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Thread: क्या जाटों में अंतर-धर्म विवाह होते हैं, हो &a

  1. #1

    क्या जाटों में अंतर-धर्म विवाह होते हैं, हो &a

    क्या जाटों में अंतर-धर्म विवाह होते हैं, हो सकते हैं अथवा होते आये हैं?

    अक्सर इस मुद्दे पर सोशल मीडिया में चर्चा होती देखी गई है| जाटों के नाम से भिन्न-भिन्न सोशल ग्रुप्स में अक्सर पूछा जा रहा है, जैसे कि क्या जाटों में अंतर-धर्म विवाह हो सकते हैं या पहले कभी हुए हैं?

    ऐसे ही उदाहरणों की सूची बनाने हेतु शुरू कर रहा हूँ यह थ्रेड, जिसमें जो उदहारण मेरी जानकारी में हैं उनको भी दाल रहा हूँ| जैसे कि

    १) १८५७ की क्रांति के शहीद बल्लबगढ़ नरेश महाराजा नाहर सिंह (हिन्दू जाट) का विवाह कपूरथला राजघराने की राजकुमारी (सिख जट्टी) से हुआ था|
    २) वर्त्तमान में महाराजा पटियाला की बहन (सिख जट्टी) हिन्दू जाट राजघराने भरतपुर की महारानी हैं|
    ३) महाराजा रणजीत सिंह की माता जींद रियासत हरियाणा की राजकुमारी थी और जींद एक हिन्दू बहुल रियासत उनका नानका था|

    मुझे अभी यह तीन उदाहरण याद हैं, आप लोग इस सूची में और नाम जोड़ने में योगदान करें| एक बात ध्यान रखियेगा कि उदाहरण होने जाटों के चाहिए, फिर धर्म चाहे कोई भी हो| आप चाहें तो साधारण परिवारों से भी ऐसे उदाहरण इस थ्रेड में जोड़ सकते हैं|

    इस थ्रेड को सोशल रिस्पांसिबिलिटी में इसलिए डाल रहा हूँ क्योंकि इसमें वर्त्तमान के उदाहरण भी हैं और इसीलिए इसको इतिहास सेक्शन में नहीं डाला|

    तो देखें चौथा उदाहरण किसकी तरफ से आता है? - Phool Kumar Malik
    Last edited by phoolkumar; January 11th, 2014 at 01:05 AM.
    One who doesn't know own roots and culture, their social identity is like a letter without address and they are culturally slave to philosophies of others.

    Reunion of Haryana state of pre-1857 is the best way possible to get Jats united.

    Phool Kumar Malik - Gathwala Khap - Nidana Heights

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    rajpaldular (January 11th, 2014), sukhbirhooda (January 12th, 2014)

  3. #2
    I do not remeber exactly, Mr. Natwar Singh former Foreign Minister was also married in Patiala Family.
    Marriages betwwen Hindu jats and Sikh jats was very common earlier.
    Yoginder Gulia

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    rajpaldular (January 15th, 2014)

  5. #3
    Second example maine unhin ka diya tha bhai sahab, aapne name bata diye, thnks!
    Quote Originally Posted by ygulia View Post
    I do not remeber exactly, Mr. Natwar Singh former Foreign Minister was also married in Patiala Family.
    Marriages betwwen Hindu jats and Sikh jats was very common earlier.

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    rajpaldular (January 15th, 2014)

  7. #4
    .
    Please have a glance of the following page of Jatland Wiki. Some relevant extracts from Thakur Deshraj's book (Page 289-291) are given in this post -

