Gandhamadana

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Gandhamadana (गन्धमादन) was a Mountain mentioned in Mahabharata (I.32.3), (III.267.5), (V.158.12),(VIII.30.78). Lit. it means 'Perfume Mountain'. It is mentioned in Ramayana at various places.

Variants

Identification

Po Lo Mo Lo Ki Li or Parimalagiri identified with the modern Gandhamadana hills.

Huen-Tsang's literature mentioned Po-Li-Mo-Lo-Ki-Li (Parimalagiri) (Pasayat,2007, 2008).

Jat clans

Location

Lying south of Gandhamadana (Perfume Mountain), Lake Anavatapta is said to be 800 li in circumference and bordered by gold, silver, and precious stones. Four rivers issued from the lake. The earthly manifestation of the lake is often identified with Lake Manasarovar, which lies at the foot of Mount Kailash (Gandhamadana or Perfume Mountain) in the Himalayas. The four mythical rivers are sometimes identified with the Ganges (east), the Indus (south), the Oxus (west), and the Tarim or the Yellow River (north).

History

The Harsha Charita of Bana/Chapter VI mentions ...--as far as Gandhamadana, whose cave-dwellings are perfumed with fragrant sulphur used as scent by the Yaksha matrons.

मंदराचल

विजयेन्द्र कुमार माथुर[2] ने लेख किया है ...मंदराचल (AS, p.688): 'श्वेतं गिरिं प्रवेक्ष्यामो मंदरं चैव पर्वतं, यत्र मणिवरौ यक्ष: कुबेरश्चैव यक्षराट्'-- महाभारत 139,5. इस उद्धरण में मंदराचल का पांडवों की उत्तराखंड की यात्रा के संबंध में उल्लेख है जिससे यह पर्वत हिमालय में बद्रीनाथ या कैलाश के निकट कोई गिरि-श्रंग जान पड़ता है. विष्णु पुराण 2.2.16 के अनुसार मंदर पर्वत इलावृत के पूर्व में है-- 'पूर्वेण मंदरोनाम दक्षिणे गंधमादन:' मंदराचल का पुराणों में क्षीरसागर-मंथन की कथा में भी वर्णन है. इस आख्यायिका के अनुसार सागर-मंथन के समय देवताओं और दानवों ने मंदराचल को मथनी बनाया था.

गंधमादन पर्वत

विजयेन्द्र कुमार माथुर[3] ने लेख किया है ...

1. गंधमादन (AS, p.266) - गंधमादन हिमालय की एक पर्वतमाला का नाम है-- 'गंधमादनमासाद्य तत्स्थानमजयत् प्रभु:, तं गंधमादनं राजन्नतिक्रम्य ततोअर्जुन:, केतुमालं विवेशाथवर्षं रत्नसमन्वितम्'-- महा. 2,28 दक्षिणात्य पाठ. बद्रीनाथ के पास हिमालय की एक चोटी अब तक इस नाम से विख्यात है. इसका उल्लेख महाभारत वन पर्व 134-2 तथा अनुवर्ती श्लोकों में सविस्तार है--'परिगृह्य द्विजश्रेष्ठाञ्ज्येष्ठा: सर्वधनुष्ताम्, पांचाली-सहिता राजन् प्रययु: गंधमादन ' आदि.

विष्णु पुराण में गंधमादन को सुमेरु पर्वत के दक्षिण में माना है-- 'पूर्वेण मंदरो नाम दक्षिणे गंधमादन'--2,2,16. विष्णु 2,2,28 में गंधमादन को मेरू के पश्चिम का 'केसराचल' माना है--'शिखिवासा: सवैडूर्य: कपिलो गंधमादन:, जारूधिप्रमुखास्त्द्वत पश्चिमे केसराचला:' किन्तु विष्णु पुराण में बद्रीनाथ या बद्रिकाश्रम को गंधमादन पर स्थित बताया गया है-- 'यद्बदर्याश्रमं पुण्यं गंधमादनपर्वते'. इससे जान पड़ता है कि एक गंधमादन पर्वत तो हिमालय के उत्तर में था और दूसरा बद्रीनाथ (जिला गढ़वाल, उत्तर प्रदेश) के निकट. पहला अवश्य ही हिमालय को पार करने के पश्चात मिलता था जैसा कि निम्न श्लोक से स्पष्ट है जहां इसका उल्लेख पांडु के वानप्रस्थ आश्रम में प्रवेश करने के पश्चात उनकी हिमालय तथा परवर्ती प्रदेशों की यात्रा के वर्णन के प्रसंग में है--'स चैत्ररथमासाद्य कालकूटमतीत्य च, हिमवन्तमतिक्रम्य प्रययौ गंधमादनम्' अर्थात पांडु चैत्ररथ-वन , कालकूट और हिमाचल को पार करने के पश्चात गंधमादन जा पहुंचे. विष्णु पुराण 2, में गंधमादन को इलावृत का पर्वत माना है. इस पर्वत को गंधर्वों और अप्सराओं की प्रिय भूमि, किन्नरों की क्रीड़ास्थली और ऋषियों तथा सिद्धों का आवास स्थल बताया [p.267]: गया है -- 'ऋषिसिद्धामरयुतं गंधर्वाप्सरसां प्रियम् विविशुस्ते महात्मान: किन्नाराचरितंगिरिम्' वन. 143,6.

