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Thread: I was a hindu!!!!

  1. #81
    Quote Originally Posted by prashantacmet View Post
    I differ here. People are practicing it because it was given to them some day by Manusmiriti....it captured their psyche and DNA for centuries...

    Kuran says "kill the infidels"..so Islam is culprit or the ISIS?...As you keep also blaming Islam ..should I also call you a hypocrite?

    As per me it is Islam and kathmullas are the culprits because they drive the people to spread hatred for other religion
    All those muslims who believe that Quran is 100% correct = 99.99% of muslims ( muslims I have interacted in my life )

    Same way all those Hindus who believe smritis are 100% correct . You can tell me the approximate percentage. I hardly meet people who read manusmriti or keep it with them as sacred book. Even i assume that you have never read it. if yes, then u don't believe it. For me its a garbage as stated in earlier posts.

    Now you are free to call me hypocrite but try not to do the discrimination with the weakest/vulnerable sections of society first otherwise its a vicious cycle & a simple blame game.
    Last edited by RathiJi; February 5th, 2015 at 03:26 PM.

  2. The Following 5 Users Say Thank You to RathiJi For This Useful Post:

    ayushkadyan (February 5th, 2015), cooljat (February 5th, 2015), rsdalal (February 6th, 2015), sjakhars (February 6th, 2015), upendersingh (February 5th, 2015)

  3. #82
    Quote Originally Posted by abhisheklakda View Post
    chalo bhai maan liya rishi munio ne vedon ko sunaya , aur ye rishi muni brahmin the ,, ho sakta hai un rishi munio se kuch galti ho gayi ho, ho sata hai ve upsesh us jamane me sahi rahe ho, par ab ye bekar ka gyan hai...... aur mai is bekar ke gyan ke upar bahas karke apna tym barbad nahi karna chahta hu......... aapne accha kiya ki "" ved ishvar ki vani hai "ye nahi kaha .....
    vase agar aap vedo ko mante ho to bhi aap brahmino ke slave hue, aur ved sunane vale brahmin slaver hai, jinko aap aankh mudhkar follow karte ho, kuch brahmino ne kaha ki ved ka gyan ishvar ka gyan hai, aur aapne maan liya, aur ab parchar bhi kar rahe ho......
    Quote Originally Posted by amitbudhwar View Post
    Sunaye the to baad mei likhe bhi honge kisi ne. ya abhi tak sabko sub kuch yaad pada hai. kya baat karte ho bhai aap bhi.


    अरे भाई, आप तो बात को समझ ही नहीं रहे। आपने मुझे चोर कहा, मैंने आपको चोर कहा, हिसाब बराबर...लेकिन मैं सबूत ले आया और आप नहीं ला सके, तो फिर चोर (गुलाम) तो आप हुए। हिंदू जीवन शैली की यही महानता है कि यह इतनी प्राचीन है कि इसके उद्गम के बारे में किसी को नहीं मालूम। ये आप कैसे कह सकते हैं कि जिन ऋषि-मुनियों ने वेद सुनाए, वे ब्राह्मण थे? क्या मालूम दूसरे ग्रह से आए एलियन हों? क्या पता जाट हों, क्या मालूम कोई और हो? और फिर आप ये भी तो देखो कि वेदों से पहले भी हिंदू सभ्यता थी। आप तो केवल हवाई अनुमान लगा रहे हो? आपके हिसाब से तो रामायण और महाभारत को भी किसी ब्राह्मण ने लिखा होगा? वेदों को बाद में हजारों ऋषि-मुनियों ने श्लोकों के रूप में लिखवाया
    और एक बात यह कि महात्मा बुद्ध का दावा था कि उन्हें बोधि वृक्ष के नीचे दिव्य ज्ञान प्राप्त हुआ था...तो क्या आप इस बात को भी गप कहोगे? दिव्य ज्ञान...आपके हिसाब से तो यह एक बकवास बात होगी। अरे भाई आपको अभी बहुत कुछ जानने की जरूरत है। आधुनिक बनने के लिए आप तो बिलकुल ही नफरत में अंधे-बहरे हो रहे हो यार।

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    cooljat (February 5th, 2015)