    http://www.jatland.com/home/Jat_Hist...ter_VII_Part_I -

    महाराज रणजीतसिंह की सोलह रानियां थीं जिनमें 9 विवाहिता थीं और सात चादर डालकर लाई गई थीं। नियोग या नाते का नाम चादर डालना है। भारत के सभी पुराने क्षत्रियों में इस तरह के विवाह उचित माने गए थे। अब भी भारत में जो पुराने क्षत्रियों के वंशज हैं अथवा पुरातन नियमों को मानते चले आते हैं, उनमें चादर डालने अथवा नाता करने की प्रथा है। महाराजा रणजीतसिंह जी ऐसी पुरातन काल के क्षत्रियों की संस्था जाट-जाति की संतान होने के कारण जाति के नियमानुसार सात ब्याह चादर डालकर लाए थे।1 उन विवाहित अथवा नाता की हुई रानियों का परिचय इस प्रकार है -
    (1) रानी महताब कुंवरि - : यह कन्हैया मिसल के सरदार गुरुबख्शसिंह की सुपुत्री थी। इन से महाराज ने 1796 ई० में विवाह किया था। इनकी ही मां का नाम सदाकुंवरि था जो कि शासन करने में बड़ी योग्य थी। इनके दो पुत्र हुए थे - (1) शेरसिंह (2) तारासिंह। कुछ इतिहासकारों का मत है कि ये पुत्र इनके औरस पुत्र न थे। इनकी नानी ने किसी के दो पुत्रों को, इनके गर्भ से होना घोषित कर दिया था। महाराज ने भी उन्हें अपना पुत्र मान लिया था। आगे शेरसिंह को तो सदा सदाकुंवरि ने अपना उत्तराधिकारी बना दिया था। सन् 1813 में महारानी महताबकुंवरि की मृत्यु हो गई।
    (2) रानी राजकुंवरि - : यह नकई मिसल के सरदार रामसिंह जी सिन्धू (जाट) की पुत्री थी। इनसे महाराज ने सन् 1798 में विवाह किया था। महाराज की बहन का नाम भी राजकुंवरि था, इसलिए इन्हें दातार कुंवरि व माई निकाई के नाम से पुकारा जाता था। कुंवर खड़गसिंह का जन्म उन्हीं के गर्भ से हुआ था। सन् 1818 में यह स्वर्ग सिधार गईं।
    (3) रानी रूपकुंवरि - : यह अमृतसर जिले के एक प्रसिद्ध सरदार जयसिंह की लड़की थी। सन् 1815 ई० में महाराज ने इनसे विवाह किया था। दूसरे सिख-युद्ध के बाद जब सरकार ने पंजाब को अपने राज्य में मिला लिया तो इन्हें 1980) वार्षिक पेन्शन अंग्रेज सरकार जीवन पर्यन्त देती रही।
    (4) रानी लक्ष्मी - : यह गुजरानवाला जिले के जोगीखां गांव के सिन्धु जाट देसासिंह की सुपुत्री थी। पंजाब-हरण के बाद सरकार ने इन्हें 11200) वार्षिक की पेन्शन दी थी।
    (5-6) महतो देवी, राजवंशी - : कांगड़ा के राजा संसारचन्द्र की महतो देवी और राजवंशी नाम की दो पुत्रियां थीं। इन्हें कांगड़ा विजय के बाद महाराज ने विवाहा था। ये दोनों ही 1839 ई० में महाराज के साथ सती हो गईं।
    (7) गुलबेगम - : यह अमृतसर के एक प्रतिष्ठित मुसलमान की लड़की थी। महाराज इनकी सुन्दरता पर मुग्ध हो गए। इसलिए इनसे बड़ी धूमधाम के साथ विवाह कर लिया। सरकार ने पंजाब को जब्त करने के बाद इनकी 12380) वार्षिक पेन्शन कर दी। 1863 ई० में यह मर गई।
    (8) रानी रामदेवी - : गुजरानवाला के कर्मसिंह की पुत्री थी। महाराज ने गुजरानवाला विजय के समय इनसे ब्याह किया था।
    (9) नवीं रानी - : शदाराज की नवीं रानी अमृतसर जिले के चीना (जाट) की सुपुत्री थी।
    ये नौ रानी महाराज की विवाहिता थीं और नीचे लिखी सात रानियां चादर डाली हुई थीं -
    (1) रानीदेवी - यह हुशियारपुर के जसवान गांव के बसीर नाकुद्द की पुत्री थी।
    (2), (3) दयाकौर, रतनकुंवरि - गुजरात के सरदार साहबसिंह भंगी की दो विधवाओं दयाकौर और रतनकुंवरि से महाराज ने सन् 1811 ई० में नाता किया था। रानी रतनकौर ने मुल्तानसिंह को अपना पुत्र मान लिया था। पंजाब हरण करने के बाद सरकार ने इन्हें 1000) वार्षिक पेन्शन दी थी। दयाकुंवरि ने काश्मीरासिंह और पिशोरासिंह को अपना पुत्र मान लिया था। इनकी सन् 1843 ई० में मृत्यु हो गई थी।
    (4) रानी चांदकुंवरि - यह अमृतसर जिले के चैनपुर गांव के जाट सिंह की पुत्री थी। 1822 ई० में महाराज ने इनसे सम्बन्ध किया। सरकार ने इन्हें 1930) वार्षिक पेन्शन दी थी।
    (5) रानी महतावकुंवरि - यह गुरदासपुर जिले के मल्ल गांव के जाट चौधरी सुजानसिंह की लड़की थी। इनसे भी महाराज ने सन् 1822 ई० में सम्बन्ध किया था - 1930) वार्षिक की सरकार ने इन्हें भी पेन्शन दी थी।
    (6) रानी सामनकुंवरि - मालवा के जाट सूवासिंह की सुपुत्री थी। सन् 1832 ई० में महाराज ने इनके साथ सम्बन्ध किया था - 1440) वार्षिक की पेन्शन सरकार से इन्हें पंजाब-हरण के बाद मिलती रही थी।

    (7) महारानी जिन्दा - महाराज की अन्तिम रानी जिन्दा थीं। ये सरदार मल्लसिंह की सुपुत्री थीं। महाराज दिलीप इन्हीं से पैदा हुए थे। पंजाब-हरण के बाद सरकार ने इनकी बड़ी भारी पेन्शन करके इन्हें काशी भेज दिया था। वहां से यह नेपाल को इसलिए भाग गई कि वहां के राजा की मदद से अपने पंजाब को वापस ले लें। इनका पूरा हाल आगे दिया जायेगा।
    गुलाबकौर - इसके अलावा गुलाबकौर भी महाराज की रानी थी, जो अमृतसर के जगदेव गांव के एक जमींदार की लड़की थी।
    मोरन- एक थी मोरन। इससे महाराज ने प्रेम के वशीभूत होकर बड़ी धूमधाम से विवाह किया था। लाहौर और शाहबीन दरवाजे के बीच गोबर चीनी कटरा की एक हवेली में इससे विवाह हुआ। फिर इसके साथ महाराज ने हरद्वार यात्रा की। महाराज के साथ जब रानी महताकुंवरि सती हुई थी, तो उसकी दासी हरिदेवी, राजदेवी और देवनो भी सती हो गईं थीं।
    इन रानियों में 7 सिक्ख जाटों की, 5 हिन्दू जाटों की, 2 मुसलमानों की, 1 हिन्दू जमींदार की और 1 विदेशीय संतान थीं।

