Bunti Ram Dara

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Author:Laxman Burdak, IFS (R), Jaipur

Bunti Ram Dara (चौधरी बूटीराम डारा), from village Kishorpura Jhunjhunu, was a leading Freedom fighter who took part in Shekhawati farmers movement in Rajasthan. [1]

जाट जन सेवक

ठाकुर देशराज[2] ने लिखा है ....चौधरी बूटीराम जी - [पृ.406]: आप डारा गोत्र के चौधरी कुशलाराम जी के जेष्ठ पुत्र है। आपसे छोटे आपके भाई श्री शिवनारायण सिंह, नंदलाल सिंह तथा दत्तूराम हैं। आपकी एकमात्र कन्या का नाम इंद्र देवी है। गत वर्ष आपकी पत्नी का देहांत हो गया। यद्यपि आपके रिश्तेदारों ने दूसरी शादी करने के लिए विशेष आग्रह किया परंतु आपने कहा “मुझे सिर्फ जीवन सार्वजनिक कार्य में लगाना है” कहकर दूसरी शादी के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। आप बाल्यावस्था से ही सार्वजनिक कार्य में भाग लेने लगे थे। जाट पंचायत के आप एक बहुत जिम्मेदार कार्यकर्ता रहे। पंचायत हस्तगत होने के बाद से अभी तक आप प्रजामंडल के अंधभक्त रहे। सन् 1939 के जयपुर सत्याग्रह के समय आप खास व्यक्तियों में से थे जिन्हें प्रजामंडल की युद्ध समिति ने अपने रिजर्व फोर्स में रख छोड़ा था। उस समय भी आपने अविरल दौड़ धूप से सत्याग्रही भेजकर सत्याग्रह को सफल बनाया। आप शेखावाटी जिला कमेटी के सदस्य रहते आए हैं।

शेखावाटी के किसानों की संस्था विद्यार्थी भवन की भी आप सदा सेवा करते रहे और उसकी कार्यकारिणी के भी सदस्य हैं। आजकल अपने गांव किशोरपुरा में भी आप मिडिल स्कूल चला रहे हैं। जिसके प्रधानाध्यापक का पद आपके लघु भ्राता श्री नंदलालसिंह बड़ी योग्यता पूर्वक संभाले हुए हैं। आप गत वर्षो से कुछ बीमार रहते हैं फिर भी सन 1945 व 1946 के किसान आंदोलन के प्रथम सत्याग्रही होने का गौरव


[पृ.407]: आपही को प्राप्त हुआ। आप करीब 3 माह बाद से समझौता होने पर जेल से मुक्त किए गए। आप साधमना प्रकृति के व्यक्ति हैं। आप सरलता, सत्य आदि गुणों से ओतप्रोत हैं और इसी से लोग आपको बूटीराम जी के बजाय बूटीनाथ जी नाम से भी पुकारा करते हैं।

जीवन परिचय

चनाणा गोलीकांड

चनाणा गोलीकांड - सन 1946 में झुंझुनू जिले के चनाणा गाँव में किसान सम्मलेन का आयोजन किया गया था. सम्मलेन के अध्यक्ष नरोत्तम लाल जोशी व मुख्य अतिथि पंडित टिकाराम पालीवाल थे. किसान नेता सरदार हरलाल सिंह, नेतराम सिंह, ठाकुर राम सिंह, ख्याली राम, बूंटी राम और स्वामी मिस्रानंद आदि उपस्थित थे. सम्मलेन आरंभ हुआ ही था कि घुड़सवार, ऊँटसवार व पैदल भौमिया तलवारें, बंदूकें, भाले व लाठियां लेकर आये. सीधे स्टेज पर हमला किया जिसमें टिकाराम पालीवाल के हाथ चोट आई. दोनों ओर से 15 मिनट तक लाठियां बरसती रहीं. भौमियों के बहुत से आदमी घायल होकर गिर पड़े तो उन्होने बंदूकों से गोलियां चलाई जिससे कई किसान घायल हो गए और सीथल का हनुमान सिंह जाट मारा गया. किसानों ने हथियार छीनकर जो मुकाबला किया उसमें एक भौमिया तेज सिंह तेतरागाँव मारा गया और 10 -12 भौमियां घायल हुए. सभा में भगदड़ मच गयी और दोनों तरफ से क़त्ल के मुकदमे दर्ज हुए. आगे चलकर समझौता हुआ और दोनों ओर से मुकदमे उठा लिए गए. (डॉ. ज्ञानप्रकाश पिलानिया: पृ. 42-43)

