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ViewsHumorous Jokes in Haryanavi/साधु-सन्त, बाबा, मोड्डे, मलंगFrom Jatland Wikiबाबा का जमाईमग्घड़ मलंग खूब हट्टा-कट्टा था पर था निरा बावली-बूच । एक दिन एक रूंख (पेड़) की डाली पर बैठा था और उसी को कुल्हाड़े से काट रहा था । साथ वाले कच्चे रास्ते पर बाबा छोटूनाथ पैदल जा रहा था - दूसरे गांव की तरफ । बाबा ने पेड़ पर देखा और बोला – अरै बावळे, तू तै पड़ैगा नीचै ।
बेसूहरी लुगाईएक बाबा आटा मांगण चाल्या गया । बाबा नै एक घर में जा-कै रूका मारा । बाबा नै देख्या अक सारा घर खिंढ़्या पड़ा था - कितै बर्तन पड़े, कितै चप्पल-जूते, कितै लत्ते-कपड़े पड़े थे । फेर एक बेसूहरी सी लुगाई बाहर आई अर बोली - बाबा, न्यूं आटा मांगता हांडै सै ईब, घर क्यूं ना बसाया ?
"बादळां कै डील हो गई"एक साल बारिश ना होई । सारा सामण, भादवा, आसौज खाली चल्या गया । एक कै थोड़ी ए जमीन थी, बिना आल्य (गीली मिट्टी) गीहूं बोवण का ब्यौंत ना होया । उसनै के करया - गाम के बाबा के डेरे में जा कै न्योता दे आया - अक जै बारिश हो गई तै सब-नै जिमाऊंगा । महाराज नै के करया - अक 8-10 जो मलंग चेले थे, उनके हाथां में रात नैं मटके दे कै भेज दिये । धोरै-ए जोहड़ था । चेल्यां नै सारी रात मैं वो खेत दे-मटक्यां, दे मटक्यां ठोक दिया ।
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