Harayanvi Paheliya

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प्रस्तुत विषय जाटलैंड फोरम पर प्रसिद्ध सूत्र हरयाणवी पहेलियो का संकलन है ! सभी पहेलियो के उत्तर प्रष्ठ के अंत: में क्रमश : दिए गए हैं !

विशेष आभार:- रविंदर जीत जी जिन्होंने अपनी रचनात्मकता से अनेको नई पहेलिया की रचना की !

रमा कटारिया जिन्होंने इन सभी पहेलियो को एक सूत्र में पिरोया और विकी को विस्तृत करने में सहायता दी !


1.छोटी सी छोरी , रामदेई ना चढ़ गी चोबारे , पाई-ए ना !


2. रघा चाले रघ -रघ , तीन मुंडी दस पग  !


3. एक सींग की गा, घाले उतना ए खा  !


4.आरड- मर्ड की लाकडी , अर्डाटा ठान्दी जा , राजा बुझे रानी नु , यो के जनावर जा  !


5.हरी थी वा भरी थी , राजा जी के बाग में , दुशाला ओडे खड़ी थी !


6.चार झोट्टी , गल जोट्टी, तडके-ए तड़क , जोहड़ में जा लोटी !


7.दबी जावे , दबी आवे , घरां आण के , मुंह बावे !


8.मेरी जड़आँ में पानी, मेरे सर पे आग, में घूमू चारुं ओड, मेरे लोग रहे लाग !


9.साड़ी रात अडावे, तडके-ए काढ बगावे!


10.लाल लाल घाघरा , हरी हरी टोपी , रावले म जाती न ठाकुर साब कुटी !


11. आड़ी चालू, टेडी चालू, चालू कमर कस !! जल्दी से नाम बताओ, मिलेगी तुमको ताली बस !!


12. दो माँ बेटी, दो माँ बेटी , चाली बाग़ में जाँ, तीन निम्बू तोड़ कें , साबत -साबत खाँ  !


13.गोलमोल गोलमोल पोरी पोरी रस , बता त बता न रपिये लूँगा दस !


14. तीतर के आगे दो तीतर , तीतर के पाछे दो तीतर , बताओ कितने तीतर  !


15. चार मण के चार पाये, चालीस मण की खाट, अस्सी मण का कोठड़ा, सौ मण का जाट  !


16. पंछी उड़े आकाश मगर कित रहैं


17. आठ पगारी ऊंटडी, और पीठ पाछै पूंछडी  !


18. अंत कटे तो बनता कोआ, आदि कटे तो हाथी , मध्य काटकर काज बनालो , मैं हूँ सबका साथी  !


19. राजा के राज मै ना , माली के बाग़ मै ना, तोलै तो शेर ना , खावै तो गुठली ना !


20. काला बलध कलासिया, महल तले के जा , बारा नाथ घाल ली , फेर भी अरडान्दा जा  !


21. बेठा साल में , पाँ पसारे गाल में !


22. सारे घर माँ के हंडआवे , पड़ी रह तो बाल खींडआवे !


23. खाली जावे , भर्या आवे  !


24. ऊंचे टिल्ले मेंहस अर्डावे, उसका काढ्या सब्कोये खावे  !


25. या गयी , या आई, एर तेरे धोरे-ए बताई  !


26. छोटी सी लुटिया , कोड़ियाँ की भरी  !


27. राह मै पड़ी जंजीर, क्यूकर ठाऊँ मेरे बीर !


28. अंगी -बांगी लाकडी , राह में जा पड़ी | कोए ना उन्हें ठावे | माडी वार में सूख जावे


29. चीकणी तलवार , भींत के दे मार !


30. कटोरै मैं कटोरा , छोरा बाप तैं बी गौरा !


31. एक खड़ी , एक पड़ी एक पै चालै गिरड़ी  !


32. चार खड़ी, चार पड़ी , दो-दो, एक-एक , में जुडी |


33.मै हूँ एक फकीर , मेरै पेट पै लकीर , आऊं सूँ मै खाण कै काम, मेरै बिन जीणा नहीं आसान !


34. में छोट्टा , तू कोड बड्डा , मानने चुम्या , तू रो पड़्या!


35.घाम लगै तो पैदा होज्या , छायाँ मै यो मरज्या काम करै तो बी उपजै , हवा लगै तो मरज्या !


36. सरपट दोडै हाथ ना आवै , घंटा उसका नाम बतावै  !


37. धौली प्लेट मै काला रसगुल्ला !


38.छोटा सा छोरा , कित जा गा ? --ताऊ आले खेत | के खा गा ? -- बालू रेत  !


39. जोहड़ माँ ते लिकड़ा भड्रक- भू , चार पाच्छे एक मुह !


40.काला सूँ में काला सूँ , काले जंगल में रहूँ सूँ, लाल पांणी पीऊँ सूँ , धोल्ले अंडे दूं सूँ !


41.बड़ रे बड़, तेरी पाणी में जड़, तेरी चोटि में आग , तेरे लोग रहे लाग !


42. प्यार करूँ तो घर चमका दयूं, वार करूँ तो ले ल्यूं जान , जंगल मैं मंगल कर दयूं , कदे कर दयूं मैं गाम बिरान !


43. एक चीज गजब की देखी , जिन्दै मैं तैं मुरदा लिकडै , अर मुरदै मै तैं जिन्दा  !


44. मैं एक छोटी सी छोरी , सबकै साथ मैं रोटी खाऊं, कोए मैंने ना रोक सकै , ना ए मैं शरमाऊं  !


45. पीली सूँ ,में पीली सूँ , माटी के बिल में रहू सूँ , बालकां के डले सहूँ सूँ , ना तो डस लूंगी कहूं सूँ!


46. सरसोली तें चाल्या , माथोली पे आया , च्यूंटकोली में पकड्या गया , हाथोली में मार्या |


47. एक नारी इस्सी देखि , जो गोली खावे | जिह पे भी थूके, वो-ए मर जावे |


48. तेरा भी वो मामा , मेरा भी वो मामा, मामा का भी वो मामा, यो रिश्ता कुकर जम्या|


49. में आई थी लेवण, तू लाग री थी देवण, जा तन्ने दे ली हो तो , में ले जाऊं  !


