Chitora

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Location of Chitaura near Gohad in Bhind District

Chitora (चितोरा) or Chitaura (चितोरा) is a village in Gohad tahsil of Bhind district in Madhya Pradesh.

Location

It is situated at a distance of about 15 km from Gohad in south-west on Gohad-Mau Road. Its PIN Code is 477116.

Chitora Fort

This was the site of fort of Bamraulia Rana Jats of Gohad.

The forts nearby Gohad such as Chitaura, Karwas, Madhaina, Itayli, Pipahad etc were managed by chieftains of Bamraulia clan.[1]

कड़वास स्टेट

ठाकुर देशराज[2] ने लिखा है .... [पृ.567]: शिवि वंशी वीरभद्र की एक शाखा बमरोलिया जाटों की है। गोत्र इनका है राणाउत्तर प्रदेश के बमरोली गांव से मध्य भारत में जाने के कारण बमरोलिया गोत्र हुआ।

गोहद के राणाओं की यह एक शाखा है। गोहद मध्य भाग में मराठों के पहले एक शक्तिशाली राज्य था। महादजी सिंधिया ने जब गोहाद पर चढ़ाई की तो गोहाद को फतह करने में कुछ दिन तक नाकामयाब रहा।

आखिर महादजी सिंधिया की विजय हुई। तब उसने इस खानदान के कुछ प्रभावशाली लोगों को खुश रखने के लिए स्वतंत्र जागिरें दी। राजा अमानसिंह, अचलसिंह और ठाकुरदास जी को महादजी सिंधिया ने अकाझरी कैंप में बुलाकर अंताकी, कड़वास, अतरसोहा, छिरेटा, अंतऊआ, चित्तौड़ा आदि गांव जागीर में दिये।

अब यह स्टेट तीन हिस्सों में बटी हुई है। राजा उदयभान सिंह, श्री गणेशसिंह और दीवानसिंह इन तीनों हिस्सों के अधिपति हैं।

राजा उदयभान सिंह जी एक योग्य और शिक्षित सरदार हैं। सिंधिया हाई स्कूल में आपने शिक्षा पाई है। ग्वालियर राज्य सभा के प्रेसिडेंट रहे हैं। हिम्मत के आप बड़े धनी हैं। दुश्मन से घबराते नहीं हैं। आप


[पृ.568]: संत मत के अनुयाई हैं। आपके भतीजे भगवानसिंह जी श्री गणेशसिंह जी के सुपुत्र हैं। कौमी सेवा में भाग लेते हैं। ग्वालियर राज्य जाट सभा को उन्होंने अपनी सेवाएं दे रखी हैं। तीसरे दीवानसिंह जी का स्वर्गवास हो गया है। राजा उदयभान सिंह जी इस समय 42-43 साल के नौजवान व्यक्ति हैं और बड़े उत्साही हैं।

Notable persons

  • ठाकुर अलबेलसिंह - [पृ.569]: आप राना गोत्र के जाट सरदार ठाकुर उत्तमसिंह जी के सुपुत्र हैं। जन्म आपका लगभग आज से 30-32 वर्ष पहले हुआ है। ग्वालियर राज्य में गांव आपका चित्तौरा है और इस समय धौलपुर राज्य में तहसीलदार हैं। सर्विस में रहते हुए भी कौम की सामाजिक स्थिति को सुधारने की आप हमेशा कोशिश करते रहते हैं। आप दो भाई हैं। छोटे बृजेंद्रसिंह जी इस समय अंग्रेजी की नवमी कक्षा में पढ़ते हैं। वह एक होनहार व सीधी प्रकृति के बच्चे हैं।[3]
  • ठाकुर गंधर्वसिंह – [पृ.571]: आप चितोरा के रईस ठाकुर रघुवीरसिंह के सुपुत्र हैं। शिक्षा आपकी हिंदी माध्यमिक है। गोत्र आपका राणा है। उम्र लगभग 36-37 साल है। आप ग्वालियर जाट क्षत्रिय सभा की कार्यकारिणी के सदस्य हैं और एक उत्साही आदमी हैं। आप के सबसे छोटे भाई निहाल सिंह जी अध्यापक हैं। [पृ.572]: दूसरे और तीसरे भाइयों के नाम क्रमशः जोहारसिंह और पंचमसिंह है जोहार सिंह एक अच्छे पहलवान हैं। [4]
  • ठाकुर हुकमसिंह - [पृ.572]: आप चित्तौरा के रहीस हैं। गोत्र आपका राणा है। उम्र आपकी लगभग 56-57 वर्ष होगी। शरीर से आप हृष्ट-पुष्ट आदमी हैं। दिल के भी आप मजबूत हैं। जाट सभा की ओर से बिरादरी के लोगों ने आपकी सेवाओं से प्रभावित होकर आप को सरदार की उपाधि दी है। इस समय जाट सभा ग्वालियर राज्य के प्रेसिडेंट है। आप एक अच्छे जमीदार खेतिहर हैं। आपके पुत्र अजमेर सिंह जी हैं जो घर के कामकाज को बुद्धिमानी के साथ संभालते हैं।[5]

External links

References

  1. Dr. Ajay Kumar Agnihotri (1985) : Gohad ke jaton ka Itihas(Hindi), p. 89
  2. Thakur Deshraj:Jat Jan Sewak, 1949, p.567-568
  3. Thakur Deshraj:Jat Jan Sewak, 1949, p.569
  4. Thakur Deshraj:Jat Jan Sewak, 1949, p.571-72
  5. Thakur Deshraj:Jat Jan Sewak, 1949, p.572

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