किसान सभा का अनुमादन

सन 1925 में पुष्कर सम्मलेन के पश्चात् शेखावाटी में दूसरी पंक्ति के जो नेता उभर कर आये, उनमें आपका प्रमुख नाम हैं [3]

15 जून 1946 को झुंझुनू में किसान कार्यकर्ताओं की एक बैठक चौधरी घासी राम ने बुलाई. शेखावाटी के प्रमुख कार्यकर्ताओं ने इसमें भाग लिया. अध्यक्षता विद्याधर कुलहरी ने की. इसमें यह उभर कर आया कि भविष्य में समाजवादी विचारधारा को अपनाया जाये. जिन व्यक्तियों ने किसान सभा का अनुमादन किया उनमें आप भी सम्मिलित थे. (राजेन्द्र कसवा, p. 201-03).

श्री बूटीराम किशोरपुरा पर भजन

रचनाकार : महाशय धर्मपाल सिंह भालोठिया, भजन-95, मेरा अनुभव (संशोधित) - 2017

देशभक्त श्री बूटीराम - स्वतंत्रता सेनानी

तर्ज-शर्म की मारी मैं मर मर जाऊं.........


जुग-जुग बसो किशोरपुरा, आज बना पवित्र धाम।

शेखावाटी में।।


इस नगरी में जन्म लिया, देश को जीवन दान दिया।

         आया श्री बूटीराम, शेखावाटी में । 1।

अंग्रेज, राजा, जागीरदार, हम पर थी तीनों की मार।

          डंडे से लेते काम, शेखावाटी में । 2।

रणभूमि में कूद पड़ा, आजादी का जंग लड़ा।

                अब रहना नहीं गुलाम, शेखावाटी में । 3।

थे पाण्डू काश्तकार यहाँ, कौरव थे जागीरदार यहाँ।

     बनकर आया घनश्याम, शेखावाटी में । 4 ।

यहाँ प्रथा जागीरदारी थी, सबसे बुरी बीमारी थी।

      जड़ से मिटा दी पाम, शेखावाटी में । 5 ।

चवरा में चली थी गोली, शहीद हो गये दिन धोळी।

      रामदेव और करणी राम, शेखावाटी में । 6 ।

वो देशभक्त अलबेला था, ऋषि दयानन्द का चेला था।

     आज पूजे जनता तमाम, शेखावाटी में । 7 ।

जब बनगी फौज किसानों की, शामत आगई ठिकानों की।

   बड़ गये घर में नमक हराम, शेखावाटी में । 8 ।

बाबा जनहितकारी था, पर दुख-भंजन हारी था।

     नहीं किया कभी आराम, शेखावाटी में । 9 ।

भरे मेला तीस जनवरी को, श्री बूटीराम चौधरी का।

      करे भालोठिया प्रणाम, शेखावाटी में । 10 ।

References

  1. Thakur Deshraj:Jat Jan Sewak, 1949, p.406-607
  2. Thakur Deshraj:Jat Jan Sewak, 1949, p.406-607
  3. राजेन्द्र कसवा: मेरा गाँव मेरा देश (वाया शेखावाटी), जयपुर, 2012, ISBN 978-81-89681-21-0, P. 100

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