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View Full Version : ताऊ बदले की करामात


dndeswal
April 5th, 2006, 07:36 PM
In my thread Sarpanch ka Election (http://www.jatland.com/forums/showthread.php?t=11336) I had mentioned about an incident relating to Tau Badle, the living legend of humour. Here is another incident, this time in Hindi/ Haryanavi.

ताऊ बदले हांसी-ठट्ठे की जीती-जागती मिसाल है ।

बैसाख उतर गया, जेठ का महीना आवण-नैं होग्या पर बदले के गेहुआं की पूळी पड़ी खेत मैं-ऐं । दोनूं छोहरे आपणे थ्रैसर और ट्रैक्टर पै दूसरे लोगां के गेहूं काढण लाग-रेह थे - भाड़े का लालच !

ताऊ नैं छोहरां तै कई बै कही - भाई, पहल्यां आपणा काम निमटा ल्यो । छोहरे जवाब देते : ईबै तै वे आल्ले (गीले) पड़े सैं !

ताऊ नैं सोच्या ये न्यूं तै ना मान्नैं । आगले दिन दोफाहरी मैं वो खेत मैं गया - दो कील्यां मैं 6-7 जगह पूळियां के सालह्ड़े (ढेर) ला-राक्खे थे । ताऊ बदले नैं एक मैं माचिस दिखा दी आर खुद खेत के किनारे वाले लेसुवे के पेड़ पै चढ-कै बैठ ग्या ।

किसै नै आग देखी आर गाम मैं खबर कर दी - गाम मैं रौळा पड़-ग्या - अरै भाजो, आपणी बाल्टी ले कै - बदले के खेत मैं तै एक गेहूं का छ्योर (ढेर) जळ्-ग्या ! जब गाम वाले खेत मैं पहुंचे तब तक तो वो सालह्ड़ा जळ कै राख हो लिया था ।

लोग घाम तैं बच्चण के मारे लेसुवे के पेड़ के नीचे खड़े हो-गे । कहण लागे - अरै, योह किस नालायक का काम सै, किस नै आग लाई होगी ? बदले का बड्डा छोहरा बोल्या : रै, बाबू खेत मैं आया था, कदे वो तै इसमैं ना जळ-ग्या?

न्यूं सुण कै बदले (जो लेसुवे के पेड़ कै ऊपर बैठ्या था), बोल्या - "मैं क्यूं जळ कै मरूं, मरैं मेरे दुश्मन !" सब नैं ऊपर देख्या । छोहरा बोल्या - हां, ये तेरे-ए काम होंगे, तन्नैं-ऐं लाई सै आग !"

बदले बोल्या: "अरै, तूं-ऐं तै कहै था आक ये आल्ले पड़े सैं । मैं तै माचिस लगा कै देखूं था - आल्ये सैं आक ना । सुसरे, ये आल्ये होते तै जळते क्यूं ?

फेर छोटा छोहरा बोल्या : भाई, ईब आपण्यां नै पहल्यां काढ ले, नांह तै यो बाबू इन बच्चे-ओड़ां नैं बी फूकैगा !
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devdahiya
April 5th, 2006, 07:40 PM
Yo Badle Kasutta tha............Issa khapparbharna bhi ek aadhha hona chahiye...ha..ha..ha.THHUWA DI RAASS...............Isski machchass khoss lyo ..na tei yu iss SERVER nei bhi Phhukkegga.....Deswal ji ibb kitt beithhya se yu Badle.......? KUCHELLIYA...ha..ha..ha. Killki na marrun na tei server Ka jhhamma beithh jyaga...!1

ratheetheraist
April 5th, 2006, 07:42 PM
waahh.....deswal saab......theek naam dharyaa iss julmii buddhangadd kaa.......BADLEE.........:D:D

le gyaa sahii BADLAA JULMI............khii khii:D:D

dndeswal
April 5th, 2006, 07:46 PM
Yo Badle Kasutta tha............Issa khapparbharna bhi ek aadhha hona chahiye...ha..ha..ha.THHUWA DI RAASS...............Isski machchass khoss lyo ..na tei yu iss SERVER nei bhi Phhukkegga.....Deswal ji ibb kitt beithhya se yu Badle.......? KUCHELLIYA...ha..ha..ha. Killki na marrun na tei server Ka jhhamma beithh jyaga...!1