  5. #83
    hahahahahahah.............
    bhai upender ye jangli sabhyata hai , jab hamare purvaj jangalon me rehte the, bhai aap to bilkul aadi yug me jana chahte hai, kuch din baad bolna ki dharti se bhi purana hai hindu dharam..........
    bhai ye adbhudgyan kaha se mila?? sayad bodhi vat ke niche mila hoga????
    aur bhai nafrat shabd meri dictinory me nahi hai......
    aur ved brahamins ne likhe hai ye vedon me hi likha hai ....sayad aapne padha nahi....
    .
    """और फिर आप ये भी तो देखो कि वेदों से पहले भी हिंदू सभ्यता थी"" bhai hasa hasa kar marega kya?? aapka dharam to harappa ki khudai me bhi nahi mila , bhai RSS factory ki history mat pdha karo, bina kisi proof ke total bakwas...

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    amitbudhwar (February 6th, 2015), singhvp (February 6th, 2015), spdeshwal (February 5th, 2015)

  7. #84
    Sometimes my wife calls me an animal... By that definition I can't even limit myself to a human being. I will have to define myself as a living being!
    There is a place in Delhi named "Rani Bagh". I say its irony at it's fullest!

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    abhisheklakda (February 6th, 2015), ayushkadyan (February 5th, 2015), DrRajpalSingh (February 8th, 2015), Prikshit (February 8th, 2015), sjakhars (February 6th, 2015)

  9. #85
    Quote Originally Posted by upendersingh View Post
    आप तो केवल हवाई अनुमान लगा रहे हो? आपके हिसाब से तो रामायण और महाभारत को भी किसी ब्राह्मण ने लिखा होगा? वेदों को बाद में हजारों ऋषि-मुनियों ने श्लोकों के रूप में लिखवाया
    और एक बात यह कि महात्मा बुद्ध का दावा था कि उन्हें बोधि वृक्ष के नीचे दिव्य ज्ञान प्राप्त हुआ था...तो क्या आप इस बात को भी गप कहोगे? दिव्य ज्ञान...आपके हिसाब से तो यह एक बकवास बात होगी। अरे भाई आपको अभी बहुत कुछ जानने की जरूरत है। आधुनिक बनने के लिए आप तो बिलकुल ही नफरत में अंधे-बहरे हो रहे हो यार।
    kya baat karte ho bhai phir se aap. kamal hai aapka. aapne khud hi maan liya ki vedd likhe gaye the. likhe gaye na finally?? are bhaijaan isliye kehta hoon. manghadant kahaniyo mei matt pado. pande kuch bhi padha ke chale jaayenge aapko aur aap wahi ratt lagate rahoge. pando ke yahi kaam hai. jaisa ki maine pehle bhi kaha tha aapko. ek baar in pando ka aap sthaan to leke dikhao. in peeth se aap in pando ko hata ke khud baitho. dekho baat banti hai ya nahi.

    pande aapka number nahi lagne dene waale. ye to pakki baat rahi.

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    abhisheklakda (February 6th, 2015)

  11. #86
    Wiki Moderator
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    Quote Originally Posted by satyeshwar View Post
    Sometimes my wife calls me an animal... By that definition I can't even limit myself to a human being. I will have to define myself as a living being!
    Fascinating indeed. Man is just 'a living being' grappling in the dark to understand self.

    Crises of self identity faced by mankind !
    History is best when created, better when re-constructed and worst when invented.

  12. #87
    Friend please be positive. There many kinds of thoughts in world . Do not be away from site.

