![]() |
|
|||||||
| Notices |
|
|
ViewsHumorous Jokes in Haryanavi/Miscellaneous - गांवों का माहौल, चौपाल, गपशप, रोजमर्रा के किस्सेFrom Jatland Wiki
घी नै तोड़ दियाभाई, रमलू घणा ऐं बोद्दा, मरियल सा हो-ग्या । उसतैं गाम का एक ताऊ कहण लाग्या - रै रमलू कुछ घी-वी खा लिया कर, तेरा गात कुछ ठीक सा दीखण लाग ज्यागा । न्यूं सुण कै रमलू बोल्या - ताऊ, मैं घी नै ऐं तै तोड़ राख्या सूं ! रमलू की या बात सुण कै ताऊ बोल्या - भाई, न्यूं क्यूकर बणी ? रमलू बोल्या - ताऊ, मैं मंडी में घी के पीपे ढोया करूं !!
"वा घी कोनी खा थी"एक बै जब भरतू का चौथा ब्याह हो रहया था, तै गाम आळे बूझण लागे - "अरै भरतू, न्यूं क्यूकर रै, तेरी बाकी तीन लुगाइयां कै के होया? वे क्यूकर मर-गी ?" भरतू बोल्या - भाई, पहली तै घी खा-कै मर-गी, अर दूसरी भी घी खा-कै मर-गी । लोग बोले - अर तीसरी क्यूकर मरी? भरतू बोल्या - भाई, तीसरी का तै सिर फूट-ग्या था । गाम आळे बोले - उसका सिर क्यूं फूट्या ? भरतू नै जवाब दिया - "अरै यार, वा घी कोनी खा थी" !!
नशे में देही पाटी जा सैएक बान्दर एक बान्दरी से बोल्या मैं हुक्का पी आऊं । बान्दरी बोल्ली जा पिया। वह हुक्का पियण चला गया तो वहां चार पांच आदमी बैठे थे और उन्होने चिलम झाड राखी थी। बन्दर जा कर उस चिलम के ऊपर बैठ गया । चिलम में बिरहड बैठी थी वा उसकै लड गई। बन्दर तो वहां से उछलता हुआ बान्दरी के पास आया……......बान्दरी बोल्ली हुक्का पी आया…….? बांदर बोल्या……हुक्का के पिया……..मेरी ते नशे में देही पाटी जा सै…...? ईब मैं तन्नैं के कहूँएक छौरे का ब्याह हो ग्या…..सुहाग रात नै जब दूल्हन का घूंघट उठाया…....तो चेहरा देख के लट्टू हो गया….…ओर बोल्या……हाये रै मेरी किस्मत……मेरे इतनी खूबसुरत बहू आ गई……जी सा आ गया रै…….और खुश हो के दूल्हन ने न्यूं बोल्या…ईब मैं तन्नैं के कहूँ….? और यूं कहते-कहते………के……..ईब मैं तन्नैं के कहूँ……ईब मैं तन्नैं के कहूँ……....सुबह के चार बज गये……। निरणे कालजे सवेरे-सवेरे छौरे का बापू………नवदम्पती के कमरे के आगे को निकले था….उसने सुणा….बेटा तो सुबह के चार बजे तक एक ही राग अलाप रहा है…..के ईब मैं तन्नैं के कहूँ……..बापू पै भी कहे बिना रहा नी गया….बापू बोल्या…...रै छौरे……तू इसने एक बै माँ कह कै कमरे तै बाहर निकल आ……....बाकी जो भी कहना-सुनणा होगा मै आपै कह-सुण लूंगा……....? ताऊ धीरे की बारिशएक बै ताऊ धीरे चौपाड़ में होक्का पीवण लाग रहया था । ताऊ चतरे उसतैं बोल्या - भाई, आजकल भगवान नै मींह गेरणा कम कर दिया । ताऊ धीरे छूटतीं हें बोल्या - भाई मींह क्यूकर पड़ै ? बूढ़्यां नै तै होक्का पीणा बंद कर दिया, जवानां नै बीड़ी पीणी बंध कर दी, अर लुगाइयां नै चूल्हा जळाना बंद कर दिया । ईब जब धूमा-ऐं ना होगा तै बादळ के तेरे खंडवे के बणैंगे ?
