mastchhora
April 30th, 2008, 10:48 AM
कुछ भूले से दिन , एक खोया हुआ जहां ढूंढता हूँ
न जाने क्या पर कुछ है जो हर जगह ढूंढता हूँ !
वो खेल , मासूम शरारतें , हँसना रोना कहीँ खो गया है
वो खिलौने , माँ की लोरी , अपने घर का आँगन ढूंढता हूँ !
वो दादी की थपकी , नानी की कहानी और माँ की डाट याद आती है
वो हसते हसते रोना , वो रोते रोते सोना बस वही रोना ढूंढता हूँ !
वो खोये हुए दोस्त , खेल - खेल में लड़ाई , वो सरे खेल जो भूल गया हूँ
एक खोया हुआ बचपन , कुछ अजीब सी बातें , वही पुराना समां ढूंढता हूँ !
वो ओस की बूंदे , सर्दी का कोहरा ,गरमी की शाम कहाँ हैं
वो दोस्तो की टोली , रंगो की होली , सरे अपनों का साथ ढूंढता हूँ !
कैसे वापस लाऊं मैं वो वक्त , वो जमाना बैठा मैं अकेला सोचता हूँ
वो बिंदास और बेपरवाह हो के जीना , वही जिन्दगी मैं फिर से ढूंढता हूँ !
कुछ भूले से दिन , एक खोया हुआ जहाँ ढूंढता हूँ
न जाने क्या पर कुछ है , जो हर जगह ढूंढता हूँ !
:mad:
न जाने क्या पर कुछ है जो हर जगह ढूंढता हूँ !
वो खेल , मासूम शरारतें , हँसना रोना कहीँ खो गया है
वो खिलौने , माँ की लोरी , अपने घर का आँगन ढूंढता हूँ !
वो दादी की थपकी , नानी की कहानी और माँ की डाट याद आती है
वो हसते हसते रोना , वो रोते रोते सोना बस वही रोना ढूंढता हूँ !
वो खोये हुए दोस्त , खेल - खेल में लड़ाई , वो सरे खेल जो भूल गया हूँ
एक खोया हुआ बचपन , कुछ अजीब सी बातें , वही पुराना समां ढूंढता हूँ !
वो ओस की बूंदे , सर्दी का कोहरा ,गरमी की शाम कहाँ हैं
वो दोस्तो की टोली , रंगो की होली , सरे अपनों का साथ ढूंढता हूँ !
कैसे वापस लाऊं मैं वो वक्त , वो जमाना बैठा मैं अकेला सोचता हूँ
वो बिंदास और बेपरवाह हो के जीना , वही जिन्दगी मैं फिर से ढूंढता हूँ !
कुछ भूले से दिन , एक खोया हुआ जहाँ ढूंढता हूँ
न जाने क्या पर कुछ है , जो हर जगह ढूंढता हूँ !
:mad: