View Full Version : Kismat ka Ultaa Chakkar (The Reverse Cycle of Destiny)
dndeswal
November 2nd, 2006, 06:43 PM
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(This post is in Devanagari script. If there is difficulty in reading the text, there is need to install ‘Mangal’ font (http://vedantijeevan.com:9700/font.htm).)
किस्मत का उल्टा चक्कर
पुराने समय की बात । आम तौर पर अगर 3-4 भाई होते तो उनमें से एक कुंवारा रह जाया करता था ।
एक चौधरी साहब के चार बेटे थे । बड़ा भाई हल जोतता था । उससे छोटे (No. 2) का नाम फत्ते था जो निरा मूढ़-गवार और बहकटा* था । सबसे छोटे (No. 3-4) दोनों लड़के कुछ पढे-लिखे थे ।
बड़े भाई का ब्याह हो गया । ब्याह के बाद वो घर-गृहस्थी में व्यस्त हो गया और हल जोड़ने और दूसरे खेती के काम फत्ते के ऊपर आ पड़े ।
फिर किसी ने फत्ते को बहका दिया कि “तेरे बड्डै भाई का तै ब्याह हो-ग्या। तेरे दोनूं छोटे भाई पढे-लिखे सैं, तेरा बाबू उनका ब्याह करवावैगा और तन्नै कंवारा राखैगा । सारी जमीन के मालिक उनके बाळक होंगे - तू तै ब्याह राख्या ना - फिर तू क्यूं सारा दिन हळ जोड़ै सै और दूसरां ताहीं कमावै सै ?”
फत्ते बहकावे में आ गया और उसने चौधरी पर दबाव बनाना शुरू किया कि मेरा भी ब्याह करवा दे ! चौधरी के पास जमीन कम थी और डरता था कि फत्ते का ब्याह होने पर जमीन का बंटवारा हो जायेगा - और वैसे भी उस मूढ़-गवार का ब्याह होना मुश्किल है ।
चौधरी ने यह समस्या गांव के कुछ और बुजुर्ग लोगों को बताई । उन बुजुर्गों ने फत्ते को समझाना शुरू किया - "अरै फत्ते, तू क्यूं फिक्र कर रहया सै? तेरे-तैं पहल्यां तै यो बड्डा भाई मरैगा, फेर उसकी बहू तेरै धोरै-ए तै रहैगी ! थोड़ा सब्र कर ले, क्यूं ब्याह का खर्चा करवावै सै?"
फत्ते फिर बहकावे में आ गया और इन्तजार करने लगा कि कब बड़े भाई की मौत हो और उसकी घरवाली उसके पल्ले बांधी जाये ।
कुछ दिन बाद बदकिस्मती से हो गया उल्टा काम - उन चारों भाईयों में से सबसे छोटे की मौत हो गई ! गांव के आदमी इकट्ठे हो गये । उन्होंने देखा कि फत्ते तो घर के एक कोने में मुंह लटकाये बैठा है । जब एक बुजुर्ग ने फत्ते के कंधे पर हाथ रक्खा, तो फत्ते बोल उठा :
"ओह तेरी कै ! करम* की बात तै देखो - कित ओड़ तैं* नम्बर लाग्या सै !!" :) :)
------
बहकटा - जो जल्दी बहकावे में आ जाये
करम की बात - किस्मत का खेल
कित ओड़ तैं – किस तरफ से
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choudharyneelam
November 2nd, 2006, 07:37 PM
hahahahahaha...ye kismat pata nahin kya kya kar deti hai...fatte ki bhi ulat di :D
ravinderdahiya
November 2nd, 2006, 07:42 PM
o teri k, kis ood tai number laagya sai
hahahaha
badiya sir
mann123
November 2nd, 2006, 11:24 PM
O tere k :D kit teh le k ne ayaa yoo kasuta joke.
downtoearth
November 7th, 2006, 05:14 PM
killllllki,,, deswal sir,,,luua diya lamber,,:p;):D:D..... bitha di faali si ya to...bagandey rahoo nuey:p
devdahiya
November 7th, 2006, 06:43 PM
Ghanna suthherra joke.Katti desi......Lagge raho DND ji.