हरा सागएक ताई कै तीन-चार बाळक थे । ताई रोज उन ताहीं हरा साग बणा कै दे देती - कदे सिरसम का, कदे चणे का, कदे बथुए का । बाळक बोले - मां, रोज-रोज हरा साग मत बणाया कर, कदे दूसरा भी बणा लिया कर । ताई बोल्ली - खाओ चाहे मत खाओ, मैं तै रोज हरा साग ए बणाऊंगी । बाळक फेर बोले - इसतैं आच्छ्या तै हामनै गळामा घाल-कै खेत में चरा ल्याया कर !
तरक्कीसतपाल (सत्तू) सोलह साल का हो गया, गांव के स्कूल से दसवीं पास कर ली, पर कभी किसी बड़े शहर में नहीं गया था । पेपर होने के बाद इस बार उसका बड़ा भाई उसे अपने साथ बंबई ले गया । बंबई जाकर सत्तू सोचने लगा कि यहां इतनी तरक्की का राज क्या है । उसने देखा कि वहां छोटे-छोटे कामों के लिए ज्यादा वक्त बरबाद नहीं करना पड़ता और उस बचे हुए समय में काम करने से तरक्की होती है । गांव में तो दीर्घशंका (जंगल-जोहड़/Latrine) के लिए एक कोस दूर जाना पड़ता था और बंबई में या तो घरों में ही गुसलखाने हैं या फिर लोग घरों के आस-पास या रेलवे लाइन के किनारे बैठकर अपना काम निपटा देते हैं - इससे टाइम की बचत होती है और यही तरक्की का राज है । गांव वापस आकर सत्तू गांव के बिल्कुल साथ किसी के घर के पीछे 'रोग काटने' बैठ जाता । जब कई दिन हो गये तो गांव के कुछ बुजुर्ग लोगों ने उसे टोक दिया । सत्तू गुस्से में आकर बोला : "तुम सारे बूढे नाश की जड़ सो - ना तुम खुद तरक्की कर सकते और ना दूसरां नै करण देते" !!!
दूबळधन और इस्सरहेड़ीसमय का हेर-फेर देखो । आज गेहूं की भरपूर उपज है । 1970 के आसपास देश में गेहूं की कमी थी और गेहूं का 'ब्लैक' होता था । उस समय गेहूं की सरकारी खरीद का मूल्य हरयाणा में कुल 74 रुपये क्विंटल होता था जबकि दिल्ली में गेहूं 100 रुपये क्विंटल के आस-पास बिक जाता था । हरयाणा बार्डर से लोग गेहूं दिल्ली लाते थे और पुलिस उन्हें पकड़ लेती थी । लोग कच्चे रास्ते से भी 1-2 बोरी गेहूं ऊंट पर लाद कर पार कर देते थे ।
"न्यूं भी तै हो सकै सै"भरपाई का आपणे खसम रळडू गैल कसूता रौळा हो-ग्या, अर रळडू घर छोड कै चल्या गया । जब रळडू कई दिन तक ना आया, तै भरपाई का छोरा सुन्डू आपणी मां तैं बोल्या - ए मां, मन्नैं तै इसा लागै सै कदे बाबू नै दूसरा ब्याह कर लिया हो अर कितै बाहर रहण लाग-ग्या हो"। न्यूं सुण-कै भरपाई नै सुन्डू कै एक रहपटा मारा अर न्यूं बोल्ली - "कमीण, इतणा भूंडा बोल्या करैं, न्यूं भी तै हो सकै सै अक तेरा बाबू किसै ट्रक कै नीचै आ-ग्या हो !!"