50. रात नु जा लुके , दिन में लिक्डावे, कती ना पेंडा छोड़े , गेल्याँ चाले जावे |


51. उप्पर तें गल घोट्या, तले तें दो मुंह छोटा,


52. चोमशे में अर्ड-मर्ड, ना में डांगर, ना में भरड!


53. पांणी तें में भर्या, आसमान में ,में तर्या , जित चाहूँ ,उड़ जाऊं , दुनिया की तष बुझाऊँ |


54. सौ दांदा का जाबडा, पर कदे ना चबाऊँ में | फेर भी घिस जावीं तो , नए कढ़वाऊँ में |


55. अरड - मरअड़ की लाकडी , आरडाटा ठाआँदी आवे| जिह पे भी जा पड़े , उहे का जी काढ बगावे |


56.बिसियाँ के सर काट दिए , ना मारया ना खून करया  !


57. जो मेरा स नाम, वो-ए मेरे बेटे का नाम , जा तू बता दे, बनज्यां सारे काम |


58. एक बलांध का मेरा शारीर, भीतर भरी घनी तक़रीर  !


59. उप्पर तें लट्ठ पड्या, भीतर तें चिडपड्या  !


60. नाचूं में हो के मगन, सर पे मेरे धरया ताज , पायां नु देखूं रो पडूँ, के स इहका राज  !


61. बीस मंजिल का भवन खडया, सर पे हरया ताज धरया  !


62. जाड्डयाँ में मोटी, गर्मियां में माड़ी, घेटी तलां कर कें, कट्ठी चालें सारी  !


63.चार बांह ,एक शरीर , लागे जब होवे पीड |


64.राम दिया शाप, आँख गई फूट , काणा होया आप, कनाग्तां मचावे लूट!


65. पतला सूँ, जब चोटी बधाऊँ, करडा होज्याँ , जा सो जाऊं , खट्टा हो ज्यां ,जब घर-घर मांग्या जाऊं |


66. जाड्डयाँ में जड़ाई मरी, गर्मियां में लुको धरी |


67. एक जानवर इस्सा देख्या, जिह के पेट में तेल , चोटी में लागरी आग, अन्धेरा होर्या रेल  !


68.सिद्धा - खब्बा डोलूं, तेरी नक़ल कर बोलूं  !


69. हांडी सा सर मेरा, कुडता पहरावे जेठ , एक टांग पे शरीर मेरा , वो भी बिना पेट !


70. कदे ना बडूं, चाहे सामण , चाहे जेठ , पर में लिकडू, जब आवे जेठ!


71. महारा जोड़ा बड़ा कसूत, हलुआ ,भार्या नु देवे कूट |


72. तीन भाण भाई , कट्ठे करें जुताई , ना कोए साला साली , रुखाला उनका हाली  !


73. लटकमलोरी ---लटकमलोरी, कड के उप्पर धारें छोरी  !


74. गाभरू ने में छेड़ूँ ना , बालक मेरा भाई , बुड्ढे नु में छोडूँ ना , चाहे ओढ़ ले रजाई |


75. ना खाऊँ ,ना खावण द्यूं, एर ना मुंह बावण !


76. नाण दे जिन्दगी , नाण दे मोत, एक हफ्ते का जीवन , बताओ ताव्ले ,वार होगी भोत |


77. हजार पायां का शरीर , ना धारूँ कोए चीर , लोग मेरा काला भुंडा, पाछे ला राख्या लाल्टनिया टुंडा |


78. जिन्दगी मेरी काठ , खसम मेरा जाट  !


79. मेरा नाम, मेरे बाप का नाम, दादा,परदादा का भी , नाम एक समान  !


80. बाजू सूँ , ना में ढोल , गाऊँ सूँ , ना कोए मोल , बालक बुड्डयाँ का में प्यारा ना में बिन्जो , ना इकतारा |


81. बेठेक मेरी आली , में सूँ चम्भो चाली , बत्तीस मेरे रुखाले , ना भाई , ना साले !


82. ना भाला ना तीर , लाग्ज्या तो घा करे गंभीर!


83. हाम सां कई हजार , एक महारा सरदार , दिन में हामने डर लागे , रात नु लिकड़आँ बाहर |


84. बारा मण की धोबन्न, गाणा गन्दी जावे , एक रपिया गेर दे , ठोड-ए मुंह बावे  !


85. बादल ने जनम दिया , जब बरस्या मींह , लाल दामन पहर्या उप्पर बेठी ,ढीह |


86. सीढ़ी जिस्सी मेरी राही , ना में कीड़ा ,ना में गिजाई |


87. छोटा सूँ में , छोटा सूँ पर सूँ बड़े काम का , में ना होऊं तो , फेर के काम दाम का |


88. सर पे मेरे सरकंडे , हजार द्यूं अंडे  !


89. जब में चढ़ी ,तो तू आई , एक थां हांसी, एक थां रोई लुगाई |


90. छोटा सा छोरा, पेट रह्या पाट, जिह के भी होया, ऊह के होगे ठाठ!


91. धोली घोड़ी लाल लगाम, उप्पर बेठा शालिग्राम !


92. जड़आँ में तेल , माथे फूल , तीन बट खाई , रही थी झूल  !


93. उप्पर चढ़ तू पाँ मारे, मेरे बिना ना सधती थारे  !


94. रेत की चादर , उप्पर बेला , गुरु बुझे , बता रे चेला!


95. हर्या घाघरा , पिली चोली , जवान होई , मंडी जा तुली!


96. हरी परी , बीटोड़े पे धरी , घरां आ के , बणी तरकारी !


97. तीन पगारी छन्नो राणी , खावै लाक्कड़ काढै पाणी  !


98. छोटी सी छोरी , सबकी जाणी , खावै रोटी , ना पीवै पाणी  !


