Devi Lal Ji.jpg

25 September
is the birthday of Chaudhary Devi Lal

Flowers.png

Datia

From Jatland Wiki
(Redirected from Dantavakra)
Jump to navigation Jump to search
Map of Datia District‎

Datia (दतिया) is a city and district in Madhya Pradesh.

Variants

Jat Gotras

History

दतिया

विजयेन्द्र कुमार माथुर[1] ने लेख किया है ...दतिया (AS, p.424) बुंदेलखंड, मध्य प्रदेश का एक ऐतिहासिक स्थान और लोकप्रिय तीर्थ स्थान है। यह झाँसी से 16 मील (लगभग 25.6 कि.मी.) की दूरी पर ग्वालियर के निकट उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित है। प्राचीन काल में दतिया 'दंतवक्त्र' की राजधानी मानी जाती थी। दंतवक्त्र का मंदिर यहाँ का मुख्य मंदिर है। इसे लोग 'मड़िया महादेव का मंदिर' कहते हैं। मड़िया महादेव का मंदिर एक पहाड़ी पर अवस्थित है। दतिया का प्राचीन दुर्ग, जो एक ऊँची पहाड़ी पर स्थित है, ओरछा नरेश वीरसिंह देव बुंदेला (17वीं शती) का बनवाया हुआ कहा जाता है। किंवदंती है कि इस दुर्ग को बनवाने में आठ वर्ष, दस मास और छब्बीस दिन का समय लगा था और बत्तीस लाख नब्बे हज़ार नौ सौ अस्सी रुपये व्यय हुए थे। दतिया में बुंदेल राजपूतों की एक शाखा का राज्य आधुनिक समय तक रहा था।

दतिया परिचय

दतिया का पुराना इलाका चारों ओर से पत्थर की दीवार से घिरा हुआ है, जिसमें बहुत से महल और बगीचे बने हुए हैं। 17वीं शताब्दी में बना 'वीरसिंह महल' उत्तर भारत की सबसे बेहतरीन इमारतों में से एक माना जाता है। यहाँ का शक्तिपीठ भारत के श्रेष्ठतम और महत्त्वपूर्ण शक्तिपीठों में एक है। प्रतिवर्ष यहाँ बड़ी तादाद में श्रद्धालुओं को आवागमन लगा रहता है।

