Jat Boarding House Sikar

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Author of this article is Laxman Burdak लक्ष्मण बुरड़क

Jat Boarding House Sikar (जाट बोर्डिंग हाउस सीकर) was a hostel constructed for boys of Sikar district during Shekhawati farmers movement. It played an important role in educating rural masses of the area and awakening farmers for their rights.

It was started under the guidance of Ishwar Singh Bhamu and Kalu Ram Sunda. Meanwhile, Master Kanhaiya Lal Mahla started Jat Hostel under a shed. In 1945 Sir Chhotu Ram inaugurated this Jat Hostel.

Struggle for education in Sikar

After the firing incidence by Jagirdars at Kudan village in Sikar district in 1935 the Jats had to face subjugation by the Thakurs of Sikar. In order to suppress ‘Jat agitation’ the Jat leaders and their followers were arrested or exiled from Sikar thikana. With the intervention of Sir Chhotu Ram and Jamanalal Bajaj, the Prime Minister of Jaipur state, Raja Gyan Nath directed Rao Raja of Sikar to have an agreement with the Jat leaders of Sikar thikana. In the agreement it was agreed upon not to raise the land tax and to hand over the khatedari rights over the land of farmers after detailed survey and settlement.

Demand of Jat Boarding at Sikar

In addition, Jats demanded land for Jat Boarding near Sikar railway station. Rao Raja Sikar did not accept this demand because he was not in favour of educating people. It was for the good luck of the farmers of Sikar that differences developed between Rao Raja Sikar and Maharaja of Jaipur state in the end of 1937. The differences were of so much magnitude that Rao Raja Sikar Kalyan Singh was punished exile to Delhi. At this juncture the Jats of Sikar supported Maharaja Jaipur. As per court order Sikar thikana came under direct control of Jaipur state. Wife of Kalyan Singh requested Prime Minister of Jaipur state Raja Gyan Nath to get Kalyan Singh freed from exile. Gyan Nath put forward a condition that it is possible to free Kalyan Singh only when the Jat leaders of Sikar thikana give him in writing this request. Rani of Sikar was now forced to invite the Jat leaders of Sikar thikana who put before her the demand for land allotment for constructing Jat Boarding house near Sikar railway station. In order to apprise Rao Raja Sikar at Delhi and get consent from him she sent two representatives of Jat leaders from each tehsil on government expenses.

Jat leaders to negotiate

The Jat leaders selected for this purpose were as follows:

Sikar tehsil

1. Hari Singh Burdak, Palthana

2. Ishwar Singh Bhamu, Bhainrupura

Laxmangarh tehsil

1. Panne Singh Batar, Bataranau

2. Lekh Ram Dotasara, Kaswali

Fatehpur tehsil

1. Mansa Ram Thalor, Narsara

2. Kanhaiya Lal Mahla, Swarupsar

Rao Raja Sikar Kalyan Singh discussed the demands of above leaders at Delhi and agreed to allot the land for Jat Boarding near railway station after which the Jat leaders gave the request in writing to Raja Gyan Nath to free Kalyan Singh from exile.

On 11-12 September 1938 there was a grand sammelan of of Jats organized in Gothra Bhukaran). It was attended by large number of Jat volunteers.

The punishment of exile of Rao Raja Kalyan Sing ended in August 1942, when he came back to Sikar with the powers to rule Sikar thikana. Rao Raja Sikar allotted 12 bigha of land for Jat Boarding near Sikar railway station and inaugurated it on basant panchami of samvat 1999 (February 1943).

Construction of Hostels

After this the construction of Hostels started under the guidance of Ishwar Singh Bhamu and Kalu Ram Sunda. Meanwhile, Master Kanhaiya Lal started hostel under a shed. In 1945 Sir Chhotu Ram inaugurated this Jat hostel. Ranmal Singh, Katrathal retired from teacher and started helping in the running of this. By 1946 there were 15 rooms and two kitchens, with boundary wall around it. The hall was constructed with the help of Burdak Jats of Palthana. One room each was constructed by Rao Raja Sikar, Ch. Gopiram, Ch. Udaram Mawa of Dadia, Ch. Ishwar Singh Bhamu, Ch Gopal Ram Fandan Rasidpura, Ch. Hari Ram Bhukar Gothra Bhukaran. Rest of the rooms were constructed with collective contribution from Jats of various villages.