99. दो बे फुले , एक बे फले , चुगे पाछे , चूल्हे में जले!


100. तू होया तो में फोड़ी थी , गीत गावण आली जोड़ी थी !


101. चिडपडा पर गुड कोणी , लंबा स पर बांस कोणी , ज़िंदा स पर सांस कोणी , लड़ जावे पर सांप कोणी !


102. काला झोटा भाज्या आवे , नाशां में धुम्मा, काला चोथ बगावे!


103. गोसे मेरा खाना , काला मेरा बाना , कदे ना में लड्या , कदे ना में भिड्या, फेर भी बतावें हारा!


104. दो तोरी , मुंह तागा , खुल जावें तो, मेमने भागां  !


105. पहाड़ तें लयाऊँ, मोरी माँ के दे ज्याऊं !


106. उप्पर ने ठा मुंह बावे, गिंहू चने वो खावे , हाली का स वो भतीजा, सारा खेत उहने बिज्या !


107. दो पहियाँ का गाडा, एक घुमे एक ठाडा, फेर भी कहवें चाले , पर थां तें ना हाले |


108. एक मेन्हेस की तीन झोटी, कोए माड़ी कोए मोटी |


109. तीन डिब्ब्याँ की रेल, ना उह पे चाल्या जावे , पीवे मीठा तेल , छिक-छिक खोई खावे!


110. एक जानवर इस्सा देख्या, जिह की कड़ पे काठी , छोटी ऊह की पुन्झअड़ , टांग जणू हों लाठी , पायां में खुर नहीं , बिन पानी जी जा ठाठी  !


111. एक माँ की दो छोरी , एक ठाडी (खड़ी ), एक हंडोरी  !


112. एक काली ,लांबी झोटी , छह मिहने जोहड़ में लोटी , फेर कोहलू में ल्या जोती  !


113. मेरे बिना कलम ना चाले , ना कोए बांच सके पोथा , एक दिन में भी था ज़िंदा रूंख, सोचो ज़रा अगर में ना होता |


114. मेरे नाम में स दुक , पर में नि बन्दूक, ब्याहली मन्ने ले कें आवे , आपना धोरा मेरे में सजावें  !


115. उड़निया डांगर , सोवे बल मांगर (कमर )  !


116. आठ टांगआं के बीच में , गाडी रह्या खींच में , जुआ मेरे पे धरया नहीं, गाडी चले कुकर ,बेरा नहीं  !


117. चार टांग , दो हाथ , के तो बता, ना आड़े तें भाज,


118. चार बांह का बीजणा, बाल ना बगावे , मौसी नु सोचे , दिखाँ आपे टूट जावे


119. घुम्मे सारा गात मेरे तीन हाथ बाल तें करें बात  !


120. सारे कुन्बे की भूख मिटाऊं खुद खाली पेट सो जाऊं !


121. वो तो हे खाती , छिक-छिक पराती , तम उह की जात बताओ , गेल्याँ दो गवाह ल्याओ  !


122. एक गाँ इस्सी देखि , जो घूम -घूम के खावे | दूध घी की थां, चून दे जावे |


123. ना में बाहर , ना में भीतर , मेरे धोरे आ कें, माणस काढें लीत्तर!


124. में सूँ बारी , पर मझक कोन्या , में सूँ बारी , पर ओसरा कोन्या !


125. एक ने जगा बताई , दोयाँ ने राह बनाई , दोयाँ ने दी बिनाई , दसां ने मिल के ठाई, बतिसां ने करी रगड़ाई!


126.तीन आखर का मेरा नाम आगले दो तें हो ज्या " काम' पाछले दो तें हो ज्या "पाणी " ला कें सुथरी दीखे राणी  !


127. कट्ठी रोवें , कट्ठी सोवें , दोनु जुडवा बेटी, पर आज ताहि नि फेटि!


128. रोयें तें वो पंघल जा | ना रोवे तो उड़ जा | बाल की करे वो सवारी | इन्दर देव का स पुजारी |


129. बिन डोर का चरखा , ना काते वो सूत | चार पालने डुलावे , घुमावें दो भूत |


130. में हाथी में भी , में बारी में भी , में छिम्बी की दूकान में , देखूं ,अक आऊं तेरे बताण में !


131. हरी थी वा भरी थी, राजा जी के बाग में, दुशाळा औढै खड़ी थी|


132. दादा मुते , पोता नहावे , सारा रस कुवे में जावे |


133. दोयाँ ने कर ल्यूं बल में , कदे सुहागी में ,कदे हल में |


134. में सूं एक लाख , बल के हो जाऊं खाख  !


135. सर में पडूँ तो "जी ", खेत में पडूँ तो "राही", तेरे पे बुझी , तेरे दादा ने बताई |


136. एक पिन्दा, चालीस दांदे , मेरे बिना ना , खेत सुहान्दे !


137. घामे की बेटी , सुरजे की पोती , के तो बता दे ना तो, तेरी अक्कल खोटी  !


138. कागज़ का मेरा गात, आसमान तें करूँ बात , मेरी नकेल तेरे हाथ  !


139. इसा जानू हथोडा , पर लाकडी का घोड़ा , रगड़-रगड़ राब , ठाडा भर द्यूं चाख!


140. ना आण दयूं , ना जाण दयूं , धुर ताहि लखान दयूं !


141. लटकी जाऊं, लटकी आऊं, घेर में आण के, बोझ ठाऊँ  !


142. सोना भी , धतूरा भी, अर आऊं में खाण में , दिखाँ आऊं थारी पिछाण में !


143. गाडी उलाली आई काम , ना तो खूंटी पे दी टांग  !


144. खाती के ने घडी, छिम्बी ने पहराया सूंट, मनियार ने चढ़ाई चूड़ी, जाट ने ओढाया चुन्दड , बताओ या बहु किसकी ?


145. हर्या छोरा , हरी रजाई , खावें उहने , हरी गिजाई !


146. भूतां की राही , अम्बर में बिछाई  !


147. गेल ने वो लटके , उलालू में आवे काम , डहिया का छोटा भाई , बताओ उह का नाम ?


