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Thread: Collection:: Khap's Positive Social Verdicts

  1. #1
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    Collection:: Khap's Positive Social Verdicts

    Rarely it happens that positive and socially uplifting decisions taken in a jat khap panchyats are highlighted. Off late there has been a hulla-bullo over 'few' decisions which were blown out of proportion by Jat/Non-Jat and others.

    This thread will serve the purpose of cases, verdicts taken in a khap panchyat assinged and resolved matters. By now there is no such collection available here. Its a shame that we can't even tell someone that khap has contributed in resolving cases of uttermost importance. Reason is simple that we don't ve any such record.

    Members are requested to contribute so that we atleast have a fine collecton of cases resolved.

    I will be starting with such a case reported in local print media where Lakhlan khap was instrumental in resolving a matter of family bloodshed of years.


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    बहल : पड़ोसी राजस्थान की सीमा पर पिछले एक दशक से रजिश में गूंजती बंदूक की गोलियों की गूंज अब हमेशा- हमेशा के लिए खामोश हो गई है और कल तक जो पक्ष एक-दूजे के खून के प्यासे थे वो सामाजिक परम्पराओं में बंध कर गले मिल गये है। इस रजिश में एक पक्ष ने जान का जोखिम भी उठा रखा है वहीं अनेक बार दोनों ओर से गोलियों से हमले भी हुए तथा हरियाणा व राजस्थान के पुलिस थानों में हत्या के प्रयासों के मामले भी दर्ज हुए है। इस रजिश में सुधीवास गाव के सगे चार भाइयों को आजीवन के कारावास की सजा भी जिला सत्र न्यायालय ने सुना रखी है फिर भी आज दोनों पक्षों ने एक स्वर अपना विरोध समाप्त कर सामाजिक परम्पराओं को मजबूती प्रदान करने के लिए मिसाल कायम की है। बहल खंड के गाव सुधीवास व राजस्थान के चुरू जिले की राजगढ़ तहसील के गाव खैरू बड़ी के दो परिवारों के बीच एक दशक से खूनी संघर्ष चला आ रहा था। इस संघर्ष में 14 नवम्बर 2003 की रात को खैरू बड़ी वासी सुमेर की मौत का इलजाम सुधीवास के सतवीर फौजी, मानसिंह, जागेराम तथा राजेश बंधुओं के नाम मृतक के भाई सतवीर व भतीजे सुनील ने बहल थाना में दर्ज मामले में हत्या करने का लगाया था। हत्या के आरोप में चारों भाइयों को कारावास भेज दिया गया। अभियोग चला व हत्या का आरोप साबित होने पर जिला सत्र न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुना दी। इस बीच हाई कोर्ट चंडीगढ़ ने चारों भाइयों की जमानत मंजूर करते हुए मामले को सुनवाई के लिए विचाराधीन रख लिया। जमानत मिलने पर ये लोग बाहर आ गये और दोनों पक्षों के बीच खूनी संघर्ष प्रारम्भ हो गया। खैरू वासी भाई-भतिजों के खिलाफ बहल थाने में तीन मामले हत्या के प्रयासों के दर्ज हुए। वहीं खैरूवासी सतवीर,रणसिंह,सुनील,संदीप आदी ने राजगढ़ थाने में उपरोक्त चारों भाइयों सहित अन्यों पर भी हत्या के प्रयास का मामला दर्ज करा दिया गया था। हाल ही में 18 नवम्बर की रात को होटल बालाजी पर बैठे मान सिंह की हत्या का विफल प्रयास हुआ, लिहाजा मानसिंह के बयान पर बहल पुलिस ने खैरूवासि बंधुओं पर हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर लिया। इस बीच खैरू वासियों ने इस रजिश को खत्म करने के प्रयास आरम्भ कर दिये और दोनों पक्षों के नाते-रिस्तेदारों ने क्षेत्र की पंचायत प्रतिनिधियों के माध्यम से फैसले के लिए दानों पक्षों के घर बैठ निपटाने की भूमिका तैयार की। इस भूमिका में राजस्थान हाई कोर्ट के सेवा निवृत जज हरीसिंह पूनिया,राजेन्द्र कालरी,आजाद सिंह खैरपुरा,पूर्व सरपंच सतपाल सिंह सुधीवास,सरपंच जिले सिंह,शशी बाक्सर,सोहन लाल मतानी,लाखलान खाप के प्रधान बलवीर सिंह मिट्ठी,कपिल शर्मा व भादर सैनी बहल के अथक प्रयासों ने इस रंजिश के अंकुरण को खत्म कर दिया। पहली पंचायत मृतक सुमेर फौजी के आगन में हुयी जिसमें सजायाफ्ता सभी भाइयों व गाव की पंचायत व खाप पंचायतों के प्रतिनिधियों ने इस रजिश से पहले व बाद तथा भविष्य पर सवाल खड़े किये और इस संघर्ष में मारे गये सुमेर फौजी के बेटे व विधवा व सभी भाई शामिल थे ने पंचायत के प्रस्तावों को स्वीकार कर लिया। तत्पश्चात दूसरी पंचायत सुधीवास गाव में मानसिंह के घर हुयी व पंचायत के प्रस्ताव पर सहर्ष स्वीकृति दे दी। दोनो पक्षों ने एक-दूजे के गले मिल रजिश को मात व गोलियों की गूंज को सदा सदा के लिए खामोश कर दिया। इस पंचायत में गणपत राम, शेरसिंह नम्बरदार, पूर्व चेयरमैन रतन सिंह गोकलपुरा, रामनिवास कोच, कै.सोहनलाल, पूर्व सरपंच रामस्वरूप ढ़ाणी खुड़ाणी व महाबीर बिराण, दरियासिंह खैरू, दाताराम पूनिया, जगराम, जयवीर फौजी, सुमेर, पप्पू, श्यामलाल शर्मा, पूर्णमल शर्मा, भगत होशियार सिंह वर्मा, नम्बरदार चंदगीराम धारवाणवास, जयनारायण पूनिया आदि भी शामिल थे। शामिल सभी पंच परमेश्वरों ने दोनो पक्षों को बधाई दी वहीं दोनों पक्षों ने मौजूद लोगों का आभार जताया।