    Quote Originally Posted by abhisheklakda View Post
    मुझे लग रहा है की ये फोरम मेरे मतलब का नहीं है, सबसे बड़ी बात तो ये की ये जाटों को धरम के नाम पर डिवाइड करता है, मई जब हिंदू था तो मुझे ये बकवास बढ़िया लगती थी, पर अब मुझे नई लगता की मुझे यहाँ अब रुकना चाहिए, क्योकि मई भगत सिंह, सर छोटूराम का अनुयायी हु , और उनकी बातों को अपने जीवन में उतारने में विश्वास करता हु , हमारे पूर्वज धोती कुरता पहनते थे जरुरी नहीं की मई भी धोती कुरता पहनू ,, हमारे पूर्वजो ने जो किया आज वो इतिहास ह , आज हम जो कर रहे ह वो कल इतिहास होगा , हमे कल को सुधारना ह, इसमें इतिहास हमारी मदद करता ह, जो गलती हमारे पूर्वजो ने की , जरुरी नहीं की हम दोहराये , हो सकता ह हमरे पूर्वजो ने कुछ गलत किया हो, जरुरी नहीं की हम भी करे,,
    अरे भाई हमे भी तो सोचने का मौका दो,भगत सिंह अगर आपकी वेबसाइट पर होता तो तुम क्या कहते,? शायद यही की तुम नास्तिक हो, तुम्हारे पूर्वज हिन्दू थे, तुम भी हिन्दू बनो, , पर आज दुनिया में भगत सिंह के करोडो पढ़ने वाले ह, उसकी सोच की दुनिया कायल ह, करतार सिंह सरभा को क्यों भूल जाते हो वो भी तो फांशी पर चढ़ गया था १९ साल की उम्र में, क्या वो भी धरम के लिए चढ़ा था?? नहीं, धरम से उसको कोई लेना देना नहीं था, क्योकि धरम का न तो नैतिकता से सम्बद्ध ह, न संस्कृति से, और कौम से तो बिलकुल भी नहीं , पर यहाँ इस फोरम पर रूढ़िवादी कट्टरपंथी सोच के लोग ज्यादा ह , कुछ तो मॉडरेटर ह, मुझे ये भी पता ह की मेरी पोस्ट जरूर डिलीट की जाएगी, पर फिर भी सोचा की एक लास्ट मैसेज छोड़ना चाहिए , ताकि मेरी इस बात पर भी कुछ विचार हो, एक सुझाव जाट इतिहासकारो को भी देना चाहूंगा की , इतिहास को ज्यादा से ज्यादा साइंटिफिक बनाने की कोशिश करे.
    धन्यवाद

  13. The Following User Says Thank You to krishdel For This Useful Post:

    abhisheklakda (February 8th, 2015)

  14. #88
    जब 1931की जनगणना हुई थी, तब सर छोटूराम ने कहा था कि वो हिन्दू नहीं हैं| चाहें तो आर टी आई लगवा के पूछ लीजिये, ओरिजिनल रिकार्ड्स में आज भी उनका धर्म "आर्य" लिखा हुआ है "हिन्दू" नहीं|


    Quote Originally Posted by upendersingh View Post


    अभिषेक लाकड़ा से मेरा कोई निजी वैर नहीं है, लेकिन इसके बावजूद मैं यह जरूर कहना चाहूंगा कि ऐसे लोग सर छोटूराम और शहीद भगत सिंह जैसे महापुरुषों के नाम पर गलत सोच को बढ़ावा दे रहे हैं। माना कि भगत सिंह ने यह कहा कि वे नास्तिक हैं, लेकिन उन्होंने खुद को कट्टर जाट/जट्ट भी कब दर्शाया? छोटू राम ने कब कहा कि वे हिंदू नहीं हैं और उन्हें केवल जाट होने पर गर्व है? वे तो गरीब-बेसहाराओं, सबके थे। अभिषेक लाकड़ा को तो केवल जाट होने का गुमान है।
    One who doesn't know own roots and culture, their social identity is like a letter without address and they are culturally slave to philosophies of others.

    Reunion of Haryana state of pre-1857 is the best way possible to get Jats united.

    Phool Kumar Malik - Gathwala Khap - Nidana Heights

  15. The Following User Says Thank You to phoolkumar For This Useful Post:

    abhisheklakda (February 9th, 2015)

  16. #89
    यह बिंदु जाटों की लाइफ का कोड ऑफ़ कंडक्ट यानी कल्चर रहे हैं:

    1) घर में लड़का होने पे "घंटी" नहीं अपितु "थाली" बजाना|
    2) "हो गया मठ", "मर गया मठ", "मार दिया मठ" की कहावत आज भी जाटों के यहां होना|
    3) सदियों से विधवा विवाह जाटों के यहां का होना|
    4) जाट बहुल इलाकों में देवदासी प्रथा का ना होना|
    5) जाट बहुल इलाकों में बदकिस्मती से सिर्फ एक वृन्दावन (हालाँकि यह आश्रम भी बंगालियों का बनवाया हुआ है, जाटों या स्थानीय लोगों का नहीं) को छोड़ कहीं भी कोई विधवा-आश्रम ना होना और विधवाओं को पुन्र-विवाह की जगह विधवा-आश्रमों में तो बिलकुल नहीं भेजने की मान्यता होना|
    6) जाट बहुत इलाको में सती-प्रथा का नगण्य होना|
    7) तलाक के बाद दूसरा विवाह ना होने तक पहले पति से जीवन-यापन का खर्च आने का चलन होना और उनसे हुई औलादों का तो पहले पति की सम्पत्ति में सामान्य औलाद की भांति हक होना|
    8) खापतंत्र वाला लोकतंत्र होना (पौराणिक गाथाओं और किस्सों से इस तंत्र का कोई कनेक्शन नहीं है| क्योंकि कनेक्शन होता और यह इनकी देन या इनके यहां मान्य होती तो इनके अनुसार यह सर्वोत्तम होती, आज अपना अस्तित्व बचाने को कोर्टों में धक्के नहीं खा रही होती|)|
    9) खाप-पंचायतों का ध्वज ओलिव ग्रीन रंग के बजाय इनके रंग जैसा होता और चिन्ह भी मोर की बजाए इनकी तरह होता|
    10) राजतंत्र के साथ-साथ, खाप-पंचायत जैसी लोकतंत्र प्रणाली का भी साथ-साथ चलते आना|
    11) हमारे यहां हुए वीरों को योद्धेय कहना (योद्धा या योद्धाओं नहीं, फर्क नोट करें)|
    12) जाटों के मूल-सिद्धांतों में मूर्ती-पूजा का ना होना| जाटों के हर गाँव के दादा खेड़ा में आज भी कोई मूर्ती नहीं है|
    13) स्व-गोत में विवाह की अनुमति ना होना| जबकि हिन्दू धर्म इसकी इजाजत देता है|
    14) गाँव-गोत-गुहांड व् इन इलाकों की छत्तीस बिरादरी की लड़की को रिस्ते के अनुसार बहन-बेटी-बुआ मानने की मान्यता होना|एक गोत के बसाये गाँवों में यह मान्यता अति प्रखर है|
    15) घर-खेत में काम करने वाले को नौकर की बजाय सीरी-साझी बुलाना और गाँव में जो रिश्ता है उसके अनुसार सम्बोधित करना ना कि उसका नाम ले के बुलाना| हमारी संस्कृति नौकर-मालिक की नहीं अपितु सीरी-साझी की है| जबकि शुद्ध हिन्दू धर्म की संस्कृति में यह नौकर-मालिक की है , सीरी-साझी की नहीं| तो यह उल्टा चलन क्यों जाटों के यहां?
    16) जाट मूलत: किसी भी प्रकार की पशु अथवा नरबलि में यकीन नहीं रखते और ना ही ऐसा करते|जबकि हिन्दू धर्म में दक्षिण भारत, बंगाल और नेपाल में कई ऐसे त्यौहार है जिनपर हिन्दू कहीं भैंस-काट्ड़े काटते हैं तो कहीं बकरे-मुर्गे| तो फिर एक जाटलैंड पर ही ऐसी बलियों का प्रचलन क्यों नहीं?
    17) जाट मूलत: शाकाहारी होते हैं और पशु-पौधों को अपना मित्र मानने की मान्यता इनके यहां है| जबकि हिन्दू धर्म तो भिन्न-भिन्न पुस्तकों में सम्पूर्ण प्रकार के प्राणियों के मांस खाने की शिक्षा देता हैं|

    अब मुझे यहां तमाम तरह के जाट यह बता दें, कि आपकी इन मूल मान्यताओं जिनका उद्गम कि सिर्फ जाट हैं, यह हिन्दू धर्म के कौनसे ग्रन्थ-पुराण या अन्य किसी धार्मिक पुस्तक में स्थान पाते हैं?