148. टोकरे की बेबे , पैर में पड़ी , जब भी बाल चाले , गडोंची प चड़ी !


149. ऊँचे टिल्ले बेठ्या , बणावे काजल श्याम , सो जा चादर ताण क, जब लिक्डावे घाम  !


150. मण का ,मण का सब कहवें , बोझ ना उह में सेर , कह तो तावाला बता दे, ना तेरी नहीं खेर!


151. हजार बारी का महल , छात पे धरया खजाना , राणी कहवे सिपाही ने , त्यार राखियो तोप खाना!


152. एक गाँठ का नाप , ठाले मानस आप , रंग स उह का धोला, रूप बदले बंजा चोला!


153. देखे तो स फूल , खावे तो सुवाद ना , ठावे ते बोझ ना , भीतर लिकड़े कांकडा, खोर में जा के सांपड्या !


154. नकोदर में बेठ्या , कानपुर में लात , मन्ने बेरा ना था , मेरे दादा ने बताई या बात!


155. लोह का बेटा , गोदी में बेठ्या , जा करे कोए घात, दूर तें मारे लात  !


156. लाल स मेरी चामडी, ग्यार में देई टेक , कोए आड़ी कोए बांगी, एक पे चढ़ी एक  !


157. जब भी उह ने बधावे , सासू का नाक तोड़ लायावे , बताओ के ?


158. दश सींग की गाँ, डून्घे डूबी जा , सब क्याएँ ने काढ ले, जो भी थ्या जा  !


159. रीती जावे, भरी आवे , सब की वा, तश बुझावे !


160. आठ पान्सली , एक बांस , जेली की बेबे, कुहाडिये की सास !


161. खाती के ने घडी , भींत में थी जड़ी , दादी की ले री घाघरी, दादा की ठा री पागडी!


162. आपणा कमा के खाऊं ना , दुसरे का छोड़ के जाऊं ना  !


163. पांच ताई भूरा , पचास ताहि काला , पचेतर ताहि धोला, फेर ना रंग का रोला!


164. पहले बिना ना दूजा , पहला टोहवे जा दुसरा खुजा , दोनु दुश्मन घणे कसुत , दूजा ठा जा जब , पहले की आवे सूत, बताओ दोनु कुण सें ?


165. उस चीज का नाँ बता , जो तू पहरे ,पर ना खरीदता , जो तू खरीदे ,पर ना पहरता , 166. जब मिंह आवे , बहार लिकड़ कें मुह बावे!


167. योद्धा सूं जंगे-मैदान में, प्रेमिकाओं का श्रृंगार सूं , जा लागूँ चक्सुओं के द्वार में, बताओ के ?


168. थोथा स गात मेरा , अर घा पड़े गंभीर , तेरे अधरां पे लाग जाऊं, तू सुर लिक्डें सुरील  !


169. अंगी बांगी लाकडी , गीत गंदी जावे , एक ओड तें भींच री, एक ओड तें मुंह बावे!


170. चुन्घनिया स एक , तडके सांझ गंडे पाडे चार , फेर भी कुछ ना मिले , रस काढ ले जा जमींदार!


171. लिली गाँ मन्ने कहवें, आऊं थारे खेत में रोज | उप्परली सत्त्रां में, मेरा नाँ ले खोज |


172. लाल तोते टांग लिए , लत्ते दिए तार | उहने देख कें लागे , जाणु आई स बहार |


173. छ : टांग का काटडू , उलटा दिया लटकाय, दीदे काढ़े झोटडी , गेल्याँ गाल फुलाय!


174. एक मोघे का छत्ता मेरा , दूसरी उह में ना सुहावे | जब भी में बाहर लिकडू, खून मेरी तश बुझावे !


175. जूंढी की बेटी , बाण की माँ | बल खाई लोटी , खाट के मांह |


176. घडी में बताऊँ घडी पाछे डूब जाऊं!


177. रेत का मंदिर , धोला भामन , कीड़ी बड गी , लागी रामभ्न !


178. ना मेर: पहिये , ना मेर : लात , घीषड- घीषड चालूँ, बल्धां की साथ , हल ने ठा ल्यूं , दोनु हाथ  !


179. घेट्टी में घेरा , ना कबूतर , ना बटेरा  !


180. वा जब आवे , ले कें जावे |


181. एक पहिये की रह्डुआ, ठोडे चक्कर खावे , कदे काप्पन्न,कदे बरोली, कदे कुल्हाँ काढ बगावे  !


182. वा-ए खोले , वा-ए मूंदे , वा ना हो तो, तू नुहाँ ने चुंडे!


183. एक सींग की गाँ, बाछ्डू चुन्घे जा खुला |


184. एक सासू दो बहु , दोनूं तारें लाली , सासू कहवे बहुआं ने, तम कसुती चाली  !


185. पहर -पहर मन्ने कहवें , पहरया में जाऊं ना , आठ घडी के बखत बिना, में दुसरा पहर आऊं ना  !


186. ना आर जावे , ना पार जावे , तू-अ देख : तन्ने-ए बतावे  !


187. एक बेटी इस्सी देखि , उह की माँ आधी ने रोज नुहावे, उप्पर तें कती गोरी चिम्के , तले तें काली रह जावे !


188. तडके-तड़क में तारी , दंदां गेल्याँ मेरी यारी , फेर भी दान्दा ने में मारी!


189. स्वर्ण सिंह की बेटी, करनपुर बियाही , देख-देख कें सारी, राजी होवें लुगाई !


190. 100 हाथ का गात , पाताल तें करूँ में बात  !


191. तीन आखर में बाँचो, काग की चोंच , हाथी को पाछो !


192. गंडे का भतीजा , चोमास्स्याँ में पसीजा  !


193. कणक की बेटी , पाणी में रलाई , अंगार पे सिंकाई, थाली में लेटी  !


194. एक धारी तलवार, पायां तले ली दाब , उह के काटे ने , खावें सब ,ले सुवाद!