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  3. #2
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    Following decsions were taken in March. Panchyat was held in Sisana.
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    Jat khaps have come out with a marriage advisory two gold rings as gifts,only a day of celebrations,single and simple meals,minimum barat is,no display of guns or shooting in the air,and no DJs.These suggestions were made at the centenary celebration of Jat Mahapanchayat in Sonipat on Monday to save the community,which has been spending heavily in marriages.In some cases,families have gone bankrupt.


    The heads from different khaps supported these guidelines,although they admitted that all of these wont be obeyed by the community.But some of the messages will have some impact on the society since people from all ages are attending this programme and they still respect the khap, said Pratap Pehelwan,the chief of Dahiya Khap,who retired as DSP of Haryana Police.


    According to Jat leaders,three major mahapanchayats were held in Sonipat in the past 100 years,including Mondays mass event.The 1960 mahapanchayat had passed the resolution to make marriages low-key affairs.It had advocated only oneday celebration against the earlier practice of 3-4 days of celebrations.This has been followed, said Col Devinder Sherawat of Delhi Gramin Samaj,who was present at the event.


    However,he said the other resolution to have limited b a r a t is did not impact the community.But this is how social changes happen.Those who dont understand khaps and their significance misinterpret it as barbaric,but these bodies have huge social significance.They propagate reform, said Col M S Dahiya,one of the organisers of the daylong mahapanchayat.


    The mahapanchayat attended by representatives from over 164 panchayats adopted resolutions to assist youth in education and employment,eliminate female foeticide and fight for rights of women and children.Female foeticide is still prevalent in the society,and we see how families hesitate in sending girls for higher education, said Dr Sarvesh Boora,an educationist.The panchayats also passed the resolution to press for amendment in Hindu Marriage Act and Special Marriage Act to solve the controversy of same gotra marriage.
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  5. #3
    हिसार. झज्जर . झज्जर 360 खाप कन्या भ्रूण हत्या और आनर किलिंग को रोकने के लिए पहल करने जा रही है। तीन अक्टूबर को जिला गुड़गांव फरूखनगर में खाप के तत्वावधान में हवन एवं कारज के रूप में एक देशौरी का आयोजन किया जा रहा है। इस देशौरी कारज में इनसे संबंधित एक प्रस्ताव लाया जाएगा।

    झज्जर 360 खाप के प्रधान दफेदार जिले सिंह धनखड़, सर्वखाप पंचायत के को-ऑर्डिनेटर ओमप्रकाश धनखड़ और सचिव झज्जर 360 खाप वीरेंद्र सिंह कादियान ने यहां जारी एक विज्ञप्ति में बताया कि इस देशौरी कारज में जो प्रस्ताव लाया जाएगा जिसकी जिम्मेवारी कमांडेंट हवा सिंह सांगवान को हर कानूनी पहलु से जांच परख कर सौंपी गई है।

    इसके अलावा 101 सदस्यीय या 151 सदस्यीय खाप कमेटी बनाई जाएगी जो मुख्यमंत्रियों, एवं केंद्रीय कानून मंत्री, समाज कल्याण मंत्री, गृहमंत्री, व अन्य राजनेताओं को ज्ञापन सौंपेगी। इसकी जिम्मेवारी गठवाला खाप के प्रधान दादा बलजीत सिंह व हुड्डा खाप के कार्यकारी अध्यक्ष एडवोकेट रामकरण हुड्डा को सौंपी गई है।

    इसके बाद भी सरकार हिंदू विवाह अधिनियम में बदलाव करके मूल परंपराओं व पहचान को सुरक्षित रखने में आना कानी करती है तो मार्च माह में एक बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा। यह कारज श्रीराम यादव हरिओम यादव, विजय व बबलू द्वारा अपनी नानी भगवानी देवी की स्मृति में किया जा रहा है। इस मौके पर राव इंद्रजीत मूर्ति की स्थापना करेंगे। इस कारज की चिट्ठियां उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान व हरियाणा के सभी खापों को भेज दी गई है।
    " जाट हारा नहीं कभी रण में तीर तोप तलवारों से ,
    जाट तो हारा हैं , गद्दारों से दरबारों से
    |"

