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Humorous Jokes in Haryanavi/स्कूल, कालिज, क्लास, मास्टर जी इत्यादि

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ताऊ देवीलाल और "कपल-केस"

यह बात उस समय की है जब ताऊ देवीलाल हरयाणा के मुख्यमंत्री थे । एक बै किसै गाम में दौरे पै जा रहे थे । सब अपनी-अपनी समस्या एक-एक करके बतावण लाग रहे थे ।

एक मास्टरणी का नम्बर आया, ताऊ तैं बोल्ली - "जी, मेरा घरवाला भी मास्टर सै, अर हम दोनूआं के स्कूल घणी दूर-दूर सैं, मेरी बदली (transfer) करवाणी सै" ।

ताऊ बोल्या - "देखांगे बेटी आगै-सी, बदलियां पै तै आजकल रोक लाग रही सै" ।

व मास्टरणी किमैं घणी-ए तावळ में थी, बोल्ली - "जी, म्हारा तै कपल केस (couple case) सै" ।

ताऊ बोल्या - "बावळी, मैं चंडीगढ़ में रहूं सूँ, तेरी ताई तै तेजा-खेड़ा* में पड़ी सै - म्हारा के कपल-केस कोनी?"


तेजा-खेड़ा = चौधरी देवीलाल का पैतृक गांव (सिरसा जिले में)


छुट्टी

एक गाम का स्कूल शमशान घाट धोरै था । जब भी गाम में कोई मरता, स्कूल की छुट्टी हो जाती ।

एक दिन बाळक स्कूल जावैं थे, शमशान घाट की भीत धोरै दो बूढ़े घाम में बैठे होक्का पीवण लाग रहे थे । उन्हैं देख कै सत्ते बोल्या - देखिये रै बदलू, म्हारी दो छुट्टी तै हाड़ै (यहीं) बैठी होक्का पीवण लाग रही सैं !!



एक बै एक छोरा स्कूल नहीं आया । आगलै दिन मास्टर नै पूछा - रै, कल स्कूल क्यूं ना आया था?

बाळक बोल्या - मास्टर जी, म्हारी भैंस नै काटड़ा दिया था ।

मास्टर बोल्या - इसमैं के खास बात हो-गी ?

बाळक नै जवाब दिया - जी, खास बात ना सै, तै आप दे कै दिखा दो !!


बाबू की पुरानी पैंट

एक बै स्कूल में मास्टर जी नै एक छोरे तैं बूझा - "कपड़ा किसे कहते हैं ?"

छोरा बोल्या - जी बेरा कोनी ।

मास्टर गुस्से में हो-कै बोल्या - तेरी पैंट किस चीज की बनी है ?

छोरा बोल्या - जी, मेरे बाबू की पुरानी पैंट की !!

मरियल मास्टरनी

एक भूगोल की मास्टरनी घणी पतली, बोद्दी-सी थी, जमा आइसक्रीम के लीकड़े जिसी । क्लास नै पाछले दिन का पाठ दोहरावै थी । बोली - बोलो बच्चो, धरती क्यूं घूमती है ?


एक छोरा बोल्या - मैडम, किमैं खा-पी लिया कर, ना तै न्यूं-ऐं घूमती दीखैगी !!


सूधा बाळक

तै भाइयो, हुया न्यूं अक एक-बै रात के बखत एक स्कूल की छात (छत) पड़-गी । तड़कैहें-तड़कैहें जब बाळक स्कूल में गये तै घणे कसूते राजी हो रहे थे, अर मेरे-मटे कूदते हांडैं - अक भाई यो तै कसूत काम हो-ग्या, ईब कई दिनां ताहीं पढ़ाई ए ना हो । सारे मास्टर अर हैडमास्टर खड़े हो-कै देखण लाग रहे - अर बाळकां के तै चेहरे कत्ती सिरसम के फूल जिसे खिल-रे थे ।

इतने में हैडमास्टर नै बगल में देख्या अक एक छोरा घणा मुरझाया सा, घणा भूंडा दुखी-सा, अर फूट-फूट कै रोवण लाग रहा था । ईब हैडमास्टर जी नै सोची अक यो छोरा तै घणा बढ़िया, पढ़णियां सै, अर बेचारा घणा दुख मान रहया सै स्कूल के नुकसान होवण का ।

हैडमास्टर आगै गया, उस नै डाटण खातिर, अर जा-कै बोल्या - "बेटा, दुखी मतना हो, मैं समझूं सूं तन्नै कितना दुख सै अक यो सारे गाम का नुकसान सै, अर ईब पढ़ाई कई दिनां ताहीं रुक ज्यागी । पर बेटे, मैं नई छत जितणी जलदी हो सकैगी, बणवा दूंगा" ।

छोरा एकदम तैं रोणा छोड कै बोल्या - "अरै ना मास्टरजी, इसा जुलम मतना करियो । मैं तै न्यूं रोऊं था अक मुश्किलां-सी तै छात पड़ी, अर मास्टर एक भी ना मरया" !!


"सारयां का फूफा"

एक बै एक स्कूल में नाटक होया । उस नाटक में एक छोरी नै बूआ का रोल करना पड़-ग्या । फिर यो बूआ का रोल करे पाच्छै सारी क्लास के बाळक उसनै "बूआ-बूआ" कह कै छेड़ण लाग्गे ।

उस छोरी नै दुखी हो कै एक दिन मास्टर ताहीं बता दी अक - जी, ये सारे मन्नै बूआ-बूआ कह कै छेड़ैं सैं ।

मास्टर कै ऊठ्या छो, अर बोल्या - "अरै, खड़े हो ज्याओ जुणसे-जुणसे इसनै बूआ कहैं सैं" ।

सारी क्लास खड़ी हो गई, बस एक छोरा पाच्छै-सी बैठ्या रह-ग्या । मास्टर उस छोरे नैं बोल्या - क्यूं रै, तेरा के चक्कर सै ?

वो छोरा सहज-सी आवाज में बोल्या "जी, ये जुणसे खड़े सैं ना, मैं इन सारयां का फूफा सूँ !!



Dndeswal 11:50, 19 May 2008 (EDT)



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