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Humorous Jokes in Haryanavi/ससुराल, बटेऊ आदि

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ऊत बटेऊ की ऊत सास

एक बै एक बटेऊ ससुराल गया । पहले ससुराल में साग-सब्जी, बूरा आदि में जब तक घी की धार डालते रहते थे जब तक कि मेहमान हाथ आगे कर के "बस, बस" कर के रोकता नहीं था । जब सास बूरा में घी डाल रही थी, तो बटेऊ परे-नै मुंह कर-कै बैठ-ग्या - कदे "बस-बस" ना करना पड़ जावै ।


पर सासू भी कम चालाक नहीं थी । वो उसका मुंह वापस घी-बूरा की तरफ घुमा कर उसको दिखाती हुई बोली - "रै देख, बटेऊ जितणा तै दिया सै घाल, अर पहलवानी करणी सै तै आपणै घरां जा करिये" !!


नई बहू

रमलू के पड़ौस में एक नई बहू आई थी । रमलू हुक्के की चिलम भरण का ओडा (बहाना) ले कै रोज उस घर में चला जाया करता । कुछ दिन पाच्छै बहू आपणै पीहर चली गई, रमलू नै इस बात का बेरा ना था ।

रमलू चिलम ले कै पहुंच ग्या अर इंघे-उंघे नै देख कै बुढ़िया तैं बोल्या - ताई, आग सै ?

ताई बोली - बेटा, आग तै कल बारह आळी गाडी में चली गई !!



सासरौली की बहू

एक छोरा आपणी घर आळी नै ले कै सुसराड़ तैं उल्टा आपणे गाम में जावै था । वो साथ में आपणी घर आळी के लत्त्यां (कपड़ों) का ट्रंक भी ले रहया था । कोसळी रेलवे स्टेशन पै वे रेल की बाट में बैठे थे - एक ताई भी बैठी थी धोरै । ताई उसकी घर आळी गैल बतळावण लाग्गी, बोल्ली - बेटी कित जाओ सो ? बहू बोल्ली - ताई, सासरौली जाणा सै ।

ताई फिर बूझण लाग्गी - बेटी तू कित की सै ? बहू बोल्ली - ताई, मैं गुडियाणी की सूँ । ताई फेर बोल्ली - बेटी, सासरौली की बहू सै ?

न्यूं सुणतीं हें छोरा बोल्या - ताई, जै या सारी सासरौली की बहू सै, तै मैं के खामखाँ यो ट्रंक सिर पै धरीं हांडूं सूं ?


"चौधरण मर ली"

एक बै एक जाट भाई अपनी एक नई रिश्तेदारी में चल्या गया, साथ में उसका नाई भी था । नई रिश्तेदारी थी, खातिरदारी में फटाफट गरमा-गरम हलवा हाजिर किया गया । दोनूं सफर में थक रहे थे, भूख भी करड़ी लाग रही थी ।

हलवा आते ही दोनूंआं नै चम्मच भरी और मुंह में गरमा-गरम हलवा धर लिया । ईब इतना गरम हलवा ना निगल्या जा और ना बाहर थूक्या जा ! बुरा हाल हो-ग्या, आंख्यां में आंसू आ-गे ।

नाई ने हिम्मत करी और बोल्या - "चौधरी, के हुया ?"

जाट बोल्या - "भाई, जब घर तैं चाल्या था, तै थारी चौधरण बीमार सी थी, बस उस की याद आ-गी" ।

नाई की आंख्यां में भी पाणी देख कै जाट बोल्या - "ठाकर, तेरै के हुया ?"

नाई बोल्या - चौधरी, मन्नै तै लाग्गै सै चौधरण मर ली !!

"तू के आपणी भूआ कै आ रही सै ?"

एक जाट का छोरा नया नया ब्याहा था, पहली बार ससुराल गया । उसनै घणा बोलण की आदत थी, चुपचाप ना रहया जाया करता । उसकी सासू भी कुछ कम नहीं थी, सारा दिन फिजूल की बात करती रही ।

सांझ नै सास परेशान हो-गी, छोरा तै उसतैं भी घणा बोलै था । वा आपणे उस बटेऊ तैं बोली - "बेटा, सुसराड़ में घणा ना बोल्या करते" ।

छोरे नै फट जवाब दिया - " तू के आपणी भूआ कै आ रही सै ? तेरी भी तै ससुराड़ सै हाड़ै" !!


गादड के कान

एक बै…..एक गादडी के पाछे दो कुत्ते लागरे थे। वा भाज कै एक दूसरे गादड के बिल में बड गई। गादड बडा मसखरा था। वो आपणी बहू तै बोल्या…..पुछिये बहू नै…..क्यूं तंग पा री सै..?

गादडी बोल्ली…….म्हारै छोरी के बटेऊ आरे सैं……अर आजै ले जाण की जिद कररे सैं।

गादड छो में भर कै बोल्या…..मैं देखूं सूं उन्हें जा कै। अकड में गादड ने बिल तै मुंह बाहर काढा तै दोनूं कुत्तां नै उसके दोनूं कान पकड लिये। गादड झटका मार कै उलटा ए बिल में बडग्या। पर कान कुत्तां के मुंह में ही रह गये। भीतर दूसरी गादडी ने गादड की बहू तै कहा, पूछिये री…….मेरे पितसरे के कानां कै के होग्या….?

गीदड बोल्या………बटेऊ तै घणें ऊंत सैं। वैं छोरी के धोखें में मन्नै ए ट्राली में गेर के ले जावैं थे। बडी मुश्किल तै पिंडा छुड़ा कै आया सूं…!!


Dndeswal 12:06, 5 June 2008 (EDT)



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