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25 September
is the birthday of Chaudhary Devi Lal

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Devika

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(Redirected from Deha River)
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Author:Laxman Burdak, IFS (R)

Devika (देविका) is name of a River mentioned by Panini in Ashtadhyayi and also ,entioned in Mahabharata. Mahabharata (I.90.83) mentions that Yudhishthira, having obtained for his wife Devika, the daughter of Govasana of the Saivya tribe, in a self-choice ceremony, begat upon her a son named Yaudheya.

Variants

Mention by Panini

Devika (देविका) is mentioned by Panini in Ashtadhyayi. [1]

Jat clans

History

Ram Swarup Joon[2] write: 64. Madrak, Madra: The Madrak gotra is an ancient gotra, and is the root of many of the Jat gotras. According to various historians Sialkot, Quetta and Ghazni were the capitals of the Madrakas since ancient times. King Shalya, the maternal uncle of the Kauravas was from the Madrak gotra. Colonel Todd found a rock inscription during the excavations of Shakla Nagri (Modern Sialkot), which he sent to the Asiatic society. In this inscription King Shalya has been called a Madrak Jat. In Mahabharata (Karna Parva) King Shalya has been called Jatit. Alexander's army had a fierce battle with the forces of the Madrakas at Sialkot. Madra and Madrayana are just the other names of Madrak. According to "Neel Puran", Madrak country began after crossing the river Bias, Satyabhama (Satluj) and the river Devika flowed through it. In ancient India the country between the rivers Ravi and Chenab was called Madrak. According to Alberuni and Ptolemy Sialkot and Shakilnagri are one and the same. People belonging to Bhatti gotra associate themselves with both Ghazni and Sialkot and for this reason the Bhatti gotra is accepted as a branch of Madrak.

देविका नदी

विजयेन्द्र कुमार माथुर[3] ने लेख किया है ...1. देविका नदी (AS, p.451) = देविका नेपाल में प्रवाहित होने वाली नदी है, जो गंडकी नदी की सहायक है। देविका, गंडकी और चक्रा नदियों के त्रिवेणी संगम पर नेपाल का प्राचीन तीर्थ 'मुक्तिनाथ' बसा हुआ है। यह स्थान काठमांडू से 140 मील (लगभग 224 कि.मी.) दूर है।

2. देविका नदी (AS, p.451) = स्कंदपुराण के अनुसार (प्रभास खंड 278) यह नदी 'मूलस्थान' (मुल्तान, दक्षिणी पाकिस्तान) के प्रसिद्ध सूर्य मंदिर के निकट बहती थी। अग्नि पुराण 200 में इस नदी को सौवीर देश के अंतर्गत बताया गया है- 'सौवीरराजस्य पुरा मैत्रेया भूत पुरोहित: तेन चायतनं विष्णो: कारितं देविका तटे।' अर्थात् "सौवार नरेश के मैत्रेय नामक पुरोहित ने देविका तट पर विष्णु का देवालय बनवाया था।

महाभारत, वनपर्व के अंतर्गत तीर्थ यात्रा प्रसंग में इस नदी का उल्लेख है। भीष्मपर्व 9, 16 में इसका अन्य नदियों के साथ उल्लेख है- 'नदी वेत्रवती चैव कृष्णवेणां च निम्नगाम्, इरावती वितस्तां च पयोष्णी देविकामपि'।

[p.452]: महाभारत, अनुशासनपर्व 25, 21 में इस नदी में स्नान करने से मरने के बाद सुंदर शरीर की प्राप्ति बताई गई है- देविकायामुपस्पृश्य तथा संदरिकाह्रदे अश्विन्यां रूपवर्चस्कं प्रेत्य वैलभते नर:'।

पाणिनि ने देविका तट के धानों का उल्लेख किया है। (अष्टाध्यायी 7,3,1) विष्णु पुराण 2,15,6 में देविका के तट पर 'वीर नगर' नामक स्थान का उल्लेख है। कुछ विद्वानों के मत में देविका पंजाब की वर्तमान देह नदी है, जो रावी में मिलती है।

देविकाकुंड

विजयेन्द्र कुमार माथुर[4] ने लेख किया है ...देविकाकुंड(AS, p.452) का वर्णन महाभारत, अनुशासनपर्व में हुआ है। यहाँ इसे एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थान बताया गया है। सम्भवत: यह तीर्थ देविका नदी के तट पर स्थित था।

अश्विनीकुमार क्षेत्र

विजयेन्द्र कुमार माथुर[5] ने लेख किया है ... अश्विनीकुमार क्षेत्र (AS, p.51) महाभारत अनुशासन पर्व में इस तीर्थ का वर्णन है। प्रसंग से, वेदिकाकुण्ड के निकट इसकी स्थिति मानी जा सकती है। देविका नदी संभवत: पंजाब की देह है। 'देविकायामुपस्पृश्य तथा सुंदरिकाह्रदे, अश्विन्यां रूपवर्चस्कं प्रेत्य वै अभते नर:।' (अनुशासन पर्व महाभारत 25, 21)