195. लुहार के ने घडी, लुहारी आई बेच , के तो बता दे , ना तेरे नुहा ने, ल्युंगी खेंच  !


196. ना में हवा ने जाई, नाम मेरा हवाई  !


197. लोहे की बादली ,. घर-घर करदी जावे , आछे ने ले धर , भुंडे ने बरसावे  !


198. उह के पाँ देख के , दिल गया पसीज , उह के आंसू चुग के, बोये एंडयाँ के बीज !


199. पाणी की रेल , खिंची बल्धां की गेल!


200. एक बाप के दो बेटे, एक ठावे बोझ , दूजा लेवे मौज !


201. एक चुंडा , दो हेल , ब्याही बाणीये की गेल |


202. तेरी मुंडी उह के हाथ में , बंडावे तन्ने बात बात में  !


203. नाम में भी जड़ , खान में भी जड़ , तावाला सा बता , ना इथों बाहर लिकड़!


204. लाल पहाड़ , काले डाकूआँ की लार , डाकू चुंड-चुंड खावें , आपने भाइयां ने भी बुलावें !

डाकू कुण ? पहाड़ कुण ?


205. मिंहा सी चीज , पाछा रहया पाट, इह बिना सरे नि, जा लत्ते जावीं पाट!


206. ना जात का भंगी, गाल में रहूँ तंग-सी , अडंगा करूँ साफ़ , नकोदर का वास  !


207. कांच का महल, कचनार की गली , रस का प्याला, मिश्री की डली, बताओ के ?


208. मुंदु सूं, पर ताला नही , मोघे सें, पर जाला नहीं  !


209. मुंह में सें अस्सी दांद, काट- काट के ला दे कांध  !


210. आड़ा पोया बांगा पोया, पोया कस्स- कस्स, कह ते तावला बता दे, ना तेरी इब्ब खेर नहीं बस !


211. दौल्ड़े का बड्डा भाई, पैरआं में करी खीन्चाई  !


212. एक टांग का सन्यासी, जोहड़ काट्ठे का वासी  !


213. लाल पारी , हरी चोट्टी , भेंट चढ़ी , कुण्डी सोट्टी!


214. नाक की शोभा, जानू स चोभा  !


215. तू झूठ ना बोल, उस्सा-ए बातावे , जिस्सा तेरे सामी डोल!


216. बाबू पेट में, बेटा बरात में !

217. चाम की जेवड़ी , हाड दिए बाल (जला ), क : ते बता , ना हाडे तें चाल!


218. काली बेल , लाल फूल , बाजें घुंघरू , बिचाले झूल !


219. खाट मेरी माँ , मुड़ढ़ा मेरा भाई , मन्ने गेल्याँ ले ज्यां , जब गीत गावें लुगाई !


220. मेरे डांगर रहे लाग, भूखा रहणा मेरे भाग  !


221. रात की उड़ार, पटबीजना कोणी , रात का शिकार , उल्लू कोणी  !


222. ना तन, ना मन, कुड़ते पहरूं हजार , ना किम्मे भीतर , ना किम्मे बाहर  !


223. घास हूँ, रूंख नहीं , मिटती मेरी भूख नहीं , ना जड़, ना पाते , पीला मेरा रंग बताते!


224. बिन खुसबू का फूल, पत्नी, पति तें मांगे , पर बालाँ में ना टाँगे !


225. आज तें आगला , डाकिये का काम ला, जोड़ कें नाम बता  !


226. दो आँख , दो जीभ , कान कोणी, बड़ा अजीब!


227. घूम घूम कें वो आवे, छप्पर -जोट्टे ठा ले जावे!


228. ना ते वा स खाट, चार्यां की करे बात , बाह्रन्ने में खड़ी, सर के उप्पर भी, अर पायां में पड़ी!


229. दादा बेठे -दादी बेठे, बेठें पोता-पोती , भाहरने की दोनु ओड़, ये दोनु जोती !


230. आर जावे पार जावे, जावे कर्र-कर्र , रूंढ़ा खींचे खूंढ़ा खींचे, दो टूक कर  !


231. ना यु पासंग, ना यु बाट, इह के बिना तौल, कोणी साच  !


232. अंगा चलूँ ,बंगा चालूँ चालूँ रंग बिरंग , आज्या भाई ,आज्या बेबे, पढले मेरे संग  !


233. बे पेंदे का लोटा, ना पाणी का टोटा , 234. जब कान ने दे दाब, उह के मुंह में के आवे आब!


235. काँधे लद्दी जावे, काँधे लद्दी आवे , गेल्याँ तेरे , खेत कमावे !


236. काली स मेरी घेटी, पायां तेल लपेटी , अँधेरे आवे मेरा यार, चंदना दे पसार , बताओ वा कुण अर यार कुण ?


237. काली सूं में काली सूं , काला मेरा गात , एक से मेरी टांग , आठ सें मेरे हाथ !


238. चिकनी जेवडी, सरपट भाजी जावे , ना हाथ पायां ने , अर ना पाँख हलावे!


239. जनम पे खावे, मौत पे खावे , खावे ठुस-ठुस , काम में कती फुस्स!


240. अगाऊ तें जात, पीछाऊ तें लड़ाई , दोनुआँ ने जोड़ कें, या पहेली बनाई  !


241. ना तन ,ना मन, कुड़ते पहरूं सौ , चाहे तार के देखो, देखो गे तो ल्यिओ रो, बताओ के ?


242. पांच दांदयाँ की कांघी, बरते बलध के: ढाआँढी  !


243. पहाड़ में जड़ , मैदान में ढाहली, खेत मेरे पत्ते , फसल दयूं निराली!


244. एक पल में आवे, एक पल में जावे , ठा के बागा दे , जा तू हाथ लावे!


245. रोऊँ एक-एक आंसूं, पर थारे घर ने चासूं  !


246. यु रोज तेरे धोरे आवे , चाँद सा गोल दिखावे , खाण का कोणी , पर खाया जावे  !


247. छोटा सा छोरा , टूलअम टूल , काँधे धोती , माथे फूल  !