पर्यटन स्थल: दतिया में कई पर्यटन स्थान हैं।

  • दंतवक्त्र का मंदिर: दंतवक्त्र का मंदिर यहाँ का मुख्य मंदिर है। इसे लोग 'मड़िया महादेव का मंदिर' कहते हैं। मड़िया महादेव का मंदिर एक पहाड़ी पर अवस्थित है। दतिया का प्राचीन दुर्ग, जो एक ऊँची पहाड़ी पर स्थित है, ओरछा नरेश वीरसिंह देव बुंदेला (17वीं शती) का बनवाया हुआ कहा जाता है। किंवदंती है कि इस दुर्ग को बनवाने में आठ वर्ष, दस मास और छब्बीस दिन का समय लगा था और बत्तीस लाख नब्बे हज़ार नौ सौ अस्सी रुपये व्यय हुए थे। दतिया में बुंदेल राजपूतों की एक शाखा का राज्य आधुनिक समय तक रहा था। दतिया के अन्य आकर्षणों में हैं-
  • पीताम्बरा पीठ
  • धूमावती मन्दिर
  • सोनगिरि मन्दिर
  • गोविन्द महल
  • उनाव बालाजी सूर्य मन्दिर
  • बडोनी
  • सिओंधा
  • भंडेर
  • राजगढ़ महल और संग्रहालय: इनके अतिरिक्त दतिया में राजगढ़ महल और संग्रहालय भी है। पीताम्बरा पीठ के निकट बना राजगढ़ महल राजा शत्रुजीत बुन्देला द्वारा बनवाया गया था। यह महल बुन्देली भवन निर्माण शैली में बना है। इस स्थान पर ही एक संग्रहालय भी है, जहाँ भौगोलिक और सांस्कृतिक महत्व की अनेक वस्तुओं का संग्रह रखा गया है।
  • मंदिर  : लघु वृंदावन नाम से मशहूर दतिया शहर में अनेक ख़ूबसूरत मंदिर बने हुए हैं। 'अवध बिहारी मंदिर', 'शिवगिर मंदिर', 'विजय राघव मंदिर', 'गोविन्द मंदिर' और 'बिहारीजी मंदिर' यहाँ के लोकप्रिय मंदिर हैं। श्रद्धालुओं का यहाँ हमेशा हुजूम लगा रहता है।
  • पीताम्बरा पीठ: यह देश के लोकप्रिय शक्तिपीठों में से एक है, जो दतिया ज़िले में स्थित है। इस शक्तिपीठ की मान्यता बहुत अधिक है। कहा जाता है कि कभी इस स्थान पर श्मशान हुआ करता था, लेकिन आज एक विश्वप्रसिद्ध मन्दिर है। स्थानील लोगों की मान्यता है कि मुकदमे आदि के सिलसिले में माँ पीताम्बरा का अनुष्ठान सफलता दिलाने वाला होता है। पीताम्बरा पीठ के प्रांगण में ही 'माँ धूमावती देवी' का मन्दिर है, जो भारत में भगवती धूमावती का एक मात्र मन्दिर है।
  • धूमावती मन्दिर: यह पसिद्ध मन्दि' दतिया ज़िले के प्रसिद्ध शक्तिपीठ 'पीताम्बरा पीठ' के प्रांगण में स्थित है। पूरे भारत में यह माँ धूमावती का एक मात्र मन्दिर है, जिसकी मान्यता भी अधिक है। माना जाता है कि पीताम्बरा पीठ की स्थापना एक संत, जिन्हें स्वामीजी महाराज कहा जाता था, ने की थी। माँ धूमावती की आरती सुबह-शाम होती है, लेकिन भक्तों के लिए धूमावती का मन्दिर शनिवार को सुबह-शाम 2 घंटे के लिए खुलता है।
  • उनाव बालाजी सूर्य मन्दिर: सूर्य देव का यह 'उनाव बालाजी मन्दिर' मध्य प्रदेश में दतिया ज़िले के उनाव में स्थित है। यह मन्दिर ऐतिहासिक होने के साथ ही प्राचीन भी है। साथ ही यह अपने साथ कई किवदंतियों को समेटे हुए है। मन्दिर के बारे में मान्यता यह है कि किसी भी प्रकार के असाध्य रोग से पीडि़त व्यक्ति यदि पहुँज नदी में स्नान करने के बाद बालाजी मन्दिर में सूर्य देव की प्रतिमा पर जल चढ़ाता है तो उसे रोगों से मुक्ति मिल जाती है। यहाँ आषाढ़ शुक्ल एकादशी को रथयात्रा का आयोजन किया जाता है तथा प्रत्येक रविवार को मेला लगता है।

संदर्भ: भारतकोश-दतिया

In Mahabharata

Dantavakra (दन्तवक्र) is mentioned in Mahabharata (II.13.12), (II.28.3),

Dantavaktra (दन्तवक्त्र) is mentioned in Mahabharata (I.61.57),


Adi Parva, Mahabharata/Book I Chapter 61 gives genealogy of the Danavas, Asuras, Kauravas, Pandavas, Gandharvas, Apsaras, Rakshasas. Dantavaktra (दन्तवक्त्र) is mentioned in Mahabharata (I.61.57) [2].... And from the tribe of Asuras called Krodhavasa were born many heroic kings on earth. Madraka, and Karnaveshta, Siddhartha, and also Kitaka; Suvira, and Suvahu, and Mahavira, and also Valhika, Kratha, Vichitya, Surasa, and the handsome king Nila; and Dhama, and Bhumipala; and Dantavakra, and he who was called Durjaya; that tiger amongst kings named Rukmi; and king Janamejaya,....


