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Thread: Historic Move of Mahapanchayat of the Satrol Khap

  1. #21
    In Satrol Khap there is only one gotra in all villages predominantly or Satrol Khap villages having several gotras like battisa khap of Shamli?
    Vivek Tomar
    Be Happy With Every Moment

  2. #22
    There are several Gotras; out of the type of khaps i.e. Gotra based and Regional and territorial agreement based, Satrol falls under the later category.

    Quote Originally Posted by tarzon View Post
    In Satrol Khap there is only one gotra in all villages predominantly or Satrol Khap villages having several gotras like battisa khap of Shamli?
    One who doesn't know own roots and culture, their social identity is like a letter without address and they are culturally slave to philosophies of others.

    Reunion of Haryana state of pre-1857 is the best way possible to get Jats united.

    Phool Kumar Malik - Gathwala Khap - Nidana Heights

  3. The Following User Says Thank You to phoolkumar For This Useful Post:

    skharb (April 24th, 2014)

  4. #23

    सतरोळ खाप के फैसले के मायने:

    सतरोळ खाप के फैसले के मायने:

    1) खाप को यह फैसला करने से पहले सर्वजातीय-सर्वखाप के मुख्यालय गाँव सोहरम, जिला मुज़फ्फरनगर, उत्तरप्रदेश के खाप-मंत्रियों व् पदाधिकारियों से इस बारे क्या पत्राचार या विचारों का आदान-प्रदान किया? यह फैसला करने से पहले सर्वखाप से इस पर मंत्रणा करी या नहीं; अगर करी तो सर्वखाप मुख्यालय की क्या राय रही, इस पर अभी तक कोई बात सामने नहीं आई|

    2) कोई खाप गोत्र आधारित हो या क्षेत्रीय करार आधारित (सतरोल खाप क्षेत्रीय करार आधारित है), दोनों ही अपने अधिकार व् प्रभाव क्षेत्र के अंतर्गत फैसले लेने को स्वतंत्र रही हैं, इसलिए कुछ बातें सिर्फ एक खाप विशेष की अपनी होती आई हैं| और इस नाते सतरोल खाप ऐसे फैसले लेने को स्वतंत्र है जो सिर्फ उसके क्षेत्र को प्रभावित करते हैं| लेकिन क्योंकि यह निर्णय अन्य खापों पर भी चर्चा का विषय बनेगा और प्रभाव भी डालेगा, इसलिए भी यह करना जरूरी हो जाता है कि सतरोल खाप ने यह फैसला करते वक्त खापों के वैधानिक रास्ते को अपनाया कि नहीं| एक स्थानीय खाप के लिए जितना जरूरी अपनी स्वयत्ता प्रयोग में लाना है, उतना ही जरूरी अन्य खापों व् सर्वखाप मुख्यालय के संज्ञान में इस बात को पहुँचाना व् उनकी राय ले कर ही फैसला करना जरूरी बनता है|

    3) ‘खेड़े के गोत्र’ पर सतरोल खाप ने कोई विचार नहीं रखा| ‘खेड़े के गोत्र’ की मंत्रणा क्यों जरूरी है वह आप इस आर्टिकल से पढ़ें| http://www.nidanaheights.com/EH-gotra.html

    4) जहाँ अन्य जातियों जैसे कि पंजाबी-बनिया में सिर्फ पिता के गोत्र को ही छोड़ने की मान्यता है वहीँ खापों में स्त्री सम्मान हेतु माता व् कहीं-कहीं तो दादी-नानी तक के गोत्र भी छोड़ने की मान्यता है| यह एक ऐसा बिंदु है जो कि खापों की शैली व् थ्योरी में लिंग-समानता को दर्शाता है, यानी अगर पिता का गोत्र छूटे तो कम से कम माता का भी छूटे| इसलिए आगे से सतरोल खाप में इस विधान को कैसे चलाया जायेगा, इस पर कोई विचार नहीं आया| हालाँकि नहीं आया तो यही समझा जा सकता है कि माता के गोत्र को भी छोड़ा जाना जारी रहेगा; लगता है खाप ने इसको "गोत्र" के अंदर ही समावेशित रखा है|

    5) लड़कियां ज्यादा होती तो इस फैसले का असर सकारात्मक रहता: सतरोल खाप इस मुद्दे से लड़कियां कम होने के दंश (ध्यान देने की बात है कि पिछले 110 साल के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 1901 में हरयाणा में लिंग-अनुपात सबसे कम था जो कि तब की अपेक्षा आज तो बढ़ा ही है, घटा नहीं) को कैसे धोती दिखना चाहती है अगर यह निर्णय इस समस्या के हल हेतु लिया गया है तो?