VirenderNarwal
November 7th, 2006, 11:35 PM
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किस्मत का उल्टा चक्कर
पुराने समय की बात । आम तौर पर अगर 3-4 भाई होते तो उनमें से एक कुंवारा रह जाया करता था ।
एक चौधरी साहब के चार बेटे थे । बड़ा भाई हल जोतता था । उससे छोटे (No. 2) का नाम फत्ते था जो निरा मूढ़-गवार और बहकटा* था । सबसे छोटे (No. 3-4) दोनों लड़के कुछ पढे-लिखे थे ।
बड़े भाई का ब्याह हो गया । ब्याह के बाद वो घर-गृहस्थी में व्यस्त हो गया और हल जोड़ने और दूसरे खेती के काम फत्ते के ऊपर आ पड़े ।
फिर किसी ने फत्ते को बहका दिया कि “तेरे बड्डै भाई का तै ब्याह हो-ग्या। तेरे दोनूं छोटे भाई पढे-लिखे सैं, तेरा बाबू उनका ब्याह करवावैगा और तन्नै कंवारा राखैगा । सारी जमीन के मालिक उनके बाळक होंगे - तू तै ब्याह राख्या ना - फिर तू क्यूं सारा दिन हळ जोड़ै सै और दूसरां ताहीं कमावै सै ?”
फत्ते बहकावे में आ गया और उसने चौधरी पर दबाव बनाना शुरू किया कि मेरा भी ब्याह करवा दे ! चौधरी के पास जमीन कम थी और डरता था कि फत्ते का ब्याह होने पर जमीन का बंटवारा हो जायेगा - और वैसे भी उस मूढ़-गवार का ब्याह होना मुश्किल है ।
चौधरी ने यह समस्या गांव के कुछ और बुजुर्ग लोगों को बताई । उन बुजुर्गों ने फत्ते को समझाना शुरू किया - "अरै फत्ते, तू क्यूं फिक्र कर रहया सै? तेरे-तैं पहल्यां तै यो बड्डा भाई मरैगा, फेर उसकी बहू तेरै धोरै-ए तै रहैगी ! थोड़ा सब्र कर ले, क्यूं ब्याह का खर्चा करवावै सै?"
फत्ते फिर बहकावे में आ गया और इन्तजार करने लगा कि कब बड़े भाई की मौत हो और उसकी घरवाली उसके पल्ले बांधी जाये ।
कुछ दिन बाद बदकिस्मती से हो गया उल्टा काम - उन चारों भाईयों में से सबसे छोटे की मौत हो गई ! गांव के आदमी इकट्ठे हो गये । उन्होंने देखा कि फत्ते तो घर के एक कोने में मुंह लटकाये बैठा है । जब एक बुजुर्ग ने फत्ते के कंधे पर हाथ रक्खा, तो फत्ते बोल उठा :
"ओह तेरी कै ! करम* की बात तै देखो - कित ओड़ तैं* नम्बर लाग्या सै !!" :) :)
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बहकटा - जो जल्दी बहकावे में आ जाये
करम की बात - किस्मत का खेल
कित ओड़ तैं – किस तरफ से
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hhhhhaaaaaaaaaaa:D :D :D kasuttaaa.... lath gad diya:D :D
aur budde bhi nu bole :D :D kyu kharcha karwave h.....?
kismat ka khel......kis odd te number lagya....:D
hhklphg
{hasne ki 10 images hi thi warna ghani e chap di thi]
vinodks
November 8th, 2006, 01:25 AM
यो तो कसुता चुटकला था देशवाल साहब.... फतै जसै भोले भाले जाट भी कमाल कै होवै सैं...
nkkhoth
November 8th, 2006, 02:17 AM
vah, bhai, bahot hi badhiya
nkkhoth
November 8th, 2006, 02:21 AM
vah, sugreeve ji, swad aarhya sse.
madhvi
November 8th, 2006, 02:33 AM
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किस्मत का उल्टा चक्कर
पुराने समय की बात । आम तौर पर अगर 3-4 भाई होते तो उनमें से एक कुंवारा रह जाया करता था ।
एक चौधरी साहब के चार बेटे थे । बड़ा भाई हल जोतता था । उससे छोटे (No. 2) का नाम फत्ते था जो निरा मूढ़-गवार और बहकटा* था । सबसे छोटे (No. 3-4) दोनों लड़के कुछ पढे-लिखे थे ।
बड़े भाई का ब्याह हो गया । ब्याह के बाद वो घर-गृहस्थी में व्यस्त हो गया और हल जोड़ने और दूसरे खेती के काम फत्ते के ऊपर आ पड़े ।
फिर किसी ने फत्ते को बहका दिया कि “तेरे बड्डै भाई का तै ब्याह हो-ग्या। तेरे दोनूं छोटे भाई पढे-लिखे सैं, तेरा बाबू उनका ब्याह करवावैगा और तन्नै कंवारा राखैगा । सारी जमीन के मालिक उनके बाळक होंगे - तू तै ब्याह राख्या ना - फिर तू क्यूं सारा दिन हळ जोड़ै सै और दूसरां ताहीं कमावै सै ?”
