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Thread: गुड स्टार्ट

  1. #1

    गुड स्टार्ट

    चंडीगढ़ के गेंदबाज अजय दलाल, जिसे डिस्ट्रिक्ट में कुछ मैच खेलने क बाद साइड कर दिया गया था, उसको अॉस्ट्रेलिया में उसी खेल के दम पर डॉन ब्रैडमैन स्कॉलरशिप मिली है। 2013 में भी भारतीय क्रिकेट बोर्ड के बॉलर्स हंट में चंडीगढ़ के गेंदबाज अजय दलाल चुने गए थे। लेकिन उसके बाद भारत में तो उनके हुनर की पहचान नहीं हुई। इसके बाद यूनिवर्सिटी ऑफ फॉलंगगॉन्ग, ऑस्ट्रेलिया में बिजनेस स्टडीज के स्टूडेंट अजय दलाल को वहां पर शानदार प्रदर्शन करने के बाद दी गई है। उनका खर्च अब फाउंडेशन उठाएगी और उन्हें इसी के साथ फर्स्ट क्लास क्रिकेट में खेलने का भी मौका मिलेगा। अजय वहां अच्छा प्रदर्शन करते हैं तो वे कंगारू टीम में जा सकते हैं। अजय को ये स्कॉलरशिप दिग्गज कंगारू खिलाड़ी एडम गिलक्रिस्ट ने दी। डिस्ट्रिक्ट मैचों में भी दरकिनार होने पर अजय ऑस्ट्रेलिया पढ़ने चले गए थे। वहीं उन्हें अपना सपना सच करने का मौका मिल गया।

    लीडर्स क्रिकेट एकेडमी में कोचिंग
    अजय 2010 में क्रिकेटर बनने का सपना लिए जींद से चंडीगढ़ आए। उन्होंने गवर्नमेंट स्कूल सेक्टर-26 की लीडर्स इन क्रिकेट एकेडमी में कोचिंग शुरू की। उनके कोच राजेश पाठा थे और एकेडमी के सचिव दपिंदर सिंह छाबड़ा ने भी उन्हें हमेशा मदद की। छबड़ा के अनुसार वो एक शानदार खिलाड़ी था जो भारत के लिए महत्वपूर्ण साबित होता।

    2012 में शुरू हुई थी स्कॉलरशिप
    यूओडब्ल्यू ब्रैडमैन फाउंडेशन स्कॉलरशिप 2012 में भारत में लॉन्च हुई। जो भी भारतीय यहां पर पढ़ाई, खेल, सोशल स्किल्स और व्यवहार में अच्छा होता है उसे ये स्कॉलरशिप मिलती है। उसकी 50 प्रतिशत तक फीस माफ होती है। अजय ने कहा कि ये स्कॉलरशिप मेरे लिए अभी तक की सबसे बड़ी कामयाबी है।

    गिलक्रिस्ट बोले : चंडीगढ़ मेरे लिए खास
    गिलक्रिस्ट बोले कि अजय एक अच्छा खिलाड़ी है। वे चंडीगढ़ रीजन के हैं और इससे मुझे काफी लगाव है। मैं किंग्स इलेवन पंजाब की ओर से खेला हूं और वहीं पर टीम का होम ग्राउंड था। इस स्कॉलरशिप को इसलिए देते हैं क्योंकि सर डॉन ब्रैडमैन हमेशा कहते थे कि एक युवा को मोटीवेट करो।

    http://www.bhaskar.com/news-ep/UT-CH...68133-PHO.html

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    amitbudhwar (January 3rd, 2016), DrRajpalSingh (November 20th, 2015), hrdhaka (December 26th, 2015), neel6318 (September 29th, 2017), ssgoyat (January 1st, 2016), sukhbirhooda (December 28th, 2015)

  3. #2
    बहुत बहुत शुभ कामनाए
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    amitbudhwar (January 3rd, 2016), hrdhaka (December 26th, 2015), ssgoyat (January 1st, 2016), sukhbirhooda (December 28th, 2015)