Dev ji, Meri puraani thread padh lyo - vo 85 saal ka Tau aaj bi gaam mein baitha sey. Kade mauka mila to milwaaoonga, par eib tei vo umar tein dhall liya - pher-bi sei pakka khoppar!
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downtoearth
April 6th, 2006, 12:53 AM
ghar too fukkya,,, fer mussyaan key aankh hoo gayi,,,,,,, khi khi khi,:D :D ,,,,, desi mast sauda,,,,,,,geri jao nuey

dhayal
April 6th, 2006, 03:59 PM
waahh.....deswal saab......theek naam dharyaa iss julmii buddhangadd kaa.......BADLEE.........:D:D

le gyaa sahii BADLAA JULMI............khii khii:D:D


reeeeeeeee julami waahh wahh he kar sakta hai aur tuje aata hi kya hai
kangal thodi apni budee laga kar koi thread post kiya kar:cool:

cooljat
April 6th, 2006, 04:03 PM
Deswal Uncleji aap aur aapke nd kisse hindi mein, kya kehne!
bas jee saa aajaya kare....ghee saa ghaal diya kare
laage raho nu hi :)

Rock on
Jit

anilsangwan
April 6th, 2006, 04:35 PM
Kiss ne chhede se re o baawli boochh......Mottli-Pahdi maakhiyan ke chhatey mein haath de diya tenne......ebb chahe kaambal oodh le....chahe johad mein badd jya....koni bachey.....



reeeeeeeee julami waahh wahh he kar sakta hai aur tuje aata hi kya hai
kangal thodi apni budee laga kar koi thread post kiya kar:cool:

dndeswal
April 7th, 2006, 06:18 PM
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ताऊ बदले का एक और किस्सा ।

23 जनवरी 1973 की बात । उस समय ताऊ बदले हट्टा-कट्टा था (आज तो काफी बूढा हो गया है)। हमारा गांव नई दिल्ली से लगभग 45 किलोमीटर पश्चिम में पड़ता है । 26 जनवरी से तीन दिन पहले एयर फोर्स वाले इन्डिया गेट क्षेत्र में वायु परेड करते हैं और उनके विमान हमारे गांव के ऊपर से गजरते हैं । उस दिन भी कोई दिन के 12 बजे विमान गुजर रहे थे और एयर फोर्स के जवान नहर की पटड़ी पर खड़े होकर आतिशबाजी छोड़ रहे थे (वे जवान अधिकतर दक्षिण भारतीय थे और हिन्दी कम समझते थे)। ताऊ बदले का ईंख का खेत वहां से कुछ दूर था और ताऊ बदले उस समय ईंख की छोल कर रहा था - और भी कई आदमी उसके साथ खेत में थे ।

गांव के कई लड़के एयर फोर्स वालों के पास खड़े होकर आतिशबाजी देख रहे थे - मैं भी वहां था (उस समय मैं कालेज में पढता था) ।

अचानक एक गोला ताऊ बदले के खेत में जा गिरा और उस जगह पर आग लग गई । ताऊ और दूसरों ने मिलकर आग बुझा दी - दो-चार ईंख के मेढे जल गये - नुकसान खास नहीं हुआ ।

ताऊ भाग कर आया और एक जवान की कमीज पकड़ कर बोला - सालो, मेरा सारा ईंख फूक दिया, इसकी उघाई-पुताई कूण देगा? और ताऊ ने तो पूरा ड्रामा कर दिया । उन जवानों को कुछ समझ नहीं आया कि ताऊ क्या कह रहा है । फिर वे मेरे से इग्लिश में पूछने लगे । मैने उनको बता दिया कि उसकी फसल का नुकसान हुआ है और उसका मुआवजा मांग रहा है । वे कहने लगे कि हमें नाम और पता लिखवा दो, हम भिजवा देंगे । पर ताऊ कहां मानने वाला था? बोला मेरे को तो अभी चाहिये ।

फिर वे ताऊ बदले को अपने साथ एयर फोर्स स्टेशन (दिल्ली) ले गये । अगले दिन शाम को ताऊ 250 रुपये का मुआवजा ले कर गांव वापस आ गया (उन दिनों 250 रुपये एक बहुत बड़ी राशि होती थी - एक फौजी जवान का मासिक वेतन मुश्किल से 250 रुपये के आस-पास होता था) ।