फत्ते बहकावे में आ गया और उसने चौधरी पर दबाव बनाना शुरू किया कि मेरा भी ब्याह करवा दे ! चौधरी के पास जमीन कम थी और डरता था कि फत्ते का ब्याह होने पर जमीन का बंटवारा हो जायेगा - और वैसे भी उस मूढ़-गवार का ब्याह होना मुश्किल है ।
चौधरी ने यह समस्या गांव के कुछ और बुजुर्ग लोगों को बताई । उन बुजुर्गों ने फत्ते को समझाना शुरू किया - "अरै फत्ते, तू क्यूं फिक्र कर रहया सै? तेरे-तैं पहल्यां तै यो बड्डा भाई मरैगा, फेर उसकी बहू तेरै धोरै-ए तै रहैगी ! थोड़ा सब्र कर ले, क्यूं ब्याह का खर्चा करवावै सै?"
फत्ते फिर बहकावे में आ गया और इन्तजार करने लगा कि कब बड़े भाई की मौत हो और उसकी घरवाली उसके पल्ले बांधी जाये ।
कुछ दिन बाद बदकिस्मती से हो गया उल्टा काम - उन चारों भाईयों में से सबसे छोटे की मौत हो गई ! गांव के आदमी इकट्ठे हो गये । उन्होंने देखा कि फत्ते तो घर के एक कोने में मुंह लटकाये बैठा है । जब एक बुजुर्ग ने फत्ते के कंधे पर हाथ रक्खा, तो फत्ते बोल उठा :
"ओह तेरी कै ! करम* की बात तै देखो - कित ओड़ तैं* नम्बर लाग्या सै !!" :) :)
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बहकटा - जो जल्दी बहकावे में आ जाये
करम की बात - किस्मत का खेल
कित ओड़ तैं – किस तरफ से
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स्वाद आ गया देसवाल साहेब, लागे रहो मुन्ना भाई की ढाल .
harishdahiya
November 8th, 2006, 08:45 AM
Deswal sir bahut badiya..............aap bhi kati andi dund ke layvo ho..................:D
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किस्मत का उल्टा चक्कर
पुराने समय की बात । आम तौर पर अगर 3-4 भाई होते तो उनमें से एक कुंवारा रह जाया करता था ।
एक चौधरी साहब के चार बेटे थे । बड़ा भाई हल जोतता था । उससे छोटे (No. 2) का नाम फत्ते था जो निरा मूढ़-गवार और बहकटा* था । सबसे छोटे (No. 3-4) दोनों लड़के कुछ पढे-लिखे थे ।
बड़े भाई का ब्याह हो गया । ब्याह के बाद वो घर-गृहस्थी में व्यस्त हो गया और हल जोड़ने और दूसरे खेती के काम फत्ते के ऊपर आ पड़े ।
फिर किसी ने फत्ते को बहका दिया कि “तेरे बड्डै भाई का तै ब्याह हो-ग्या। तेरे दोनूं छोटे भाई पढे-लिखे सैं, तेरा बाबू उनका ब्याह करवावैगा और तन्नै कंवारा राखैगा । सारी जमीन के मालिक उनके बाळक होंगे - तू तै ब्याह राख्या ना - फिर तू क्यूं सारा दिन हळ जोड़ै सै और दूसरां ताहीं कमावै सै ?”
फत्ते बहकावे में आ गया और उसने चौधरी पर दबाव बनाना शुरू किया कि मेरा भी ब्याह करवा दे ! चौधरी के पास जमीन कम थी और डरता था कि फत्ते का ब्याह होने पर जमीन का बंटवारा हो जायेगा - और वैसे भी उस मूढ़-गवार का ब्याह होना मुश्किल है ।
चौधरी ने यह समस्या गांव के कुछ और बुजुर्ग लोगों को बताई । उन बुजुर्गों ने फत्ते को समझाना शुरू किया - "अरै फत्ते, तू क्यूं फिक्र कर रहया सै? तेरे-तैं पहल्यां तै यो बड्डा भाई मरैगा, फेर उसकी बहू तेरै धोरै-ए तै रहैगी ! थोड़ा सब्र कर ले, क्यूं ब्याह का खर्चा करवावै सै?"
