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ViewsHumorous Jokes in Haryanavi/पंडित जी, ज्योतिषी आदिFrom Jatland Wiki
दीवाएक जाट के बाळक ना होवैं थे । एक दिन एक भाठ आ-ग्या अर जाटणी नै आपणा रोणा रो दिया । बाहमण बोल्या - बेटी, रोवै मतना, मैं परसों बद्रीनाथ जाऊँ सूँ, ऊड़ै तेरे नाम का दीवा जळा दूंगा - अर भगवान सब भली करैंगे, चिन्ता ना करियो ।
बूझे आळा पंडितगाम कै बाहर भीड़ लाग रही थी, ताऊ आया खेत म्हां तैं, लाम्बा लठ ले रहया अर बोल्या - अरै के हो रहया सै ? एक जणा बोल्या - ताऊ, यो बाहमण आगे की बतावै सै । ताऊ फेर बोल्या - हाटियो भाई मन्नै भी देखण दो के रोळा सै । ताऊ बाहमण तैं बोल्या - हां भाई, तू आगे की बतावै सै ? बाहमण - हां जी । ताऊ नै लठ ऊपर नै ठाया अर बोल्या - "आंच्छ्या तै, बाहमण, तू न्यूं बता यो लठ तेरे सिर में लागैगा अक गोड्यां पै ?" बाहमण नै सोच्या, जै सिर में कहया तै यो तेरे गोड्यां नै तोड़ैगा अर अगर गोड्यां पै कहया तै यो सिर नै फोड़ैगा ! बाहमण हाथ जोड़-कै खड़या हो-ग्या अर बोल्या - "चौधरी साहब, मैं कुछ ना जानता आगे-पाच्छे की, मन्नै माफ कर दे ।"
पंडित की परेशानीएक चौधराईन पड़ौसी गांव में एक पंडित के पास गई - वो पंडित हाथ देखकर "बूझा काढ़ण" का काम करता था ।
जाट-पंडित संवादचौधरी एक पंडित के पास पहुंचा - "बूझा कढ़वावण" । पंडित ने उसका हाथ देखकर एक पोथी निकाली और एक कागज पर कुछ आडी-टेढी लकीर निकाल कर बोला - "तेरै तै शनीचर चढ़ रहया सै" ।
पंडित - पूजा-पाठ करना पड़ैगा, 21 रुपय्ये और एक शाल दान करना पड़ैगा । जाट - पंडित जी, शाल तै घणा महंगा आवैगा, इतने पईसे कोनी । पंडित - चल ठीक सै, 21 रुपय्ये निकाल । जाट - ना पंडित जी, 21 तै कोनी । पंडित - चल, 11 दे दे । जाट - पंडित जी, इतणा ब्यौंत बी कोनी । पंडित - 5 रुपय्ये का ब्यौंत तै होगा ? जाट - पंडित जी, साची बात तै या सै अक मेरा तै सवा रुपय्ये का ब्यौंत सै । पंडित - चल, ठीक सै, सवा रुपय्या निकाल । जाट (जेब में हाथ डालकर) - ओहो, पंडित जी, ईब तै गोझ खाली पड़ी सै - तड़कै दे दूंगा । पंडित - जब तेरै धोरै सवा रुपय्या बी कोनी, तै शनीचर के तेरी पूंछड़ पाड़ैगा ? चढ्या राहण दे उसनै !!
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