F.S.Young

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F.S.Young was the British Inspector-General of Police for earst while princely Jaipur State before Independence.

In 1934 Maha Prajapati Yagya at Sikar

In 1934 there was a Maha Prajapati Yagya at Sikar by the Jats. They claimed Kshatriya status on the basis of Bhat Records. Mr F S Young was IG Police sent by British Govt to watch the situation. Mr Young called the Bahis of Bhats and put a seal on them that these are historical documents. Any Bhat of Jat Gotra will prove that Jats are Kshatriyas.

एफ. एस. यंग का परिचय

मि. एफ. एस. यंग (F.S.Young) के बारे में राजेन्द्र कसवा लिखते हैं कि मि. एफ. एस. यंग की भूमिका लगभग तटस्थ भाव की नजर आती है. वह अंग्रेज पुलिस अधिकारी था. स्वाभाविक रूप से वह ब्रिटिश सरकार और जयपुर दरबार के प्रति समर्पित था. इसके बाद वह जागीरदारों और किसानों को लगभग बराबरी पर देखता था. उद्देश्य यही था की रियासत को कोई नुकशान न हो. किसानों को शिक्षित करने में उसका बड़ा हाथ था. उसने समय समय पर प्रशंसा की और उनमें आत्म सम्मान जगाया. [1]

झुंझुनूं में जाट महासभा का सम्मलेन सन् 1932 में यंग भी उपस्थित हुए थे. जयपुर रियासत के पुलिस इंस्पेक्टर जनरल मि. अफ.ऍस. यंग (F.S.Young) , नाजिम शेखावाटी, पुलिस अधीक्षक झुंझुनू व अन्य अधिकारीगण जुलुस के साथ-साथ चल रहे थे. शहर के निवासियों ने अनेक स्थानों पर जुलुस रोककर , मुख्य अतिथि व किसान नेताओं का सम्मान किया. महिलाओं ने आरती उतारी. तत्पश्चात वे भी जुलुस में शामिल हो गए.

सम्मलेन स्थल पर ऊँचा मंच बना हुआ था. अनेक हवन-कुण्ड एक और बने हुए थे. अधिवेशन के दौरान तीनों दिन सुबह यग्य हुआ और जनेऊ बांटी गयी. दिन में भाषणों के अतिरिक्त भजनोपदेशक रोचक और जोशीले गीत प्रस्तुत कर रहे थे. जीवन राम जैतपुरा, हुकुम सिंह, भोला सिंह, पंडित दत्तुराम, हनुमान स्वामी, चौधरी घासी राम आदि ने एक से बढ़कर एक गीत सुनाये. ठाकुर देशराज, पन्ने सिंह, सरदार हरलाल सिंह आदि नेताओं ने सामाजिक, आर्थिक एवं राजनैतिक बदलाव की आवश्यकता प्रतिपादित की. विशाल सम्मलेन को संबोधित करते हुए जयपुर रियासत के आई .जी . यंग (F.S.Young) ने कहा - जाट एक बहादुर कौम है. सामन्तों और पुरोहितों के लिए यह असह्य था.

सीकर ठिकाने से किसानों का समझौता 23 अगस्त 1934

ठाकुर देशराज[2] ने लिखा है ....जनता को यह जानकर प्रसन्नता होगी कि सीकर के जाटों का आंदोलन अंत में प्रशंसनीय सफलता के साथ समाप्त हुआ है। किसानों की मांगों में से अधिकांश पूरी कर दी गई हैं। निशंदेह जमीन का लगान जो रखा गया है वह बहुत अधिक है और अनुचित अवश्य है तो भी सीनियर अफसर की सब इच्छाओं पर विश्वास करते हुए किसान आंदोलन समाप्त करने के लिए सहमत हो गए हैं। सब संबंधितों के साथ न्याय करने के लिए यह अवश्य ही कहना पड़ेगा कि किसानों की ओर से कुँवर रतन सिंह सभापति राजपूताना जाट महासभा भरतपुर, ठाकुर झम्मन सिंह एडवोकेट मंत्री अखिल भारतीय जाट महासभा, अजमेर के वी.एस. पथिक आदि और ठिकाने की ओर से कैप्टन वेब सीनियर ऑफिसर सीकर के सुप्रयास और बुद्धिमानी पूर्ण सुकृत्यों तथा निर्देश के बिना आंदोलन का, बिना एक भी दुर्घटना के, अंत और अनूठा समझोता होना असंभव था। मि. जोन्स वाइस प्रेसिडेंट स्टेट कौंसिल और मि. यंग आई जी पुलिस जयपुर तथा ब्रिटिश भारत प्रेस भी अपनी उस सहानुभूति के लिए जो कि उन्होंने पीड़ित किसानों के प्रति प्रगट की तथा उपरोक्त सफलता में जिसका कुछ कम भाग नहीं है यह सभी बधाई के पात्र हैं।

External links

References

  1. राजेन्द्र कसवा: मेरा गाँव मेरा देश (वाया शेखावाटी), जयपुर, 2012, ISBN 978-81-89681-21-0, P. 160
  2. Thakur Deshraj: Jat Jan Sewak, 1949, p.272-273