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Humorous Jokes in Haryanavi/बनिया, दुकान, बाजार आदि

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कंजूस बनिया

बनिया नाई से हजामत बनवाया करता था । एक बार बनिया की टोपी कहीं खो गई । बनिया ने सोचा कि कुछ दिन दाढ़ी बनवाना छोड़ देता हूं, पैसे बच जायेंगे और उन बचे हुए पैसों से नई टोपी खरीद लूंगा ।


एक हफ्ते बाद बनिया ने देखा कि दाढ़ी तो काफी बढ़ गई है । सोचा कि टोपी के पैसे तो पूरे हो ही गये, आज दाढ़ी बनवा लेता हूं । जब वो नाई की दुकान की तरफ जा रहा था तो रास्ते में उसे एक लंबी दाढ़ी वाला सरदार मिला । उसको देखकर बनिया बोला – “सरदार जी, न्यूं लागै सै, तेरा तै पूरा बिस्तर खो गया” !!



एक बनिया था कसूता मूंजी (कंजूस) ।

एक रात अपने छोरां नै बोल्या - आज जो रोटी नहीं खावैगा, उसनै पांच रुपय्ये मिल्लैंगे ।

उसके छोरे राजी हो-गे अर पांच-पांच रुपय्ये ले कै बिना रोटी खाये सो गये ।

तड़कैहें (सुबह) ऊठतीं-हें बनिया नै कही - "ईब रोटी उसनै मिल्लैंगी जो पांच रुपय्ये देगा" !!

मिठाई की दुकान

एक सेठ जी मिठाई की दुकान कर रहया था । एक ताऊ आया अर सेठ की आंखों के आगे हाथ घुमावण लाग्या ।


सेठ बोल्या - चौधरी, के करै सै ?

ताऊ - तन्नैं दीखै सै ?

सेठ - हां, दीखै सै ।

ताऊ - इतणी बढ़िया मिठाई धरी, फेर खाता क्यूं ना ?

सेठ - न्यूं खाऊंगा तै मेरा नास हो ज्यागा ।

ताऊ बोल्या - हट परे नै, मेरा नास होण दे, मैं खा ल्यूं सूं


पहले आळा कान

एक बै रब्बू नै 500 रुपय्ये की जरूरत पड़-गी - सोची अक लाला जी पै ले ल्यूं ।

रब्बू नै फोन खटकाया । लाला जी के फोन उठाते ही रब्बू बोल्या - लाला जी, मैं रब्बू बोलूं सूं ।

लाला जी - हां रब्बू, बोल के बात सै ?

रब्बू - लाला जी, 500 रुपय्ये की जरूरत थी ।

ईब लाला जी नै सोची अक झिकोई रुपय्ये ले ज्यागा । लाला जी सोच कै बोल्या - "रब्बू, मन्नैं इस कान तैं सुणै कोन्या, रिसीवर दूसरे कान पै लाऊं सूं, फेर बोलिये ।"

लाला जी नै रिसीवर दूसरे कान पै लगाया अर बोल्या - हां रब्बू, ईब बोल के कह था ?

ईब रब्बू नै सोची अक सुण्या कोनी, क्यूं ना हजार रुपय्ये मांग ल्यूं ! सोच कै बोल्या - "लाला जी, हजार रुपय्ये की जरूरत सै" ।

लाला जी नै सोची अक झिकोई ईब घणे मांगण लाग्या ।

लाला जी बोल्या - "ऐं, रब्बू भाई, न्यूं कर - पहले आळे कान पै आ ज्या" !!


“तीन फेरे भतेरे”

एक बै बनिया की छोरी के ब्याह में फेरे करवावण खातिर कोई बाहमण ना मिल्या । जब कित्तै तैं बाहमण का जुगाड़ ना हुया तै छोरी आळे एक जिम्मेदार जाट नै ले आये । जाट नै फेरे शुरु करवा दिये ।

तीन फेरे होण पाच्छै जाट बोल्या - भाइयो, रस्म तै पूरी हो-गी, छोरी की विदा करवाओ ।

छोरे आळे बाराती बोले - जी, फेरे तै सात होया करैं ।

जाट बोल्या - भाई, बात इसी सै, जै (अगर) उसनै रुकणा होगा तै तीन फेरयां में भी कित्तै ना जावै । अर जै इसनै भाजणा ए सै, तै चाहे पच्चीस फेरे करवा ल्यो !!


नुकसान

सेठ की दुकान में चोरी हो गई । सेठ ने थाने में रपट लिखवा दी ।

अगले दिन सेठ की दुकान पर तीन सिपाही आ पहुंचे और पूछताछ करने लगे । फिर एक सिपाही ने एक बोरी में से थोड़े भूगड़े (भुने हुए चने) उठाये और खाने लगा । दूसरे ने थोड़ी मूंगफली की मुट्ठी भर ली और तीसरे ने पतासे खाने शुरु कर दिये ।

थोड़ी देर बात थाणेदार आया और सेठ से बोला - सेठ, कितने का नुकसान हुआ ?

सेठ ने जवाब दिया - जी, नुकसान खतम कित हुया सै, ईबै तै होण ए लाग रहया सै !!


