Bansra

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Location of Paner in Ajmer district

Bansra (बांसड़ा) is a Village in Kishangarh tahsil of Ajmer district in Rajasthan. During Tejaji's time in 1103 it was known as Rangbari, Rangbari Bas, Rangbari Bansra or Rangbari Ka Bas.

Founder

Location

I is located at a distance of 2 km from Paner in south-east direction.

Jat Gotras

Monuments

History

It was the village of Lachha Gujari, friend of Pemal, Tejaji's wife.

तेजाजी का पेमल से मिलन

संत श्री कान्हाराम[1] ने लिखा है कि.... [पृष्ठ-232]: तेजाजी का ससुराल पनेर में सास द्वारा अपमान किए जाने पर अपने पति को वापस मुड़ते देख पेमल को झटका लगा। पेमल ने पिता और भाइयों से इशारा किया कि वे तेजाजी को रोकें। श्वसुर और साला तेजाजी को रोकते हैं पर वे मानते नहीं हैं। वे घर से बाहर निकल आते हैं।


[पृष्ठ-233]: पेमल की सहेली थी लाछां गूजरी। वह शहर पनेर के दक्षिण पूर्व की ओर रंगबाड़ी के बास (मोहल्ला) में रहती थी। उसने पेमल को तेजाजी से मिलवाने का यत्न किया। वह ऊँटनी पर सवार हुई और रास्ते में मीणा सरदारों से लड़ती-जूझती तेजाजी तक जा पहुँची। लाछा ने लीलण की लगाम पकड़ली। उन्हें पेमल का सन्देश दिया। अगर उसे छोड़ कर गए, तो वह जहर खा कर मर जाएगी। उसके मां-बाप उसकी शादी किसी और के साथ तय कर चुके हैं। लाछां बताती है, पेमल तो मरने ही वाली थी, वही उसे तेजाजी से मिलाने का वचन दे कर रोक आई है। लाछां के समझाने पर भी तेजा पर कोई असर नहीं हुआ। पेमल अपनी माँ को खरी खोटी सुनाती है। पेमल कलपती हुई आई और लीलण के सामने खड़ी हो गई। पेमल ने कहा - आपके इंतजार में मैंने इतने वर्ष निकाले। मेरे साथ घर वालों ने कैसा वर्ताव किया यह मैं ही जानती हूँ। आज आप चले गए तो मेरा क्या होगा। मुझे भी अपने साथ ले चलो। मैं आपके चरणों में अपना जीवन न्यौछावर कर दूँगी।

पेमल की व्यथा देखकर तेजाजी वापस मुड़ गए। आगे आगे लाछा तथा पीछे पीछे तेजाजी चलने लगे। पेमल ने राहत की सांस ली। वे लाछा की रंगबाड़ी के लिए चल पड़े।


[पृष्ठ-234]: लाछा ने तेजाजी और साथियों को भोजन के लिए आमंत्रित किया। विश्राम के लिए तेजाजी मैड़ी में पधारे। लाछा ने तेजा के साथियों के रुकने की व्यवस्था की। नंदू गुर्जर साथियों से बातें करने लगे। सभी ने पेमल के पति को सराहा। देर रात तक औरतों ने जंवाई गीत गाए। पेमल की ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं था। तेजाजी पेमल से मिले। अत्यन्त रूपवती थी पेमल। दोनों बतरस में डूबे थे कि लाछां की आहट सुनाई दी।

रंगबाड़ी बासड़ा

लाछा बावड़ी
लाछा की छतरी

संत श्री कान्हाराम[2] ने लिखा है कि.... [पृष्ठ-235]: शहर पनेर तेजाजी का ससुराल है। यह गाँव वर्तमान में राजस्थान के अजमेर जिले की किशनगढ़ तहसील में स्थित है। यह किशनगढ़ से 30-32 किमी उत्तर दिशा में है। तेजाजी के वीरगति स्थल सुरसुरा से 15-16 किमी उत्तर-पश्चिम दिशा में है। जिला मुख्यालय अजमेर से उत्तर पूर्व दिशा में 60 किमी दूर है। नागौर जिले के परबतसर से सिर्फ 4 किमी दक्षिण पूर्व में है।

आज राजस्व रिकॉर्ड में सिर्फ पनेर है परंतु तेजाजी के इतिहास में यह शहर पनेर नाम से सुप्रसिद्ध था। यह गाँव तेजाजी के जन्म से बहुत पहले ही बसा हुआ था। प्राचीन समय में वर्तमान पनेर से पश्चिम दिशा में बसा हुआ था। तेजाजी के समय में यह वर्तमान पनेर से 1 किमी उत्तर में पहाड़ियों की तलहटी में बसा हुआ था। यहाँ के राख़-ठीकरे आदि इसके प्रमाण हैं।