Sabha Parva, Mahabharata/Book II Chapter 13 mentions the Kshatriyas in support of Jarasandha: Dantavakra (दन्तवक्र) is mentioned in Mahabharata (II.13.12).[3].... There are others also viz., Dantavakra, Karusha, Karava, Meghavahana, that wait upon Jarasandha.


Sabha Parva, Mahabharata/Book II Chapter 28 mentions Sahadeva's march towards south: kings and tribes defeated. Dantavakra (दन्तवक्र) is mentioned in Mahabharata (II.28.3). [4]....And the hero (Sahadeva) then, defeating Dantavakra, the mighty king of the Adhirajas and making him pay tribute, re-established him on his throne.

Jat History

ठाकुर देशराज[5] ने लिखा है ....दतिया - [पृ.550]: ग्वालियर से आगे जीआईपी लाइन पर 60


[पृ.551]: मील के फैसले पर एक बुंदेल राज्य है इसमें सैनवार, लालऊ, हंसेलिया, हतींगरवार, राजीरिया, कैथोलिया, डठूरे आदि गोत्र के जाटों के राज्य को ही समाप्त नहीं किया किंतु उनके जागीरदारी और जमीदारी के हकों पर भी पानी फेर दिया। फिर भी यहां के जाटों ने बड़ी हिम्मत के साथ अपने को संभाले रखा है। अत्यंत बुरी हालत में पहुंचने से बचाया है और मौजूदा समय में उठने की भी कोशिश की है।

Jatwara Trans Chambal

The approximate axis of the Jatwara Trans Chambal could be taken to comprise the general line represented by Bhind, Gohad and Indargarh, overlapping the modern districts of Bhind (Gohad and Lahar tahsils), Gwalior (Morar and Bhitarwar blocks and Dabra tahsils) and Datia (Indargarh tahsil) in the present day Madhya Pradesh. Astride this axis and in a fan-like direction from it, there is a scattered population of Jats: to the East, it extends towards the lower reaches of the Chambal and Sind Rivers: to the West towards Gwalior, Shivpuri, Dabra, Magrora, and Bhitarwar. Gohad, Pichhore and Magrora were Jat states having about 360 Jat Forts. As a rule exclusive Jat habitations are few. More often the Jat is to be found in solitary homesteads in composite ethnic villages, his remote ancestor probably having been assigned the custody of the local Jat garhi (minor fortification), still precariously perched atop the neighboring hillock.


