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View Full Version : Kitna achchha hota....


indian4529
May 27th, 2008, 01:00 PM
कितना अच्छा होता
गर संसार में एक ही भाषा होती
एक ही धर्म होता
समाज जातियों में यूं विभक्त न होता
न इतनी भाषाएं सीखते
न इतने झगड़े होते
न खुदा को बांटना पड़ता
धरती पर रेखाएं खींचे बगैर
बिना पासपोर्ट कोई कहीं भी आ-जा सकता
मौसम बदलने पर अनुकूल जगह पर
अपनी उड़ान भर सकता
सारे सागर सांझे
सारे वृक्ष सांझे
प्रकृति का हर कण
गुरूद्वारे के लंगर की तरह सांझा
यह देश मेरा न कहकर
यह विश्व मेरा कहते
तो कितना अच्छा होता।

kannumix
May 27th, 2008, 01:07 PM
bahut badhiya or sab sai badhiya passport :) vali baat kahi brar bhai per kash aisa ho pata

sumitsehrawat
May 27th, 2008, 01:32 PM
Bhaisahab.... bilkul sahi kaha hai aapne.
Keep writing... :)!

कितना अच्छा होता
गर संसार में एक ही भाषा होती
एक ही धर्म होता
समाज जातियों में यूं विभक्त न होता
न इतनी भाषाएं सीखते
न इतने झगड़े होते
न खुदा को बांटना पड़ता
धरती पर रेखाएं खींचे बगैर
बिना पासपोर्ट कोई कहीं भी आ-जा सकता
मौसम बदलने पर अनुकूल जगह पर
अपनी उड़ान भर सकता
सारे सागर सांझे
सारे वृक्ष सांझे
प्रकृति का हर कण
गुरूद्वारे के लंगर की तरह सांझा
यह देश मेरा न कहकर
यह विश्व मेरा कहते
तो कितना अच्छा होता।

Maniisha
June 5th, 2008, 10:44 AM
कितना अच्छा होता
गर संसार में एक ही भाषा होती
एक ही धर्म होता
समाज जातियों में यूं विभक्त न होता
न इतनी भाषाएं सीखते
न इतने झगड़े होते
न खुदा को बांटना पड़ता
धरती पर रेखाएं खींचे बगैर
बिना पासपोर्ट कोई कहीं भी आ-जा सकता
मौसम बदलने पर अनुकूल जगह पर
अपनी उड़ान भर सकता
सारे सागर सांझे
सारे वृक्ष सांझे
प्रकृति का हर कण
गुरूद्वारे के लंगर की तरह सांझा
यह देश मेरा न कहकर
यह विश्व मेरा कहते
तो कितना अच्छा होता।

Nice one Brar Ji :)

ritu
June 5th, 2008, 06:00 PM
very good poem brar ji.