Ahmadabad

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Author:Laxman Burdak, IFS (Retd.), Jaipur
Ahmedabad district map

Ahmadabad or Ahmedabad is the former capital of Gujarat. Its ancient name was Asáwal (असावल).[1] or "Yessawal" [2][3]

Variants

  • Asawal/ Asáwal (असावल)
  • Ahmedabad (अहमदाबाद) (गुजरात) (AS, p.55)
  • Asavala असावल (गुजरात) (AS, p.52)
  • Ashapalli (आशापल्ली) = असावल (AS, p.71)

Origin of name

Ahmadabad owes its name to one Ahmad named chieftain who founded it. On this issue,James Tod[4] writes that by an adventurer of the same race from which the Agnikulas were originally converts, though Saharan the Tak hid his name and his tribe under his new epithet of Zafar Khan, and as Muzaffar ascended the throne of Gujarat, which he left to his son. His grandson was Ahmad, who founded Ahmadabad, whose most splendid edifices were built from the ancient cities around it. Zafar Khan embraced Islam, and became viceroy of Gujarat. According to Ferishta, he threw off his allegiance to Delhi in 1396, or rather maintained a nominal allegiance till 1403.

Talukas in Ahmadabad

Ahmedabad District is divided into a number of taluka.

History

Archaeological evidence suggests that the area around Ahmedabad has been inhabited since the 11th century, when it was known as Ashaval (or Ashapalli).[5] At that time, Karandev I, the Solanki ruler of Anhilwara (modern Patan), waged a successful war against the Bhil king of Ashaval,[6] and established a city called Karnavati on the banks of the Sabarmati. Solanki rule lasted until the 13th century, when Gujarat came under the control of the Vaghela dynasty of Dholka. Gujarat subsequently came under the control of the Delhi Sultanate in the 14th century. However, by the earlier 15th century, the local governor Zafar Khan Muzaffar established his independence from the Delhi Sultanate and crowned himself Sultan of Gujarat as Muzaffar Shah I, thereby founding the Muzaffarid dynasty. Karnavati finally came under the control of his grandson Sultan Ahmed Shah in 1411 A.D. who renamed the city as Ahmedabad after himself.[7]

असावल

विजयेन्द्र कुमार माथुर[8] ने लेख किया है ... असावल अथवा 'असवाल' (AS, p.52) अहमदाबाद का प्राचीन नाम है। अहमदाबाद की स्थापना के पूर्व असावल काफ़ी महत्त्व का नगर था। इसी नगर को केन्द्र बनाकर 15वीं शताब्दी में गुजरात में मुस्लिम सल्तनत का विकास हुआ था। असावल नगर साबरमती (प्राचीन साभ्रमती) के तट पर बसा हुआ था। 1411 ई. अहमदशाह बहमनी प्रथम ने अहमदाबाद की नींव डाली थी। इससे पूर्व गुजरात के हिंदू नरेशों की राजधानी वलभि, पाटन, अन्हलवाड़ा और असावल में रही थी। असावल आशापल्ली का अपभ्रंश माना जाता है।

अहमदाबाद

विजयेन्द्र कुमार माथुर[9] ने लेख किया है ...अहमदाबाद (AS, p.55): अहमदाबाद साबरमती या प्राचीन साभ्रमती के तट पर बसा हुआ नगर है। सन् 1411 ई. में अहमदशाह बहमनी ने अहमदाबाद की नींव प्राचीन हिन्दू नगर असावल या आशापल्ली के स्थान पर रखी थी। इससे पहले गुजरात की राजधानी अन्हलवाड़ा या पाटन और उससे भी पहले बलभि में थी। जैन स्तोत्र तीर्थ मालाचैत्य वंदन में संभवत: अहमदाबाद को करणावती कहा गया है- 'वेदे श्रीकरणावती शिवपुरे नागद्रहे नाणके'। सन् 1273 ई. से 1700 ई. तक अहमदाबाद की समृद्धि गुजरात की राजधानी के रूप में बढ़ी-चढ़ी रही। 1615 ई. में सर टामस रो ने अहमदाबाद को तत्कालीन लंदन के बराबर बड़ा नगर बताया था। 1638 ई. में एक यूरोपीय पर्यटक ने अहमदाबाद के विषय में लिखा था कि संसार की कोई जाति या एशिया की कोई वस्तु ऐसी नहीं है जो अहमदाबाद में न दिखाई पड़े – There is scarce any nation in the world or any commodity in Asia but may not be seen in this city. आश्चर्य नहीं कि शाहजहाँ ने मुमताज़महल से विवाह के पश्चात् अपने जीवन के कई सुखद वर्ष अहमदाबाद में बिताए थे। अहमदाबाद की तत्कालीन समृद्धि का कारण इसका सूरत आदि बड़े बंदरगाहों के पृष्ठ-प्रदेश में स्थित होना था। इसीलिए इसे गुजरात की राजधानी बनाया गया था।