Tahsils in Datia District

Villages in Datia tahsil

1. Agora, 2. Akola, 3. Anjani, 4. Aser, 5. Badanpur, 6. Badera, 7. Badonkalan, 8. Bagedhari Sani, 9. Bahadurpur, 10. Bajni, 11. Bamrol, 12. Banoli, 13. Banvas , 14. Bardhuwan, 15. Bargaon , 16. Barodi, 17. Baroy , 18. Basai, 19. Baswaha, 20. Behruka, 21. Bhadevara, 22. Bhadumra, 23. Bhagour, 24. Bhairar, 25. Bhawanipur, 26. Bhilla, 27. Bhiti, 28. Bhitora, 29. Bhoy, 30. Bhula, 31. Bidaniya, 32. Bijanpura, 33. Bikar, 34. Bilhar, 35. Biloni, 36. Budheda, 37. Buhara, 38. Chakbahadurpur, 39. Chakchandewa, 40. Chakkabu, 41. Chakora, 42. Chakramsagar, 43. Charbara, 44. Chhata, 45. Chirai, 46. Chirol, 47. Chiroli, 48. Chirula, 49. Chitupura, 50. Chituwa, 51. Chopra, 52. Dabardona, 53. Dabrabag, 54. Dabribhat, 55. Dagurai, 56. Danda, 57. Dang Karera, 58. Dangra, 59. Daryapur, 60. Deguwanchamar, 61. Dera, 62. Devgarh, 63. Devpura, 64. Devra, 65. Dhankari, 66. Dhawari, 67. Dimankikund, 68. Diswar, 69. Dongarpur, 70. Dubah , 71. Durgapur, 72. Dursara, 73. Erai, 74. Gada, 75. Gadhi, 76. Gadri , 77. Gandhari, 78. Ganeshkheda, 79. Garera, 80. Gharawa, 81. Ghislani, 82. Ghughsi, 83. Ghutari, 84. Gora, 85. Govindgarh, 86. Govindnagar, 87. Govindpur, 88. Guda , 89. Gudariya, 90. Gujarra, 91. Guliyapura , 92. Gulmau, 93. Hamirpura , 94. Hasanpur, 95. Hatlai, 96. Hatlav, 97. Hidora, 98. Himmatpura, 99. Hinotiya, 100. Hirapur, 101. Ikara, 102. Imaliya , 103. Jaitpur , 104. Jakhoriya, 105. Janakpur, 106. Jhadiya, 107. Jhalmau, 108. Jighna, 109. Johariya, 110. Jonhar, 111. Kakarua, 112. Kakoda, 113. Kalapahad, 114. Kalipahad, 115. Kalipura , 116. Kalyanpurabujurg, 117. Kalyanpurakhurd , 118. Kamad , 119. Kamhar, 120. Kamrari, 121. Kamthara, 122. Kandhari, 123. Kararikhurd, 124. Karkhara, 125. Karra, 126. Katili, 127. Kevlari, 128. Khadrawani, 129. Khairi, 130. Khaitola, 131. Khamera, 132. Kharag, 133. Khireyaghoghu, 134. Khiriya, 135. Khiriyakabir , 136. Khiriyakhodas, 137. Khiriyanai, 138. Kotra, 139. Kuakheda, 140. Kudraya, 141. Kumhariyachhewlari, 142. Kumharra, 143. Kumhedi, 144. Kuretha, 145. Kurthara, 146. Kusauli, 147. Lakhanpur, 148. Lalauwa , 149. Lamaycha, 150. Larayta, 151. Letra, 152. Lidhora, 153. Madguwan, 154. Maharajpura, 155. Mahewa, 156. Mahua, 157. Makdari, 158. Makoni, 159. Malkhanpur, 160. Malokpahadi, 161. Mangalpur, 162. Manikpur, 163. Mawai, 164. Mohanpur, 165. Mudeni, 166. Mudra, 167. Murera, 168. Nadai, 169. Nandpur, 170. Nareta, 171. Nargarh, 172. Nauner, 173. Nayagaon, 174. Nayakheda, 175. Neguwan Sani, 176. Nichroli, 177. Niraval, 178. Nunwaha, 179. Orina, 180. Pachara, 181. Pachokhara, 182. Pagra, 183. Pahodi, 184. Pakhra , 185. Palinoor, 186. Palipamari, 187. Palothar, 188. Panuha, 189. Parakheda, 190. Parasari, 191. Pathari, 192. Pathra, 193. Penta, 194. Phulra, 195. Pisnari, 196. Pitsura, 197. Radhapur, 198. Raduapura, 199. Raipur Sani, 200. Raipura, 201. Rajapur, 202. Rajora, 203. Rajpur, 204. Ramnagar, 205. Rampura Dang, 206. Ramsagar, 207. Raon , 208. Rawari, 209. Rawatpura, 210. Reda, 211. Rew, 212. Richhar, 213. Richhara, 214. Richhari, 215. Sabdalpur, 216. Sadwara, 217. Saipura, 218. Salaiya Pamar, 219. Samawali, 220. Samroli, 221. Sankuli, 222. Sanora, 223. Sasuti, 224. Satari, 225. Satlon, 226. Semai, 227. Sersa, 228. Sewni, 229. Sihuli, 230. Sijora, 231. Sikaua, 232. Simariya, 233. Sinawal, 234. Sindhwari, 235. Sirol, 236. Sitapur, 237. Sujed, 238. Suketa, 239. Sunar, 240. Syari, 241. Taga, 242. Taka Khurd, 243. Taraua, 244. Targuwan, 245. Thakurpura, 246. Tiwari Ka Kua, 247. Udgawan, 248. Unao, 249. Uprain, 250. Urdana, 251. Vijaipur,