    हाँ अगर लड़कियां ज्यादा होती तो यह दंश जरूर धुल जाता क्योंकि फिर संख्या में ज्यादा होने से जो लड़कियां कुंवारी रहती उनको खाप के अंदर ही दूल्हे मिल जाते|
    और अगर कोई यह कहता हो और खुद को स्याना समझता हो कि इससे लड़कों को पास में ही दुल्हनें मिल जाएँगी, तो इससे समस्या तो हल नहीं हुई? क्यों हल नहीं हुई, क्योंकि हिन्दू धर्म में बहु-पत्नी प्रथा तो है नहीं| तो ऐसे में एक दूल्हे के लिए एक ही दुल्हन होती है| अब फर्क सिर्फ इतना पड़ेगा कि जो दुल्हन 20-30 कोस दूर जा के मिलती थी अब वो 20-30 कोस पास मिल जाएगी| और जो पास वाली से शादी कर लेगा, तो इस फैसले के लागू रहते उसे जो दूर वाली मिलनी थी वो किसी और को मिलेगी| यानि जहाँ दूल्हे अपनी खाप के अंदर से ही दुल्हनें लेंगे, वहीँ वो दुल्हनें दूसरों को चली जाएँगी जो उनको बाहर से मिलती| तो दुल्हनों की उपलब्धिता तो उतनी ही रहेगी?

    और इस फैसले से ना ही लड़कियों के माँ-बाप के जो एक स्वैच्छिक आदर्श दामाद ढूंढने के पैमाने होते हैं वो बदलने वाले| यानी जो संभावित दामाद इस फैसले के होने से पहले नकारे जाते थे वो आगे भी नकारे जाते रहेंगे| तो इस फैसले से धरातलीय सूरत कितनी बदलेगी, इस पर कोई स्पष्टता व् दूरदर्शिता नजर नहीं आई|

    6) सिर्फ अंतर्जातीय विवाहों को वैधानिक मान्यता देने के साहसिक व् खुले दिल के निर्णय के अलावा फिलहाल इसमें ज्यादा ख़ुशी मनाने जैसा कुछ नहीं: खापों में अंतर्जातीय-विवाह व् प्रेमविवाह पहले से होते आये हैं, परन्तु अधकारिक घोषणा पहले नहीं थी| आज भी खापलैंड के हर गाँव में दो-चार, दो-चार (कहीं-कहीं तो दहाई के आंकड़े में) ऐसे वैवाहिक जोड़े विद्यमान हैं जिन्होनें या तो प्रेम विवाह किये या फिर अंतर्जातीय विवाह किये| लेकिन क्योंकि हिन्दू धर्म की वर्ण-व्यवस्था की खाई इतनी गहरी रही है कि ऐसे विवाहों को कम सम्मान व् मान्यता की दृष्टि से देखा जाता आता रहा गया है| उम्मीद है कि सतरोल खाप द्वारा इन विवाहों को ले आधिकारिक मान्यता की घोषणा से अब यह तस्वीर बदलेगी और इन विवाहों को भी वही सम्मान (याद रहे सम्मान, वर्ना जैसे कि ऊपर कहा ऐसे विवाह होते पहले से आये हैं) मिलेगा जो कि एक सामान्य विवाह को मिलता है|


    7) असली चोट इन पर होनी चाहिए थी:

    1) खापों को अब फिर से आधिकारिक तौर पर दहेज़ लेने-देने वालों के सामाजिक बहिष्कार की अपनी पुरानी परम्परा को सख्ती से लागू करने की घोषणा करनी चाहिए थी| पुराने जमाने में खापों में रीत होती थी कि अगर दूल्हा या दुल्हन पक्ष में से किसी ने भी 101 ((शायद 1 रूपये का नियम होता था) रूपये से ज्यादा का रिश्ता किया तो समारोह में उपस्थित लोग ना सिर्फ इसका बहिष्कार करते थे अपितु पंडाल छोड़कर चले जाते थे|
    2) शहरों में जितनी भी गैर-कानूनी अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे या गर्भपात सम्बन्धी मशीनें अथवा डॉक्टर हैं उन पर नकेल कसने की आधिकारिक घोषणा करनी चाहिए थी|
    3) जितने भी डॉक्टर वैधानिक होते हुए भी कन्या-भ्रूण हत्या जैसे कृत्यों में संलिप्त पाये जाते हैं, उनके विरुद्ध सामाजिक बहिष्कार के साथ-साथ उन पर अपराध साबित होने पर उनकी प्रैक्टिस ना चलने देने की घोषणा होनी चाहिए थी|
    4) खापों के पुराने नियमों के अनुसार औरत को उसके प्रॉपर्टी सम्बन्धी अधिकार सुनिश्चित व् सुरक्षित करने की घोषणा कम से कम (यानी इतना तो जरूर होना चाहिए था) होनी चाहिए थी| इस बारे खापों के क्या नियम रहे हैं उस हेतु यह लेख पढ़ें: http://www.nidanaheights.com/choupal-property.html
    5) युवाओं की यौन-सम्बन्धी समस्याओं को कैसे हल किया जाए, इस पर मंत्रणा होनी चाहिए थी|
    6) मीडिया व् सिनेमा में हरियाणवी समाज के संस्कारों व् संस्कृति का सही प्रदार्पण हो, इसको कैसे सुनिश्चित किया जाए, इस पर मंत्रणा होनी चाहिए थी|
    7) हालाँकि खाप इस पर पहले से घोषणा कर चुकी हैं पर फिर से इसको दोहराया जाना चाहिए था कि 'हॉनर किलिंग को खाप स्वीकार नहीं करती'|
    8) दूसरे राज्यों से जो दुल्हनें खरीद कर लाई जा रही हैं, उसके लिए घोषणा की जाती कि आज के बाद कोई भी दुल्हन खरीद के नहीं अपितु उसी मान-सम्मान से ब्याह के लाएगा, जिस सम्मान के साथ कि स्थानीय ब्याह होते हैं| ताकि उन दुल्हनों को सैंकड़ों मील दूर आने पर सम्मान भी मिलता और अपनापन भी| और सबसे बड़ा उनके हृदय से "मोल की" कही जाने वाला दर्द ख़त्म होता|

    चलते-चलते: अगर खापें बिंदु 7 में रखी गई 8 बातों पर सख्त हो जाएँ तो सदियों पुरानी परम्पराओं को कम से कम तोड़ने की जरूरत पड़े| अन्यथा सिर्फ यह कहने मात्र को कि, "देखो हमने 700 साल पुरानी परम्परा को तोड़ दिया और हम आधुनिक हो गए या जमाना हमको आधुनिक समझे या अब हम आधुनिक समझे जायेंगे", यह इतना ही थोथा साबित होगा जितना कि ऊपर की गई विवेचना में निकल कर आई सच्चाई|

    Phool Kumar Malik
    Last edited by phoolkumar; April 24th, 2014 at 07:10 PM.
    One who doesn't know own roots and culture, their social identity is like a letter without address and they are culturally slave to philosophies of others.

    Reunion of Haryana state of pre-1857 is the best way possible to get Jats united.

    Phool Kumar Malik - Gathwala Khap - Nidana Heights

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    krishanpal (April 24th, 2014), skharb (April 24th, 2014)

  6. #24
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    Quote Originally Posted by phoolkumar View Post
    There are several Gotras; out of the type of khaps i.e. Gotra based and Regional and territorial agreement based, Satrol falls under the later category.
    only uglan tapa out of four tapa belongs to kharb gotra .......................petwar tapa historically bada bhai mana jata h satrol khap m.
    satrol khap inn four tappa s h na ki ye tape satrol khap s..............aise baat karne s pahle sab tappo ki sahmati jarroi h jo iss panchyat k pas nahi thi
    aise faslo ko lane k liye tolhe tak ki sahmati jarroi hoti h............
    Last edited by skharb; April 24th, 2014 at 09:07 PM.

  7. #25
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    Quote Originally Posted by DrRajpalSingh View Post
    The Satrol Khap Mahapanchayat held at Narnaund today, 24th April, 2014 has taken a few very significant decisions of far reaching importance like appointing Youth Khap wing President and Women Wing President respectively to involve the youth and the women in decision taking and implementation of the decisions in the area represented by it.
    ye panchyat manyata prapat nahi h satrol khap ki khali love commando force h media k sahyog s
    2 din pahle subedar inder singh ko with team khap ki taraf se koi bhi baat kahne s mana kar diya tha ...........big satol khap panchyat karke
    arr ye pardhan bhi nahi h khap k aaj k din........................per pata nahi kyu dramebaji kar rahe h ...........

