Akhil Bharatiya Kisan Rana Mela Gwalior

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महाराजा भीमसिंह राणा

अखिल भारतीय किसान राणा मेला ग्वालियर दुर्ग पर प्रत्येक वर्ष चैत्र मास की रामनवमी के दिन आयोजित किया जाता है। यह आयोजन सन 1756 वीं ईसवी में ग्वालियर किले की तलहटी में एक छद्म युद्व में महाराजा भीमसिंह राणा का बलिदान हुआ था और ग्वालियर किले पर ही चैत्र मास की रामनवमी को उनका अन्तिम संस्कार हुआ था जहां महाराजा भीमसिंह राणा की समाधि (छत्री) बनी हुई है, वहीं यह आयोजन होता है।

महाराजा भीमसिंह राणा

महाराजा भीमसिंह राणा महाराजा होते हुए भी मूल रूप से किसान एवं किसानों के हितचिंतक थे। अत : यह ऋद्धांजलि समारोह स्वत: ही अखिल भारतीय किसान राणा मेला का रूप लेता चला गया । आज देश के कोने - कोने से किसान और किसान हितैषी नेता यहां ऋद्धांजलि देने पधारते हैं। अब यह आयोजन हमारे इतिहास का एक पृष्ठ बन चुका है। हम सबके लिए यह गर्व की बात है। अखिल भारतीय किसान राणा मेला ग्वालियर दुर्ग म.प्र. एवं ऋद्धांजलि समारोह विगत 33वर्षों से निरन्तर सफलता पूर्वक आयोजित होता रहा है।

महाराजा भीमसिंह राणा की समाधि (छत्री)

महाराजा भीमसिंह राणा ने वर्ष 1754 ई. में ग्वालियर के किले में एक ऐतिहासिक तालाब, जिसको भीमताल कहा गया है, बनवाया था. उनकी मृत्यु के बाद उनके उत्तराधिकारी महाराजा छत्र सिंह राणा ने भीमताल के किनारे एक सुंदर छतरी का निर्माण कराया था. इसी स्थान पर जाट समाज कल्याण परिषद ग्वालियर द्वारा प्रति वर्ष रामनवमी के दिन अखिल भारतीय किसान राणा मेला का आयोजन किया जाता है.

किसान राणा मेला में पधारने वाले महत्वपूर्ण लोग

अभी तक जो जानी - मानी हस्तियों ने किसान राणा मेला में पधारकर महाराजा भीमसिंह राणा की छत्री पर ऋद्धांजलि अर्पित की है , एवं अपने विचारों से दूर - दराज से आये किसानों को लाभान्वित किया है, उनमें कुछ विभूतियां ये हैं -

महाराजा भीमसिंह राणा की मूर्ति
  • अनेक विधायक एवं जाट संस्थाओं के अध्यक्ष

महाराजा भीमसिंह राणा की मूर्ति

महाराजा भीमसिंह राणा की आदमक़द मूर्ति जेल-रोड़ पर ग्वालियर में 28 मार्च 2015 को स्थापित की गई थी.

संपर्क सूत्र

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