  5. #3
    इंटरनेशनल बॉक्सर बेटा खोया तो नाती को गोद ले बना रहे चैंपियन

    एकहड्डी तोड़ पंच ऐसा भी है, जिसे आज दुनिया का बॉक्सिंग जगत भूला चुका है। भिवानी के साई सेंटर में 2006 में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद इंटरनेशनल बॉक्सर सोनू चहल की कहानी अब कागजों में दफन होती जा रही है। यह केवल उस अंतर्राष्ट्रीय बॉक्सर की ही कहानी नहीं है, बल्कि दास्तां है एक पिता के जज्बे, जुनून और जिद की। इकलौते बेटे की मौत के बाद भी हिसार के मदनहेड़ी निवासी पिता चरण सिंह चहल ने अपने सपनों काे बिखरने नहीं दिया। उन्होंने अपने गुस्से को पाला और ठान लिया कि बेशक उनका इंटरनेशनल बॉक्सर बेटा दुनिया से चला गया, लेकिन वे देश को एक स्टार खिलाड़ी जरूर देंगे। 55 वर्षीय इस पिता ने अपनी बेटी से 27 दिन के बच्चे को गोद लिया और अब उसे साेनू जैसी परवरिश देकर चैंपियन बनाने की ठान ली है। इसी परवरिश का नतीजा है कि छह वर्षीय एलेक्स ने स्कूल में एथलेटिक्स में तीन बार गोल्ड जीतकर अपने इरादे भी जाहिर कर दिए हैं। ये वही चरण सिंह चहल हैं, जिन्होंने बॉक्सिंग जगत में चल रहे फर्जी दस्तावेजों के खुलासे के लिए पूरे छह वर्ष तक आरटीआई लगाकर साई सेंटर से सबूत जुटाए।

    60 मिनट में 400 मीटर के मैदान का पांच बार लगाता है चक्कर

    बेटेकी मौत के बाद पिता ने अपने नाती एलेक्स को गोद लिया। मामा जैसा चैंपियन बनने का सपना देखने वाला एलेक्स कक्षा दूसरी का छात्र है, लेकिन मैदान पर उसका स्टार्ट-अप 400 मीटर है। चरण सिंह रोज सुबह-शाम मैदान पर एलेक्स को प्रैक्टिस कराते हैं। यह जूनियर सोनू एक घंटे में पांच बार मैदान का पूरा चक्कर लगाता है। उम्र में छोटा, लेकिन जज्बा ऐसा कि मैदान पर एलेक्स बड़े-बड़े धावकों के साथ दौड़ता है। वह कहता है, मामा की तरह वो भी टीवी पर जरूर आएगा।

    साेनू ने तीन साल में 8 इंटरनेशनल मेडल जीते

    वर्ष2001 में बॉक्सर सोनू चहल ने पहला अंतर्राष्ट्रीय मेडल जर्मनी में जीता। इसके बाद वह रोमानिया, उजबेकिस्तान, दिल्ली, दुबई, रुस और अंत में जर्मनी में सबसे आगे रहा। वहीं 11 बार नेशनल चैंपियन बनने वाला सोनू चहल 57 60 किग्रा भारवर्ग में खेलता था। वहीं, एलेक्स भी अपने मामा के नक्शे कदमों पर चलते हुए 6 वर्ष की उम्र में ही स्कूल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर मेडल जीतने लगा है। मिलाथा हड्*डी तोड़ का खिताब : इंटरनेशनलबॉक्सर 18 वर्षीय सोनू चहल ने साई में रहते हुए अपनी प्रतिभा को निखारा और छह माह में ही उसे इंटरनेशनल लेवल पर हड्डी तोड़ पंच का खिताब भी मिल गया। उस समय विशेषज्ञों ने उसके स्वर्णिम भविष्य का पहले ही ऐलान कर दिया था, लेकिन वर्ष 2006 में रहस्यमय परिस्थितियों में उसका शव फंदे पर झूलता मिला। अब यह केस हत्या और आत्महत्या के बीच झूलकर रह गया है।

    {2006 में संदिग्ध हालात में हुई बेटी की मौत तो 27 दिन के नाती को फौलाद बनाने की ठानी

    {खुद करवाते हैं प्रैक्टिस, एथलेटिक्स में 6 वर्षीय एलेक्स दिखाने लगा है कमाल

    एलेक्स को ट्रेनिंग देते हुए चरण सिंह चहल।

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    amitbudhwar (January 3rd, 2016), DrRajpalSingh (December 21st, 2015), hrdhaka (December 26th, 2015), ssgoyat (January 1st, 2016), sukhbirhooda (December 28th, 2015), vishalsunsunwal (January 4th, 2016)

  7. #4
    Wish best of achievements for the rising sports star !!!
    History is best when created, better when re-constructed and worst when invented.