    " इस कौम का ईलाही दुखड़ा किसे सुनाऊ ?
    डर हैं के इसके गम में घुल घुल के न मर जाऊँ || "
    ...........................चौ.छोटूराम ओहल्याण

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  7. #4
    हिसार .पाई . जाखौली गांव व ढुल खाप के गांवों के बीच भाईचारे का संबंध अब वैवाहिक रिश्तों के रूप में कायम हो सकेगा। पहले इनके बीच भाईचारे का संबंध कायम होने के कारण आपस में वैवाहिक रिश्तों की मनाही थी। इस मसले पर एक बैठक पाई के पुराना बस अड्डा मैदान पर संपन्न हुई। भाईचारे के संबंध को वैवाहिक रिश्तों के रूप में अपनाने के लिए गांव जखौली से 36 बिरादरी के लोगों की एक महापंचायत सर्वजात सर्वखाप नेता मनीराम कादियान के नेतृत्व में पाई पहुंची।

    महापंचायत में ढुल खाप की ओर से पाई, भाणा, सेरधा, रमाणा-रमाणी, फरियाबाद, हरसौला, शेरू खेड़ी आदि गांवों के 36 बिरादरी के लोगों ने भाग लिया। ढुल खाप का नेतृत्व खाप अध्यक्ष एवं रिटायर्ड आईएएस अधिकारी हरफूल ¨सह ने किया। महापंचायत में गांव जखौली की ओर से भाईचारे के संबंध को वैवाहिक रिश्तों के रूप में अपनाए जाने का प्रस्ताव रखा गया। प्रस्ताव पर काफी तर्क-वितर्क के बाद दोनों ही पक्ष वैवाहिक रिश्तों को अपनाने के मुद्दे पर सहमत हो गए।

    सर्वजात सर्वखाप नेता मनीराम कादियान ने कहा कि एक गोत्र एक गांव में शादी के उभरते मसलों की रोकथाम के लिए यह पग उठाया गया है। नजदीकी ढुल गोत्र के गांव व जाखौली गांव के विभिन्न गोत्रों के बीच वैवाहिक रिश्ते कायम होने की प्रथा का शुभारंभ होने से एक गोत्र एक गांव में शादी के मसलों पर अंकुश लगेगा। ढुल खाप अध्यक्ष हरफूल ¨सह ने कहा कि ढुल खाप के गांवों व जाखौली गांव के बीच आपसी भाईचारे के संबंध पिछले 100 वर्षो से भी अधिक समय से कायम थे। इस सहमति से दोनों पक्षों के इतिहास में एक नए अध्याय का सूत्रपात हो गया है।
    " जाट हारा नहीं कभी रण में तीर तोप तलवारों से ,
    जाट तो हारा हैं , गद्दारों से दरबारों से
    |"

    " इस कौम का ईलाही दुखड़ा किसे सुनाऊ ?
    डर हैं के इसके गम में घुल घुल के न मर जाऊँ || "
    ...........................चौ.छोटूराम ओहल्याण

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    kuldeeppunia25 (November 22nd, 2011), ravinderjeet (October 4th, 2011), satyenderdeswal (April 19th, 2012), vicky84 (October 5th, 2011)

  9. #5
    सही कर्या भाई | इह ढाल के निर्णय समय के अनुसार लेंदे रहवेंगे ते घणखरी असामजिक कुरीतियाँ पे भी अंकुश लाग जा गा अर समाज परगतिशील बन्या रहवेगा |
    :rockwhen you found a key to success,some ideot change the lock,*******BREAK THE DOOR.
    हक़ मांगने से नहीं मिलता , छिना जाता हे |
    अहिंसा कमजोरों का हथियार हे |
    पगड़ी संभाल जट्टा |
    मौत नु आंगालियाँ पे नचांदे , ते आपां जाट कुहांदे |

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  11. #6

    Sarvajatiya Sarva Khap Mahapanchayat paves way for peace among warring families

    Friends, You will be glad to learn that the Sarvajatiya Sarva Khap Mahapanchayat presided over by Swami Karam Pal, held its meeting at Bhainswal Kalan village of Sonepat district of Haryana and paved way for two warring families to resolve their issues amicably. The full report of the meeting with photograph of the said Mahapanchayat could be read in "THE TRIBUNE, CHANDIGARH, MONDAY, NOVEMBER 21, 2011" page 4. Hope that this type of activities of the elders of the society must give further stimulation to other s too to follow their footsteps to resolve issues of bitterness amicably.
    regards
    Dr. Raj Pal Singh

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    JSRana (November 22nd, 2011), lrburdak (November 21st, 2011), vijaykajla1 (November 21st, 2011)