ढोल की आवाज

जाट ने बनिया से उधार ले रखा था । काफी समय हो गया, बनिया ने दबाव देना शुरु किया । जाट ने कह दिया कि कल मेरे घर आ कर पूरा पैसा ब्याज समेत ले जाना ।

बनिया खुश हो कर अगले दिन सुबह जा पहुंचा जाट के घर । जाट ने सेठ को घर के अन्दर बुला लिया और बाहर खिड़की से किसी को इशारा किया । पहले ही ढ़ोल बजाने वाले बुला रखे थे, वे इशारा पाते ही ढोल बजाने लगे और जाट ने सेठ की पिटाई शुरू कर दी । पिट-पिटा कर सेठ ने कहा - "चौधरी साहब, मेरे पैसे समझो कि आ गए, पर मेरी पिटाई की बात किसी को मत बताना, नहीं तो मेरी बेइज्जती हो ज्यागी ।" जाट मान गया ।

कुछ दिन बाद जाट के पड़ौसे में किसी की शादी थी और ढोल बज रहे थे । बनिया के लड़के ने पूछा - बापू, किसका ब्याह सै "

बनिया बोल्या - बेटा, किस्सै का ब्याह कोनी, कोई बनिया पिटता होगा !!


52-बुद्धि बाणियां, 53-बुद्धि जाट

ऐसी कहावत है कि बनियां के पास एक नहीं, 52 दिमाग होते हैं ।

पुरानी बात है । एक जाट एक दूसरे गांव के बनिया से कभी-कभी ब्याज पर पैसे लेता था और बनियां की सूदखोरी से परेशान था । एक बार जाट की 14-15 साल की लड़की का बीमारी से देहान्त हो गया और जाट को सेठजी से कुछ और कर्ज लेना पड़ा ।

फिर हुआ यूं कि कुछ दिन बाद बनियां की लड़की, जिसका नाम “परमेसरी” था और जो लगभग उसी उम्र (14-15 साल) की थी, वो भी महामारी के कारण चल बसी । उसकी 13वीं के दिन जाट शोक प्रकट करने के लिए उस सेठ के घर चला गया ।

उस समय बनियां घर में नहीं था । सेठानी भोली-भाली थी - जाट ने उसको एक तरफ ले जा कर कहा : "सेठानी जी, मैं तो अपनी लड़की से कल स्वर्ग में मिलने गया था, वो तो अब मौज में है पर परमेसरी बेचारी परेशान है । वो कह रही थी कि वो अपने जेवर तो धरती पर ही छोड़ आई और उसकी दूसरी सहेलियां सजी-संवरी घूमती हैं - और मेरे को यह कहने लगी, कि मेरी मां से कह देना कि मेरे जेवर भिजवा दे । अगर आप उसके जेवर मुझे दे दें तो मैं अगली बार वहां उसके पास पहुंचा दूंगा" ।

बेचारी सेठानी ने जाट को जेवर दे दिये और जाट उसको राम राम कहकर अपने गांव की तरफ पैदल चलता बना । थोड़ी देर के बाद जब बनिया घर आया तो सेठानी ने सारा किस्सा बता दिया । बनियां समझ गया कि चौधरी तो सेठानी का उल्लू बना गया और अपनी घोड़ी पर सवार होकर उसी तरफ भागा । बनियां को घोड़ी पर आता देखकर जाट खेतों की तरफ भाग गया और एक पेड़ पर चढ़ गया । बनियां ने घोड़ी पेड़ के नीचे रोक ली और जाट से जेवर मांगे । जाट ने जवाब दिया : “सेठ जी, मैने कोई चोरी तो की नहीं है, सेठानी ने अपने आप ये जेवर मुझे दिये हैं । अगर आप इस पेड़ पर चढ़ सकते हो तो ऊपर आकर अपने जेवर ले जाओ” ।

बनियां बेचारा जोर लगाकर पेड़ पर तो चढ़ गया पर बुरी तरह थक गया । मौका देखकर जाट ने नीचे खड़ी हुई उसकी घोड़ी पर छलांग लाई और घोड़ी को लेकर भागने लगा ।

बनियां ने देख लिया कि अब तो घोड़ी भी हाथ से गई - फिर सोचा कि जाट के हाथों अपना अपमान करवाने की बजाय क्यों ना कुछ पुण्य ही कमा लिया जाये !

बनियां ने जोर से आवाज दी : "अड़ चौधड़ी - या घोड़ी परमेसरी ताहीं दे दिये और उस-तैं बता दिये कि तेरी मां नै तै जेवर भेजे सैं और बाप नै घोड़ी ।"

बाद में बनिया दूसरों को बताने लगा : बावन-बुद्धि बाणियां, तिरेपन-बुद्धि जाट !!


"एक तै मरै ए गा"

एक बार एक सेठ के घर में सांप घुस गया । सेठ ने चिल्लाना शुरू किया, लोग इकट्ठे हो गए । एक जाट गया अन्दर लाठी ले कर । उसके घुसते ही सेठ बाहर आया और दरवाजे की कुंडी बंद कर दी ।

लोग बोले - सेठ ये क्या किया ?

सेठ बोल्या - दो दुश्मन भीतर सैं - एक तै मरै ए गा !!


Dndeswal 10:25, 8 June 2008 (EDT)


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