मुलतान, पाकिस्तान

विजयेन्द्र कुमार माथुर[6] ने लेख किया है .... मुलतान, पाकिस्तान, (AS, p.753) : जनश्रुति के अनुसार मुल्तान का वास्तविक नाम मूलस्थान. यह एक प्राचीन सूर्य मन्दिर के लिए दूर-दूर तक विख्यात था। भविष्यपुराण 39 की एक कथा में वर्णित है किकृष्ण के पुत्र साम्ब ने दुर्वासा के शाप के परिणामस्वरूप कुष्ठ रोग से पीड़ित होने पर सूर्य की उपासना की थी और मूलस्थान (मुल्तान) में सूर्य मन्दिर बनवाया था। उसने मगद्वीप से सूर्योपासना में दक्ष सोलह मग परिवारों को बुलाया था। ये मग लोग शायद ईरान के निवासी थे और शाकल द्वीप में बसे हुए थे। इस सूर्य मन्दिर के खण्डहर मुल्तान में आज भी स्थित हैं। (दे. मगद्वीप).

स्कन्दपुराण के प्रभासक्षेत्र-माहात्म्य, अध्याय 278 में इस मन्दिर को देविका नदी के तट पर स्थित बताया गया है- 'ततो गच्छेन महादेविमूलस्थानमिति श्रुतम, देविकायास्तट रम्ये भास्करं वारितस्करम'। देविका वर्तमान देह नदी है। युवानच्वांग के समय में सिन्धु और मुल्तान पड़ौसी देश थे। अलबेरूनी ने सौवीर देश का विस्तार मुल्तान तक बताया है। एक प्राचीन किवदंती में मुल्तान को विष्णु के भक्त प्रह्लाद का जन्म स्थान तथा हिरण्यकशिपु की राजधानी माना जाता है। प्रह्लाद के नाम से एक प्रसिद्ध मन्दिर भी यहाँ स्थित है।

In Mahabharata

Devika (देविका) (Lady) is mentioned in Mahabharata (I.90.83)

Devika River (देविका) is mentioned in Mahabharata (III.80.110), (VI.10.15), (XIII.26.9), (XIII.26.19)


Adi Parva, Mahabharata/Book I Chapter 90 gives the History and family tree of Puru, Bharatas and Pandavas commencing from Daksha....Devika is listed in verse (I.90.83)[7]...Yudhishthira, having obtained for his wife Devika, the daughter of Govasana of the Saivya tribe, in a self-choice ceremony, begat upon her a son named Yaudheya.


Vana Parva, Mahabharata/Book III Chapter 80 mentions Merit attached to tirthas. Devika (देविका) Tirtha is mentioned in verse III.80.110. [8]...One should then go, O king, to Devika (देविका) celebrated over the whole world. It was there, O bull of Bharata race, that, as heard by us, the Brahmanas first sprang into existence. There also is the region of the holder of the trident--a region that is celebrated over the world. Having bathed in Devika and worshipped Maheswara by offering him, to the best of one's might, rice boiled in milk and butter, a man obtaineth, O bull of the Bharata race, the merit of a sacrifice that is capable of filling every desire.


Bhisma Parva, Mahabharata/Book VI Chapter 10 describes geography and provinces of Bharatavarsha. Devika River is listed in verse (VI.10.15). [9]


Anusasana Parva/Book XIII Chapter 26 mentions the sacred waters on the earth. Devika (देविका) is mentioned in Mahabharata (XIII.26.9).[10].....By bathing in Pushkara, and Prabhasa, and Naimisha, and the ocean, and Devika, and Indramarga, and Swarnabindu, one is sure to ascend to heaven being seated on a celestial car, and filled with transports of joy at the adorations of Apsara.


Anusasana Parva/Book XIII Chapter 26 mentions the sacred waters on the earth. Sundarika Hrada (सुंदरिकाह्रद) is mentioned in Mahabharata (III.82.51), (XIII.26.19).[11]..... Bathing in Devika and the lake known by the name of Sundarika as also in the Tirtha called Ashwini, one acquires, in one's next life, great beauty of form.

External links

References

  1. V. S. Agrawala: India as Known to Panini, 1953, p. 45, 104
  2. History of the Jats/Chapter V, p.
  3. Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.451
  4. Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.452
  5. Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.51
  6. Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.753
  7. युधिष्ठिरस तु गॊवासनस्य शैब्यस्य देविकां नाम कन्यां सवयंवरे लेभे । तस्यां पुत्रं जनयाम आस यौधेयं नाम (I.90.83)
  8. अथ गच्छेत राजेन्द्र देविकां लॊकविश्रुताम, परसूतिर यत्र विप्राणां शरूयते भरतर्षभ (III.80.110)
  9. नदीं वेत्रवतीं चैव कृष्ण वेणां च निम्नगाम, इरावतीं वितस्तां च पयॊष्णीं देविकाम अपि (VI.10.15)
  10. पुष्करं च प्रभासं च नैमिषं सागरॊदकम, देविकाम इन्द्र मार्गं च स्वर्णबिन्दुं विगाह्य च, विबॊध्यते विमानस्थः सॊ ऽपसरॊभिर अभिष्टुतः (XIII.26.9)
  11. देशकाल (?देविका) उपस्पृश्य तथा सुन्दरिका ह्रदे, अश्विभ्यां रूपवर्चस्यं परेत्य वै लभते नरः (XIII.26.19)

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