Villages in Datia District

Agora, Ahroni, Akola, Atra, Atreta, Badera, Badera Sopan, Badokhari, Badonikhurd, Badonkalan, Baghwali, Bagpura, Bagpura, Bahadurpur, Banoli, Banvas, Bardhuwan, Bargaon, Barguwan, Barka, Basai, Basturi, Baswaha, Berachh, Berchha, Bhadevara, Bhadol, Bhadona, Bhagupura, Bhalka, Bhander, Bharroli, Bharsula, Bhitari, Bichhodana, Bijanpura, Bikar, Bilheti, Budheda, Budhera, Buhara, Chandrol, Cheena, Chhikau, Chirula, Dabhni, Daryaopur, Daryapur, Datia, Debhai, Delua, Dhound, Diguwan, Dirolipar, Dohar, Dongarpur, Durgapur, Dursara, Erai, Gadhi, Gandhari, Ghughsi, Godan, Gora, Govindpur, Gujarra, Gumanpura, Gyara, Hetampura, Hidora, Hinotiya, Ikara, Imaliya, Indergarh, Ingui, Jaitpur, Johariya, Jonhar, Jonia, Jujharpur, Kamad, Kamlapuri, Kamrari, Kanjoli, Kaserua, Katili, Khadaua, Khajoori, Khamroli, Khireyaghoghu, Khiriya Faijulla, Kudari, Kulenth, Kumhedi, Kurthara, Kusauli, Lahar Haveli, Larayta, Loch, Magrol, Mahua, Maithana Pahuj, Makdari, Marsenibuzurg, Meoli, Mudra, Murera, Murgawan, Nahla, Nayakheda, Neemdanda, Netuapura, Nichroli, Orina, Pachokhara, Pachokhara, Padri, Pandokhar, Parasari, Parsondagoojar, Pathra, Piprauakalan, Porsa, Pyawal, Rampurakhurd, Ramsagar, Raruajiwan, Raruarai, Rawari, Reda, Richhar, Richhoura, Ruhera, Sadwara, Saletara, Salon Bharroli, Salon Bhitari, Sankuli, Sarsai, Satlon, Seguwan, Semai, Seondha, Sersa, Sijora, Sikari, Silori, Sinawal, Sindhwari, Sirol, Sirsa, Sitapur, Soda, Softa, Sohan, Sonagir, Sunari, Taga, Targuwan, Tatarpur, Tedot, Telgaon, Tharet, Tiletha, Todapahad, Uchad, Udina, Unao, Unchiya, Uprain, Urdana,


Notable persons

Gallery

External links

References

  1. Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.424
  2. दन्तवक्त्रश च नामासीद दुर्जयश चैव नामतः, रुक्मी च नृपशार्दूलॊ राजा च जनमेजयः (I.61.57)
  3. दन्तवक्रः करूषश च कलभॊ मेघवाहनः, मूर्ध्ना थिव्यं मणिं बिभ्रथ यं तं भूतमणिं विथुः (II.13.12)
  4. अधिराजाधिपं चैव दन्तवक्रं महाहवे, जिगाय करथं चैव सवराज्ये संन्यवेशयत
  5. Thakur Deshraj:Jat Jan Sewak, 1949, p.550-51

Back to Madhya Pradesh