फत्ते फिर बहकावे में आ गया और इन्तजार करने लगा कि कब बड़े भाई की मौत हो और उसकी घरवाली उसके पल्ले बांधी जाये ।
कुछ दिन बाद बदकिस्मती से हो गया उल्टा काम - उन चारों भाईयों में से सबसे छोटे की मौत हो गई ! गांव के आदमी इकट्ठे हो गये । उन्होंने देखा कि फत्ते तो घर के एक कोने में मुंह लटकाये बैठा है । जब एक बुजुर्ग ने फत्ते के कंधे पर हाथ रक्खा, तो फत्ते बोल उठा :
"ओह तेरी कै ! करम* की बात तै देखो - कित ओड़ तैं* नम्बर लाग्या सै !!" :) :)
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बहकटा - जो जल्दी बहकावे में आ जाये
करम की बात - किस्मत का खेल
कित ओड़ तैं – किस तरफ से
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bhupindersingh
November 8th, 2006, 05:48 PM
ha ha ha ha.........
jat jaisa bola koi ni ho sakta
dndeswal
March 28th, 2008, 07:53 PM
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I read Jitender Hooda’s thread Ismein koe ekla soo ke te dikha dyo ... (http://www.jatland.com/forums/showthread.php?t=23620)
And it reminded me this old thread of mine – revived for reading pleasure.
jitendershooda
March 28th, 2008, 08:38 PM
ha ha ha ha ... deshwal ji ... kassuta tha yo te .... ha ha ghana bhola aadmi tha wo bhi ... issyan gail ji banya badi bhundi karti ....
ek se nue ...6 bhaiyan mein te ek randa rakh rakhya se .... kana se ... bechara bahut mehanati ... jib tahi gode chalein they ... kamvan khatir kade koe si bhabhi meethi bolati er apne sajhe rakh leti ... er kade koe si .... er pher thoda bada hoe pache uski gail wa kari ... koe apne dhore rakhe na ... na roti-tooka ... bichara boode boodhi dhore padya rahe ... er jameen chodi na uske naam ...
nysa
March 30th, 2008, 02:08 PM
hahahahahaa....:D:)kati chala ttha diya aapne .:)
bahut badhiya ..
rakeshdahiya77
April 2nd, 2008, 10:13 AM
bahut badhiya deswal sahab
dndeswal
June 6th, 2008, 08:23 PM
ha ha ha ha ... deshwal ji ... kassuta tha yo te .... ha ha ghana bhola aadmi tha wo bhi ... issyan gail ji banya badi bhundi karti ....
ek se nue ...6 bhaiyan mein te ek randa rakh rakhya se .... kana se ... bechara bahut mehanati ... jib tahi gode chalein they ... kamvan khatir kade koe si bhabhi meethi bolati er apne sajhe rakh leti ... er kade koe si .... er pher thoda bada hoe pache uski gail wa kari ... koe apne dhore rakhe na ... na roti-tooka ... bichara boode boodhi dhore padya rahe ... er jameen chodi na uske naam ...
ठीक कहै सै जीतू - एक किस्सा और लिख देता हूं, इससे मिलता जुलता (संजीत ने लिखा है पहले)
एक बै एक ताऊ कै तीन छोरे थे । ताई मर-गी बीमार हो-कै, फेर ताऊ नै बड्डे छोरे का ब्याह करणा पड़-ग्या । ब्याह के वक्त पता लगा कि उस छोरी की एक और छोटी भाण थी - सो, ताऊ नै वो आपणा छोरा भी साथ ही लपेट दिया - इस तरह दोनों बेटे ब्याहे गए ।
सबतैं छोटा रह-ग्या बिन ब्याहा, उसनै भी ब्याह की जिद करी । ताऊ उसतैं न्यूं बोल्या - भाई, तेरे भाइयां का ब्याह तै छोटी उमर में कर दिया था, पर तेरा ईबै ना करां ।
छोटा छोरा सोन्नू भी कत्ती जवान हो रहया था, पूरा गाभरू । रिश्ते आळे आवैं तै ताऊ कह देता अक ईबै तै म्हारा सोन्नू बाळक सै, ईबै रिश्ता ना लेवां । दो-तीन साल काढ़ दिया न्यूं-ऐं ।
फिर एक दिन रिश्ते आळे आ-गे, ताऊ बोल्या - म्हारा सोनूं तै ईबै बाळक सै ।
सोन्नू नै आया छो, अर बोल्या - बाबू, ईब और के मैं रींकूंगा ?