  13. #7
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    As Dr Raj pal told about Bhainswaal's Sacrface type revenge. DSP literally appealed to Khaps to come forward. and guess what they did. Here are three links.
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    गांव भैंसवाल कलां में पांच हत्याओं के बाद से तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। अब तो पुलिस भी इस मामले के शांतिपूर्ण निबटारे के लिए आपसी बातचीत को महत्वपूर्ण मानने लगी है। गोहाना के डीएसपी ने भी मामले में खाप पंचायतों को आगे आने की अपील की। इससे बेगुनाह लोगों का खून बहने से रोका जा सके।
    विदित रहे कि 8 मई की शाम को गाव भैंसवाल कला के मिठान पाने के सरपंच मुकेश मलिक को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया गया था। उस समय वह अपने भाई कुलदीप व परिवार से ही रविंद्र के साथ मोटरसाइकिल पर गाव कटवाल से लाठ की ओर जा रहा था। इसी दिन सरपंच के भाई मंजीत व परिवार से ही सुखबीर पर भी गाव भैंसवाल कला में आवली रोड पर गोलिया बरसाई थी। इसी बीच छोटी दीपावली 25 अक्टूबर की रात को गाव के रामकिशन (60) को गोली मारी गई थी। इसमें उसकी जान बच गई थी। 28 अक्टूबर को रामकिशन की पुत्रवधू सुशीला उर्फ बबली पत्**नी अमरजीत व पास ही के घर में जयकरण व उसके बेटे संदीप (28) की हत्या कर दी गई थी। वहीं 12 नवंबर को पूर्व सरपंच मुकेश के चाचा बलराज की हत्या कर दी गई। इस दौरान फरीदाबाद का विवेक भी घायल हुआ था। सभी बलराज को इस मामले में बेगुनाह मान रहे हैं। अब लोग भी मानने लगे कि मामले मे बेगुनाह लोगों का खून बहने लगा है। इसे रोका जाना चाहिए। लगातार बह रहे खून से गांव में दहशत का माहौल है। इस संबंध में डीएसपी तुलाराम ने बताया कि पुलिस गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के कृतसकंल्प है। उन्होंने बताया कि गांव में शांति के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। साथ उन्होंने खाप पंचायतों से भी अपील की कि वे इस मामले में आगे आए। उन्होंने कहा कि खाप पंचायत इस मामले में बड़ी महत्ता निभा सकती है। उनका कहना था कि पुलिस गांव में सुरक्षा दे सकती है, और गांव में नाका लगा सकती है। उसके बावजूद दोनों गुटों का मनमुटाव दूर करने से ही इस रंजिश को खत्म किया जा सकता है। इसलिए खापों विशेषकर मलिक खाप को इस मामले में आगे आकर प्रयास करने चाहिए।


    http://in.jagran.yahoo.com/news/loca...8488646_1.html



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    गोहाना, संवाद सहयोगी : गांव भैंसवाल कलां मिठान में दो गुटों के बीच चुनावी रंजिश से शुरू हुए हत्याओं के दौर को रोकने व शांति बहाली के लिए महापंचायत का आयोजन किया गया। इसमें फैसला लिया गया कि विभिन्न हत्याकाडों में नामजद सभी व्यक्ति 28 नवंबर तक पुलिस या अदालत में पेश होकर आत्मसमर्पण कर दे।
    रविवार को गांव में हुई महापंचायत की अध्यक्षता सर्व खाप पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी कर्मपाल ने की। विदित रहे कि गाव भैंसवाल कला मिठान पाना के सरपंच मुकेश मलिक की बीती आठ मई को हत्या कर दी गई थी। इसके बाद गाव के एक बुजुर्ग पर दीपावली से एक दिन पहले गोलिया बरसाई गई, लेकिन वह बच गया था। इसके कुछ ही दिन बाद एक महिला सहित तीन व्यक्तियों की हत्या कर दी गई।, जिसमें बाप-बेटा भी शामिल थे। गत सप्ताह भी सरपंच मुकेश के परिवार से एक व्यक्ति की हत्या कर दी गई। इस विवाद में अभी तक पाच व्यक्तियों की हत्या हो चुकी है। इसी विवाद को सुलझाने के लिए रविवार को गाव भैंसवाल कला के राजकीय स्कूल में महापंचायत का आयोजन किया गया। पंचायत ने सभी पक्षों के व्यक्तियों को आमंत्रित किया गया। महापंचायत में सर्व खाप पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी कर्मपाल ने कहा कि पाचों हत्याकाडों में जो भी व्यक्ति नामजद है उनको 28 नवंबर तक पुलिस या अदालत में स्वयं को पेश करना होगा। पंचायत ने सभी पक्षों के गारंटर भी लिए। नामजद व्यक्तियो को पेश करने के बाद पंचायत के अध्यक्ष स्वामी कर्मपाल को अवगत करवाना होगा। इसके बाद दोबारा पंचायत बुलाई जाएगी। जो व्यक्ति भविष्य में गाव में अशाति फैलाएगा उसका महापंचायत से कोई लेना-देना नहीं होगा। वहीं, इससे पहले सुबह के समय गाव के स्कूल में शाति यज्ञ का आयोजन किया गया और ग्रामीणों ने गाव में शाति बनाए रखने का संकल्प लिया।
    इस मौके पर एडवोकेट रामफल मोर, बुटाना बारहा प्रधान बलबीर कुंडू, आहुलाना बारहा प्रधान मलिक राज मलिक, मुंडलाना बारहा प्रधान मेहर सिंह, कथूरा बारहा प्रधान भलेराम, डा.वीर सिंह मलिक, बलबीर लाठ, अशोक मदीना, धर्मवीर मलिक, सतबीर आर्य, अशोक खत्री, ईश्वर, रामकिशन मलिक आदि मौजूद थे।

    http://in.jagran.yahoo.com/news/loca...8518364_1.html

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    Sonepat, November 20
    The day-long proceedings of a Sarvjatiya Sarv Khap Mahapanchayat at Bhainwal Kalan village today paved the way for a compromise among four families of the village whose enmity had claimed five lives in the past six months.