248. नाइ की ,मन भाई की , बात कहूँगी हेठी | इसकी सासू ,मेरी सासू दोनु सें माँ बेटी ||


249. दो सिपाही लड़दे जावें , केम के पत्ते झडदे जावें  !


250. एक अच्मभा इस्सा देख्या , देख्या र लोगो केम तले, बीस बरस की पाड़ी चुन्घे, तीन बरस की मेंह्स तले !


251. कदे कहवें धूपिया , कदे कहवें रतोडा , चीज में एक सूं, अडोस पड़ोस जोड्या !


252. वो गाम कुन्सा स जिह में लड़की गोबर खाती हो |


253. इस्सी चिड़िया का नाँ बताओ ,जिह के सर पर पैर


254. ठोडपुर की छोरी , नाशिक में ब्याही, लोग देवें मरोड़ी , देखें सारी लुगाई !


255. लोहे का हाथी, ना पूंछ ना काठी , 256. माँ जाई का सन्देश, आया तागे का धर भेष  !


257. ३ चीज जहान मे, ना धरती पर , ना आसमान मे!


258. तेरी बेहल्डी ने ऊंगु , तले बड जाणु ते चुन्घुं  !


259. १० बज के १० मिनट पे , खड़ी होज्याँ मूंछ , के ते तावला बता दे, ना तू बावली बूच  !


260. आग तें मुसीबत, पाछे तें धन , ताव्ले से बताओ, तीन अक्षर गिण !


261. आलू क ताप चढ़ावे, इससे फल का नाँ बताओ |


262. ना में "आडू ", ना में "राही" , मेरे नाम में , ये दोनु आई !


263. ना उह के लाग रे खुर, ना उह के लाग रे पाँ, फेर भी उहने तू खेताँ ले जा !


264. में नहान्ना सा , तू कोड बड़ा | मन्ने चुम्म्या , तू रो पड़्या |


265. तू भी खार्या, में भी खार्या , तू दिखावे दुःख , में दिखाऊं ताप , दोनुआँ बिना , जी नहीं सकते आप |


266. रंग मेरे तीन , ना डरे पाक , ना डरे चीन  !


267. कड़ पे लोटा, पानी में लोट्या  !


268. चढ़ावे मणिआर, ले जावे लणीहार |


269. वा नहीं स नार , पर अंडे दे हजार  !


270. हाथ ने मसली , बल खाई जावे , बाही सेरुआं ने , आपना भाई बतावे!


271. गोसे की बेबे, भींत के चिपट रि  !


272. गार्या तें बणी, भींत पे चन्णी , गेल मेरा भाई , दुशहरे के दिन , जोहड़ में जा बहाई |


273. गोल सूं में गोल सूं , गोबर की में झोल सूं , होली पे मेरा जाणा, गेल बडकला मरजाणा!


274. रोटी का भाई , दादी ने बणाया , मन्ने खाया  !


275. जाती स ,पर जावे कोणी , खाती स ,पर खावे कोणी  !


276. मेरे नाम में स ईंख , जा घेटी पे जा लागुं, मांगन दयूं ना जान की भीख!


277. वा उड़े के गुजरी, मन्ने कही, अक वा स गुजरी, पर सब गए नाट, बता या के हुई बात!


278. जले भी ,ब्ले भी, पर ना होवे राख , ना में बिजली , ना में ताख  !


279. माटी तें बन्या, पर में ना घडा, दुआली की बाट में, कुम्हार क पड्या !


280. माटी की माँ, माटी का बेटा , माँ पेट भर खावे, भूखा रहवे बेटा  !


281. माँ काली, बेटा गोरा , चीनी का भाई, ईंख का छोरा !


282. नाम तें -पायां में अड़ी, असल में सर पे धरी  !


283. नाम तें दुश्मन , खावे ते खुशमन !


284. इह के नाम में , पखेरू का नाम , पर स यु चौपाया, साझला सारा गाम!


285. में जल में भी , में थल में भी , मछली का साथी, रोला करूँ दिन राती!


286. मुस्से की जात, कांड्या का गात !


287. काला सुं पर नाग नहीं, पक्षि सुं पर काग नहीं , मीठी बांनी बोलिए , आम के बागाँ टोह लिए !


288. चाम की गोझ, आग लावे रोज , लुहार कहवे लुहारी ने, तावली-तावली लोज  !


289. छ : टांग का काला घोड़ा, मिंह तें पहलम अंडे ले दोडा !


290. धरती के मांह डुन्घी , धरती के उप्पर ऊंची लांबी , सांप का महल सूं में , बनावे एक कीड़ी आंधी !


291. कटोरी में कटोरी , कटोरी में पताशा , पताशे में बिंदी , दिखावे दुनिया का तमाशा !


292. सगाई की रीत, निशानी -ए प्रीत , अनामिका के संग , के ते बता दयो , ना होवो फेर तंग!


293. जींदे कमाया जावे , मौत पाछे भी बधें जावे  !


294. मेरा नाम स तोता (पर्यायवाची ), में लागूं ते माणस रोता , एक स मेरी चोंच , मारूँ ते आवे खरोंच!


295. भीतर जहर भरी , आग ला मुंह में धरी  !


296. जनमे जब , थे कोणी , सर पे सें , मुंह में कोणी  !


297. में ते डिब्बी में सोई थी , च्यूंटी ने पकड़ी थी , नाक में गोई थी  !


298. में एक पखेरू, ना कोए बला , मेरी घेटी में , स एक छल्ला!


299. एक अजूबा ईसा देख्या , आगे तें बणाया भगवान् ने , पाछे तें बणाया इंसान ने  !


300. बंदड़ी की गेल आया, भाई नहीं ,और कोए बताया, घरां आ के गाल में बैंडवाया !


301. एक पाँ पे देहि घुमाऊं , लोग्ड की में बात बणाउं |


302. थूक मूत की छाबड़ी , माछर माखी खा , माड़ी सी बाल चाले , गेल्याँ-ए उड़ जा  !