    कौनसे शंकराचार्य, आचार्य, ऋषि-महर्षि ने जाटों की इन बातों को कौनसी किताब, लेखनी, सभा, सम्मलेन में सराहा या हिन्दू धर्म का अंग बताया है|

    मेरी पोस्ट पर प्रतिउत्तर में सिर्फ उत्तर देने की औपचारिकता निभाने मात्र कमेंट मत करना, कुछ तार्किक और दार्शनिक जवाब देने वाला कोई भाई होव तो देवे|

    और क्योंकि मुझे आजतक इन बातों के जवाब नहीं मिले, इसलिए मैंने मेरा धार्मिक-आध्यात्मिक-सामाजिक पहचान पत्र बनाया है| अगले कमेंट में दाल रहा हूँ इसकी एक प्रति|

    अब किसी जाट भाई में ज्ञान-तर्क क्षमता होवे तो मुझे कन्विंस करे कि मेरे भाई आप भटके हुए हो, यह लो आपकी सारी बातों के उत्तर और कहलाओ "हिन्दू"| क्योंकि यह धर्म हमारे स्वाभिमान व् मान्यताएं, दोनों की रक्षा करता है|
    Last edited by phoolkumar; February 9th, 2015 at 12:27 PM.

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    abhisheklakda (February 9th, 2015), prashantacmet (February 9th, 2015)

  18. #90
    और क्योंकि मुझे आजतक इन बातों के जवाब नहीं मिले, इसलिए मैंने मेरा धार्मिक-आध्यात्मिक-सामाजिक पहचान पत्र बनाया है| अगले कमेंट में दाल रहा हूँ इसकी एक प्रति|

    अब किसी जाट भाई में ज्ञान-तर्क क्षमता होवे तो मुझे कन्विंस करे कि मेरे भाई आप भटके हुए हो, यह लो आपकी सारी बातों के उत्तर और बने रहो "हिन्दू"|

    One who doesn't know own roots and culture, their social identity is like a letter without address and they are culturally slave to philosophies of others.

    Reunion of Haryana state of pre-1857 is the best way possible to get Jats united.

    Phool Kumar Malik - Gathwala Khap - Nidana Heights

  19. #91
    Quote Originally Posted by phoolkumar View Post
    जब 1931की जनगणना हुई थी, तब सर छोटूराम ने कहा था कि वो हिन्दू नहीं हैं| चाहें तो आर टी आई लगवा के पूछ लीजिये, ओरिजिनल रिकार्ड्स में आज भी उनका धर्म "आर्य" लिखा हुआ है "हिन्दू" नहीं|
    Kya aapne RTI lagvake ye bat confirm kari he. He to jankari ke liye ek copy laga dijiye.
    जागरूक ती अज्ञानी नहीं बनाया जा सके, स्वाभिमानी का अपमान नहीं करा जा सके , निडर ती दबाया नहीं जा सके भाई नुए सामाजिक क्रांति एक बार आ जे तो उसती बदला नहीं जा सके ---ज्याणी जाट।

    दोस्त हो या दुश्मन, जाट दोनुआ ने १०० साल ताईं याद राखा करे

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    ayushkadyan (February 9th, 2015), cooljat (February 9th, 2015)

  21. #92
    Quote Originally Posted by phoolkumar View Post
    यह बिंदु जाटों की लाइफ का कोड ऑफ़ कंडक्ट यानी कल्चर रहे हैं:

    1) घर में लड़का होने पे "घंटी" नहीं अपितु "थाली" बजाना|
    2) "हो गया मठ", "मर गया मठ", "मार दिया मठ" की कहावत आज भी जाटों के यहां होना|
    3) सदियों से विधवा विवाह जाटों के यहां का होना|
    4) जाट बहुल इलाकों में देवदासी प्रथा का ना होना|
    5) जाट बहुल इलाकों में बदकिस्मती से सिर्फ एक वृन्दावन (हालाँकि यह आश्रम भी बंगालियों का बनवाया हुआ है, जाटों या स्थानीय लोगों का नहीं) को छोड़ कहीं भी कोई विधवा-आश्रम ना होना और विधवाओं को पुन्र-विवाह की जगह विधवा-आश्रमों में तो बिलकुल नहीं भेजने की मान्यता होना|
    6) जाट बहुत इलाको में सती-प्रथा का नगण्य होना|
    7) तलाक के बाद दूसरा विवाह ना होने तक पहले पति से जीवन-यापन का खर्च आने का चलन होना और उनसे हुई औलादों का तो पहले पति की सम्पत्ति में सामान्य औलाद की भांति हक होना|
    8) खापतंत्र वाला लोकतंत्र होना (पौराणिक गाथाओं और किस्सों से इस तंत्र का कोई कनेक्शन नहीं है| क्योंकि कनेक्शन होता और यह इनकी देन या इनके यहां मान्य होती तो इनके अनुसार यह सर्वोत्तम होती, आज अपना अस्तित्व बचाने को कोर्टों में धक्के नहीं खा रही होती|)|
    9) खाप-पंचायतों का ध्वज ओलिव ग्रीन रंग के बजाय इनके रंग जैसा होता और चिन्ह भी मोर की बजाए इनकी तरह होता|
    10) राजतंत्र के साथ-साथ, खाप-पंचायत जैसी लोकतंत्र प्रणाली का भी साथ-साथ चलते आना|
    11) हमारे यहां हुए वीरों को योद्धेय कहना (योद्धा या योद्धाओं नहीं, फर्क नोट करें)|
    12) जाटों के मूल-सिद्धांतों में मूर्ती-पूजा का ना होना| जाटों के हर गाँव के दादा खेड़ा में आज भी कोई मूर्ती नहीं है|
    13) स्व-गोत में विवाह की अनुमति ना होना| जबकि हिन्दू धर्म इसकी इजाजत देता है|
    14) गाँव-गोत-गुहांड व् इन इलाकों की छत्तीस बिरादरी की लड़की को रिस्ते के अनुसार बहन-बेटी-बुआ मानने की मान्यता होना|एक गोत के बसाये गाँवों में यह मान्यता अति प्रखर है|
    15) घर-खेत में काम करने वाले को नौकर की बजाय सीरी-साझी बुलाना और गाँव में जो रिश्ता है उसके अनुसार सम्बोधित करना ना कि उसका नाम ले के बुलाना| हमारी संस्कृति नौकर-मालिक की नहीं अपितु सीरी-साझी की है| जबकि शुद्ध हिन्दू धर्म की संस्कृति में यह नौकर-मालिक की है , सीरी-साझी की नहीं| तो यह उल्टा चलन क्यों जाटों के यहां?
    16) जाट मूलत: किसी भी प्रकार की पशु अथवा नरबलि में यकीन नहीं रखते और ना ही ऐसा करते|जबकि हिन्दू धर्म में दक्षिण भारत, बंगाल और नेपाल में कई ऐसे त्यौहार है जिनपर हिन्दू कहीं भैंस-काट्ड़े काटते हैं तो कहीं बकरे-मुर्गे| तो फिर एक जाटलैंड पर ही ऐसी बलियों का प्रचलन क्यों नहीं?
    17) जाट मूलत: शाकाहारी होते हैं और पशु-पौधों को अपना मित्र मानने की मान्यता इनके यहां है| जबकि हिन्दू धर्म तो भिन्न-भिन्न पुस्तकों में सम्पूर्ण प्रकार के प्राणियों के मांस खाने की शिक्षा देता हैं|

    अब मुझे यहां तमाम तरह के जाट यह बता दें, कि आपकी इन मूल मान्यताओं जिनका उद्गम कि सिर्फ जाट हैं, यह हिन्दू धर्म के कौनसे ग्रन्थ-पुराण या अन्य किसी धार्मिक पुस्तक में स्थान पाते हैं?

    कौनसे शंकराचार्य, आचार्य, ऋषि-महर्षि ने जाटों की इन बातों को कौनसी किताब, लेखनी, सभा, सम्मलेन में सराहा या हिन्दू धर्म का अंग बताया है|

    मेरी पोस्ट पर प्रतिउत्तर में सिर्फ उत्तर देने की औपचारिकता निभाने मात्र कमेंट मत करना, कुछ तार्किक और दार्शनिक जवाब देने वाला कोई भाई होव तो देवे|

    और क्योंकि मुझे आजतक इन बातों के जवाब नहीं मिले, इसलिए मैंने मेरा धार्मिक-आध्यात्मिक-सामाजिक पहचान पत्र बनाया है| अगले कमेंट में दाल रहा हूँ इसकी एक प्रति|