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    hrdhaka (December 26th, 2015), kannumix (December 23rd, 2015), sukhbirhooda (December 28th, 2015)

  9. #5
    सोनीपत(हरियाणा)। सोनीपत का एक पहलवान पहलवानी की पहचान को उस अंदाज में दुनिया को दिखाने जा रहा है जिसकी धमक अभी तक दि ग्रेट खली के रूप में ही नजर आई थी। लेकिन अब सतेंद्र डागर बड़े-बड़े फाइटरों से लड़ते हुए नजर आएंगे। तीन बार हिंद केसरी बन चुके सतेंद्र अब दिल्ली में 15 जनवरी को होने वाली वर्ल्ड रेसलिंग एंटरटेनमेंट (डब्ल्यूडब्ल्यूई) की फाइट में चुनौती पेश करेंगे।

    आयोजकों की ओर से मंगलवार को उनके नाम को हरी झंडी दिखाई गई। जून से लेकर अभी तक सतेंद्र अमेरिका में खुद को इस फाइट के लिए तैयार कर रहे थे।

    किसी से भी हो जाए फाइट मैं तैयार हूं
    मेरी ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है। हालांकि, मुकाबले में यह अभी तय नहीं हुआ कि मेरी फाइट किससे होगी, लेकिन मैं किसी से भी मुकाबले के लिए तैयार हूं, फिर सामने चाहे चैंपियन अंडरटेकर ही क्यों न हो। सतेंद्र डागर

    फाइट को लेकर चिंतित था परिवार
    फाइट को लेकर परिवार में कुछ चिंता थी, क्योंकि इसमें मारधाड़ अधिक है। हालांकि, अमेरिका में लगातार ट्रेनिंग लेने के कारण परिजन भी अब आश्वस्त हैं।

    http://www.bhaskar.com/news-ep/HAR-S...03109-PHO.html


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    amitbudhwar (January 3rd, 2016), AryanPoonia (January 1st, 2016), hrdhaka (December 26th, 2015), ssgoyat (January 1st, 2016), sukhbirhooda (December 28th, 2015)

  11. #6
    कुश्ती,एथलेटिक्स, कबड्*डी और बैडमिंटन जैसे खेलों में अग्रणी रोहतक जोन के खिलाड़ियों ने अब शूटिंग में भी धाक जमाना शुरू कर दिया है। भाजपा नेता बलराज कुंडू के पुत्र विश्वा ने हाल ही में राजस्थान के जयपुर में राष्ट्रीय जूनियर शॉटगन चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीत इसे साबित कर दिखाया है। शुक्रवार को विश्वा के शहर आगमन पर जबरदस्त काफिला निकाला गया। तिलियार लेक से लेकर भिवानी स्टैंड सहित शहर के तमाम रास्तों से गुजरने वाले काफिला को देख हर कोई 15 वर्षीय विश्वा की उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहा था। ‘दैनिक भास्कर’ से विशेष बातचीत में विश्वा ने कहा कि डेढ़ वर्ष पहले गुड़गांव निवासी दोस्त से इंस्पायर होकर उसने शॉटगन थामी। पहले स्टेट और फिर नेशनल इसी बीच विश्वा ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भी दो सिल्वर मेडल पर कब्जा किया है। चंद माह की प्रैक्टिस में ही शीर्ष स्तर की प्रतियोगिताओं में जीत हासिल करने वाले विश्वा के हौसले बुलंद हैं। 25 जनवरी से नई दिल्ली में होने जा रहे भारतीय टीम के ट्रायल के लिए उसने दम भरना शुरू कर दिया है।

