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ViewsHumorous Jokes in Haryanavi/नाई, चमार आदि दूसरी जातियों पर चुटकुलेFrom Jatland Wiki
खात्ती की बहूएक बार एक गांव में एक खात्ती ने अपनी घरवाली की पिटाई कर दी । खात्तिण जा पहुंची कूऐं में छ्लांग लगाने - पर कूऐं पर पहुंच कर वो डर गई और वहीं बैठ कर रोने लगी । गांव की कुछ और औरतें वहां पर इकट्ठी हो गई और उससे पूछने लगी - "आंहे, खात्ती नै तू क्यूकर पीटी - उसनै तेरै थप्पड़ मारे, लात-घूसे मारे अक डंडे ?"
तोड़ा - कमी
भैंस की खरीददारीपहली बार ब्याई हुई भैंस को "खार-की" कहा जाता है ।
चमार की ससुरालएक चमार पैदल चलता-चलता सात कोस दूर अपनी ससुराल पहुंच गया । उसकी सास बूझण लागी - "बेटा, पाहयां (पैदल) आया सै के?"
भोले चमारघीसू चमार गहरी नींद में सोवै था । उसनै आपणी भैंस एक कच्चे कोठड़े में बांध राखी थी । रात नै चोर आये, उन्हैं कच्ची भीत का कुछ हिस्सा तोड़ दिया अर भैंस नै खोल ले गये ।
"गऊ-का-जाया" एक चमार ने सोचा कि कुछ नया किया जाये । उसने दो दरांती लेकर अपनी दोनों कनपटियों के साथ जोर से बाँध ली और अपनी चमारी से बोला - "अळ, देख मेरे सींग, ईब मैं आंक्कल (सांड) बण-ग्या" । चमारी बोली - "न्यूं बणें तैं के हो सै ? कुछ कर-कै तै दिखा !" चमार अपने झौंपडे के पास गया और उसकी छान को लगा अपने 'सींगों' से खुरचने । पास ही उसका चूल्हा जल रहा था - छान (झौंपड़ी) से कुछ फूस चूल्हे में गिर पड़ा और आग लग गई | दोनों दरांती उलझ गई छान में और चमार लगा चिल्लाने । चमारी भी चिल्लाई - बचाओ, बचाओ ! चमारी की चिल्लाहट सुनकर गाँव के लोग वहां भाग कर आये । कईयों ने चमारी से पूछा - इसकै के हो-ग्या? चमारी बोली "अळ, यो गऊ का जाया मरैगा जळ कै !!!
जब पहुंच गए बणी में, तै भूंडू चूड़े नै एक बड्डा-सा खढ़ा खोद दिया । उस खढ़े नै देख कै कल्लू चमार बोल्या - "ए... यो तै भोत बड्डा खढ़ा, इसमैं तै दो बाळक आ-ज्याँ !! दूसरा चमार बोल्या - देख, कितणा भूंडा बोल्या सै, तन्नैं आगली बै कोनी ल्यावां !! मां का जमाई !
सुक्खा अपनी ससुराल गया और वहां उसको खूब खांड-बूरा नसीब हुई । दो दिन बाद जब वो अपने गांव उल्टा आया तो उसकी मां ने उसको रोटी और चटनी खाने को दी । उसनै मां को कहा - "मां, थोड़ी सी बूरा घाल दे" । मां बोली - "बेटा, बूरा तै जमाई कै घाल्या करैं" । सुक्खा बोला "तै जमाई समझ कै घाल दे बूरा" !! "तू क्यूकर रांड हो-गी?"