    Village sarpanch Mukesh Malik was shot dead about five months back. To avenge his killing, Jai Karan, Sandeep and Shushila were shot dead in October allegedly by the Mukesh group. In retaliation, Mukesh’s uncle, Balraj Malik, was shot dead on November 12 allegedly by two armed youths of rival families.

    The mahapanchayat, presided over by Swamy Karam Pal, unanimously resolved that all those who were allegedly involved in the murders and were at large would surrender before the police by November 28. The next mahapanchayat would be convened after receiving a report on their surrender from the village peace committee.

    The mahapanchayat succeeded in bringing elders of the warring families — Mukesh’s father Raghubir Singh Malik, Shushil’s father-in-law Ram Kumar Malik, Jai Karan’s father Deep Chand Malik and Zile Singh whose son was an alleged accused in the murders — to the meeting and convinced them to leave the decision to representatives of the mahapanchayat.

    Besides prominent citizens of the village, Umed Singh of Gathwala, Balbir Singh of Butana, Bhale Ram Narwal of Kathura, Mehar Singh Lathwal of Murlana, Malik Raj Malik of Ahulana and Ram Phal Mor, general secretary of the Mor Khap, former MLA Kitab Singh Malik, zila parishad member Kuldeep Gangana participated in the proceedings.


    http://www.tribuneindia.com/2011/20111121/haryana.htm#5

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    Last edited by Samarkadian; November 22nd, 2011 at 12:30 PM.
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  15. #8
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    As Dr Raj pal told about Bhainswaal's Sacrface type revenge. DSP literally appealed to Khaps to come forward. and guess what they did. Here are three links.
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    गांव भैंसवाल कलां में पांच हत्याओं के बाद से तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। अब तो पुलिस भी इस मामले के शांतिपूर्ण निबटारे के लिए आपसी बातचीत को महत्वपूर्ण मानने लगी है। गोहाना के डीएसपी ने भी मामले में खाप पंचायतों को आगे आने की अपील की। इससे बेगुनाह लोगों का खून बहने से रोका जा सके।
    विदित रहे कि 8 मई की शाम को गाव भैंसवाल कला के मिठान पाने के सरपंच मुकेश मलिक को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया गया था। उस समय वह अपने भाई कुलदीप व परिवार से ही रविंद्र के साथ मोटरसाइकिल पर गाव कटवाल से लाठ की ओर जा रहा था। इसी दिन सरपंच के भाई मंजीत व परिवार से ही सुखबीर पर भी गाव भैंसवाल कला में आवली रोड पर गोलिया बरसाई थी। इसी बीच छोटी दीपावली 25 अक्टूबर की रात को गाव के रामकिशन (60) को गोली मारी गई थी। इसमें उसकी जान बच गई थी। 28 अक्टूबर को रामकिशन की पुत्रवधू सुशीला उर्फ बबली पत्**नी अमरजीत व पास ही के घर में जयकरण व उसके बेटे संदीप (28) की हत्या कर दी गई थी। वहीं 12 नवंबर को पूर्व सरपंच मुकेश के चाचा बलराज की हत्या कर दी गई। इस दौरान फरीदाबाद का विवेक भी घायल हुआ था। सभी बलराज को इस मामले में बेगुनाह मान रहे हैं। अब लोग भी मानने लगे कि मामले मे बेगुनाह लोगों का खून बहने लगा है। इसे रोका जाना चाहिए। लगातार बह रहे खून से गांव में दहशत का माहौल है। इस संबंध में डीएसपी तुलाराम ने बताया कि पुलिस गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के कृतसकंल्प है। उन्होंने बताया कि गांव में शांति के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। साथ उन्होंने खाप पंचायतों से भी अपील की कि वे इस मामले में आगे आए। उन्होंने कहा कि खाप पंचायत इस मामले में बड़ी महत्ता निभा सकती है। उनका कहना था कि पुलिस गांव में सुरक्षा दे सकती है, और गांव में नाका लगा सकती है। उसके बावजूद दोनों गुटों का मनमुटाव दूर करने से ही इस रंजिश को खत्म किया जा सकता है। इसलिए खापों विशेषकर मलिक खाप को इस मामले में आगे आकर प्रयास करने चाहिए।


    http://in.jagran.yahoo.com/news/loca...8488646_1.html

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    There is no doubt that Khap Panchayats can do a lot to neutralize the situation. But it seems that they are busy in something else which is MUCH more important.
    It's better to be alone than in a bad company.

  16. #9

    Khaps bend 'bhaichara' ban for this wrestler's love story

    Dear Jats,

    It is a matter of pleasure to share with you all a news write up in the Times of India Chandigarh dated 23rd November 2011. The news on the topic under discussion is self explanatory and detailed. Extract of the news is as follows.