  8. #26
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    rajniti kitni down market ho sakete h ........................jin jat bhaiyeyo n narnaund m jat k namm per vote diye h wo hi samajh sakte h iss baat ko
    hindu muslim na mily too ..........................tappa k naam p ladwao jatta n arr apni dukan jamahay rakho
    Last edited by skharb; April 25th, 2014 at 07:41 PM.

  9. #27
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    jat samaj k liye positive wind apne childs ko pada likha k lyk banana h...........na ki in batto m ulzahna.
    sahri jatto k liye ye positive wind ho sakti h ......per gaon k jatto k liye ye disaster h !!

  10. #28
    Quote Originally Posted by phoolkumar View Post
    सतरोळ खाप के फैसले के मायने:

    1) खाप को यह फैसला करने से पहले सर्वजातीय-सर्वखाप के मुख्यालय गाँव सोहरम, जिला मुज़फ्फरनगर, उत्तरप्रदेश के खाप-मंत्रियों व् पदाधिकारियों से इस बारे क्या पत्राचार या विचारों का आदान-प्रदान किया? यह फैसला करने से पहले सर्वखाप से इस पर मंत्रणा करी या नहीं; अगर करी तो सर्वखाप मुख्यालय की क्या राय रही, इस पर अभी तक कोई बात सामने नहीं आई|

    2) कोई खाप गोत्र आधारित हो या क्षेत्रीय करार आधारित (सतरोल खाप क्षेत्रीय करार आधारित है), दोनों ही अपने अधिकार व् प्रभाव क्षेत्र के अंतर्गत फैसले लेने को स्वतंत्र रही हैं, इसलिए कुछ बातें सिर्फ एक खाप विशेष की अपनी होती आई हैं| और इस नाते सतरोल खाप ऐसे फैसले लेने को स्वतंत्र है जो सिर्फ उसके क्षेत्र को प्रभावित करते हैं| लेकिन क्योंकि यह निर्णय अन्य खापों पर भी चर्चा का विषय बनेगा और प्रभाव भी डालेगा, इसलिए भी यह करना जरूरी हो जाता है कि सतरोल खाप ने यह फैसला करते वक्त खापों के वैधानिक रास्ते को अपनाया कि नहीं| एक स्थानीय खाप के लिए जितना जरूरी अपनी स्वयत्ता प्रयोग में लाना है, उतना ही जरूरी अन्य खापों व् सर्वखाप मुख्यालय के संज्ञान में इस बात को पहुँचाना व् उनकी राय ले कर ही फैसला करना जरूरी बनता है|

    3) ‘खेड़े के गोत्र’ पर सतरोल खाप ने कोई विचार नहीं रखा| ‘खेड़े के गोत्र’ की मंत्रणा क्यों जरूरी है वह आप इस आर्टिकल से पढ़ें| http://www.nidanaheights.com/EH-gotra.html

    4) जहाँ अन्य जातियों जैसे कि पंजाबी-बनिया में सिर्फ पिता के गोत्र को ही छोड़ने की मान्यता है वहीँ खापों में स्त्री सम्मान हेतु माता व् कहीं-कहीं तो दादी-नानी तक के गोत्र भी छोड़ने की मान्यता है| यह एक ऐसा बिंदु है जो कि खापों की शैली व् थ्योरी में लिंग-समानता को दर्शाता है, यानी अगर पिता का गोत्र छूटे तो कम से कम माता का भी छूटे| इसलिए आगे से सतरोल खाप में इस विधान को कैसे चलाया जायेगा, इस पर कोई विचार नहीं आया| हालाँकि नहीं आया तो यही समझा जा सकता है कि माता के गोत्र को भी छोड़ा जाना जारी रहेगा; लगता है खाप ने इसको "गोत्र" के अंदर ही समावेशित रखा है|

    5) लड़कियां ज्यादा होती तो इस फैसले का असर सकारात्मक रहता: सतरोल खाप इस मुद्दे से लड़कियां कम होने के दंश (ध्यान देने की बात है कि पिछले 110 साल के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 1901 में हरयाणा में लिंग-अनुपात सबसे कम था जो कि तब की अपेक्षा आज तो बढ़ा ही है, घटा नहीं) को कैसे धोती दिखना चाहती है अगर यह निर्णय इस समस्या के हल हेतु लिया गया है तो?