    पापा का सपना देश के लिए लाऊं मेडल

    विश्वाकहते हैं, ‘पापा का सपना है कि मैं विदेशों से देश के लिए मेडल लेकर आंऊ। इस सपने को पूरा करने का वक्त भी नजदीक है। इसलिए अब मेरा पूरा ध्यान इंडियन टीम के ट्रायल पर है।’ उन्होंने उम्मीद जताई है कि वे टीम में जगह बनाकर ही रहेंगे। बता दें कि विश्वा आठवीं कक्षा से शॉटगन की प्रैक्टिस नई दिल्ली में कर रहे हैं। वे बसंतकुंज स्थित जीडी गोयनका स्कूल में 10वीं के छात्र हैं। कोच पीएस सोडी उरुसतम के मार्गदर्शन में विश्वा शूटिंग के गुर सीख रहा है। इससे पहले विश्वा ने फिनलैंड में हुई अंतर्राष्ट्रीय चैंपियनशिप में दो सिल्वर दिल्ली में हुई स्टेट चैंपियनशिप में जीत हासिल की है।

    रोहतक. जयपुरसे राष्ट्रीय जूनियर शॉटगन चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीत कर लौटे खिलाड़ी विश्वा के स्वागत में निकलता काफिला।

    शहर के खिलाड़ियों के लिए

    प्रेरणा बना चैंपियन

    20दिसबंर को संपन्न हुई राष्ट्रीय जूनियर शॉटगन चैंपियनशिप में हरियाणा से भाली आनंदपुर निवासी विश्वा कुंडू ने शानदार प्रदर्शन दिखाते हुए पहली बार जिले को मेडल दिलाया। अभी तक दिल्ली से सटा इलाका शूटिंग को लेकर प्रसिद्ध था, लेकिन अब रोहतक के खिलाड़ियों में भी इसके प्रति दिलचस्पी बढ़ी है। विश्वा के कारण शहर के खिलाड़ी भी इस खेल की ओर प्रेरित हो रहे हैं। भाजपा नेता बलराज कुंडू ने अपने बेटे की उपलब्धि पर अठगामा पंचायत भवन को एक लाख मोखरा गऊशाला को पचास हजार रुपए दान दिए। इस अवसर पर मास्टर धर्मपाल सिंह, जिले सिंह कुंडू, समुंद्र सिंह, कर्मवीर, परमवीर टेकना, राजेश कौशिक, मोती सिंह, पन बल्हारा, मुकेश कटारिया, रघुबीर सिंह युवा एकता मंच बहु अकबरपुर की तरफ से भी खिलाड़ी का स्वागत किया गया।

    http://www.bhaskar.com/news/HAR-ROH-...90546-NOR.html

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    amitbudhwar (January 3rd, 2016), hrdhaka (December 26th, 2015), sukhbirhooda (December 28th, 2015), vishalsunsunwal (January 4th, 2016)

  13. #7
    रेसलिंग जैसे खेल में लड़कियों का होना ही बड़ी बात है। और फिर कोई लड़की यदि अखाड़े में लड़कों को पटखनी दे तो क्या कहना। ऐसी ही कुछ कहानी है यूपी के सलावा गांव की पहलवान दिव्या ककरान की। 17 साल की दिव्या अखाड़े में लड़कों से ना सिर्फ फाइट करती हैं, बल्कि उन्हें धूल भी चटाती हैं।बता दें कि इन दिनों भारत में चल रही वक्त प्रो-रेसलिंग लीग में इंडिया के रेसलर्स अपना टैलेंट दिखा रहे हैं। खासकर फोगाट बहनों ने शानदार प्रदर्शन किया है।
    क्यों अलग हैं दिव्या
    * यूं तो भारत में गीता फोगाट और बबिता कुमारी जैसी रेसलर हैं, लेकिन दिव्या उनसे अलग हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि दिव्या लड़कों से फाइट करने के लिए मशहूर हैं।
    * वो अब तक कई लड़कों को अखाड़े में हरा चुकी हैं। मजबूत कंधे और माथे पर बिखरे बाल के कारण दिव्या दिखने में भी लड़कों जैसी ही लगती हैं।
    भाई को देखकर सीखा
    * दिव्या के पिता रेसलर नहीं बन सके इसलिए उन्होंने अपने बेटे देव को ये खेल सिखाया।
    * बड़े भाई को बचपन से ही दिव्या ने इस खेल में देखा। खुद भी अखाड़े के बाहर खड़ी होकर घंटों उन्हें देखा करती थीं।
    * 8 साल की उम्र से ही इस खेल में दिव्या का मन लगने लगा। लेकिन उनका टैलेंट तब सामने आया जब 2010 में उन्होंने एक लड़के को हराया।
    ऐसे शुरू हुआ सफर
    * 1990 के दशक में दिव्या के पिता सूरज कुश्ती में करियर बनाने के लिए दिल्ली आए थे, लेकिन सफलता नहीं मिली।