    "A panchayat of Rathi and Dalal khaps in Baproda village of Jhajjar has lifted restrictions on matrimonial ties among about six villages where it was banned due to 'bhaichara' (brotherhood) norm. The panchayat of Rathi Nogama khap (nine villages) took this decision in a meeting held in Bhaproda village on Sunday......"

    Hope that more such positive changes in the society will follow.



    Regards,

    Sincerely yours, Dr. Raj Pal Singh

  17. #10
    Quote Originally Posted by DrRajpalSingh View Post
    Dear Jats,

    It is a matter of pleasure to share with you all a news write up in the Times of India Chandigarh dated 23rd November 2011. The news on the topic under discussion is self explanatory and detailed. Extract of the news is as follows.

    "A panchayat of Rathi and Dalal khaps in Baproda village of Jhajjar has lifted restrictions on matrimonial ties among about six villages where it was banned due to 'bhaichara' (brotherhood) norm. The panchayat of Rathi Nogama khap (nine villages) took this decision in a meeting held in Bhaproda village on Sunday......"

    Hope that more such positive changes in the society will follow.



    Regards,

    Sincerely yours, Dr. Raj Pal Singh
    Good move. This was village level bhaichara norm due to proximity of villages. There is no universal bhairchara norm for matrimony between Dalals and Rathis. The universal norm is Dalal-Mann-Sehwag-Deshwal.

  18. The Following User Says Thank You to kapdal For This Useful Post:

    vijay (November 24th, 2011)

  19. #11
    Hello Friends,

    In continuation with the previous day's thread,the full text of the story line, “Khaps bend ‘bhaichara’ ban for this wrestler’s love story” as reported by Deepender Deswal in The Times of India, Chandigarh 23.11.2011 is reproduced hereinunder with due acknowledgements to the reporter and the news paper for the readers to ponder over the issue.

    “JHAJJAR: Khaps may be the sworn nemesis of love birds but this love story has made the khap panchayat bend its age-old rules to pave way for their marriage. A panchayat of Rathi and Dalal khaps in Baproda village of Jhajjar has lifted restrictions on matrimonial ties among about six villages where it was banned due to 'bhaichara' (brotherhood) norm. The panchayat of Rathi Nogama khap (nine villages) took this decision in a meeting held in Bhaproda village on Sunday. The panchayat was also attended by leaders of Dalal and Ahlawat khaps who too gave their consent to the move and promised to get it approved from their khaps in the next couple of days. The force behind prodding the conservative panchayats to take this step is a love story. Manoj Rathi, a national level wrestler who is a resident of Bhapora, had been courting Seema Dalal, a Matan resident who is a student of BA second year in Rohtak, for the last two years. They disclosed their affair to their families about a year ago, who also approved the relationship. But a social hitch stood between them as a 'bhaichara' relationship exists between their respective villages located at a distance of about five kilometres with one village - Kharhar - falling in between.”
    “However, Ramkumar Rathi, Manoj's father, had taken up the matter before Rathi khap panchayat about a year ago urging the panchayat to lift the restrictions on the plea that there is no perpetual 'bhaichara' between Rathi and Dalal gotras and the two villages also did not share boundaries. Rathi nogama pradhan Tasveer Singh Rathi told TOI that since it won't be fair to allow this marriage as an exception, they decided to hold a panchayat to review the 'bhaichara' norms. Explaining the decision, Ramkumar said that several villages in the region which has Rathi, Dalal, Ahlawat and some other gotras, had declared bhaichara among them to forge a strong bond to counter external aggressors during the Mughal period. "Since no such problem exists today, we decided to lift the restrictions on matrimonial ties among these villages, which are banned in bhaichara villages. Now marriages could be held between girls and boys from villages, which do not have the same gotra and don't share borders," he said. Talking to TOI, Manoj said he was feeling relieved after the decision. "It wouldn't have been possible to tie the knot by violating the prevailing norms as we have to live in the same society. It's a progressive decision which would open marriages in about a dozen villages of this region," he said. Thanking his family for their support, Manoj, an ASI in the CRPF, who had won silver medal in the recent All-India police games, however, refused to discuss his love affair.”

    regards,

    Dr Raj Pal Singh

  20. The Following 3 Users Say Thank You to DrRajpalSingh For This Useful Post:

    JSRana (November 24th, 2011), pradeepiisc (January 10th, 2012), sunillathwal (January 1st, 2012)

  21. #12
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    Quote Originally Posted by DrRajpalSingh View Post
    Dear Jats,

    It is a matter of pleasure to share with you all a news write up in the Times of India Chandigarh dated 23rd November 2011. The news on the topic under discussion is self explanatory and detailed. Extract of the news is as follows.

    "A panchayat of Rathi and Dalal khaps in Baproda village of Jhajjar has lifted restrictions on matrimonial ties among about six villages where it was banned due to 'bhaichara' (brotherhood) norm. The panchayat of Rathi Nogama khap (nine villages) took this decision in a meeting held in Bhaproda village on Sunday......"

    Hope that more such positive changes in the society will follow.



    Regards,
    Sincerely yours, Dr. Raj Pal Singh


    A good news.
    I hope that the message is provocative if people who adjust the mass can adjust some adjustments.
    It's better to be alone than in a bad company.