वाह ताऊ बदले !
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devdahiya
April 7th, 2006, 10:14 PM
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ताऊ बदले का एक और किस्सा ।

23 जनवरी 1973 की बात । उस समय ताऊ बदले हट्टा-कट्टा था (आज तो काफी बूढा हो गया है)। हमारा गांव नई दिल्ली से लगभग 45 किलोमीटर पश्चिम में पड़ता है । 26 जनवरी से तीन दिन पहले एयर फोर्स वाले इन्डिया गेट क्षेत्र में वायु परेड करते हैं और उनके विमान हमारे गांव के ऊपर से गजरते हैं । उस दिन भी कोई दिन के 12 बजे विमान गुजर रहे थे और एयर फोर्स के जवान नहर की पटड़ी पर खड़े होकर आतिशबाजी छोड़ रहे थे (वे जवान अधिकतर दक्षिण भारतीय थे और हिन्दी कम समझते थे)। ताऊ बदले का ईंख का खेत वहां से कुछ दूर था और ताऊ बदले उस समय ईंख की छोल कर रहा था - और भी कई आदमी उसके साथ खेत में थे ।

गांव के कई लड़के एयर फोर्स वालों के पास खड़े होकर आतिशबाजी देख रहे थे - मैं भी वहां था (उस समय मैं कालेज में पढता था) ।

अचानक एक गोला ताऊ बदले के खेत में जा गिरा और उस जगह पर आग लग गई । ताऊ और दूसरों ने मिलकर आग बुझा दी - दो-चार ईंख के मेढे जल गये - नुकसान खास नहीं हुआ ।

ताऊ भाग कर आया और एक जवान की कमीज पकड़ कर बोला - सालो, मेरा सारा ईंख फूक दिया, इसकी उघाई-पुताई कूण देगा? और ताऊ ने तो पूरा ड्रामा कर दिया । उन जवानों को कुछ समझ नहीं आया कि ताऊ क्या कह रहा है । फिर वे मेरे से इग्लिश में पूछने लगे । मैने उनको बता दिया कि उसकी फसल का नुकसान हुआ है और उसका मुआवजा मांग रहा है । वे कहने लगे कि हमें नाम और पता लिखवा दो, हम भिजवा देंगे । पर ताऊ कहां मानने वाला था? बोला मेरे को तो अभी चाहिये ।

फिर वे ताऊ बदले को अपने साथ एयर फोर्स स्टेशन (दिल्ली) ले गये । अगले दिन शाम को ताऊ 250 रुपये का मुआवजा ले कर गांव वापस आ गया (उन दिनों 250 रुपये एक बहुत बड़ी राशि होती थी - एक फौजी जवान का मासिक वेतन मुश्किल से 250 रुपये के आस-पास होता था) ।

वाह ताऊ बदले !
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Ha..ha..ha. Baad mei te baade ho se...sahi karya tau Badle Dilli chalya gya...?

cooljat
April 7th, 2006, 11:04 PM
arrrrrrrrrrr Deepika Bebe....thand rakh thand....thodi se baraf chaab le jaa...its all for fun.....Rathee the Terrorist is loaded with ak47 of fun...so its all for fun

jyada gussa acha nahi hai sehat ke liye, apne bade bhai ki baat maan le :p

Rock on
Jit



bhot ghanaa bolyaaa.........:mad:

kar to yo bera naa k dega.............. par tu apni soch liye......... fer tere pankhe paate paavnge:D:D

desijat
April 8th, 2006, 02:21 AM
Dev ji, Meri puraani thread padh lyo - vo 85 saal ka Tau aaj bi gaam mein baitha sey. Kade mauka mila to milwaaoonga, par eib tei vo umar tein dhall liya - pher-bi sei pakka khoppar!
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Reminded me of my dadaji
Har kahani har kisse aate the, and jab baithte the to sab sunte, haste haste pet lot pot ho jata ar serious poems sun ke dil bhar aata,
Missing him.

some lines from my poem -

Life is an experience which never ends
Life is a journey which never stops with the flow
Live life as if it is your last day
Live life as if there is no tomorrow

ratheetheraist
April 8th, 2006, 05:41 PM
Reminded me of my dadaji
Har kahani har kisse aate the, and jab baithte the to sab sunte, haste haste pet lot pot ho jata ar serious poems sun ke dil bhar aata,
Missing him.