[पृष्ठ-236]: शहर पनेर गणतन्त्र के शासक रायमल जी मुहता, झाँझर गोत्र के जाट थे, जिनके पिता का नाम राव महेशजी था। रायमल जी मुहता तेजाजी के श्वसुर थे। तेजाजी की सास का नाम बोदल दे था, जो काला गोत्र के जाट की पुत्री थी। तेजाजी की पत्नी का नाम पेमल था। पेमल बड़ी सती सतवंती थी। बचपन में शादी हो जाने के बावजूद 29 वर्ष तक तेजाजी का इंतजार करती रही। पेमल के भाई और भाभी के नाम मालूम नहीं हैं।

शहर पनेर से करीब 2 किमी पूर्व की ओर रंगबाड़ी का बास में पेमल की सहेली प्रसिद्ध लाछा गुजरी रहती थी।


[पृष्ठ-237]:लाछा के पति का नाम नंदू गुर्जर था। लाछा चौहान गोत्र की गुर्जर थी। लाछा के पति नंदू तंवर गोत्र के गुर्जर थे। लाछा के पास बहुत सी गायें थी।

लाछा व लाछा की रंगबाड़ी

लाछा का भैरूजी

संत श्री कान्हाराम[3] ने लिखा है कि.... [पृष्ठ-260]: लाछा पनेर के रंगबाड़ी बास में रहती थी। अब उस जगह का नाम रंगबाड़ी बांसड़ा है जो वर्तमान पनेर से 3 किमी पूर्व में पड़ता है। वहाँ रंगबाड़ी का कुवा पर लाछा द्वारा स्थापित रंगबाड़ी भैरूजी आज भी विद्यमान है। वहाँ खुदाई में पुराने गाँव के अवशेष मिलते हैं। लाछा चौहान गोत्र की गुर्जर थी। लाछा के पति नंदू गुर्जर क गोत्र तंवर था। नंदू गुर्जर सीधा सादा इंसान था। वहाँ की कर्ता-धर्ता लाछा ही थी। लाछा के नाम से ही सारा कार्य व्यवहार चलता था। लाछा के पास बड़ी संख्या में गायें थे और वह उस जमाने की प्रभावशाली महिला थी।


[पृष्ठ-261]: रंगबाड़ीतेजाजी के जमाने में रंगबाड़ी शहर पनेर का एक बास था। यह स्थान वर्तमान पनेर से 2 किमी पूर्व में है। रूपनगढ़ कस्बे से 2-3 किमी उत्तर में स्थित है। इस रंगबाड़ी के स्थान से उत्तर में 3 किमी दूर जाजोता गाँव बसा है। उस समय रंगबाड़ी में लाछा अपने पति नंदू गुर्जर के साथ रहती थी। रंगबाड़ी के दक्षिण दिशा में 3 किमी दूरी पर उस समय सुरसुरा का जंगल पड़ता था। यहाँ पर एक सुंदर काबरिया पहाड़ी है। इस पहाड़ी के पूर्व में, जहां वर्तमान हनुमानगढ़ मेगा-हाईवे गुजरता है, के पास ही प्राचीन लाछा बावड़ी है। इस वन में लाछा की गायें चरने जाती थी। लाछा बावड़ी का निर्माण गायों के पानी के लिए करवाया था।


[पृष्ठ-262]: उस समय यहाँ निर्जन वन था और यह बावड़ी पशु धन और राहगीरों के लिए पानी का एक मात्र साधन था। यह उस समय से ही लाछा बावड़ी के नाम से प्रसिद्ध हो गई थी। लाछा बावड़ी के पास भव्य छतरियाँ बनी हुई हैं। वहाँ एक शिलालेख पर खर्च का विवरण दिया है जिस पर लाछा का नाम भी लिखा है। शिलालेख लाछा कालीन नहीं लगता, वह बाद में किसी के द्वारा लगाया लगता है।

तत्कालीन रंगबाड़ी के स्थान पर आज एक छोटा सा गाँव रंगबाड़ी बासड़ा आबाद है। यहाँ 50-60 घर हैं। यहाँ एक प्राचीन मंदिर है। इस गाँव के पास से नदी निकलती है। नदी के पूर्व दिशा में रंगबाड़ी का कुआ है तथा इस कुवे पर लाछा द्वारा प्रतिष्ठित रंगबाड़ी के भैरूजी का चबूतरा एक पेड़ों के झुरमुट में मौजूद है। लाछा की यह रंगबाड़ी (कुवा) आज तानाण के बेटे घीसा मेघवाल के अधिकार में है।

Notable persons

External links

References

  1. Sant Kanha Ram: Shri Veer Tejaji Ka Itihas Evam Jiwan Charitra (Shodh Granth), Published by Veer Tejaji Shodh Sansthan Sursura, Ajmer, 2015. pp.232-234
  2. Sant Kanha Ram: Shri Veer Tejaji Ka Itihas Evam Jiwan Charitra (Shodh Granth), Published by Veer Tejaji Shodh Sansthan Sursura, Ajmer, 2015. pp.235-239
  3. Sant Kanha Ram: Shri Veer Tejaji Ka Itihas Evam Jiwan Charitra (Shodh Granth), Published by Veer Tejaji Shodh Sansthan Sursura, Ajmer, 2015. pp.260-262

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