Bharana

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Bharana (भराणा) gotra Jats live in Rajasthan.

Origin

Bharana Clan gets name after Nagavanshi named Bharana (भरणा).[1]

History

Mahavansa/Chapter 23 (The Levying of the Warriors) tells....Nandhimitta, Süranimila, Mahasona, Gothaimbara, Theraputtabhaya, Bharana, and also Velusumana, Khañjadeva, Phussadeva and Labhiyavasabha: these ten were his mighty and great warriors of King Elara (BC 205-161) of Lanka, who were selected to stay with the prince Gamini.

In the village of Kappakandara a son of Kumara lived named Bharana. In time, when he was ten to twelve years old, he went with the boys into the forest and chased many hares; he struck at them with his foot and dashed them, (smitten) in twain, to the ground. Then when he, at the age of sixteen years, went with the village-folk into the forest he killed antelopes, elks, and boars in like manner. Therefore was Bharana known as a great warrior. And him did the king in like manner command to stay with Gamani.

Villages in Tonk district

Hadigaon Kala (1),

Villages in Nagaur district

Bharangaon (भरणगांव), Bharnawa (भरनांवा),

Bharana village in Firozpur district

Bharana named village is in Zira tahsil in Firozpur district in Punjab, India.

History

डॉ पेमाराम[2]लिखते हैं कि सिंध और पंजाब से समय-समय पर ज्यों-ज्यों जाट राजस्थान में आते गये, मरूस्थलीय प्रदेशों में बसने के साथ ही उन्होने प्रजातन्त्रीय तरीके से अपने छोटे-छोटे गणराज्य बना लिये थे जो अपनी सुरक्षा की व्यवस्था स्वयं करते थे तथा मिल-बैठकर अपने आपसी विवाद सुलझा लेते थे । ऐसे गणराज्य तीसरी सदी से लेकर सोलहवीं सदी तक चलते रहे । जैसे ईसा की तीसरी शताब्दी तक यौधेयों का जांगल प्रदेश पर अधिकार था । उसके बाद नागों ने उन्हें हरा कर जांगल प्रदेश (वर्तमान बिकानेर एवं नागौर जिला) पर अधिकार कर लिया । यौधेयों को हराने वाले पद्मावती के भारशिव नाग थे, जिन्होने चौथी शताब्दी से लेकर छठी शताब्दी तक बिकानेर, नागौर, जोधपुर तथा जालोर के जसवन्तपुरा तक शासन किया । जांगल प्रदेश में नागों के अधीन जो क्षेत्र था, उसकी राजधानी अहिच्छत्रपुर (नागौर) थी । यही वजह है कि नागौर के आस-पास चारों ओर अनेक नागवंशी मिसलों के नाम पर अनेक गांव बसे हुये हैं जैसे काला मिसल के नाम पर काल्यास, फ़िरड़ोदा का फिड़ोद, इनाणियां का इनाणा, भाकल का भाखरोद, बानों का भदाणा, भरणा का भरणगांव / भरनांवा / भरनाई, गोरा का डेह तथा धोला का खड़नाल आदि ।

छठी शताब्दी बाद नागौर पर दौसौ साल तक गूजरों ने राज किया परन्तु आठवीं शताब्दी बाद पुनः काला नागों ने गूजरों को हराकर अपना आधिपत्य कायम किया ।

दसवीं सदी के अन्त में प्रतिहारों ने नागों से नागौर छीन लिया । इस समय प्रतिहारों ने काला नागों का पूर्णतया सफ़ाया कर दिया । थोड़े से नाग बचे वे बलाया गांव में बसे और फिर वहां से अन्यत्र गये ।

Notable persons

External links

Reference

  1. डॉ पेमाराम:राजस्थान के जाटों का इतिहास,2010, पृ.19
  2. राजस्थान के जाटों का इतिहास, 2010, पृ.19

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