    हाँ अगर लड़कियां ज्यादा होती तो यह दंश जरूर धुल जाता क्योंकि फिर संख्या में ज्यादा होने से जो लड़कियां कुंवारी रहती उनको खाप के अंदर ही दूल्हे मिल जाते|
    और अगर कोई यह कहता हो और खुद को स्याना समझता हो कि इससे लड़कों को पास में ही दुल्हनें मिल जाएँगी, तो इससे समस्या तो हल नहीं हुई? क्यों हल नहीं हुई, क्योंकि हिन्दू धर्म में बहु-पत्नी प्रथा तो है नहीं| तो ऐसे में एक दूल्हे के लिए एक ही दुल्हन होती है| अब फर्क सिर्फ इतना पड़ेगा कि जो दुल्हन 20-30 कोस दूर जा के मिलती थी अब वो 20-30 कोस पास मिल जाएगी| और जो पास वाली से शादी कर लेगा, तो इस फैसले के लागू रहते उसे जो दूर वाली मिलनी थी वो किसी और को मिलेगी| यानि जहाँ दूल्हे अपनी खाप के अंदर से ही दुल्हनें लेंगे, वहीँ वो दुल्हनें दूसरों को चली जाएँगी जो उनको बाहर से मिलती| तो दुल्हनों की उपलब्धिता तो उतनी ही रहेगी?

    और इस फैसले से ना ही लड़कियों के माँ-बाप के जो एक स्वैच्छिक आदर्श दामाद ढूंढने के पैमाने होते हैं वो बदलने वाले| यानी जो संभावित दामाद इस फैसले के होने से पहले नकारे जाते थे वो आगे भी नकारे जाते रहेंगे| तो इस फैसले से धरातलीय सूरत कितनी बदलेगी, इस पर कोई स्पष्टता व् दूरदर्शिता नजर नहीं आई|

    6) सिर्फ अंतर्जातीय विवाहों को वैधानिक मान्यता देने के साहसिक व् खुले दिल के निर्णय के अलावा फिलहाल इसमें ज्यादा ख़ुशी मनाने जैसा कुछ नहीं: खापों में अंतर्जातीय-विवाह व् प्रेमविवाह पहले से होते आये हैं, परन्तु अधकारिक घोषणा पहले नहीं थी| आज भी खापलैंड के हर गाँव में दो-चार, दो-चार (कहीं-कहीं तो दहाई के आंकड़े में) ऐसे वैवाहिक जोड़े विद्यमान हैं जिन्होनें या तो प्रेम विवाह किये या फिर अंतर्जातीय विवाह किये| लेकिन क्योंकि हिन्दू धर्म की वर्ण-व्यवस्था की खाई इतनी गहरी रही है कि ऐसे विवाहों को कम सम्मान व् मान्यता की दृष्टि से देखा जाता आता रहा गया है| उम्मीद है कि सतरोल खाप द्वारा इन विवाहों को ले आधिकारिक मान्यता की घोषणा से अब यह तस्वीर बदलेगी और इन विवाहों को भी वही सम्मान (याद रहे सम्मान, वर्ना जैसे कि ऊपर कहा ऐसे विवाह होते पहले से आये हैं) मिलेगा जो कि एक सामान्य विवाह को मिलता है|


    7) असली चोट इन पर होनी चाहिए थी:

    1) खापों को अब फिर से आधिकारिक तौर पर दहेज़ लेने-देने वालों के सामाजिक बहिष्कार की अपनी पुरानी परम्परा को सख्ती से लागू करने की घोषणा करनी चाहिए थी| पुराने जमाने में खापों में रीत होती थी कि अगर दूल्हा या दुल्हन पक्ष में से किसी ने भी 101 ((शायद 1 रूपये का नियम होता था) रूपये से ज्यादा का रिश्ता किया तो समारोह में उपस्थित लोग ना सिर्फ इसका बहिष्कार करते थे अपितु पंडाल छोड़कर चले जाते थे|
    2) शहरों में जितनी भी गैर-कानूनी अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे या गर्भपात सम्बन्धी मशीनें अथवा डॉक्टर हैं उन पर नकेल कसने की आधिकारिक घोषणा करनी चाहिए थी|
    3) जितने भी डॉक्टर वैधानिक होते हुए भी कन्या-भ्रूण हत्या जैसे कृत्यों में संलिप्त पाये जाते हैं, उनके विरुद्ध सामाजिक बहिष्कार के साथ-साथ उन पर अपराध साबित होने पर उनकी प्रैक्टिस ना चलने देने की घोषणा होनी चाहिए थी|
    4) खापों के पुराने नियमों के अनुसार औरत को उसके प्रॉपर्टी सम्बन्धी अधिकार सुनिश्चित व् सुरक्षित करने की घोषणा कम से कम (यानी इतना तो जरूर होना चाहिए था) होनी चाहिए थी| इस बारे खापों के क्या नियम रहे हैं उस हेतु यह लेख पढ़ें: http://www.nidanaheights.com/choupal-property.html
    5) युवाओं की यौन-सम्बन्धी समस्याओं को कैसे हल किया जाए, इस पर मंत्रणा होनी चाहिए थी|
    6) मीडिया व् सिनेमा में हरियाणवी समाज के संस्कारों व् संस्कृति का सही प्रदार्पण हो, इसको कैसे सुनिश्चित किया जाए, इस पर मंत्रणा होनी चाहिए थी|
    7) हालाँकि खाप इस पर पहले से घोषणा कर चुकी हैं पर फिर से इसको दोहराया जाना चाहिए था कि 'हॉनर किलिंग को खाप स्वीकार नहीं करती'|
    8) दूसरे राज्यों से जो दुल्हनें खरीद कर लाई जा रही हैं, उसके लिए घोषणा की जाती कि आज के बाद कोई भी दुल्हन खरीद के नहीं अपितु उसी मान-सम्मान से ब्याह के लाएगा, जिस सम्मान के साथ कि स्थानीय ब्याह होते हैं| ताकि उन दुल्हनों को सैंकड़ों मील दूर आने पर सम्मान भी मिलता और अपनापन भी| और सबसे बड़ा उनके हृदय से "मोल की" कही जाने वाला दर्द ख़त्म होता|

    चलते-चलते: अगर खापें बिंदु 7 में रखी गई 8 बातों पर सख्त हो जाएँ तो सदियों पुरानी परम्पराओं को कम से कम तोड़ने की जरूरत पड़े| अन्यथा सिर्फ यह कहने मात्र को कि, "देखो हमने 700 साल पुरानी परम्परा को तोड़ दिया और हम आधुनिक हो गए या जमाना हमको आधुनिक समझे या अब हम आधुनिक समझे जायेंगे", यह इतना ही थोथा साबित होगा जितना कि ऊपर की गई विवेचना में निकल कर आई सच्चाई|

    Phool Kumar Malik
    Good suggestions in Point 7 - worth consideration.

    Leaving aside other finer points/ formalities, kindly comment, if you consider the decision taken at the Khap Panchayat as a progressive step or not !
    History is best when created, better when re-constructed and worst when invented.

  11. #29
    Another move mulled over by khaps of Haryana
    http://timesofindia.indiatimes.com/i...w/34344472.cms
    -- Freedom is not worth having if it does not include the freedom to make mistakes.
    -- When you talk, you are only repeating what you already know. But if you listen, you may learn something new.

  12. #30
    Satrol Khap took a good move initially but overdid certain things that could have been avoided .

    This issue was discussed with Khap Pradhan Inder Singh of Putthi Village, a simple and noble man, earlier who wanted to relax restriction to tapa level not more than that .For example Kharbs of eight villages of Ugalan tapa are descendants of a common ancestor .Marriages between these villages (though could be in different gotr )should not have been allowed as entire land belonged to Kharb khera.

    Now some media hungry Satrol khap leaders are crossing their limits and announcing that even if parents of young couple disagree for intercaste marriage we will convince them .That was the last straw as Jats are proud of their racial background and want their children to marry in their own caste.

    I talked with Pardhan of Satrol Khap today to ask him Who gave authority to these Khap representative to make such silly announcements ? Subedar Inder Singh current Pardhan from Baas Village clarified that we have nothing to do with cast or intercaste marriage and he will ,look in to greater level restriction as per the wishes of khap tapas.