    भारत के हिन्दू नरेशों में महाराज रणजीतसिंह और महाराज जवाहरसिंह भरतपुर ही ऐसे थे जिन्होंने मुसलमानों की ललनाओं के साथ भी विवाह किए थे। अन्यथा ग्यारहवीं शताब्दी से इतिहास में यही होता रहा कि भारत के राजपूत नरेशों की ललनाओं को मुसलमान शासक अपनी अंकशायनी बनाते रहे। यह सिक्ख और खास तौर से जाट जाति के लिए स्वाभिमान की बात है।
    Last edited by dndeswal; January 11th, 2014 at 09:21 AM.
    तमसो मा ज्योतिर्गमय

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    phoolkumar (January 11th, 2014), rajpaldular (January 11th, 2014), sukhbirhooda (January 12th, 2014)

  9. #5
    Quote Originally Posted by dndeswal View Post
    .
    Please have a glance of the following page of Jatland Wiki. Some relevant extracts from Thakur Deshraj's book (Page 289-291) are given in this post -

    http://www.jatland.com/home/Jat_Hist...ter_VII_Part_I -

    महाराज रणजीतसिंह की सोलह रानियां थीं जिनमें 9 विवाहिता थीं और सात चादर डालकर लाई गई थीं। नियोग या नाते का नाम चादर डालना है। भारत के सभी पुराने क्षत्रियों में इस तरह के विवाह उचित माने गए थे। अब भी भारत में जो पुराने क्षत्रियों के वंशज हैं अथवा पुरातन नियमों को मानते चले आते हैं, उनमें चादर डालने अथवा नाता करने की प्रथा है। महाराजा रणजीतसिंह जी ऐसी पुरातन काल के क्षत्रियों की संस्था जाट-जाति की संतान होने के कारण जाति के नियमानुसार सात ब्याह चादर डालकर लाए थे।1 उन विवाहित अथवा नाता की हुई रानियों का परिचय इस प्रकार है -
    (1) रानी महताब कुंवरि - : यह कन्हैया मिसल के सरदार गुरुबख्शसिंह की सुपुत्री थी। इन से महाराज ने 1796 ई० में विवाह किया था। इनकी ही मां का नाम सदाकुंवरि था जो कि शासन करने में बड़ी योग्य थी। इनके दो पुत्र हुए थे - (1) शेरसिंह (2) तारासिंह। कुछ इतिहासकारों का मत है कि ये पुत्र इनके औरस पुत्र न थे। इनकी नानी ने किसी के दो पुत्रों को, इनके गर्भ से होना घोषित कर दिया था। महाराज ने भी उन्हें अपना पुत्र मान लिया था। आगे शेरसिंह को तो सदा सदाकुंवरि ने अपना उत्तराधिकारी बना दिया था। सन् 1813 में महारानी महताबकुंवरि की मृत्यु हो गई।
    (2) रानी राजकुंवरि - : यह नकई मिसल के सरदार रामसिंह जी सिन्धू (जाट) की पुत्री थी। इनसे महाराज ने सन् 1798 में विवाह किया था। महाराज की बहन का नाम भी राजकुंवरि था, इसलिए इन्हें दातार कुंवरि व माई निकाई के नाम से पुकारा जाता था। कुंवर खड़गसिंह का जन्म उन्हीं के गर्भ से हुआ था। सन् 1818 में यह स्वर्ग सिधार गईं।
    (3) रानी रूपकुंवरि - : यह अमृतसर जिले के एक प्रसिद्ध सरदार जयसिंह की लड़की थी। सन् 1815 ई० में महाराज ने इनसे विवाह किया था। दूसरे सिख-युद्ध के बाद जब सरकार ने पंजाब को अपने राज्य में मिला लिया तो इन्हें 1980) वार्षिक पेन्शन अंग्रेज सरकार जीवन पर्यन्त देती रही।
    (4) रानी लक्ष्मी - : यह गुजरानवाला जिले के जोगीखां गांव के सिन्धु जाट देसासिंह की सुपुत्री थी। पंजाब-हरण के बाद सरकार ने इन्हें 11200) वार्षिक की पेन्शन दी थी।
    (5-6) महतो देवी, राजवंशी - : कांगड़ा के राजा संसारचन्द्र की महतो देवी और राजवंशी नाम की दो पुत्रियां थीं। इन्हें कांगड़ा विजय के बाद महाराज ने विवाहा था। ये दोनों ही 1839 ई० में महाराज के साथ सती हो गईं।
    (7) गुलबेगम - : यह अमृतसर के एक प्रतिष्ठित मुसलमान की लड़की थी। महाराज इनकी सुन्दरता पर मुग्ध हो गए। इसलिए इनसे बड़ी धूमधाम के साथ विवाह कर लिया। सरकार ने पंजाब को जब्त करने के बाद इनकी 12380) वार्षिक पेन्शन कर दी। 1863 ई० में यह मर गई।
    (8) रानी रामदेवी - : गुजरानवाला के कर्मसिंह की पुत्री थी। महाराज ने गुजरानवाला विजय के समय इनसे ब्याह किया था।
    (9) नवीं रानी - : शदाराज की नवीं रानी अमृतसर जिले के चीना (जाट) की सुपुत्री थी।
    ये नौ रानी महाराज की विवाहिता थीं और नीचे लिखी सात रानियां चादर डाली हुई थीं -
    (1) रानीदेवी - यह हुशियारपुर के जसवान गांव के बसीर नाकुद्द की पुत्री थी।
    (2), (3) दयाकौर, रतनकुंवरि - गुजरात के सरदार साहबसिंह भंगी की दो विधवाओं दयाकौर और रतनकुंवरि से महाराज ने सन् 1811 ई० में नाता किया था। रानी रतनकौर ने मुल्तानसिंह को अपना पुत्र मान लिया था। पंजाब हरण करने के बाद सरकार ने इन्हें 1000) वार्षिक पेन्शन दी थी। दयाकुंवरि ने काश्मीरासिंह और पिशोरासिंह को अपना पुत्र मान लिया था। इनकी सन् 1843 ई० में मृत्यु हो गई थी।
    (4) रानी चांदकुंवरि - यह अमृतसर जिले के चैनपुर गांव के जाट सिंह की पुत्री थी। 1822 ई० में महाराज ने इनसे सम्बन्ध किया। सरकार ने इन्हें 1930) वार्षिक पेन्शन दी थी।
    (5) रानी महतावकुंवरि - यह गुरदासपुर जिले के मल्ल गांव के जाट चौधरी सुजानसिंह की लड़की थी। इनसे भी महाराज ने सन् 1822 ई० में सम्बन्ध किया था - 1930) वार्षिक की सरकार ने इन्हें भी पेन्शन दी थी।
    (6) रानी सामनकुंवरि - मालवा के जाट सूवासिंह की सुपुत्री थी। सन् 1832 ई० में महाराज ने इनके साथ सम्बन्ध किया था - 1440) वार्षिक की पेन्शन सरकार से इन्हें पंजाब-हरण के बाद मिलती रही थी।