    अब किसी जाट भाई में ज्ञान-तर्क क्षमता होवे तो मुझे कन्विंस करे कि मेरे भाई आप भटके हुए हो, यह लो आपकी सारी बातों के उत्तर और कहलाओ "हिन्दू"| क्योंकि यह धर्म हमारे स्वाभिमान व् मान्यताएं, दोनों की रक्षा करता है|
    But then if Jats were Buddist why are their belief doesnt match buddist ?
    जागरूक ती अज्ञानी नहीं बनाया जा सके, स्वाभिमानी का अपमान नहीं करा जा सके , निडर ती दबाया नहीं जा सके भाई नुए सामाजिक क्रांति एक बार आ जे तो उसती बदला नहीं जा सके ---ज्याणी जाट।

    दोस्त हो या दुश्मन, जाट दोनुआ ने १०० साल ताईं याद राखा करे

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    ayushkadyan (February 9th, 2015), cooljat (February 9th, 2015)

  23. #93
    Hawa Singh Sangwan sir ki researches padhiye, "Asali Lutere Kaun" aur unki anya researches mein bhi yah baat unhonen batai hai.... aur mere khyal se jitna serious ho ke unhonen yah baat find out kari hogi, koi moorkh jat hi hoga jo unki research ko baseless bol dega.... unki research hai mera aise kahne ka base .... rest aapko aage research karni hai to uske liye kaha hai RTI lagwaiye aur niklwa lijiye!

    Quote Originally Posted by VirJ View Post
    Kya aapne RTI lagvake ye bat confirm kari he. He to jankari ke liye ek copy laga dijiye.
    One who doesn't know own roots and culture, their social identity is like a letter without address and they are culturally slave to philosophies of others.

    Reunion of Haryana state of pre-1857 is the best way possible to get Jats united.

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    abhisheklakda (February 9th, 2015)

  25. #94
    I don't know aapne "Buddhism" ko kyon daal liya is lekh mein, maine to uska jikra bhi nahin kiya but fir bhi daal liya hai to aapse jaanna chahunga ki aapne buddhism kitna padha hai?

    At least maine itna to buddhism ke baare mein jaroor jana hai ki jo yah 17 points hain inmen se most of point buddhism se mel khaate hain, jo ki is baat ka prove hai ki kabhi ek jamaane mein Buddh rahe hum Jats ne hi in manytaon ko udhar bhi banaya tha aur fir jab by force and laalach udhar se vimukh kiya gaya to hum in points ko tab bhi nahin chhod paaye.... rest aapko jyada is baare jaanna hai to please buddhism ko padh len, maine itna nahin padha hua.....

    maine jo yah 17 points likhe hain yah buddhism ke base pe ya uski reading ke base pe nahin balki jo aaj Jats ke jo parchalan hain uske base pe likha hai.... and I hope most of JL members know these points in person too as in their homes these are the idealistic jat practices.


    Quote Originally Posted by VirJ View Post
    But then if Jats were Buddist why are their belief doesnt match buddist ?
    One who doesn't know own roots and culture, their social identity is like a letter without address and they are culturally slave to philosophies of others.

    Reunion of Haryana state of pre-1857 is the best way possible to get Jats united.

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    abhisheklakda (February 9th, 2015), rskankara (February 10th, 2015)

  27. #95
    Suni sunayi baton pe hamare desh ke log visvash karna band kar de to adha bhala to apne aap ho jayega.

    Mude ki bat ye he aapke paas is bat ka na to koi sabot na hi aapne iski janch karne ki kausis kari.

    Me murkh hi sahi par aankon dekhi par visvas karta hun kanon suni par nahi.
    जागरूक ती अज्ञानी नहीं बनाया जा सके, स्वाभिमानी का अपमान नहीं करा जा सके , निडर ती दबाया नहीं जा सके भाई नुए सामाजिक क्रांति एक बार आ जे तो उसती बदला नहीं जा सके ---ज्याणी जाट।

    दोस्त हो या दुश्मन, जाट दोनुआ ने १०० साल ताईं याद राखा करे

  28. #96
    "Asali Lutere Kaun" padh lijiye!