घासी चमार का देहान्त हो गया और उसकी घरवाली रोते-रोते जोर-जोर से चिल्लाती रही - हाये, मैं रांड हो गई, हाये मैं...." एक महीने बाद जब भूंडू शाम को गांव के बाहर "जंगल-जोहड़" खातिर गया तो वहां गांव के कुछ नौजवान मिले, उसतैं बोले - "अरै भूंडू, थोडी हाण पहल्यां तेरी बहू तै रांड हो-गी ।" भूंडू भाग कर घर आया जहां उसकी मां और उसकी बहू दोनों बैठी थी । भूंडू जोर-जोर से रो कर अपनी मां तैं बोल्या - "ऐ मा, सारा गाम कहै सै अक या तै रांड हो-गी" । उसकी मां बोली "तू तै यो रहया मेरै धोरै, फिर तेरी बहू क्यूकर रांड हो-गी?" भूंडू फिर सुबकता-सुबकता बोल्या "मेरा बाबू मरया उस दिन बी तै मैं तेरै धोरै-ए बैठ्या था, फिर तू क्यूकर रांड हो-गी?" तिप्पन चमार अब तो भोले-भाले चमार कम ही रह गए हैं । सच्ची बात है - एक गांव में एक चमार हुआ करता था जिसका नाम था ’तिप्पन’ । गर्मी के दिन थे, रात को अपनी मूंज की चारपाई पर लेटा था, हल्की सी गुदड़ी बिछा रखी थी । खटमलों ने उसे सोने न दिया । गुस्से में आकर बोला "अळ सुसळो, आज के तै तुम नहीं, के मैं" । और अपनी गुदड़ी जमीन पर रखकर उसको आग लगा दी । सारे गांव को यह खबर लग गई और आज भी गांव वाले चटकारी लेकर यह कहते हैं:
"अळ के करूं किसान मेरै जूं सी लड़ैं" बुलडोजर गांव के बाहर सड़क पर चमार ने एक बुलडोजर चलता देख लिया । उसने पहली बार बुलडोजर देखा था । हांफता-हांफता घर आया और घरवालों को बोल्या - "सारे के सारे छात्यां (छतों) पै चढ़ ज्याओ, एक रेल राह भूल रही सै" !! पंचायत - ब्याह की समस्याघणे साल पहल्यां की बात । गाम में पंचायत हुई - उसमैं मुद्दा यो था अक ब्याह में टाइम घणा लागण लाग-ग्या, इसका के समाधान हो? सारा गाम इकट्ठा हो-ग्या । सरपंच नै कही अक भाई सलाह दो । किसै नै कही कि बाजे पै रोक लगा दो - ये नाचण आळे भोत घणा टाइम लेवैं सैं । किसै ने कहया अक पांच आदमियां की बारात होनी चाहिये । एक बोल्या कि पंडित तैं कहो अक फेरे करवावण में कम टाइम लगावै । घीसू चमार बोल्या - अळ औळ (और) बात तै साळी (सारी) ठीक सैं, पळ (पर) ब्याह में सब-तैं घणा टाइम लेवैं सैं भाती - अळ ये भाती गाम के होणे चाहियें !!
"एक तै जरूर मरैगी"मूळा कुम्हार की दो छोरी न्यारे-न्यारे गामां में ब्याह राक्खी थी । एक बै मूळा दोनूं छोरियां तै मिलण-फेटण चल्या गया । पहल्या वो बड्ड़ी छोरी धोरै गया, उन्हैं कुछ खेती-बाड़ी कर राक्खी थी, वो बोल्ली - बाबू, ईब-कै रामजी नहीं बरस्या, तै मैं तै कतई मर-गी, ईब-कै हमनै खेती घणी कर राखी सै । मूळा दूसरी छोरी धोरै गया, तै वो बोल्ली - बाबू, ईब-कै भांडे घणे पाथ राखे सैं, जै रामजी बरस ग्या, तै मैं मर-गी । मूळा घरां आ-कै आपणी कुम्हारी तैं बोल्या - भागवान, चून (आटे) का कट्टा त्यार कर ले, एक छोरी तै जरूर मरैगी !!
जाट का गुड़ और तेली की बोतलएक बै जाट और तेली नै आहमी-साहमी (आमने-सामने) दुकान खोल ली - जाट नै गुड़ की अर तेली नै तेल की । एक दिन दोफाहरे ताहीं उनकी किस्सै की बिक्री ना हुई, तै दोनूंआं नै यो फैसला करया अक बारी-बारी एक दूसरे की दुकान पै जा-कै एक दूसरे की बोहणी करवा देवैंगे । तै पहल्यां तेली गया जाट की दुकान पै, अर बोल्या - "भाई, एक बोतल गुड़ दिये" । जाट बोल्या - "अरै बावळी-बूच, गुड़ बोतल के हिसाब तैं नहीं, किलो के हिसाब तैं मिल्या करै - जा फिर दुबारा आ ।" तो तेली फिर आया और बोल्या - "भाई, एक किलो गुड़ दिये बोतल में" । जाट फिर बोल्या - "ना भाई, तेरै तै कोनी समझ आई, तू न्यूं कर अक तू बैठ मेरी दुकान पै - अर मैं गुड़ लेण आऊंगा" । तेली जाट की दुकान पै बैठ-ग्या अर जाट आया गाहक बन कै । जाट बोल्या - भाई, एक किलो गुड़ दिये । तेली सुनते ही बोल्या - "बोतल ल्याया सै" ?
जाट और राजपूतएक बै जाट और राजपूत में बहस छिड़ गई अक कौन बड्डा । जाट बोल्या- बता तू क्यूकर बड्डा ? राजपूत - मैं ठाकुर, अर राजपूत । जाट - मैं चौधरी, अर आंडी जाट । राजपूत - मैं छत्री (क्षत्रिय) । जाट - मैं तम्बू ! राजपूत - यो 'तम्बू' के होवै है ? जाट - यो तेरी 'छतरी' का फूफा !! . Dndeswal 14:41, 20 May 2008 (EDT) Back to Index Humorous Jokes in Haryanavi |