    (7) महारानी जिन्दा - महाराज की अन्तिम रानी जिन्दा थीं। ये सरदार मल्लसिंह की सुपुत्री थीं। महाराज दिलीप इन्हीं से पैदा हुए थे। पंजाब-हरण के बाद सरकार ने इनकी बड़ी भारी पेन्शन करके इन्हें काशी भेज दिया था। वहां से यह नेपाल को इसलिए भाग गई कि वहां के राजा की मदद से अपने पंजाब को वापस ले लें। इनका पूरा हाल आगे दिया जायेगा।
    गुलाबकौर - इसके अलावा गुलाबकौर भी महाराज की रानी थी, जो अमृतसर के जगदेव गांव के एक जमींदार की लड़की थी।
    मोरन- एक थी मोरन। इससे महाराज ने प्रेम के वशीभूत होकर बड़ी धूमधाम से विवाह किया था। लाहौर और शाहबीन दरवाजे के बीच गोबर चीनी कटरा की एक हवेली में इससे विवाह हुआ। फिर इसके साथ महाराज ने हरद्वार यात्रा की। महाराज के साथ जब रानी महताकुंवरि सती हुई थी, तो उसकी दासी हरिदेवी, राजदेवी और देवनो भी सती हो गईं थीं।
    इन रानियों में 7 सिक्ख जाटों की, 5 हिन्दू जाटों की, 2 मुसलमानों की, 1 हिन्दू जमींदार की और 1 विदेशीय संतान थीं।

    भारत के हिन्दू नरेशों में महाराज रणजीतसिंह और महाराज जवाहरसिंह भरतपुर ही ऐसे थे जिन्होंने मुसलमानों की ललनाओं के साथ भी विवाह किए थे। अन्यथा ग्यारहवीं शताब्दी से इतिहास में यही होता रहा कि भारत के राजपूत नरेशों की ललनाओं को मुसलमान शासक अपनी अंकशायनी बनाते रहे। यह सिक्ख और खास तौर से जाट जाति के लिए स्वाभिमान की बात है।
    Could you let us know the name of the Muslim Wife of Maharaja Jawahar Singh of Bharatpur !
    History is best when created, better when re-constructed and worst when invented.

  10. The Following 2 Users Say Thank You to DrRajpalSingh For This Useful Post:

    phoolkumar (January 11th, 2014), rajpaldular (January 11th, 2014)

  11. #6
    adbhut sir, ati adbhut..... yaani aapne jo 2 rajaon ke udaharan diye unko is thread ke example number 4th and 5th kahe sakte hain..... but yes Dr. Rajpal ji ka swaal meri taraf se bhi hai...... hope we could get the name of that maharani too!

    Quote Originally Posted by dndeswal View Post
    .
    Please have a glance of the following page of Jatland Wiki. Some relevant extracts from Thakur Deshraj's book (Page 289-291) are given in this post -

