dndeswal
November 10th, 2006, 01:53 AM
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नेग
छोटू सादा-भोला था, उसके ब्याह को भी कई साल हो गये थे, बाल-बच्चा कोई था नहीं, घरवाली से थोड़ी नोंक-झोंक भी हो जाती थी ।
उसके गांव से थोड़ी दूर एक खाली कुटिया थी, उसमें एक बाबा आकर रहने लगा । छोटू रोज बाबा के पास बैठ कर चिलम-सुल्फा पीने लगा और पता नहीं उसके मन में क्या आया कि वो तो बाबा का पक्का चेला बन गया । कान पड़वा लिये और भगवां कपड़े धारण कर लिये - सब उसको 'बाबा छोटूनाथ' कहने लगे ।
बाबा ने छोटूनाथ को ट्रेनिंग देनी शुरू की - साधु का पहला काम तो भीख मांगना ही है । बाबा ने कहा कि किसी भी घर में जाओ तो सभी महिलाओं और लड़कियों को मां-बहन कहकर बोलना चाहिये । भीख का थैला उठाकर छोटूनाथ अपने ही घर गया और दरवाजे पर पुकारने लगा - "माई, थोड़ा सा चून घाल दे" । उसकी घरवाली निकल कर आई और बोली - "अनपूते, मन्नै क्यूं 'माई' कहै सै ?" छोटूनाथ बोल्या "माई, यो तै मेरे गुरु का दिया-ओड़ मंत्र सै, इसनै भंग ना करूं, नहीं तै मन्नै रोटी कूण देगा ?"
छोटूनाथ का गुरु एक रात उसे अकेला सोता छोड़कर कहीं और चलता बना । उसके बाद छोटूनाथ को अपने गांव से भिक्षा मिलनी भी बंद हो गई । कई दिन बाद वो अपना भगवां बाणा फेंक कर अपने घर आया और अपनी घरवाली तैं बोल्या "मेरे तै करम माड़े लिकडे* - तेरे तैं नेग* बी बिगाड़ा और किम्मै पल्लै बी ना पड़्या ।"
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*करम माड़े लिकडे - किस्मत कमजोर निकली
*नेग – रिश्ता
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नेग
छोटू सादा-भोला था, उसके ब्याह को भी कई साल हो गये थे, बाल-बच्चा कोई था नहीं, घरवाली से थोड़ी नोंक-झोंक भी हो जाती थी ।
उसके गांव से थोड़ी दूर एक खाली कुटिया थी, उसमें एक बाबा आकर रहने लगा । छोटू रोज बाबा के पास बैठ कर चिलम-सुल्फा पीने लगा और पता नहीं उसके मन में क्या आया कि वो तो बाबा का पक्का चेला बन गया । कान पड़वा लिये और भगवां कपड़े धारण कर लिये - सब उसको 'बाबा छोटूनाथ' कहने लगे ।
बाबा ने छोटूनाथ को ट्रेनिंग देनी शुरू की - साधु का पहला काम तो भीख मांगना ही है । बाबा ने कहा कि किसी भी घर में जाओ तो सभी महिलाओं और लड़कियों को मां-बहन कहकर बोलना चाहिये । भीख का थैला उठाकर छोटूनाथ अपने ही घर गया और दरवाजे पर पुकारने लगा - "माई, थोड़ा सा चून घाल दे" । उसकी घरवाली निकल कर आई और बोली - "अनपूते, मन्नै क्यूं 'माई' कहै सै ?" छोटूनाथ बोल्या "माई, यो तै मेरे गुरु का दिया-ओड़ मंत्र सै, इसनै भंग ना करूं, नहीं तै मन्नै रोटी कूण देगा ?"
छोटूनाथ का गुरु एक रात उसे अकेला सोता छोड़कर कहीं और चलता बना । उसके बाद छोटूनाथ को अपने गांव से भिक्षा मिलनी भी बंद हो गई । कई दिन बाद वो अपना भगवां बाणा फेंक कर अपने घर आया और अपनी घरवाली तैं बोल्या "मेरे तै करम माड़े लिकडे* - तेरे तैं नेग* बी बिगाड़ा और किम्मै पल्लै बी ना पड़्या ।"
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*करम माड़े लिकडे - किस्मत कमजोर निकली
*नेग – रिश्ता
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