2. गंधमादन (AS, p.267) (मद्रास) श्री रामेश्वरम् के संपूर्ण क्षेत्र का नाम गंधमादन है. महर्षि अगस्त्य का आश्रम इसी स्थान पर बताया जाता है. विशिष्ट रूप से, गंधमादन रामझरोका नामक स्थान को कहते हैं. यह रामेश्वर-मंदिर से डेढ़ मील दूर है. मार्ग में सुग्रीव, अंगद तथा जाम्बवान के नाम से प्रसिद्ध सरोवर मिलते हैं. कहते हैं कि गंधमादन में, हनुमान ने लंका जाने के लिए समुद्र की दूरी का अनुमान किया था तथा सुग्रीव आदि के साथ लंका पहुंचने के बारे में मंत्रणा की थी. कहा जाता है कि रामेश्वरम् प्राचीन गंधमादन पर ही स्थित है.

3. गंधमादन (AS, p.267) - धोलपुर (राजस्थान) के निकट एक पहाड़ी है. इसकी एक गुहा का संबंध पुराणों में वर्णित राजा मुचुकुंद से बताया जाता है. (देखें धौलपुर)


गंधमादन पर्वत का उल्लेख कई पौराणिक हिन्दू धर्मग्रंथों में हुआ है। महाभारत की पुरा-कथाओं में भी गंधमादन पर्वत का वर्णन प्रमुखता से आता है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार माना जाता है कि यहाँ देवता रमण करते हैं। पर्वतों में श्रेष्ठ इस पर्वत पर कश्यप ऋषि ने भी तपस्या की थी। गंधमादन पर्वत के शिखर पर किसी भी वाहन से नहीं पहुँचा जा सकता। यहाँ पापात्मा नहीं पहुँच पाते। पापियों को विषैले सरीसृप, कीड़े-मकौड़े डस लेते हैं।

अपने अज्ञातवास के समय हिमवंत पार करके पाण्डव गंधमादन के पास पहुँचे थे। कुबेर के राजप्रासाद में गंधमादन की उपस्थिति देखी जाती है। इंद्र लोक में जाते समय अर्जुन को हिमवंत और गंधमादन को पार करते दिखाया गया है। गंधमादन में ऋषि, सिद्ध, चारण, विद्याधर, देवता, गन्धर्व, अप्सराएँ और किन्नर निवास करते हैं। वे सब यहाँ निर्भीक विचरण करते हैं। इसी पर्वत पर भीमसेन और श्रीराम के भक्त हनुमान का मिलन हुआ था। भीमसेन ने यहाँ क्रोधवश्वत को पराजित किया था। हिमवत पर गंधमादन के पास वृषपर्वन का आश्रम स्थित था। यहाँ नित्य सिद्ध, चारण, विद्याधर, किन्नर आदि परिभ्रमण करते दृष्टिगोचर होते हैं। मार्कण्डेय ऋषि ने नारायण के उदर में गंधमादन के दर्शन किए थे। स्वर्ण नगरी लंका को खो देने पर कुबेर ने गंधमादन पर ही निवास किया था। गंधमादन शिखर पर गुह्यों के स्वामी, कुबेर, राक्षस और अप्सराएँ आनन्द पूर्वक रहते हैं। गंधमादन के पास कई छोटी स्वर्ण, मणि, मोतियों सी चमकती पर्वत मालाएँ हैं। माना जाता है कि इस पर्वत पर मानव जीवन की अवधि 11,000 वर्ष है। यहाँ आदमी सर्वानंद प्राप्त करता है, स्त्रियाँ कमलवत् लावण्यमयी हैं। गंधमादन पर देवता और ऋषिगण आदि पितामह ब्रह्मा की साधना में साधनारत रहते हैं। यह देव पर्वत शिखर अमृत और अक्षय आनन्द अनुभूति का महास्त्रोत है।

संदर्भ:भारतकोश-गंधमादन पर्वत

In Mahabharata

Gandhamadana (गन्धमादन) (Mountain) in Mahabharata (I.32.3), (III.267.5), (V.158.12),(VIII.30.78),


Vana Parva, Mahabharata mentions Bhimasena's journey to Gandhamadana at the request of Draupadi (in search of the sweet-scented flower).