    http://www.jatland.com/home/Jat_Hist...ter_VII_Part_I -

    महाराज रणजीतसिंह की सोलह रानियां थीं जिनमें 9 विवाहिता थीं और सात चादर डालकर लाई गई थीं। नियोग या नाते का नाम चादर डालना है। भारत के सभी पुराने क्षत्रियों में इस तरह के विवाह उचित माने गए थे। अब भी भारत में जो पुराने क्षत्रियों के वंशज हैं अथवा पुरातन नियमों को मानते चले आते हैं, उनमें चादर डालने अथवा नाता करने की प्रथा है। महाराजा रणजीतसिंह जी ऐसी पुरातन काल के क्षत्रियों की संस्था जाट-जाति की संतान होने के कारण जाति के नियमानुसार सात ब्याह चादर डालकर लाए थे।1 उन विवाहित अथवा नाता की हुई रानियों का परिचय इस प्रकार है -
    (1) रानी महताब कुंवरि - : यह कन्हैया मिसल के सरदार गुरुबख्शसिंह की सुपुत्री थी। इन से महाराज ने 1796 ई० में विवाह किया था। इनकी ही मां का नाम सदाकुंवरि था जो कि शासन करने में बड़ी योग्य थी। इनके दो पुत्र हुए थे - (1) शेरसिंह (2) तारासिंह। कुछ इतिहासकारों का मत है कि ये पुत्र इनके औरस पुत्र न थे। इनकी नानी ने किसी के दो पुत्रों को, इनके गर्भ से होना घोषित कर दिया था। महाराज ने भी उन्हें अपना पुत्र मान लिया था। आगे शेरसिंह को तो सदा सदाकुंवरि ने अपना उत्तराधिकारी बना दिया था। सन् 1813 में महारानी महताबकुंवरि की मृत्यु हो गई।
    (2) रानी राजकुंवरि - : यह नकई मिसल के सरदार रामसिंह जी सिन्धू (जाट) की पुत्री थी। इनसे महाराज ने सन् 1798 में विवाह किया था। महाराज की बहन का नाम भी राजकुंवरि था, इसलिए इन्हें दातार कुंवरि व माई निकाई के नाम से पुकारा जाता था। कुंवर खड़गसिंह का जन्म उन्हीं के गर्भ से हुआ था। सन् 1818 में यह स्वर्ग सिधार गईं।
    (3) रानी रूपकुंवरि - : यह अमृतसर जिले के एक प्रसिद्ध सरदार जयसिंह की लड़की थी। सन् 1815 ई० में महाराज ने इनसे विवाह किया था। दूसरे सिख-युद्ध के बाद जब सरकार ने पंजाब को अपने राज्य में मिला लिया तो इन्हें 1980) वार्षिक पेन्शन अंग्रेज सरकार जीवन पर्यन्त देती रही।
    (4) रानी लक्ष्मी - : यह गुजरानवाला जिले के जोगीखां गांव के सिन्धु जाट देसासिंह की सुपुत्री थी। पंजाब-हरण के बाद सरकार ने इन्हें 11200) वार्षिक की पेन्शन दी थी।
    (5-6) महतो देवी, राजवंशी - : कांगड़ा के राजा संसारचन्द्र की महतो देवी और राजवंशी नाम की दो पुत्रियां थीं। इन्हें कांगड़ा विजय के बाद महाराज ने विवाहा था। ये दोनों ही 1839 ई० में महाराज के साथ सती हो गईं।
    (7) गुलबेगम - : यह अमृतसर के एक प्रतिष्ठित मुसलमान की लड़की थी। महाराज इनकी सुन्दरता पर मुग्ध हो गए। इसलिए इनसे बड़ी धूमधाम के साथ विवाह कर लिया। सरकार ने पंजाब को जब्त करने के बाद इनकी 12380) वार्षिक पेन्शन कर दी। 1863 ई० में यह मर गई।
    (8) रानी रामदेवी - : गुजरानवाला के कर्मसिंह की पुत्री थी। महाराज ने गुजरानवाला विजय के समय इनसे ब्याह किया था।
    (9) नवीं रानी - : शदाराज की नवीं रानी अमृतसर जिले के चीना (जाट) की सुपुत्री थी।
    ये नौ रानी महाराज की विवाहिता थीं और नीचे लिखी सात रानियां चादर डाली हुई थीं -
    (1) रानीदेवी - यह हुशियारपुर के जसवान गांव के बसीर नाकुद्द की पुत्री थी।
    (2), (3) दयाकौर, रतनकुंवरि - गुजरात के सरदार साहबसिंह भंगी की दो विधवाओं दयाकौर और रतनकुंवरि से महाराज ने सन् 1811 ई० में नाता किया था। रानी रतनकौर ने मुल्तानसिंह को अपना पुत्र मान लिया था। पंजाब हरण करने के बाद सरकार ने इन्हें 1000) वार्षिक पेन्शन दी थी। दयाकुंवरि ने काश्मीरासिंह और पिशोरासिंह को अपना पुत्र मान लिया था। इनकी सन् 1843 ई० में मृत्यु हो गई थी।
    (4) रानी चांदकुंवरि - यह अमृतसर जिले के चैनपुर गांव के जाट सिंह की पुत्री थी। 1822 ई० में महाराज ने इनसे सम्बन्ध किया। सरकार ने इन्हें 1930) वार्षिक पेन्शन दी थी।
    (5) रानी महतावकुंवरि - यह गुरदासपुर जिले के मल्ल गांव के जाट चौधरी सुजानसिंह की लड़की थी। इनसे भी महाराज ने सन् 1822 ई० में सम्बन्ध किया था - 1930) वार्षिक की सरकार ने इन्हें भी पेन्शन दी थी।
    (6) रानी सामनकुंवरि - मालवा के जाट सूवासिंह की सुपुत्री थी। सन् 1832 ई० में महाराज ने इनके साथ सम्बन्ध किया था - 1440) वार्षिक की पेन्शन सरकार से इन्हें पंजाब-हरण के बाद मिलती रही थी।