    Statement regarding intercaste marriage was made by one Captain Mahabir Singh of Bhaini village general secretary of Satrol Khap who has been warned for this not to make such announcement henceforth.(incidentally there used to be no khap general secretary earlier)


    Khap are fast loosing their traditional structure and greater acceptance as they are falling prey to media's charms ,if they continue same way soon they will loose their relevance in Jat Society.
    Last edited by narenderkharb; April 29th, 2014 at 05:31 PM.

  13. The Following 4 Users Say Thank You to narenderkharb For This Useful Post:

    DrRajpalSingh (April 30th, 2014), Prikshit (April 30th, 2014), skharb (April 29th, 2014), ssgoyat (April 29th, 2014)

  14. #31
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    ye political move tha .........isko khap panchyat samjhna hi sahi nahi h
    basic principle of jat democracy h ground level s na ki upper position s..........sarv khap never inter khap decision
    on the similar way khap not inter in tapps .........and tapa not inter in village level.........
    Last edited by skharb; April 29th, 2014 at 08:33 PM.

  15. #32
    Quote Originally Posted by narenderkharb View Post
    Satrol Khap took a good move initially but overdid certain things that could have been avoided .

    This issue was discussed with Khap Pradhan Inder Singh of Putthi Village, a simple and noble man, earlier who wanted to relax restriction to tapa level not more than that .For example Kharbs of eight villages of Ugalan tapa are descendants of a common ancestor .Marriages between these villages (though could be in different gotr )should not have been allowed as entire land belonged to Kharb khera.

    Now some media hungry Satrol khap leaders are crossing their limits and announcing that even if parents of young couple disagree for intercaste marriage we will convince them .That was the last straw as Jats are proud of their racial background and want their children to marry in their own caste.

    I talked with Pardhan of Satrol Khap today to ask him Who gave authority to these Khap representative to make such silly announcements ? Subedar Inder Singh current Pardhan from Baas Village clarified that we have nothing to do with cast or intercaste marriage and he will ,look in to greater level restriction as per the wishes of khap tapas.

    Statement regarding intercaste marriage was made by one Captain Mahabir Singh of Bhaini village general secretary of Satrol Khap who has been warned for this not to make such announcement henceforth.(incidentally there used to be no khap general secretary earlier)


    Khap are fast loosing their traditional structure and greater acceptance as they are falling prey to media's charms ,if they continue same way soon they will loose their relevance in Jat Society.
    I do not see any major changes will take place after such moves, we jats have our tradition which we follow. In extreme cases we go for intercaste and all, people still oppose it and it will follow in future as well.
    -- Freedom is not worth having if it does not include the freedom to make mistakes.
    -- When you talk, you are only repeating what you already know. But if you listen, you may learn something new.

  16. #33
    Quote Originally Posted by Prikshit View Post
    I do not see any major changes will take place after such moves, we jats have our tradition which we follow. In extreme cases we go for intercaste and all, people still oppose it and it will follow in future as well.
    Nothing can be predicted at the present time; but, some of the decisions taken by the Satrol Khap Panchayat will have surely long term impact on the social fabric of the society in general and the Jat community in particular !
    History is best when created, better when re-constructed and worst when invented.

  17. #34
    Quote Originally Posted by DrRajpalSingh View Post
    Nothing can be predicted at the present time; but, some of the decisions taken by the Satrol Khap Panchayat will have surely long term impact on the social fabric of the society in general and the Jat community in particular !
    Again it is about mindset of individuals, intercaste marriage is not a new thing introduced over here, it was done/opposed as per individual's. Khap doesn't have much stake in now or in the past.
    -- Freedom is not worth having if it does not include the freedom to make mistakes.
    -- When you talk, you are only repeating what you already know. But if you listen, you may learn something new.

  18. The Following User Says Thank You to Prikshit For This Useful Post:

    sunnytewatia (April 30th, 2014)

  19. #35
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    Quote Originally Posted by DrRajpalSingh View Post
    Nothing can be predicted at the present time; but, some of the decisions taken by the Satrol Khap Panchayat will have surely long term impact on the social fabric of the society in general and the Jat community in particular !
    sir ji .........................are you sure about this so called panchyat is satrol khap panchyat ...........ya yu hi just time pass

  20. #36
    Quote Originally Posted by skharb View Post
    sir ji .........................are you sure about this so called panchyat is satrol khap panchyat ...........ya yu hi just time pass
    If one goes by Media reports presented both by print media [news papers and electronic media-TV channels], it was Satrol Khap Panchayat in which out of four tapas three tapas agreed to the proposals brought out and one tapa had some reservations/objections regarding inter-tapas marriages in the Khap region.