some lines from my poem -

Life is an experience which never ends
Life is a journey which never stops with the flow
Live life as if it is your last day
Live life as if there is no tomorrow

bhai desi kaamall likhaa tannee yaade....koi mail nahi iskkaa.............:);)

parr sunn .........je tu muskuraate chehre ke time pe hondaa naa te baat e kuch aur hondii .....kukrammii...........kisse possamm pose ho ryaa saii dekhiyoo ek bee.............killkii........@possamm pose.....:D:D:D

drjatin
April 8th, 2006, 08:39 PM
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ताऊ बदले का एक और किस्सा ।

23 जनवरी 1973 की बात । उस समय ताऊ बदले हट्टा-कट्टा था (आज तो काफी बूढा हो गया है)। हमारा गांव नई दिल्ली से लगभग 45 किलोमीटर पश्चिम में पड़ता है । 26 जनवरी से तीन दिन पहले एयर फोर्स वाले इन्डिया गेट क्षेत्र में वायु परेड करते हैं और उनके विमान हमारे गांव के ऊपर से गजरते हैं । उस दिन भी कोई दिन के 12 बजे विमान गुजर रहे थे और एयर फोर्स के जवान नहर की पटड़ी पर खड़े होकर आतिशबाजी छोड़ रहे थे (वे जवान अधिकतर दक्षिण भारतीय थे और हिन्दी कम समझते थे)। ताऊ बदले का ईंख का खेत वहां से कुछ दूर था और ताऊ बदले उस समय ईंख की छोल कर रहा था - और भी कई आदमी उसके साथ खेत में थे ।

गांव के कई लड़के एयर फोर्स वालों के पास खड़े होकर आतिशबाजी देख रहे थे - मैं भी वहां था (उस समय मैं कालेज में पढता था) ।

अचानक एक गोला ताऊ बदले के खेत में जा गिरा और उस जगह पर आग लग गई । ताऊ और दूसरों ने मिलकर आग बुझा दी - दो-चार ईंख के मेढे जल गये - नुकसान खास नहीं हुआ ।

ताऊ भाग कर आया और एक जवान की कमीज पकड़ कर बोला - सालो, मेरा सारा ईंख फूक दिया, इसकी उघाई-पुताई कूण देगा? और ताऊ ने तो पूरा ड्रामा कर दिया । उन जवानों को कुछ समझ नहीं आया कि ताऊ क्या कह रहा है । फिर वे मेरे से इग्लिश में पूछने लगे । मैने उनको बता दिया कि उसकी फसल का नुकसान हुआ है और उसका मुआवजा मांग रहा है । वे कहने लगे कि हमें नाम और पता लिखवा दो, हम भिजवा देंगे । पर ताऊ कहां मानने वाला था? बोला मेरे को तो अभी चाहिये ।

फिर वे ताऊ बदले को अपने साथ एयर फोर्स स्टेशन (दिल्ली) ले गये । अगले दिन शाम को ताऊ 250 रुपये का मुआवजा ले कर गांव वापस आ गया (उन दिनों 250 रुपये एक बहुत बड़ी राशि होती थी - एक फौजी जवान का मासिक वेतन मुश्किल से 250 रुपये के आस-पास होता था) ।

वाह ताऊ बदले !
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BAHUT BADHIYA DESHWALJI BARE DINA MEIN HINDI PADHANE KO MILL

good

dhayal
April 10th, 2006, 12:09 PM
bhot ghanaa bolyaaa.........:mad:

kar to yo bera naa k dega.............. par tu apni soch liye......... fer tere pankhe paate paavnge:D:D



kyo pinke jatland per tane dhayal ke post dikhte nai toh tu koi post karle
hahahhahahahah:eek: :D :p

dndeswal
April 20th, 2006, 07:38 PM
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ताऊ बदले के कितने किस्से सुनायें आपको !

