Hiranyavati

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Hiranyavati (हिरण्यवती) is name of a River. It is also mentioned as a place name for Ujjain in ancient literature.

Origin

Variants

History

In ancient times, Kushinagar was known as Kushavati (Jatakas). It finds mention in epic Ramayana as the city of Kusha the son of Rama, the famous king of Ayodhya. Kushinagar was a celebrated center of the Malla kingdom of ancient India. Later, it would be known as Kushinara, one of the most important four holy sites for Buddhists. At this location (Rama Bhar Stupa), near the Hiranyavati River, Gautama Buddha attained Parinirvana (or 'Final Nirvana') after falling ill from eating a meal of a species of mushroom.

James Legge[1] tells....Going on twelve yojanas, still to the east, they came to the city of Kusanagara, on the north of which, between two saal trees, on the bank of the Nairanjana river, is the place where the World-honoured one, with his head to the north, attained to pari-nirvana (and died). Nairanjana is confounded, according to Eitel, even by Hsuan-chwang, with the Hiranyavati, which flows past the city on the south.

हैरण्यवती

हैरण्यवती (AS, p.1030) - हिरण्मय वर्ष की नदी ,'दक्षिणेन तु नीलस्य निषधस्योत्तरेणतु वर्ष हिरण्मयं यात्रा हैरण्यवती नदी' यह साइबेरिया या मंगोलिया की कोई नदी हो सकती है. (दे. हिरण्मय)[2]

हिरण्यवती

हिरण्यवती उज्जयिनी का प्राचीन संस्कृत नाम है। उज्जयिनी के कई नाम संस्कृत साहित्य में मिलते हैं जिनमें मुख्य हैं- अवंती, विशाला, भोगवती और पद्मावती।[3]

हिरण्यवती नदी

हिरण्यवती नदी का उल्लेख वामनपुराण में हुआ है। यह कुरूक्षेत्र में बहने वाली पवित्र नदी है, जो स्वच्छ और विशुद्ध जल से भरी रहती है। इस नदी में कंकर-कीचड़ का नाम तक नहीं है। हिरण्यवती नदी भारत की प्रमुख नदियों में से एक है। (उद्योग पर्व महाभारत 152.7-8) सरस्वती की सहायक नदियों में दृष्टावती तथा हिरण्यवती भी थीं।[4]

'बुद्धचरित' के वर्णन के अनुसार यह नदी राप्ती जान पड़ती है। वामनपुराण के वर्णन के अनुसार-'सरस्वती नदी पुण्या तथा वैतरणी नदी, आपगा च महापुण्या गंगा मंदाकिनी नदी, मधुस्रवा अम्लु नदी, कौशिकी पापनाशिनी दृषद्वती महापुण्या तथा हिरण्यवती नदी।'वामनपुराण 39, 6-7-8[5]

बुद्ध से सम्बंध: लगभग 2500 वर्ष पूर्व बुद्ध ने हिरण्यवती नदी का जल पीकर भिक्षुओं को अंतिम उपदेश देने के बाद महापरिनिर्वाण प्राप्त किया था। उनका दाह संस्कार मल्लों ने चक्रवर्ती सम्राट की भांति इसी नदी के तट पर रामाभार में किया था। उस समय नदी विशाल थी, यही कारण था कि भिक्षु महाकश्यप जब बिहार से यहां पहुंचे तो शाम होने के कारण नदी पार नहीं कर सके और प्रात: काल नदी पार करके रामाभार पहुंचे। तब जाकर बुद्ध का अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। हिरण्यवती का जल बौद्धों के लिए काफ़ी पवित्र है। पर्यटक यहां से जल ले जाकर अपने पूजा घरों में रखते हैं।[6]

महत्त्वपूर्ण तथ्य: प्राचीन मल्ल गणराज्य की राजधानी कुशीनगर के पूर्वी छोर पर प्रवाहित होने वाली हिरण्यवती नदी बुद्ध के महापरिनिर्वाण की साक्षी तो है ही, मल्ल गणराज्य की समृद्धि और सम्पन्नता का आधार भी रही है। प्राचीन काल में तराई के घने जंगलों के बीच बहती हुई यह नदी मल्ल राज्य की सीमा भी निर्धारित करती थी। कहा जाता है कि इस नदी के बालू के कणों के साथ सोने के कण भी मिलते थे, जिसके कारण इसे हिरण्यवती कहा जाने लगा। प्राचीन काल में जंगल में रहने वाले आदिवासी और जन जातियों के लोग इस नदी के बालू में से कठिन परिश्रम द्वारा सोने के कणों को अलग करके उनको उन समय के श्रेष्ठ जनों, साहुकारों को बेचते थे।[7]

In Mahabharata

Hiranwati (हिरण्वती) (River) is mentioned in Mahabharata (V.157.1), (VI.9.5), (VI.10.24)


Udyoga Parva/Mahabharata Book V Chapter 157 mentions Hiranwati (हिरण्वती) River in verse Mahabharata (V.157.1).[8]....After the Pandavas had encamped by the side of the Hiranwati, the Kauravas also fixed their camps.


Bhisma Parva, Mahabharata/Book VI Chapter 9 mentions names of the Varshas, mountains and all those that dwell on those mountains. Hiranwati (हिरण्वती) (River) is mentioned in Mahabharata verse (VI.9.5). [9] ..On the south of Nishadha is the Varsha called Hiranvata where is the river called Hiranwati.


Bhisma Parva, Mahabharata/Book VI Chapter 10 describes geography and provinces of Bharatavarsha. Hiranwati (हिरण्वती) (River) is mentioned in Mahabharata verse (VI.10.24).[10]

References

  1. A Record of Buddhistic Kingdoms/Chapter 24, f.n.5
  2. Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.1030
  3. भारतकोश-हिरण्यवती
  4. भारतकोश-हिरण्यवती नदी
  5. Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.1025
  6. भारतकोश-हिरण्यवती नदी
  7. भारतकोश-हिरण्यवती नदी
  8. हिरण्वत्यां निविष्टेषु पाण्डवेषु महात्मसु, थुर्यॊधनॊ महाराज कर्णेन सह भारत
  9. थक्षिणे शृङ्गिणश चैव शवेतस्यादॊत्तरेण च, वर्षं हैरण्वतं नाम यत्र हैरण्वती नथी (VI.9.5)
  10. शशिकान्तां शिवां चैव तदा वीरवतीम अपि, वास्तुं सुवास्तुं गौरीं च कम्पनां स हिरण्वतीम (VI.10.24)