  22. The Following User Says Thank You to vijay For This Useful Post:

    DrRajpalSingh (January 10th, 2012)

  23. #13

    84 Khap Panchayat Re- establishes Bhaichara between two Warring groups of Kansaala

    On Friday 30th December 2011, on the initiative of Mr. Ram Bir, Sarpanch of Gram Panchayat, Kansaala, a 84 Khap Panchayat consisting of representatives from 360 villages led by President Partap Singh is reported to have succeeded in ending bloody feud among the people belonging to two groups led by Sher Singh and Sanjeev.

    The quarrel had started during the process for the election for Gram Panchayat in the year 2000 was in progress. Exchange of hot words was followed by blows which led to death of a person.

    This created grouping in the village and since 2000, six persons have been killed, two persons are in Jail and three persons are absconding police.

    The warring groups have agreed to implement the Khap Panchayat verdict to settle the matter amicably and maintain BHAICHARA in the village. They have also agreed to settle the cases regarding jailed persons and absconders also peacefully.

    For full report see Amar Ujala (Hindi) Chandigarh 31.12.2011

  24. The Following 8 Users Say Thank You to DrRajpalSingh For This Useful Post:

    deshi-jat (January 1st, 2012), JSRana (January 2nd, 2012), lrburdak (January 1st, 2012), pradeepiisc (January 10th, 2012), ravinderjeet (January 10th, 2012), sunillathwal (January 1st, 2012), thukrela (January 1st, 2012), vishalsunsunwal (January 2nd, 2012)

  25. #14

    Mahapanchayat of 36 villages Tries to Resolve Conflict

    It is reported (in the Tribune, Chandigarh, Monday, January 2, 2012, page 4) that around 750 persons from 36 villages in Meham and Kalanaur blocks of Rohtak district comprising Meham Chaubisi Khap and Panwar Khap converged on January 1, 2012 at Basana village.

    The Mahapanchayat was held in order to facilitate an out of court agreement between Mr. Balbir Singh alias Bali Pehalwan, a former INLD MLA from Meham and his opponents regarding a case in which Bali Pehalwan and 21 others have been booked on a complaint lodged against then by Mr. Sita Ram Rathi, sarpaanch of Basana village, after an armed clash in which a youth, Vishnu, was killed in firing at Anaj Mandi in Kalanaur last year. Mr. Bali Pehlwan has been in judicial custody for the past about seven months in this case. But nine persons accused in the case are still to be apprehended.

    It is reported that Mr. Rathi told the Mahapanchayat that : (They) "must ensure that the remaining nine accused also surrender first to the police before we could think about such an option."
    Mr. Bijender Malik, Sarpanch of Mokhara village, urged the Panchayat to work out a formula to reach a compromise so that cordial relations between residents of neighbouring Basana and Mokhara villages were not disturbed.

  26. #15
    To avoid a flood-like situation in the villages and to prevent desertification of land, Jakhar Khap Panchayat has imposed ban on cultivation of paddy in Jhajjar region and farmers who dare to defy the verdict face social boycott and a fine of Rs.5,100/-.

    For further details, kindly contact page 3 of The Tribune dated January 10, 2012

    or

    www.tribuneindia.com

  27. The Following User Says Thank You to DrRajpalSingh For This Useful Post:

    ravinderjeet (January 10th, 2012)

  28. #16
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    Thank you Dr Rajpal for letting us know. I am pasting the full report with link here. Keep up the nice work.

    ------------------------------------------------

    http://www.tribuneindia.com/2012/20120110/haryana.htm#2



    Jhajjar, January 9
    Notwithstanding the rising trend of growing paddy in the state, it will not be easy now for the farmers of the Salhavaas region here to grow the paddy crop as the Jakhar khap panchayat, which is active in 36 villages of the region, has clamped a ban on cultivating the paddy crop in the villages.

    If any one dares to violate the verdict of the panchayat, he may be boycotted socially besides having to bear a financial penalty as well.

    The verdict has been pronounced not only to avoid a flood-like situation in the villages but also to prevent desertification of land, say representatives of the panchayat.

    A 36-member monitoring committee (one representative from each village of the panchayat) has been constituted with Kashmir Singh as president by the khap panchayat to ensure the execution of the verdict in the region besides keeping a tab on the farmers who used to cultivate the paddy crop on a priority basis in the past.

    Earlier, a long discussion over the deteriorating condition of the land of the villages, located on both sides of the Jawahar Lal Nehru Canal crossing the Salhavaas region, was held at the khap meeting which was attended by a large number of people of all 36 villages at Patwar Bhawan in Salhavaas village here.

    “The condition of the land in these villages, which is already afflicted with high-level ground water, worsens during the rainy season every year owing to failure of the district authorities in draining out the stagnant water from there in time.

    “Though this situation favours cultivation of the paddy crop, which requires a lot of water to grow, but it is harmful to all other crops which are cultivated here going by the season. That is the foremost reason why the farmers prefer to sow the paddy crop here but they cannot be allowed to do so at the cost of the fertility of the land,” said Mehar Singh, secretary of the Khap panchayat during the meeting, adding that the farmers of the region had already paid the price of this condition to a large extent and now the time had come to impose a ban on cultivation of the paddy crop in the region.

