pmalhan
December 4th, 2007, 09:52 AM
घने साल पहलम की बात से, ताऊ धीरे का छोरा नफे फौज में था, एक दिन ताऊ ने सुंडू बुलाया एर एर बोल्या, रे सुंडू तू तो पदना लिखना जाने से, नफे धोरे एक चिट्ठी लिख दे,
सुंडू बोल्या, बता ताऊ के लिखना से, इबबे लिक्खी चिट्ठी |
ताऊ बोल्या, लिक्ख दे राम राम, हाड़े सब ठीख से, तेरा के हाल से| सुंडू बोल्या लिक्ख दिया ताऊ, और बता के लिक्खना से,
ताऊ बोल्या, ऊसने कही थी जूती बनवावन की, लिख दे भाई तेरी जुत्ति धरी बनी बनायीं| सुंडू फेर बोल्या और ताऊ के लिक्खुं| ताऊ बोल्या और लिक्ख दे तू आज्या हे तो फेट लया हैं|
नफे ने चिट्ठी मिली,
भाई नफे,
राम राम,
हाड़े सब ठीख से, तेरा के हाल से| लिख दे भाई तेरी जुत्ति धरी बनी बनायीं, जे तू आज्या हे तो फेट लियां हें
सुंडू बोल्या, बता ताऊ के लिखना से, इबबे लिक्खी चिट्ठी |
ताऊ बोल्या, लिक्ख दे राम राम, हाड़े सब ठीख से, तेरा के हाल से| सुंडू बोल्या लिक्ख दिया ताऊ, और बता के लिक्खना से,
ताऊ बोल्या, ऊसने कही थी जूती बनवावन की, लिख दे भाई तेरी जुत्ति धरी बनी बनायीं| सुंडू फेर बोल्या और ताऊ के लिक्खुं| ताऊ बोल्या और लिक्ख दे तू आज्या हे तो फेट लया हैं|
नफे ने चिट्ठी मिली,
भाई नफे,
राम राम,
हाड़े सब ठीख से, तेरा के हाल से| लिख दे भाई तेरी जुत्ति धरी बनी बनायीं, जे तू आज्या हे तो फेट लियां हें