रावराजा के निर्वासन से वापसी और सीकर बोर्डिंग हाऊस

सीकर के रावराजा के निर्वासन के पश्चात् वहां शांति व्याप्त थी. इस दौरान एक दिलचस्प घटना घटी. झुंझुनू में छात्रावास की भूमि बिसाऊ ठाकुर ने दी थी. किन्तु सीकर में प्रयास करने के उपरांत भी जमीन नहीं मिल रही थी. गोठड़ा किसान समेलन में भी यह प्रकरण उठा था. लेकिन रावराजा के निर्वासन के बाद भूमि कौन दे यह समस्या हो गयी. रावराजा के बाहर रहने से रानी चिंतित थी. किसी ने उन्हें बताया कि यदि किसान पंचायत जयपुर दरबार को कह दे तो रावराजा की वापसी हो सकती है. रानी ने किसान पंचायत के नेताओं को बुलाया. उनके सामने इच्छा प्रकट की कि राजा को वापस बुलाया जाये. हरीसिंह बुरड़क पलथाना और ईश्वर सिंह भामू ने मांग रखी कि यदि सीकर दरबार छात्रावास के लिए भूखंड उपलब्ध करवादे तो पंचायत के नेता रावराजा को वापस लाने का प्रयास करेंगे. उन्होंने रेलवे स्टेशन के निकट भूमि चिन्हित कर रखी थी. सीकर रानी ने वादा किया कि रावराजा के आते ही छात्रावास के लिए जमीन देदी जाएगी. पंचायत के मुखियाओं ने जयपुर महाराजा को लिखकर दिया कि यदि यदि रावराजा को सीकर लाया जाता है तो उनको कोई ऐतराज नहीं है. सितम्बर 1942 में कल्याण सिंह फिर से रावराजा बनकर आ गए. (राजेन्द्र कसवा: पृ.193)

यह अश्चर्यजनक लगता है कि रावराजा के विरुद्ध संघर्ष करने वाले और उत्पीड़न सहने वाले ही उन्हें वापस ले आये. पंचायत के जाट नेताओं ने सोच समझ कर ही यह निर्णय किया था. असल में कल्याण सिंह अनपढ़ जरूर थे किन्तु वे साफ़ दिल व्यक्ति थे. छोटे ठिकानेदार ही उसे निर्दयी बनाए थे. राष्ट्रीय स्तर पर यह लगने लगा था कि देर-सबेर जागीरदारों को जाना ही होगा. अंग्रेज अधिकारियों और जयपुर रियासत ने बंदोबस्त करके कुछ हद तक सीकरवाटी के किसानों को संतुष्ट भी कर दिया था. (राजेन्द्र कसवा: पृ.194)

रावराजा के पुनः आने से सकारात्मक प्रभाव पड़ा. छात्रावास के लिए किसान पंचायत को भूमि आवंटित करने में विलम्ब नहीं हुआ. बसंत पंचमी , फ़रवरी 1943 में, सीकर बोर्डिंग हाऊस का शिलान्यास स्वयं रावराजा ने किया. उस अवसर पर हरीसिंह बुरड़क पलथाना, ईश्वर सिंह भामू भैरूपुरा, कालूराम सुंडा कूदन, कानाराम भूकर, डूंगाराम भामू, हरी राम भूकर गोठड़ा आदि किसान नेता उपस्थित थे. कल्याण सिंह ने 12 बीघा भूमि प्रदान की. यही नहीं रावराजा ने अपने पुत्र हरदयाल सिंह के नाम से एक कमरे की राशि भी दी. (राजेन्द्र कसवा: पृ.195)