    He said the khap panchayat had decided to impose a fine of Rs 5,100 on those farmers who may try to plant the paddy crop. Besides they would be boycotted socially. In this situation, no one would talk and maintain social relations with the persons facing a boycott.

    “No one from 36 villages has so far raised any objection over the decision and all representatives of the villages supported the decision by raising their hands at the meeting,” he claimed.
    "All I am trying to do is bridge the gap between Jats and Rest of World"

    As I shall imagine, so shall I become.

  29. #17
    Friends,

    The Tribune, dated January 11, 2012 has published editorial captioned 'Khap ban on Paddy:Panchayats can help in Water conservation'

    For further details log in www.tribuneindia.com

    Regards.

  30. The Following User Says Thank You to DrRajpalSingh For This Useful Post:

    abhisheklakda (January 31st, 2015)

  31. #18
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    Quote Originally Posted by DrRajpalSingh View Post
    Friends,

    The Tribune, dated January 11, 2012 has published editorial captioned 'Khap ban on Paddy:Panchayats can help in Water conservation'

    For further details log in www.tribuneindia.com

    Regards.

    Many thanks Dr Rajpal. I am reproducing that link and editorial piece but I strongly object to the first line used in Editorial. It is kind of Sad to know that even The Tribune lacks basic knowledge about khaps that they do ''order'' Honour Killing. However on the same time they are knowing the far better and its impact on society. Indirectly, this is slap on Govt and administrative bodies that they could not do what Khaps did with a social gathering.

    ----------------------------------



    HARYANA’S khap panchayats have earned notoriety by ordering “honour killings” or asking married couples to separate. Given their social influence, they can do a lot of good work too like settling local disputes, saving unborn daughters and conserving life-saving water resources. A khap panchayat in the Jhajjar area has asked farmers in 36 villages under it to stop paddy cultivation. Though it has no legal sanction to impose a fine and a social boycott too is an extreme step, the panchayat should educate the growers insisting on paddy cultivation about the damage the crop is doing to the falling water table. Since the groundwater level in Haryana and Punjab has declined to alarming levels, a water-guzzling crop like paddy is no longer viable.

    Experts have for long advised farmers in this region to shun paddy. In August last year the Central Ground Water Board suggested to the governments in Punjab and Haryana that at least one district in each state should grow crops other than paddy. Nothing has happened. The post-harvest burning of paddy straw, which causes air pollution, continues despite being outlawed. Efforts to encourage farmers to adopt sprinklers and drip irrigation have had limited success despite a 75 per cent subsidy on them. The Centre is trying to promote alternative crops which need minimum water like pulses and oilseeds by offering higher support prices and assured procurement, but to no avail.

    The chief reason given for farmers opting for paddy is the returns are higher than from any other crop. This may not be true if the input costs of free electricity, the subsidy on diesel and the installation of submersible pumps, and the long-term damage to groundwater resources are taken into account. In fact, Punjab and Haryana pay a heavy price for growing paddy. It is, therefore, important to rope in panchayats to spread awareness about the environmentally destructive role paddy cultivation plays in this region with limited water resources. They can help in reviving village ponds and making rainwater harvesting popular. Collective efforts are needed to save the life-line called water.


    http://www.tribuneindia.com/2012/20120111/edit.htm#1
    "All I am trying to do is bridge the gap between Jats and Rest of World"

    As I shall imagine, so shall I become.

  32. The Following User Says Thank You to Samarkadian For This Useful Post:

    abhisheklakda (January 31st, 2015)

  33. #19
    @Samar:

    समर, इन खाप आल्याँ नै म्हारे गाम मै भी भेजिए भाई I म्हारे कुनबे के 15 -16 छोरे फौजदारी के केस मै फंस रहे सें, जिनमे मेरा सबसे छोटा भाई भी है जिसको मुख्य आरोपी बना राख्या सै कि इसने दूसरी पार्टी के आदमी को कुल्हाड़ी मारी (जो सरासर झूठ है ) I जमीन पर तकरार होगी थी पडोसी गाम के एक कुनबे के साथ, उनके थोड़ी चोट लाग गी और उनका एक बुजुर्ग आदमी दो दिन के बाद स्वर्ग सिधार गया I उससे मामला और गंभीर होगया I म्हारे आल्याँ नै भी इस्तगाषा कर राख्या सै आर केस शुरू होगया I मैं अभी गया था कुछ दिन पहले, मैंने समझौते की कोशिश करी, पंचायत के द्वारा, दो तीन सरपंचो और मौजीज़ आदमियों के पास भी गया और उनको लेकर दूसरी पार्टी के पास भी गया, पर कोई समझोता नहीं हो पाया I खाप नै भी पूरा जोर लगा लिया, पर इब ताएँ कुछ ना हो लिया I इसलिए, खाप सब जगह और हर केस में कामयाब नहीं हैं I
    Last edited by singhvp; January 11th, 2012 at 08:15 PM.

  34. #20
    Thanks Samarji.

    I think it is a very balanced editorial on the issue under discussion. The Tribune deserves kudos for it because hundred per cent agreement is never expected from intellectuals on any issue.

    regards

  35. The Following 2 Users Say Thank You to DrRajpalSingh For This Useful Post:

    abhisheklakda (January 31st, 2015), Arvindc (January 12th, 2012)

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