303. पांच किल्लो का स बोझ मेरा , नाइ का ले जा , जब करण जावे बेरा, नाई के ने एक लोई मिल जावे , माँ मेरी फूल्ली ना समावे  !


304. तू पति भी , तू गहणा भी , तू उतर्या करे , इस्सा कहणा भी!


305. दुनुआ का नाम अ एके, एक स काला अर, एक कती ना दिखे !


306. चार ठूंठी की बाल्टी, दूध भरी जा , सुनील कहवे राकेश ने, मन्ने क्यूँ ना दे जा  !


307. सज्जे भी, खब्बे भी , छाती के उप्पर भी , धरले इह में सौदा , तगड़ा हो चे बौदा  !


308. दूर तें आवे , घंटी बजावे , दीखे कोणी , पर खूब बतलावे ?


309. चवालीस जणे, लेण में खड़े , लोग बतावें , बारा खड़े  !


310. आन्गालियाँ का सर, हरयाने का गाम , दोनुआ का एक-सा नाम!


311. बाबू कहूँ ,ते लड़ जावें, काका कहूँ ते टूर जावें , माँ-ए मेरी न्यू बता , इन् ने क्यूकर समझावें!


312. काला कुत्ता ,मुडमा पुन्झ , तन्ने ना बेरा ते तेरे बाबू पे बुझ |


313. छोटा सा छोरा, पेट में मोघ्ला , सब ने प्यावे पाणी, काम करे ना दोगला!


314. भाण के जांणा, बियाह का वाणा, भर के आणा  !


315. मुसीबत का स साथी, साढ़े तीन हाथ की काट्ठी , नाला नहर कूदा दे , तावाला सा तू बता दे!


316. हाड में गाड़, घोड़ा बलध ठाड़ !


317. ना में बोया जाऊं, ना में जाम्म्या जाऊं , तीन अक्षर का मेरा नाम, बोढिया के दुसर में आऊँ !


318. गोस्स्याँ का पलंग बिछाया , आग दी खावण ने , बेशक ना जबाब दियो, जा डर लागे बतावण में!


319. स वो कसुता चालणा, ना चाले ते खोटा, धोरे तें जावे जर , पड जा घर में टोटा!


320. मोर की पूंछ में, चन्दा की मूंछ में , नाम मेरा हथियार , तावला बता मेरे यार!


321. तेरा सुसरा, मेरा सुसरा , दोनुआ का समधाणा , म्हारा दोनुआ का के नेग, तमने स जरुर बताणा  !


322. आवे थी वा जावे थी , देवर ऩे बधाई बतावे थी |


323. लाकडी का गात मेरा , तू ना लिए चाट मेरा , बियाह में तेरे कर दयूं मिंह, सोच लिए एक बार ज़रा  !


324. छोरा धंसर्या ग्यार में, बाप बतावे कुम्हार ऩे , रोंदा रोंदा चक्कर काटे , कुल्हाँ अर चुघड़े बांटे  !


325. जब वा पहली बार बड़ी घर में , चावलां की हांडी खिंडी घर में |


326. कित का तू शयाना, ज्ञान का पीवे आब , इस्से पहेली में स मेरा नाम, दिखाँ बता सको आप  !


327. कडवी भी तू , मिट्ठी भी तू , तेरे तें-ए अरि, तेरे तैं-ए यारी!


328. गाड़े लुहारी जन्माणी, घर मेरा कढावणी  !


329. पेड़ी- पेड़ी चढ़ता जाऊं , सरां की छतरी ठाऊँ , धरें मन्ने दादी नानी , फेर कर देवें बाड़, अर घर मेरा गितवाड़!


330. कोठे उप्पर आली , रहवे उह में चम्भो चाली!


331. मुकलावे में आई, सासू ननद ने ठाई !


332. आड़ी बांगी जेवडी, खेत बिचाले जा , या ने गेरे हाली , क्यूकर बोया जा !


333. सर पे मेरे ताज स, पूंछ में स मेरे धवज , जा कोए इब्बे बता दे , इनाम तें जावेगा सज्ज!


334. हथेली में हथेली, हथेली में पिस्सा , कोए जा बता दे , ते आ जावे जिस्सा !


335. दुस्सर में आई, बिठा दी कड़ियाँ , ना मेरे में फूल , ना कदे वे झड़ियां!


336. में पोली में पाथर सूं , खेत में में माटी सूं, पोली में छात, अर खेत में झाल, में -ए डाटू सूं !


337. तीन आखर का मेरा नाँ, दाम कितणा बेरा ना , बोझ स , पर कोणी मण, उघाड़ी का ढक दे तन  !


338. तेरे सर का मान, दस गज ले तान , नाम में स पाँ, शीश उह की ठआँ!


339. आगे करदे डरे, पाछे तें करे , गल हे या इस्सी , करें बिना ना सरे !


340. थप्पड़ तें बणी, भींत पे तणी !


341. ढोल का छोरा , मदारी की गेल , माक्कड़ नाचे , धाप की गेल !


342. बिन दांदां का मुंह, बीचाले धर्या कांकडा !


343. तीन आखर का मेरा नाम, देणी पडूँ तडके -सांझ , बांस की में बेटी , घेटी देई बाँध !


344. खाऊं सूं में सांप , खाऊं सूं में मिर्च , बताओ में कुण सूं , माड़ा सा दीमाग खर्च!


345. गरम बतावें , पर ताती कोणी, हरी अर लाल के, सिवा आती कोणी!


346. सुसरे ने थी भरी, भींत तले खड़ी , पायां में स जाली, रोज घाले घर आली!


347. में चालूँ ते तू स, में रुकूँ ते तू नहीं , ना मेरा कोए आकार, में सूं ते तू साकार !


348. दो तलवार भीड़दी जावें, भींत पे भींत चिणदी जावें !


349. एक टांग का घोड़ा, गेल दिया नाथ , काम आवे जब , दोनु लावे हाथ  !


350. गोल मोल गिन्डुआ, दादा की गोझ में , दादा फूंक रितावे , भर ल्याऊं रोज में!