गांव में एक पुराना स्वतंत्रता-सेनानी होता था - सूरत सिंह, जिसने आजाद हिंद फौज में सेवा की थी । उसे पेंशन मिलती थी और हरयाणा रोडवेज में फ्री घूमने का पास भी मिला हुआ था । 1996 में ताऊ सूरत सिंह का देहान्त हो गया । उनके देहान्त के बाद उसके बड़े छोहरे की बहू ने उसके पुराने कागज फाड़ कर कुरड़ी पर फेंक दिये ।

पता नहीं कैसे ताऊ बदले उस कुरड़ी पर जा पहुंचा और उसका हरयाणा रोडवेज का बस पास उसको वहां पड़ा दिखाई दिया । बस-पास सही सलामत था । ताऊ बदले की तो किस्मत खुल गई । उसने ताऊ सूरत सिंह का फोटो उस पर से उतार कर फेंक दिया । कई दिन बाद वह गुड़गांव गया हुआ था । वहां पर थाणे में पहुंचा और थाणेदार से बोला - बेटा, ये मेरा बस पास है, इस पर से मेरा फोटो उतर गया है, मेरा दूसरा फोटो इस पर लगवा दो । उसने मुंशी से कहकर वहां ताऊ बदले का दिया हुआ फोटो चिपकवा दिया । फिर ताऊ मुंशी से बोल्या : भाई, इस पै थाणे की रबड़ की मोहर बी लगा दे, नहीं तै ये बस कंडक्टर मन्नैं दुखी करैंगे । ताऊ की ये मुराद भी थाणे वालों ने पूरी कर दी ।

ताऊ बदले आज भी उस पास को लेकर बस में फ्री घूमता है और ड्राइवर-कंडक्टर पर रौब भी झाड़ता है - अरै, मन्नैं सीट दिलाओ, मन्नैं तै आजादी की लड़ाई लड़ी थी । देखते नहीं, इस पै थाणे की मोहर भी लगी है? और अपनी इस करतूत को अपने गांव वालों को छाती ठोक कर बताता भी है - उनसे झूठ कतई नहीं बोलता !
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devdahiya
April 20th, 2006, 08:11 PM
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ताऊ बदले के कितने किस्से सुनायें आपको !

गांव में एक पुराना स्वतंत्रता-सेनानी होता था - सूरत सिंह, जिसने आजाद हिंद फौज में सेवा की थी । उसे पेंशन मिलती थी और हरयाणा रोडवेज में फ्री घूमने का पास भी मिला हुआ था । 1996 में ताऊ सूरत सिंह का देहान्त हो गया । उनके देहान्त के बाद उसके बड़े छोहरे की बहू ने उसके पुराने कागज फाड़ कर कुरड़ी पर फेंक दिये ।

पता नहीं कैसे ताऊ बदले उस कुरड़ी पर जा पहुंचा और उसका हरयाणा रोडवेज का बस पास उसको वहां पड़ा दिखाई दिया । बस-पास सही सलामत था । ताऊ बदले की तो किस्मत खुल गई । उसने ताऊ सूरत सिंह का फोटो उस पर से उतार कर फेंक दिया । कई दिन बाद वह गुड़गांव गया हुआ था । वहां पर थाणे में पहुंचा और थाणेदार से बोला - बेटा, ये मेरा बस पास है, इस पर से मेरा फोटो उतर गया है, मेरा दूसरा फोटो इस पर लगवा दो । उसने मुंशी से कहकर वहां ताऊ बदले का दिया हुआ फोटो चिपकवा दिया । फिर ताऊ मुंशी से बोल्या : भाई, इस पै थाणे की रबड़ की मोहर बी लगा दे, नहीं तै ये बस कंडक्टर मन्नैं दुखी करैंगे । ताऊ की ये मुराद भी थाणे वालों ने पूरी कर दी ।

ताऊ बदले आज भी उस पास को लेकर बस में फ्री घूमता है और ड्राइवर-कंडक्टर पर रौब भी झाड़ता है - अरै, मन्नैं सीट दिलाओ, मन्नैं तै आजादी की लड़ाई लड़ी थी । देखते नहीं, इस पै थाणे की मोहर भी लगी है? और अपनी इस करतूत को अपने गांव वालों को छाती ठोक कर बताता भी है - उनसे झूठ कतई नहीं बोलता !
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Ha..ha..ha..ha.Yo badle tau dyaakki sei katti Deswal ji...ibbke nei ghraan jaungga tei iss Raachh tein jaroor milungga.Kassutta kaam sei iss thhathhi ka.