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raka
June 7th, 2008, 05:57 PM
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(This post is in Devanagari script. If there is difficulty in reading the text, there is need to install ‘Mangal’ font (http://vedantijeevan.com:9700/font.htm).)
किस्मत का उल्टा चक्कर
पुराने समय की बात । आम तौर पर अगर 3-4 भाई होते तो उनमें से एक कुंवारा रह जाया करता था ।
एक चौधरी साहब के चार बेटे थे । बड़ा भाई हल जोतता था । उससे छोटे (No. 2) का नाम फत्ते था जो निरा मूढ़-गवार और बहकटा* था । सबसे छोटे (No. 3-4) दोनों लड़के कुछ पढे-लिखे थे ।
बड़े भाई का ब्याह हो गया । ब्याह के बाद वो घर-गृहस्थी में व्यस्त हो गया और हल जोड़ने और दूसरे खेती के काम फत्ते के ऊपर आ पड़े ।
फिर किसी ने फत्ते को बहका दिया कि “तेरे बड्डै भाई का तै ब्याह हो-ग्या। तेरे दोनूं छोटे भाई पढे-लिखे सैं, तेरा बाबू उनका ब्याह करवावैगा और तन्नै कंवारा राखैगा । सारी जमीन के मालिक उनके बाळक होंगे - तू तै ब्याह राख्या ना - फिर तू क्यूं सारा दिन हळ जोड़ै सै और दूसरां ताहीं कमावै सै ?”
फत्ते बहकावे में आ गया और उसने चौधरी पर दबाव बनाना शुरू किया कि मेरा भी ब्याह करवा दे ! चौधरी के पास जमीन कम थी और डरता था कि फत्ते का ब्याह होने पर जमीन का बंटवारा हो जायेगा - और वैसे भी उस मूढ़-गवार का ब्याह होना मुश्किल है ।
चौधरी ने यह समस्या गांव के कुछ और बुजुर्ग लोगों को बताई । उन बुजुर्गों ने फत्ते को समझाना शुरू किया - "अरै फत्ते, तू क्यूं फिक्र कर रहया सै? तेरे-तैं पहल्यां तै यो बड्डा भाई मरैगा, फेर उसकी बहू तेरै धोरै-ए तै रहैगी ! थोड़ा सब्र कर ले, क्यूं ब्याह का खर्चा करवावै सै?"
फत्ते फिर बहकावे में आ गया और इन्तजार करने लगा कि कब बड़े भाई की मौत हो और उसकी घरवाली उसके पल्ले बांधी जाये ।
कुछ दिन बाद बदकिस्मती से हो गया उल्टा काम - उन चारों भाईयों में से सबसे छोटे की मौत हो गई ! गांव के आदमी इकट्ठे हो गये । उन्होंने देखा कि फत्ते तो घर के एक कोने में मुंह लटकाये बैठा है । जब एक बुजुर्ग ने फत्ते के कंधे पर हाथ रक्खा, तो फत्ते बोल उठा :
"ओह तेरी कै ! करम* की बात तै देखो - कित ओड़ तैं* नम्बर लाग्या सै !!" :) :)
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बहकटा - जो जल्दी बहकावे में आ जाये
करम की बात - किस्मत का खेल
कित ओड़ तैं – किस तरफ से
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wahe baat ho gai ,chahe sara gaon marjaio par fattey lamberdar koni bane
renuchoudhary
June 8th, 2008, 01:04 PM
Deswal jee, excellent
Ek sachhi ghatna yadd aagi, ek chore ka biyaha na hora thaa, chota bhai bhee batt dekhra thaa ki , kad iska biyaha ho aur mera number lage, khair kismat ne sunlee, aur bade bhai ka biyah pakka hoga, jab jaimala padree thee to chote wala rukke maran lagya , KAT GYA ROG KAT GAYA ROG, sub baratee aur gharatee usne dekhe, ke hogya isne,