Vana Parva, Mahabharata/Book III Chapter 267 mentions ....Rama with troops crossed the great ocean and arrived at Lanka....Gavakshya also of terrible mien and endued with a bovine tail, showed himself there, having collected sixty thousand crores of monkeys. And the renowned Gandhamadana, dwelling on the mountains of the same name...

गन्धमाथनवासी तु परदितॊ गन्धमाथनः
कॊटीसहस्रम उग्राणां हरीणां समकर्षत Mahabharata (III.267.5)

Udyoga Parva/Mahabharata Book V Chapter 158 mentions ...Without having yet approached Bhishma in battle, why dost thou indulge in boasts? Like a fool that boasteth of his intention to ascend the mountains of Gandhamadana...

असमागम्य भीष्मेण संयुगे किं विकत्दसे
आरुरुक्षुर यदा मन्थः पर्वतं गन्धमादनम Mahabharata (V.158.12)

Karna Parva/Mahabharata Book VIII Chapter 30 mentions ....So Rakshasas and Pishacas protect the Himavat, the best of mountains. The Guhyakas, O great king, protect the mountains of Gandhamadana.

रक्षःपिशाचान हिमवान गुह्यकान गन्धमाथनः
धरुवः सर्वाणि भूतानि विष्णुर लॊकाञ जनार्थनः Mahabharata (VIII.30.78)

The Harsha Charita of Bana/Chapter VII mentions .... How insignificant is the distance between the Snowy Range and Gandhamadana!

In Ramayana

Bala Kanda Sarga 17 mentions.... The brilliant Gandhamadana is the son of Kubera, while the divine architect Vishvakarma procreated the great vanara called Nala. [1-17-12]

धनदस्य सुतः श्रीमान् वानरो गन्धमादनः । विश्वकर्मा तु अजनयन् नलम् नाम महा कपिम् ॥१-१७-१२॥

Kishkindha Kanda Sarga 41...Sugreeva sends Vanara-s to southward which troop includes Hanuman, Jambavanta, Nila and others and Angada is its leader. Sugreeva gives a vivid picture of the southern side of Jambu dviipa up to the south-most part of passable regions, next to which the abode of Yama, the Terminator is there. This troop is also given one month's time to find the whereabouts of Seetha.

2, 3, 4, 5. Sugreeva, the well-informed and brave lord of Vanara troops, then beckoned Angada and the other prominent vanara-s who are valorous ones with full-fledged dash and dare, like the son of Fire-god Neela, and the exceptional vanara Hanuman, the highly vigorous son of Grandparent Brahma, namely Jambavanta, also others like Suhotra, Sharari, Sharagulma, Gaja, Gavaksha, Gavaya, Sushena, Vrishabha, Mainda, Dvivida, Sushena, Gandhamadana, and the two sons of Ritual-fire called Ulkamukha, Ananga. [4-41-2, 3, 4, 5]

नीलम् अग्नि सुतम् चैव हनूमन्तम् च वानरम् ।
पितामह सुतम् चैव जांबवंतम् महोजसम् ॥४-४१-२॥
सुहोत्रम् च शरारिम् च शरगुल्मम् तथा एव च ।
गजम् गवाक्षम् गवयम् सुषेणम् वृषभम् तथा ॥४-४१-३॥
मैन्दम् च द्विविदम् चैव सुषेणम् गन्धमादनम् ।
उल्कामुखम् अनंगम् च हुतशन सुतौ उभौ ॥४-४१-४॥
अंगद प्रमुखान् वीरान् वीरः कपि गण ईश्वरः ।
वेग विक्रम संपन्नान् संदिदेश विशेषवित् ॥४-४१-५॥

Yuddha Kanda/Yuddha Kanda Sarga 30 mentions.... Gaja, Gavaksha, Gavaya, Sharabha and Gandhamadana the five sons of Yama the God of Death all of them resembling Yama

पुत्रा वैवस्वतस्य अत्र पन्च काल अन्तक उपमाः । गजो गव अक्षो गवयः शरभो गन्ध मादनः ॥६-३०-२६॥

References


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