    (7) महारानी जिन्दा - महाराज की अन्तिम रानी जिन्दा थीं। ये सरदार मल्लसिंह की सुपुत्री थीं। महाराज दिलीप इन्हीं से पैदा हुए थे। पंजाब-हरण के बाद सरकार ने इनकी बड़ी भारी पेन्शन करके इन्हें काशी भेज दिया था। वहां से यह नेपाल को इसलिए भाग गई कि वहां के राजा की मदद से अपने पंजाब को वापस ले लें। इनका पूरा हाल आगे दिया जायेगा।
    गुलाबकौर - इसके अलावा गुलाबकौर भी महाराज की रानी थी, जो अमृतसर के जगदेव गांव के एक जमींदार की लड़की थी।
    मोरन- एक थी मोरन। इससे महाराज ने प्रेम के वशीभूत होकर बड़ी धूमधाम से विवाह किया था। लाहौर और शाहबीन दरवाजे के बीच गोबर चीनी कटरा की एक हवेली में इससे विवाह हुआ। फिर इसके साथ महाराज ने हरद्वार यात्रा की। महाराज के साथ जब रानी महताकुंवरि सती हुई थी, तो उसकी दासी हरिदेवी, राजदेवी और देवनो भी सती हो गईं थीं।
    इन रानियों में 7 सिक्ख जाटों की, 5 हिन्दू जाटों की, 2 मुसलमानों की, 1 हिन्दू जमींदार की और 1 विदेशीय संतान थीं।

    भारत के हिन्दू नरेशों में महाराज रणजीतसिंह और महाराज जवाहरसिंह भरतपुर ही ऐसे थे जिन्होंने मुसलमानों की ललनाओं के साथ भी विवाह किए थे। अन्यथा ग्यारहवीं शताब्दी से इतिहास में यही होता रहा कि भारत के राजपूत नरेशों की ललनाओं को मुसलमान शासक अपनी अंकशायनी बनाते रहे। यह सिक्ख और खास तौर से जाट जाति के लिए स्वाभिमान की बात है।

  12. The Following User Says Thank You to phoolkumar For This Useful Post:

    rajpaldular (January 15th, 2014)

  13. #7
    Quote Originally Posted by phoolkumar View Post
    क्या जाटों में अंतर-धर्म विवाह होते हैं, हो सकते हैं अथवा होते आये हैं?

    अक्सर इस मुद्दे पर सोशल मीडिया में चर्चा होती देखी गई है| जाटों के नाम से भिन्न-भिन्न सोशल ग्रुप्स में अक्सर पूछा जा रहा है, जैसे कि क्या जाटों में अंतर-धर्म विवाह हो सकते हैं या पहले कभी हुए हैं?

    ऐसे ही उदाहरणों की सूची बनाने हेतु शुरू कर रहा हूँ यह थ्रेड, जिसमें जो उदहारण मेरी जानकारी में हैं उनको भी दाल रहा हूँ| जैसे कि

    १) १८५७ की क्रांति के शहीद बल्लबगढ़ नरेश महाराजा नाहर सिंह (हिन्दू जाट) का विवाह कपूरथला राजघराने की राजकुमारी (सिख जट्टी) से हुआ था|
    २) वर्त्तमान में महाराजा पटियाला की बहन (सिख जट्टी) हिन्दू जाट राजघराने भरतपुर की महारानी हैं|
    ३) महाराजा रणजीत सिंह की माता जींद रियासत हरियाणा की राजकुमारी थी और जींद एक हिन्दू बहुल रियासत उनका नानका था|

    मुझे अभी यह तीन उदाहरण याद हैं, आप लोग इस सूची में और नाम जोड़ने में योगदान करें| एक बात ध्यान रखियेगा कि उदाहरण होने जाटों के चाहिए, फिर धर्म चाहे कोई भी हो| आप चाहें तो साधारण परिवारों से भी ऐसे उदाहरण इस थ्रेड में जोड़ सकते हैं|

    इस थ्रेड को सोशल रिस्पांसिबिलिटी में इसलिए डाल रहा हूँ क्योंकि इसमें वर्त्तमान के उदाहरण भी हैं और इसीलिए इसको इतिहास सेक्शन में नहीं डाला|

    तो देखें चौथा उदाहरण किसकी तरफ से आता है? - Phool Kumar Malik

    I do not know and can not understand, why "Jats" connect themselves so orthodoxily to religions, in terms of marriages.

    Jat boys have married across a vast spectrum of religions, ethnicites where ever their heart connected and they found a woman beautiful.

  14. The Following 2 Users Say Thank You to maddhan1979 For This Useful Post:

    rajpaldular (January 15th, 2014), rekhasmriti (January 12th, 2014)

  15. #8
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    Quote Originally Posted by phoolkumar View Post
    क्या जाटों में अंतर-धर्म विवाह होते हैं, हो सकते हैं अथवा होते आये हैं?

    अक्सर इस मुद्दे पर सोशल मीडिया में चर्चा होती देखी गई है| जाटों के नाम से भिन्न-भिन्न सोशल ग्रुप्स में अक्सर पूछा जा रहा है, जैसे कि क्या जाटों में अंतर-धर्म विवाह हो सकते हैं या पहले कभी हुए हैं?