    * कुछ समय बाद सूरज गांव लौट गए। शादी की और दूध बेचने का बिजनेस शुरू किया। जल्द ही ये बिजनेस भी फेल हो गया।
    * पत्नी और दो बच्चों के साथ सूरज फिर ईस्ट दिल्ली के गोकुलपुर लौटे। नया बिजनेस डाला।
    * पत्नी संयोगिता लंगोट (कुश्ती में पहनी जाने वाली ड्रेस) सिलने का काम करने लगीं। सूरज इसे दंगल में बेचा करते थे।
    * पांच साल की दिव्या अपने भाई के साथ अखाड़ा जाती थीं। एक कोने में बैठकर दिव्या रेसलर्स के मूव को कॉपी करती थीं।
    2010 से शुरू हुई ट्रेनिंग
    * दिल्ली के रेसलर राजुकमार गोस्वामी के बेटे अशोक ने साल 2010 से दिव्या को ट्रेनिंग देनी शुरू की।


    * इसके पहले तक दिव्या एक सेशन में 2000 बैठक तक कर लेती थीं।
    * हालांकि, अशोक के लिए दिव्या को ट्रेनिंग देना आसान नहीं था। कई लोगों ने इसका विरोध किया।
    * 2011 में स्कूल नेशनल्स इवेंट में दिव्या ने पहला गोल्ड मेडल जीता।
    पहली बार लड़के से लड़ीं दिव्या
    * 2010 में यूपी के गांव में एक दंगल टूर्नामेंट था, लेकिन इसमें दिव्या को खेलने का मौका नहीं मिला।



    * इससे गुस्साए उनके पिता सूरज ने ऑर्गनाइजर्स ने कहा कि उनकी बेटी किसी भी लड़के से फाइट कर सकती है।
    * तब भीड़ से पूछा गया कि क्या कोई लड़का इस लड़की से लड़ना चाहता है। भीड़ से एक लड़का सामने आया।
    * लड़की को कमजोर मानते हुए लड़के के पिता ने इस फाइट पर 500 रुपए का प्राइज रखा।
    * फाइट शुरू होने के कुछ मिनटों में ही दिव्या ने ऐसे-ऐसे मूव्स दिखाए कि लड़का चित हो गया और इस तरह दिव्या ने पहले लड़के को हराया।
    * लड़के के पिता के 500 रुपए के अलावा तब दिव्या को वहां मौजूद लोगों ने भी अवॉर्ड के रूप में पैसे दिए।
    * इसके बाद दिव्या के पिता ने उन्हें प्रोफेशनल रेसलर के तौर पर ट्रेनिंग दिलानी शुरू की।
    भाई ने छोड़ी रेसलिंग
    * दिव्या में टैलेंट को देखते हुए दिव्या के भाई देव ने अपना स्कूल और खेल छोड़ दिया।




    * पिता के लिए घर में दो रेसलर्स को तैयार करना आसान नहीं था।
    * दिव्या के टैलेंट को देखते हुए भाई ने रेसलिंग छोड़ दी और बहन के करियर पर फोकस किया।
    दिव्या के अवॉर्ड्स
    * 2013 में अंडर-17 एशियन कैडेट चैम्पियनशिप के लिए सिलेक्ट हुईं और सिल्वर मेडल जीता।





    * 2014 में एशियन कैडेट रेसलिंग चैम्पियनशिप में गोल्ड जीता।
    * जुलाई 2015 में जूनियर एशियन रेसलिंग चैम्पियनशिप में चार मेडल जीते।
    * अगस्त 2015 में जूनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैम्पियनशिप में भारतीय दल को लीड किया।
    http://www.bhaskar.com/news-ep/SPO-O...05249-PHO.html






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    amitbudhwar (January 3rd, 2016), sukhbirhooda (December 28th, 2015), vishalsunsunwal (January 4th, 2016)

  15. #8
    हिसार (हरियाणा) के छोटे-से गांव घिराए के किसान की बेटी स्वीटी बुरा फरवरी, 2016 में होने वाले ओलिंपिक बॉक्सिंग क्वालिफायर के लिए पसीना बहा रही हैं। ये वही बहादुर लड़की है, जो कभी हट्टे-कट्टे लड़कों से भी भिड़ जाती थी। आज स्वीटी बुरा वर्ल्ड रैंकिंग में दूसरे नंबर पर हैं।

    आर्थिक रूप से कमजोर पिता ने नेगेटिव प्रेशर के बावजूद कैसे बनाया बॉक्सर...