    The said Khap Panchyat held not one but two meetings and also nominated a president each for its Women Wing and Youth Wing with appointment of one spokes person.

    If it was something else than Khap Panchayat of Satrol, then kindly share what it was !
    History is best when created, better when re-constructed and worst when invented.

  21. #37
    Quote Originally Posted by narenderkharb View Post
    Satrol Khap took a good move initially but overdid certain things that could have been avoided .

    This issue was discussed with Khap Pradhan Inder Singh of Putthi Village, a simple and noble man, earlier who wanted to relax restriction to tapa level not more than that .For example Kharbs of eight villages of Ugalan tapa are descendants of a common ancestor .Marriages between these villages (though could be in different gotr )should not have been allowed as entire land belonged to Kharb khera.

    Now some media hungry Satrol khap leaders are crossing their limits and announcing that even if parents of young couple disagree for intercaste marriage we will convince them .That was the last straw as Jats are proud of their racial background and want their children to marry in their own caste.

    I talked with Pardhan of Satrol Khap today to ask him Who gave authority to these Khap representative to make such silly announcements ? Subedar Inder Singh current Pardhan from Baas Village clarified that we have nothing to do with cast or intercaste marriage and he will ,look in to greater level restriction as per the wishes of khap tapas.

    Statement regarding intercaste marriage was made by one Captain Mahabir Singh of Bhaini village general secretary of Satrol Khap who has been warned for this not to make such announcement henceforth.(incidentally there used to be no khap general secretary earlier)


    Khap are fast loosing their traditional structure and greater acceptance as they are falling prey to media's charms ,if they continue same way soon they will loose their relevance in Jat Society.
    For those who do not agree that it was Satrol Khap Panchayat the post is an eye opener !

    To broaden the active participation of more and more people in the functioning of the Khap Panchayat, Subedar Inder Singh has initiated some good steps which need emulated by all the Khaps so that grass root level people could be involved in decision making.

    Yes every one has right to discuss their methodology adopted or the decisions arrived at but none can deny about its meetings !
    History is best when created, better when re-constructed and worst when invented.

  22. #38
    Many social organisations and NGOs have come forward to appeal for removal of GHOONGHAT system [covering of face with cloth in the presence of elders of the community] practised by women in different parts of Haryana. This is a timely move and must be approved and encouraged by all right thinking persons.
    History is best when created, better when re-constructed and worst when invented.

  23. #39
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    Quote Originally Posted by DrRajpalSingh View Post
    If one goes by Media reports presented both by print media [news papers and electronic media-TV channels], it was Satrol Khap Panchayat in which out of four tapas three tapas agreed to the proposals brought out and one tapa had some reservations/objections regarding inter-tapas marriages in the Khap region.

    The said Khap Panchyat held not one but two meetings and also nominated a president each for its Women Wing and Youth Wing with appointment of one spokes person.

    If it was something else than Khap Panchayat of Satrol, then kindly share what it was !
    it was rumours spread by few individuals who represented themselves infront of media persons(with help of media persons) as tapas and agreed to the proposals eg: can you consider hansraj yadav from jamawadi village as pradhan of bas tapa?
    theres only 40 to 50 yadav families in satrol khap settled later from nowhere
    so it aint possible for any yadav to be a representative of bas tapa

  24. #40
    Quote Originally Posted by skharb View Post
    it was rumours spread by few individuals who represented themselves infront of media persons(with help of media persons) as tapas and agreed to the proposals eg: can you consider hansraj yadav from jamawadi village as pradhan of bas tapa?
    theres only 40 to 50 yadav families in satrol khap settled later from nowhere
    so it aint possible for any yadav to be a representative of bas tapa
    The presence of one Yadav nominee does not invalidate all that has been done or is being done by CH. Inder Singh led Satrol Khap. Yes, he has also admitted that out of four, one Tapa leader had walked out of the meeting. But at the same time he is reported to have expressed hope that the efforts of his team will try to bring him back by convincing the dissenting people of the community to their fold.

    What is the latest position about implementation of the Satrol Khap decisions and allied matter, we are not aware !
    History is best when created, better when re-constructed and worst when invented.

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