जाट बोर्डिंग में आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह

जाट बोर्डिंग में आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह

Ref - Patrika news network Posted: 2016-05-11

प्रत्येक क्षेत्र में जाट समाज की प्रतिभाओं ने देशभर में सीकर का नाम रोशन किया है। बात चाहे वीर सैनिकों की हो या वीरांगनाओं की। प्रतियोगी परीक्षाओं परिणाम में भी सीकर राज्यभर में प्रथम स्थान पर है। यहां के शिक्षाविद् अब जाट पूरे समाज में शिक्षा की रोशनी जला रहे है।


यह बात जाट बोर्डिंग में आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि व पूर्व सांसद जयंत चौधरी ने कही। पूर्व सांसद चौधरी ने कहा कि वर्तमान स्थिति में सभी वर्ग के किसानों को साथ लेकर चलना होगा। तभी नेतृत्व की कमान हमारे हाथ होगी और राष्ट्र का उत्थान होगा।

चौधरी कुंभाराम आर्य की 102 वीं जयंती पर आयोजित समारोह में अतिथि के तौर पर पूर्व विधायक रड़मलसिंह, प्रतिपक्ष नेता रामेश्वर डूडी, डा हरिसिंह, चौधरी कुंभाराम की पुत्रवधु सुचित्रा आर्य, अखिल भारतीय जाट महासभा के राष्ट्रीय महासचिव चौधरी युद्धवीर सिंह, विधायक झाबरसिंह खर्रा, गोविन्द सिंह डोटासरा, नंदकिशोर महरिया, रिटायर्ड डीजी के राम, आईएएस मुकेश, डा काकरान, पूर्व विधायक झाबरमल सुंडा, दिलसुखराम चौधरी, पूर्व जिला प्रमुख रीटा सिंह, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष हरिराम रणवां, एसडीएम अशोक फगेडिय़ा, किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट आदि ने शिरकत की।

प्रतिभाओं का हुआ सम्मान: समारोह में जाट रत्न से चौधरी चैनसिंह आर्य को सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त समाज की 245 प्रतिभाओं को भी सम्मानित किया गया। इसमें शहीद वीरांगनाओ, वीर सैनिको, मेडिकल व इंजिनियरिंग में प्रतिभाशाली विद्यार्थियों व आईएएस, आरएएस, आईपीएस व आरजेएस व विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिभाओं को सम्मानित किया। प्रतिभाओं को चौधरी कुंभाराम रत्न, चौधरी छोटूराम रत्न, चौधरी चरणसिंह रत्न, महाराजा सूरजमल रत्न से नवाजा गया।


बढ़ाया हौसला: राज्य में सीकर की पहचान बनाने के लिए समाज ने शिक्षाविदें का सम्मान किया। इनमें शिक्षाविद् हरिराम रणवां, जोगेन्द्र सिंह सुंडा, श्रवण चौधरी, प्रदीप बुडानिया, महावीर हुड्डा, डा आरएल पूनियां, रतन सिंह पिलानियां, रामनिवास ढाका, शंकर बगडिय़ा, संजय कुल्हरी, शिवराम, प्रकाश भाकर को स्वामी केशवानंद रत्न देकर सम्मानित किया गया। खेल प्रतिभाओं को चौधरी दारासिंह रत्न देकर सम्मानित किया गया।


यह रहे मौजूद: समारोह में आयोजन समिति के सचिव डा रामचंद्र सुंडा, राजेश खाखल, सरोज लॉयल, औंकारमल मूंड, तेजा सेना अध्यक्ष सांवरमल मुवाल, नरेन्द्र बाटड़, कुलदीप रणवां, हरिसिंह बाजिया, इंजीनियर भंवर सिंह, महेन्द्र डोरवाल सहित काफी में महिलाओं व अन्य लोगों ने भाग लिया।

References


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