    छोटा किसान होने के कारण पिता महेंद्र सिंह बुरा की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। बेटी बॉक्सर बनना चाहती थी। गांव के लोग और रिश्तेदार विरोध में थे। ऐसे में पिता ने बेटी का साथ दिया। गांव वाले पिता पर भी ताने मारते, लेकिन उन्होंने इसकी परवाह नहीं की और बेटी को हिसार बॉक्सिंग प्रैक्टिस के लिए भेजा। मेहनत जल्द रंग लाई। 2009 में बेटी ने 3 महीने के भीतर स्टेट लेवल पर गोल्ड मेडल जीत पिता का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया।

    किन्हें देती हैं सक्सेस का क्रेडिट?
    - हेमलता सिंह बगड़वाल (कोच): जब भी नेशनल लेवल के लिए सिलेक्शन नहीं होता कहती- तुम्हारा लेवल बड़ा है, हारो मत।
    - राज सिंह (कोच): गजब का कॉन्फिडेंस दिया। हमेशा कहते हैं तुम जो चाहो कर सकती हो। तुममे है दम।
    - अनूप कुमार (कोच): नेशनल-इंटरनेशनल इवेंट्स के दौरान जबरदस्त सपोर्ट। हमेशा पॉजिटिव सलाह से कॉन्फिडेंस बढ़ाया।

    - महेंद्र सिंह (पिता): हमेशा सपोर्ट किया। कोई कुछ भी कहे मेरा साथ दिया। उन्हीं की बदौलत आज मैं यहां तक पहुंच सकी।
    - संजय कुमार (कोच): फिलहाल इनके अंडर में कर रही तैयारी। भिवानी साई सेंटर में हैं कोच।

    12 KM डेली चलाती थी साइकिल
    - 2009 में जब मैंने बॉक्सिंग ज्वॉइन किया तो उम्र सिर्फ 15 साल थी। उससे पहले कबड्डी खेलती थी।
    - जाट सीनियर सेकंड्री स्कूल में पढ़ती थी, वहां से प्रैक्टिस सेंटर 6km था। प्रैक्टिस के लिए रोज 12km साइकिल चलाना पड़ता था।
    - 2009 में पहले बॉक्सिंग ट्रॉयल में अपोनेंट सोनिया से काफी मार पड़ी। काफी समय से ट्रेनिंग ले रही सोनिया एकतरफा भारी पड़ रही थी।
    - बाउट के अंतिम राउंड के दौरान भाई मंदीप के चिढ़ाने पर आया गुस्सा और एक ही पंच में कर दिया चित। हुआ जूनियर लेवल पर सिलेक्शन।
    - ऑल इंडिया लेवल पर लगातार 5 बार चैम्पियन बनने का रिकॉर्ड। फिलहाल साई सेंटर में कर रही प्रैक्टिस। ओलिंपिक क्वालिफायर है निशाने पर।

    http://www.bhaskar.com/news-ep/SPO-O...9698-PHO.html?

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    amitbudhwar (January 3rd, 2016), DrRajpalSingh (January 4th, 2016), sukhbirhooda (January 3rd, 2016), vishalsunsunwal (January 3rd, 2016)

  17. #9
    **********
    Last edited by amitbudhwar; February 18th, 2016 at 03:45 PM.

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    kannumix (January 20th, 2016)

  19. #10
    भोत बढ़िया भाई

    Quote Originally Posted by amitbudhwar View Post

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    neel6318 (September 29th, 2017)

  21. #11
    Har Har Modi, Ghar Ghar Modi.

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    neel6318 (September 29th, 2017), vijaypooniya (July 7th, 2016)

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