    ऐसे ही उदाहरणों की सूची बनाने हेतु शुरू कर रहा हूँ यह थ्रेड, जिसमें जो उदहारण मेरी जानकारी में हैं उनको भी दाल रहा हूँ| जैसे कि

    १) १८५७ की क्रांति के शहीद बल्लबगढ़ नरेश महाराजा नाहर सिंह (हिन्दू जाट) का विवाह कपूरथला राजघराने की राजकुमारी (सिख जट्टी) से हुआ था|
    २) वर्त्तमान में महाराजा पटियाला की बहन (सिख जट्टी) हिन्दू जाट राजघराने भरतपुर की महारानी हैं|
    ३) महाराजा रणजीत सिंह की माता जींद रियासत हरियाणा की राजकुमारी थी और जींद एक हिन्दू बहुल रियासत उनका नानका था|

    मुझे अभी यह तीन उदाहरण याद हैं, आप लोग इस सूची में और नाम जोड़ने में योगदान करें| एक बात ध्यान रखियेगा कि उदाहरण होने जाटों के चाहिए, फिर धर्म चाहे कोई भी हो| आप चाहें तो साधारण परिवारों से भी ऐसे उदाहरण इस थ्रेड में जोड़ सकते हैं|

    इस थ्रेड को सोशल रिस्पांसिबिलिटी में इसलिए डाल रहा हूँ क्योंकि इसमें वर्त्तमान के उदाहरण भी हैं और इसीलिए इसको इतिहास सेक्शन में नहीं डाला|

    तो देखें चौथा उदाहरण किसकी तरफ से आता है? - Phool Kumar Malik
    What is the significance of quoting ultra-elite and Kings in this matter ? That would be exception if common people are not in to it.
    "All I am trying to do is bridge the gap between Jats and Rest of World"

    As I shall imagine, so shall I become.

  16. The Following 4 Users Say Thank You to Samarkadian For This Useful Post:

    anilsangwan (January 13th, 2014), rajpaldular (January 15th, 2014), rekhasmriti (January 12th, 2014), ssgoyat (January 13th, 2014)

  17. #9
    I m aware of some Inter-Caste Jat marriages , but Inter Religion NONE . Talking about common people cases not Royalties

  18. The Following User Says Thank You to rekhasmriti For This Useful Post:

    rajpaldular (January 15th, 2014)

  19. #10
    aapko kaise laga ki ye article ya thread aapko out of religion ya caste ja ke shadi karne se rokta hai? yahaan to in fact baat hi aise cases ki ho rahi hai jo Jat hote hue inter-religion byaah karen hon....; haan only restriction ye hai ki JL pe sirf Jats ke such example ko list ban rahi hai, fir bhi aapko all-around banaani hai to new thread shuru kijiye na bhai?

    Quote Originally Posted by maddhan1979 View Post
    I do not know and can not understand, why "Jats" connect themselves so orthodoxily to religions, in terms of marriages.

    Jat boys have married across a vast spectrum of religions, ethnicites where ever their heart connected and they found a woman beautiful.
    One who doesn't know own roots and culture, their social identity is like a letter without address and they are culturally slave to philosophies of others.

    Reunion of Haryana state of pre-1857 is the best way possible to get Jats united.

    Phool Kumar Malik - Gathwala Khap - Nidana Heights

  20. The Following User Says Thank You to phoolkumar For This Useful Post:

    rajpaldular (January 15th, 2014)

  21. #11
    Smriti ji and Samar Kadyan, both should note my this line too from my post as आप चाहें तो साधारण परिवारों से भी ऐसे उदाहरण इस थ्रेड में जोड़ सकते हैं|

    so you can enlist as many as cases you want but just of Jats across three or in whatever religion Jats are found.

    haan intercaste ki enlisting karni hai to wo uske liye bhi chaahen to ek alag thread shuru kar len, main bhi jitne case jaanta honga, udhar daal dunga!

    Quote Originally Posted by rekhasmriti View Post
    I m aware of some Inter-Caste Jat marriages , but Inter Religion NONE . Talking about common people cases not Royalties
    One who doesn't know own roots and culture, their social identity is like a letter without address and they are culturally slave to philosophies of others.

    Reunion of Haryana state of pre-1857 is the best way possible to get Jats united.

    Phool Kumar Malik - Gathwala Khap - Nidana Heights

  22. The Following User Says Thank You to phoolkumar For This Useful Post:

    rajpaldular (January 15th, 2014)

  23. #12
    Quote Originally Posted by maddhan1979 View Post
    I do not know and can not understand, why "Jats" connect themselves so orthodoxily to religions, in terms of marriages.

    Jat boys have married across a vast spectrum of religions, ethnicites where ever their heart connected and they found a woman beautiful.

    Why i say "Jat boys" because, there are more "Boys" than girls in Jat community.
    Last edited by DrRajpalSingh; January 14th, 2014 at 09:40 AM.

  24. The Following User Says Thank You to maddhan1979 For This Useful Post:

    rajpaldular (January 15th, 2014)

  25. #13
    Quote Originally Posted by maddhan1979 View Post
    Why i say "Jat boys" because, there are more "Boys" than girls in Jat community.

    What do you want to convey Friend by quoting your own post and then commenting vaguely on them !

    Here a direct topic has been chosen for discussion whether there have had been/could be/are being arranged intra religion marriages among the Jats or not. If you have some information on this aspect, write down your views otherwise save your precious ideas for another thread discussions, if any !
    History is best when created, better when re-constructed and worst when invented.

  26. The Following 2 Users Say Thank You to DrRajpalSingh For This Useful Post:

    phoolkumar (January 15th, 2014), rajpaldular (January 15th, 2014)

  27. #14
    Inter-religion marriages are not common among jatts if we observe the case of commom people.

    I have seen more cases of inter-religion marriages in other tribes. For example, sikh-kambojs and hindu-kambojs(muslims are barred) frequently marry, it may be because they are less in numbers. Jatts have a good number of population in each religion they usually don't go outside their religion.

    Still I have heard few cases of inter religion marriage among jats of adjoining haryana and punjab borders (bhatinda, moga, ambala, kuruchetras etc). May be someone from that area can give some input.
    Become more and more innocent, less knowledgeable and more childlike. Take life as fun - because that's precisely what it is!