    Quote Originally Posted by VirJ View Post
    Suni sunayi baton pe hamare desh ke log visvash karna band kar de to adha bhala to apne aap ho jayega.

    Mude ki bat ye he aapke paas is bat ka na to koi sabot na hi aapne iski janch karne ki kausis kari.

    Me murkh hi sahi par aankon dekhi par visvas karta hun kanon suni par nahi.
    One who doesn't know own roots and culture, their social identity is like a letter without address and they are culturally slave to philosophies of others.

    Reunion of Haryana state of pre-1857 is the best way possible to get Jats united.

    Phool Kumar Malik - Gathwala Khap - Nidana Heights

  29. #97
    Bhai that is not primary source. There are 1000 reference and books which claim he was Hindu and you might find some which claim he was Muslim.

    You made the statement here and onus is on you to back it up. You can put all baseless things here by refering to any writer/book.

    I personally dont care whether he was Hindu or Muslim or something else. Just doesn't want people like you and the writer you are refering to for your own agendas. He was a great person and his religion was his own choice. His religion didn't make him great his deeds did.
    Last edited by VirJ; February 9th, 2015 at 05:53 PM.
    जागरूक ती अज्ञानी नहीं बनाया जा सके, स्वाभिमानी का अपमान नहीं करा जा सके , निडर ती दबाया नहीं जा सके भाई नुए सामाजिक क्रांति एक बार आ जे तो उसती बदला नहीं जा सके ---ज्याणी जाट।

    दोस्त हो या दुश्मन, जाट दोनुआ ने १०० साल ताईं याद राखा करे

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    ayushkadyan (February 10th, 2015)

  31. #98
    mujhe meri baat kahne ke liye jo source mila wo bata diya,..... aapke according waali 1000 references mein se jara ek hi reference de dijiye jismen sir chhoturam ne khud kaha ho ki main Hindu hu?

    kya de payenge, please?

    Quote Originally Posted by VirJ View Post
    Bhai that is not primary source. There are 1000 reference and books which claim he was Hindu and you might find some which claim he was Muslim.

    You made the statement here onus is on you to back it up.
    One who doesn't know own roots and culture, their social identity is like a letter without address and they are culturally slave to philosophies of others.

    Reunion of Haryana state of pre-1857 is the best way possible to get Jats united.

    Phool Kumar Malik - Gathwala Khap - Nidana Heights

  32. #99
    Quote Originally Posted by phoolkumar View Post
    "Asali Lutere Kaun" padh lijiye!
    Very logical answer from a person seeking logical arguments from other people.
    जागरूक ती अज्ञानी नहीं बनाया जा सके, स्वाभिमानी का अपमान नहीं करा जा सके , निडर ती दबाया नहीं जा सके भाई नुए सामाजिक क्रांति एक बार आ जे तो उसती बदला नहीं जा सके ---ज्याणी जाट।

    दोस्त हो या दुश्मन, जाट दोनुआ ने १०० साल ताईं याद राखा करे

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    ayushkadyan (February 10th, 2015), cooljat (February 9th, 2015)

  34. #100
    Quote Originally Posted by phoolkumar View Post
    mujhe meri baat kahne ke liye jo source mila wo bata diya,..... aapke according waali 1000 references mein se jara ek hi reference de dijiye jismen sir chhoturam ne khud kaha ho ki main Hindu hu?

    kya de payenge, please?
    Aapke writer ne to Soniya Gandhi ko bhi jatni bata diya tha......How can you claim that Chotu Ram himself said in that book that he was not hindu. Is that book official autobiography?


    Tark se lad sakta hun bhai kutark ke aage gutne hi tek sakta hun.
    Last edited by VirJ; February 9th, 2015 at 06:09 PM. Reason: Spell
    जागरूक ती अज्ञानी नहीं बनाया जा सके, स्वाभिमानी का अपमान नहीं करा जा सके , निडर ती दबाया नहीं जा सके भाई नुए सामाजिक क्रांति एक बार आ जे तो उसती बदला नहीं जा सके ---ज्याणी जाट।

    दोस्त हो या दुश्मन, जाट दोनुआ ने १०० साल ताईं याद राखा करे

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