351. ना ते में चीन तें आई, ना में किहे चीनी के ब्याही , फेर लोगाँ ने चीनी क्यूँ बताई!


352. वा आई ,मुंह बाई, नींद की खबर ल्याई  !


353. पात्थर से अंडे, खूड बणाया वास , धोळी मेरी घेटी, लांबी टांग ख़ास!


354. दो सुरंग बहीं जाँ , हलुआ खा ले ठहीं जाँ  !


355. चुन का काम्बल , ओढें बेठा आलू  !


356. तीन आखर का मेरा नाम , चुहले हारे का मेरा काम , तोष -मोश के में बणाया , दादी का हाथ जलण तें बचाया!


357. चिमटे की बेबे , लुहारी दे दे , नाक तें करे काम, बताओ इह का नाम!


358. वा पति धोरे जावे, मीठा जबाब ले आवे , वा ना आवे ते , ते नींद ना आवे !


359. बाबू भाण ने छोडूँ ना , करूँ काम में खोट , काम में ना ईमान , मारून हलवी चोट  !


360. एक आदत भुंडी , एक काँधे की घुंडी , एक बिकवा दे नाज , एक बुआ दे नाज  !


361. बूंदी का बीज , खाण की चीज , मिर्च की आँख , मिट्ठा ले चाख  !


362. आड़ी बांगी लाकडी , खावण में धाकड़ी , बेषण चीनी मिलाई जा, छिक-छिक खाई जा  !


363. ना या किते टंगी, ना इह में गिरी , टींगरआँ की मनभावन, ताव्ले लागो बतावाण !


364. पूरी ने खावें , सवा-आली बतावें  !


365. ना ते में सूं फूल, पर मेरे नाम में गुल , नरम सूं पर नहीं गल्या, के ते बताओ , ना ते में यु चला!


366. ईंख की पोती, जमा धोळी धप्प , घाल दे बटेऊ क:, खा जा चपा-चप  !


367. ना बर्फ की बेबे , ना बर्फ की धी , ना गर्मी तें पीन्घले, बढ़िया मीठी सी  !


368. में पैर में , में हाथ में , घरां आवण , की बाट में  !


369. दो पाट की चाक्की, ना कदे राही जावे , ज्यां ने भी रगड़े , कुछ ना बाहर बगावे!


370. जा बालक के हाथ में , करे लिखण का काम , जा बुड्ढ़े के हाथ में , बण ज्यां उह के दाम !


371. जब उलटी आई बरात, बगड़ में धरी परांत, भाभी ने हाम खिलाये, परात में किम्मे रलाये!


372. ब्याहली की पिछाण, से यु एक प्रहाण !


373. तीखी नजर , घर अम्बर , झपट मारे नाग, नाम बताओ आज!


374. यु राछ भी , यु बखत भी , यु नरम भी , यु सखत भी !


375. जिन्दगी की सौत, ना या दारु , ना या मौत |


376. नाम में तीन आखर , अन्न की भरी जा , ना भरें गुड -शक्कर!


377. बाण का भाई,. जोहड़ का काठा, समझाओ मन्ने, या के स गाथा !


378. हरया चाम , दिल स धोला, पाणी का घर , पाणी का कओला!


379. नाम में काग , बेल में पड़ी , सूं में साग , पर ना कढ़ी !


380. बांडे गा ते बधेगा, दाबे गा ते घटेगा , ना या कोए चीज , बता काका के भतीज!


381. ना ओड स, ना तोड़ स , फेल्या चारूं , ओड स  !


382. छोटा सा कद, पेट में नली, दादा मारे घूँट, सर पे आग बलि !


383. पायां तें पड़े, चाक्की ने घड़े  !


384. बताओ इस्से दाणे का नाम , स ते मिट्ठा ,पर ग़ुम में नाम  !


385. पाछे आवे माणस, आगे संगीत का राछ , तीन आखर का नाम , वो मेरा प्रियतम  !


386. एक तें पेट हो जा खाली , एक तें दीमाग में काली , दोनुआँ का नाम एक , जा बता सको ते , इनाम की बाट देख!


387. राम की चुन्दड , राम का रंग , राम का घोट्टा, घरती ने ओढया  !


388. उनके घेटी तले आल , उनके कड़ पे सें पाल , धोले उनके बाल , ठुम्मक ठामक चाल!


389. फूल भी तू , आँशु भी तू , दुःख में भी तू, सुख में भी तू !


390. हाथां की लय, जोहड़ का भाई , दोनुआँ की , एक राशि बताई!


391. घर में लागे हाथ जोड़ , खेत में लागे बलध जोड़ , दखां कोए बतावे इह का तोड़!


392. बिलोनी चारमुन्ही , चरुंआँ पे चाले रई, बासन भर-भर ल्यावें सीत, सारी गाल ने कही !


393. ना खाट ना खटोला, पार भाई सूं छोटा इनका , वो न्यू बोल्या  !


394. जेव्डे तें जा के डटी , दोनु काख मेरी कटी , सुवाद आवे जब आवे झोटटा, में डांगर नहीं, सूं लाकडी का सौदा !


395. एक बे डांगर, एक बे झोंका , सही बताइओ , कदे हो जा धोखा!


396. बीज की माँ, हाली की बेबे , काँधे बेठी, मुट्ठी भर-भर दे |


397. वो स, बताओ कित स ?


398. खेत में कटार, लांबी एक सार |


399. बचपन काला , जवानी लाल , बियाह मो पोहंच्या , ख़तम होई चाल |


400. फली मेरी साग, पत्त्यां में खाज , घणा पीउं , उगल जाऊं, के ते तू बता, ना फेर में बताऊँ !


401. एक में चारा , एक में तेल , पाछले दो आखर, खावें मेळ!


402. धोले हाड , भूरी खाल, बालक पण में थे, मुन्छ्याँ के बाळ |


403. छः नाथां का बलध, जोड़ी में चाले , उनके बिना तू , खेल में ना चाले!


404. काला सा घर , भीतर जावण तें डर!


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