  28. The Following 2 Users Say Thank You to prashantacmet For This Useful Post:

    DrRajpalSingh (January 15th, 2014), rajpaldular (January 15th, 2014)

  29. #15
    Quote Originally Posted by DrRajpalSingh View Post
    What do you want to convey Friend by quoting your own post and then commenting vaguely on them !

    Here a direct topic has been chosen for discussion whether there have had been/could be/are being arranged intra religion marriages among the Jats or not. If you have some information on this aspect, write down your views otherwise save your precious ideas for another thread discussions, if any !

    As far as i know, "Jats" believe in "gender equality", lot of "Jat girls" opt for sports like wrestling, boxing, athletics and so on which in larger context are connected with men only. This is also a proof of their ancient past, where women would take up responsibility of family or work, when men were fighting wars or were away from their homes for a long time.

    Why, i state this thing now? Simply because, of "gender equality" as i stated a fact that "there are more boys and less girls in this community therefore the Jat boys have married out of community for a long time but that does not mean that Jat girls are left behind, they are at par only thing is "they are precious to the community, as they are less in number".

  30. The Following User Says Thank You to maddhan1979 For This Useful Post:

    rajpaldular (January 15th, 2014)

  31. #16
    Shantanu, usually I find your posts very informative and worthy of any debate but don't know why, you seen gone out of context this time. The point here to be discussed is the "INTER RELIGION MARRIAGES AMONG JATS" even then if you stick to your point of gender ratio then please start a fresh thread or look into older threads, I have had discussed it once in past.

    Thanks for not diverting the thread!

    Quote Originally Posted by maddhan1979 View Post
    As far as i know, "Jats" believe in "gender equality", lot of "Jat girls" opt for sports like wrestling, boxing, athletics and so on which in larger context are connected with men only. This is also a proof of their ancient past, where women would take up responsibility of family or work, when men were fighting wars or were away from their homes for a long time.

    Why, i state this thing now? Simply because, of "gender equality" as i stated a fact that "there are more boys and less girls in this community therefore the Jat boys have married out of community for a long time but that does not mean that Jat girls are left behind, they are at par only thing is "they are precious to the community, as they are less in number".
    One who doesn't know own roots and culture, their social identity is like a letter without address and they are culturally slave to philosophies of others.

    Reunion of Haryana state of pre-1857 is the best way possible to get Jats united.

    Phool Kumar Malik - Gathwala Khap - Nidana Heights

  32. #17
    So far only 5 examples could be found and that too from historical perspective, come on guys you must be having such examples in current too. Though equally I can understand you may first like to have the permission of that couple before bringing their names on thread. So if not possible for naming couples from current era, then lets dig down in history for more such examples. Thanks!
    One who doesn't know own roots and culture, their social identity is like a letter without address and they are culturally slave to philosophies of others.

    Reunion of Haryana state of pre-1857 is the best way possible to get Jats united.

    Phool Kumar Malik - Gathwala Khap - Nidana Heights

  33. The Following User Says Thank You to phoolkumar For This Useful Post:

    rajpaldular (January 15th, 2014)

  34. #18
    For your information Shantanu and as also indicated by Dr. Rajpal, here we are focused on only inter-religion jat marriages. Not Jat (boy or girl) marrying outside caste or a non-jat boy/girl out of religion. Its about only Jat marrying Jat but inter-religion.

    Quote Originally Posted by maddhan1979 View Post
    Why i say "Jat boys" because, there are more "Boys" than girls in Jat community.
    One who doesn't know own roots and culture, their social identity is like a letter without address and they are culturally slave to philosophies of others.

    Reunion of Haryana state of pre-1857 is the best way possible to get Jats united.

    Phool Kumar Malik - Gathwala Khap - Nidana Heights

  35. #19
    Inter religion (Sikh-Hindu) marriage happen among Jats. I don't want to put example here due to personal and privacy reasons. However it is not that common and I must say that it is more common among non Jats.
    जागरूक ती अज्ञानी नहीं बनाया जा सके, स्वाभिमानी का अपमान नहीं करा जा सके , निडर ती दबाया नहीं जा सके भाई नुए सामाजिक क्रांति एक बार आ जे तो उसती बदला नहीं जा सके ---ज्याणी जाट।

    दोस्त हो या दुश्मन, जाट दोनुआ ने १०० साल ताईं याद राखा करे

  36. The Following 2 Users Say Thank You to VirJ For This Useful Post:

    phoolkumar (January 15th, 2014), rajpaldular (January 15th, 2014)

  37. #20
    I would also like to point out that Sikhism isn't considered a separate religion by many. There are lot of Sikhs who visit temples (my personal friends as well ) and we visit Gurudwara whenever they invite. True Inter religion marriage would be when someone marry a Muslim. Though it happened in my cousin's family but it wasn't welcomed initially.
    Last edited by VirJ; January 15th, 2014 at 07:31 AM.
    जागरूक ती अज्ञानी नहीं बनाया जा सके, स्वाभिमानी का अपमान नहीं करा जा सके , निडर ती दबाया नहीं जा सके भाई नुए सामाजिक क्रांति एक बार आ जे तो उसती बदला नहीं जा सके ---ज्याणी जाट।

    दोस्त हो या दुश्मन, जाट दोनुआ ने १०० साल ताईं याद राखा करे

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    phoolkumar (January 15th, 2014), rajpaldular (January 15th, 2014), rekhasmriti (January 15th, 2014)

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