गुजरात के सुलतानों के बनवाए हुए यहाँ अनेक भवन आज भी वर्तमान में हैं जो हिन्दू-मुस्लिम वास्तुकला के संगम के सुंदर उदाहरण हैं। गुजरात में इस मिश्रशैली की नींव डालने वाला सुलतान अहमदशाह ही था। इन भवनों में पत्थर की जाली और नक़्क़ाशी का काम सराहनीय है। यहाँ के स्मारकों में जामा मस्जिद (1424 ई.) मुख्य है। इसमें 260 स्तंभ है। अहमदशाह की बेगमों के मक़बरों को रानी की हजरा कहा जाता है। रानी सिप्री की मसजिद 50X20 फुट के परिमाण में बनी है। सीदी-सैयद की मसजिद पत्थर की जालियों से सज्जित खिड़कियों के लिए प्रख्यात है। अहमदाबाद के दक्षिण फाटक- राजपुर से पौन मील पर कांकरिया झील है जिसे सन् 1451 ई. में सुलतान कुतुबुद्दीन ने बनवाया था। झील के मध्य में एक टापू है। यहाँ एक दुर्ग का निर्माण भी किया गया था। अहमदाबाद में समृद्धि की विपुलता होते हुए भी एक बड़ा दोष यह था कि यहाँ धूल बहुत उड़ती थी, जिसके कारण जहाँगीर ने नगर का नाम ही गर्दाबाद रख दिया था।

अहमदाबाद:भारत का मेनचेस्टर

अहमदाबाद को भारत का मेनचेस्टर भी कहा जाता है। वर्तमान समय में अहमदाबाद को भारत के गुजरात प्रांत की राजधानी होने के साथ साथ अहमदाबाद को एक प्रमुख औद्योगिक शहर के रूप में जाना जाता है। ऐतिहासिक तौर पर, अहमदाबाद भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान प्रमुख शिविर आधार रहा है। महात्मा गांधी ने साबरमती आश्रम की स्थापना अहमदाबाद में की और स्‍वतंत्रता संघर्ष से जुड़ें अनेक आन्‍दोलन की शुरुआत भी यहीं से हुई थी। ऊन की बुनाई के लिए भी अहमदाबाद काफ़ी प्रसिद्ध है। इसके साथ ही अहमदाबाद शहर व्यापार और वाणिज्य केन्द्र के रूप में बहुत अधिक विकसित हो रहा है।

अहमदाबाद शहर एक सदी के अन्दर ही यह एक धनाढ्य एवं विशाल शहर के रूप में उभरकर सामने आ गया था, लेकिन सल्तनतों की उठापटक व अराजकता से अहमदाबाद का पतन हुआ और सन् 1572 ई. में मुग़ल बादशाह अकबर ने अहमदाबाद पर क़ब्ज़ा कर लिया। सन् 1707 ई. में औरंगज़ेब की मृत्यु के साथ ही इसके पुनरोद्वार का मुग़ल अभियान भी समाप्त हो गया और सन् 1818 ई. में अंग्रेज़ों के द्वारा गुजरात के अधिग्रहण के साथ ही इसका और भी अधिक पतन हुआ। सन् 1859 से 1861 ई. में अहमदाबाद में सूती वस्त्र की पहली मिल स्थापित हुई और शीघ्र ही यह भारत का छठा सबसे अधिक जनसंख्या वाला शहर और विशाल अंतर्देशीय औद्योगिक केन्द्र बन गया। सन् 1960 ई. में अहमदाबाद को गुजरात राज्य की अस्थायी राजधानी बनाया गया। सन् 1970 ई. में राज्य प्रशासन गांधीनगर स्थानांतरित हो गया। अहमदाबाद में हिन्दू, मुस्लिम व जैन वास्तुशिल्प का मिलन होता है और इसके प्राचीन वास्तु अवशेष नई मिलों और कारख़ानों की वास्तुकला के बिल्कुल विपरीत हैं।

संदर्भ: भारतकोश-अहमदाबाद

JAT Bhawan

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External links

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References

  1. The History of India, as Told by Its Own Historians/Note (A).- Geographical,p.357
  2. Bird's Guzerat,187
  3. The History of India, as Told by Its Own Historians/VIII. Al Idrísí ,p.87
  4. James Tod: Annals and Antiquities of Rajasthan, Volume I, James Todd Annals/Chapter 7 Catalogue of the Thirty Six Royal Races, p.118
  5. Turner, Jane (1996). The Dictionary of Art 1. Grove. p. 471. ISBN 9781884446009.
  6. Michell, George; Shah, Snehal; Burton-Page, John; Mehta, Dinesh (28 July 2006). Ahmadabad. Marg Publications. pp. 17–19. ISBN 81-85026-03-3.
  7. "History of Ahmedabad". Ahmedabad Municipal Corporation, egovamc.com.
  8. Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.52
  9. Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.55

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