"जी तोड़ रहया सै"एक बै भाई, गाम में एक आदमी मर-ग्या । उसके घर वाले उसनै अंतिम संस्कार तैं पहल्यां न्हुआवण (नहलाने) लाग-गे - उस (मुर्दे) नै कुर्सी पै बैठा कै । घणी हाण (देर) हो-गी न्हुवाते-न्हुवाते - सारे कत्ती दुखी हो-गे । वो (मुर्दा) कदे इस साइड में पड़-ज्या, अर कदे दूसरी साइड में पड़-ज्या ! एक भाई कत्ती दुखी हो-ग्या अर छो में आ कै बोल्या - ऐ मेरे यार, मरैं तै सब सैं, पर तू तै कत्ती-ए जी तोड़ रहया सै !!
"इसी बात के घरां बतावण की होया करैं?"एक बै एक ताऊ नै घेर में नळका (हैंड-पम्प) लगा राख्या था, अर एक पिलूरा पाळ राख्या था । उड़ै बहू/ छोरी पाणी भरण आया करती । एक बहू नई-नई आई थी - अर नई बहुवां नै गेड़े गैल नए सूट बदलण का शौक होवै ए सै ! ताऊ था असली नकल ठोकण आळा । जब भी वा बहू पाणी लेण आती, ताऊ पिलूरे कै ओड्डै (बहाने) बहू पै नकल मारता - "रै पिलूरे, आज तै जमा लाल (सूट) गाड रहया सै ... रै पिलूरे, आज तै सारा ए लीला हो रहया सै ... रै पिलूरे, आज तै तू काळा (सूट) पहर रहया सै ..." कई दिनां में बहू की समझ में आया अक यो बूढ़ा तै तन्नैं कहै सै - अर उसनै आपणे खसम तैं कह दई एक वो बूढा तै न्यूं-न्यूं नकल मारै सै । वो छोरा सुण-कै बूढ़े धोरै आया, बोल्या - "ताऊ, तन्नैं बहूआं कानीं बात मारतीं हाण सरम ना आंदी ? तेरी उमर रह रही सै इन बातां की ?" बूढ़ा बोल्या - "भाई, मैं तै इस पिलूरे नै कहया करता, अर जै बहू फरक मान-गी हो, तै टाळ कर दांगे ।" आगलै दिन वा बहू फेर पाणी लेण आई, बूढ़ा बोल्या - रै पिलूरे, इसी-इसी बात के घरां बतावण की होया करैं ?"
चार "पत"एक बै रामफळ धरमबीर तैं बोल्या - चार इसे शहरां के नाम बता जो "पत" पै खतम होते हों । धरमबीर लाग्या आंगळियां पै गिणन अर बोल्या - सोनीपत, पानीपत, बाघपत अर खरखौदा । रामफळ चक्कर में पड़-ग्या, बोल्या - भाई, बात समझ में कोन्यां आई, खोल कै बता - यो खरखौदा क्यूकर भला ? धरमबीर बोल्या - "रै, उड़ै रामपत ब्याह राख्या सै" !!
ताऊ राम-रामचालीस साल का बदले गाळ में जावै था, एक ऊत सा बाळक बोल्या - ताऊ, राम-राम । बदले नै "ताऊ" कहलवाना कुछ आच्छया-सा ना लाग्या, उसनै कोई जवाब ना दिया अर आगे-नै लिकड़ लिया । आगलै दिन वो छोरा फिर बोल्या - ताऊ राम-राम । बदले तैं ना रहया गया अर उस छोरे तैं बोल्या - छोरे, तू मन्नै "काका" नहीं कह दे ? छोरा बोल्या - "काका" कह दूंगा तै के हो ज्यागा ? बदले बोल्या - जै तू मन्नै "काका" कह देगा तै मैं तेरी मां की बगल में चूल्हे धोरै बैठ कै गर्मा-गर्म रोटी खा लूंगा । छोरा बोल्या "ले तै, फिर तन्नै मैं "मामा" कह दूं सूं - चूल्हे धोरै बैठ कै, तवे पर-तैं आप्पै तार-कै कत्ती तात्ती-तात्ती रोटी खा लिये"!!
Dndeswal 14:22, 20 May 2008 (EDT)
Back to Index Humorous Jokes in Haryanavi |