Chudi Ajeetgarh

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Location of Chudi Ajeetgarh in Jhunjhunu district

Chudi Ajeetgarh (चुड़ी अजीतगढ) (Churi Ajitgarh, Chudi Ajitgarh) is a medium-size village in Jhunjhunu tahsil & district in Rajasthan.

Jat Gotras

Population

The Ajeetgarh village has the total population of 1833, of which 909 are males while 924 are females (as per Population Census 2011).[1]

History

ठाकुर देशराज यौधेयों का सम्बन्ध इस जगह से होना इस प्रकार बताते हैं -

यह प्रजातंत्री समुदाय एकतंत्र हमलों से बहुत समय तक टक्कर लेता रहा। पौराणिक ने इन्हें युधिष्ठिर के वंशजों में माना है। आजकल जोहिया नाम से जाटों के अन्दर इनका निशान पाया जाता है। जांगल देश में राठौर के विरूद्ध भी इन्हें खूब लड़ना पड़ा था। पन्द्रहवीं सदी में इनके हाथ से बीकानेर का राज्य निकल गया। उस समय में शेरसिंह इनमें बड़ा वीर सरदार था। कुछ लोग इनमें से व्यापार भी करने लग गये थे। इन्हें चन्द्रगुप्त मौर्य, कनिष्क और समुद्रगुप्त जैसे साम्राज्यवादियों से भी पाला पड़ा था, किन्तु फिर भी इन्होंने अपने अस्तित्व को स्थिर रखा। इस वीर समुदाय की सैनिक शक्ति की धाक पहली, दूसरी शताब्दियों तक तो सारे भारत में थी। रूद्रदामन ने इनके विषय में लिखाया था -

सर्वक्षत्रा विष्कृत वीरशब्द जातोत्सेकाभिधेयानां यौधेयानाम् ।

अर्थात - सभी क्षत्रियों के सामने यौधेयों ने अपना नाम (युद्धवीर) चरितार्थ करने के कारण जिन्हें अभिमान हो गया था और जो परास्त नहीं किये जा सकते थे। यह थी उनकी वीरता, जिसका उल्लेख उनके शत्रुओं ने भी किया है।

भरतपुर राज्य में उनका एक शिलालेख मिला था।


जाट इतिहास:ठाकुर देशराज,पृष्ठान्त-166


इस बात का वर्णन डा. प्लीट ने गुप्तों का वर्णन के वर्णन के साथ किया है। उस शिलालेख में यौधेय-गण के निर्वाचित प्रधान का उल्लेख है। इनका प्रधान महाराज महासेनापति की उपाधि धारण करता था। कुछ अन्य गणों के अध्यक्ष भी राजा और राजन्य की उपाधि धारण करने लग गए थे। मालूम होता है, एकतंत्रियों के मुकाबलों में गण अपने अध्यक्षों का राजा, महाराजा या राजन्य की उपाधि देने लग गए थे। लिच्छिवियों ने तो अपने 7077 मेम्बरों को भी राजा की उपाधि दे डाली थी। यौधेयों का यह शिलालेख गुप्तकाल का बताया जाता है। जोधपुर में भी यौधेयों का एक गण था और उसका सरदार था महीपाल। यह महीपाल अवश्य ही 1200 ई. के लगभग था। उसके वंश के लोग अजीतगढ़ चूड़ी की ओर बढ़ गए। इन यौधेयों की कालान्तर में अनेक शाखाएं भी हो गई। कुलरिया शाखा के लोग अब तक अजीतगढ़ चूड़ी के पास मौजूद हैं।


दलीप सिंह अहलावत[2] ने लिखा है....यौधेयों की कालान्तर में कई शाखायें भी हो गईं। कुलकिया शाखा के लोग अब अजीतगढ़ चूड़ी के पास मौजूद हैं। इस वंश में ढाका शाखा के भी अनेक गांव हैं जिनमें गांव ढानी जयपुर में, ढकौली, पटौली, औगटा, सहदपुर आदि मेरठ में, मिल्क, मानिपुर, छाचरी आदि जिला बिजनौर में सुप्रसिद्ध गांव हैं।....यौधेय के शाखागोत्र - 1. कुलकिया 2. ढाका

Notable persons

External links

References


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