Kakrola

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Kakrola (ककरौला) village is located near Najafgarh in west Delhi. Most of the agricultural land has been acquired by DDA. It has NSIT institute of engineering very close by. The people of this village are acquiring higher education now.

Location

Origin

Gahlawat Jats from neighbouring Haryana and Rajasthan founded this village.

History

Gahlawat and Gahlot are same gotras.

The village Mitraon is dominated by Gahlawat clan Jats. Village Farmana in Sonipat district is considered as the centre of Gahlawats. The Gahlawat people of Mitraon believe that they migrated from Farmana and settled at Mitraon and Kakrola. Some people came from Rajasthan. Local MLA Kailash Mitrau is from Mitraon village. [1]

Famous Arya Samajist Chaudhari Ishwar Singh Gehlawat was originally from Kakrola. He spent most of time in educating people from Farmana. His grandson Kulbeer Singh Gahlot has a good business. Some of his family members live in Canada. Prof Jagdish Kumar Gehlawat of Jat Jyoti did his High School from Farmana and he gives credit to Chaudhari Ishwar Singh for his progress. [2]

Jat Gotras

Notable Persons

External Links

जाटवीरों की वीरता पर चौ० ईश्वरसिंह गहलोत का एक श्रेष्ठ भजन

नोट - कविसम्राट् चौ० ईश्वरसिंह जी गहलोत गांव व डा० ककरोला (प्रदेश देहली) का बनाया हुआ यह भजन है जो उन्होंने सन् 1935 ई० में गाया था। इस भजन का पूरा विवरण जानने के लिए देखिये यह पेज -

Jat History Dalip Singh Ahlawat/Chapter IV (Page 444-448)


टेक - दुनिया पुकारी, हैं बेशक जाट देवता।

ईसा से पहले हुए चार सौ अस्सी वर्ष,
यूनान में जाट लड़े कहते हैरोडोटस
मेरी जानकारी.....हैं बेशक जाट देवता॥1॥
स्ट्रेबो कहे रूम में सन् 250 में बसते जाट,
कैस्पियन के यौद्धेय जाट रखते बड़ा भारी ठाठ।
बड़े योद्धा भारी.....हैं बेशक जाट देवता॥2॥
थियोडोसियस शाह रूम जाटों से लड, गया हार,
जाट राजा अत्तीला को निज लड़की का डोला त्यार।
कहे कर रिश्तेदारी.....हैं बेशक जाट देवता॥3॥
इटली में राज करें थियोडेरिक तीस साल,
कब्जा में जाटों के रहे स्पेन और पुर्तगाल।
जर्मनी हमारी.....हैं बेशक जाट देवता॥4॥
अपने हैं जटलैण्ड, स्काटलैण्ड, स्कन्धनाभ
यूनान, मिश्र, सीरिया, तुर्की में अपना रौबदाब।
पेशा फौजदारी.....हैं बेशक जाट देवता॥5॥
रशिया पर्शिया अपने, अपना अफ़गानिस्तान,
क्रुक कनिंघम, ग्राउस कहते हैं चीन तिब्बत, तुर्किस्तान।
जाटों की सरदारी.....हैं बेशक जाट देवता॥6॥
जाटाली इलाका गजनी बस्ती ईरान में,
बुशहर के धोरे दीखें जाटनी पहरान में।
चुंदड़ी लंहगा साड़ी.....हैं बेशक जाट देवता॥7॥
ईरान के खण्डहर खोदे, मिलते निशान हैं,
सिक्के पर सीता जी, रामचन्द्र, हनुमान हैं10
भाषा हरफ नगारी.....हैं बेशक जाट देवता॥8॥
अरब में पचास हजार बसते जत नाम हैं,
औरतें फ्रीश फंसा अपने हुश्न दाम में।
करती खातरदारी.....हैं बेशक जाट देवता॥9॥
अली के खज़ाने की रक्षा जाट लोग करते,
पैगम्बर हजरत मुहम्मद साहब जाटों का दम भरते।
बिगड़ी संवारी11.....हैं बेशक जाट देवता॥10॥
रण के लड़ाके बांके वैद्यराज जाट थे,
श्रीमती आयशा का दुःख रोग काटते।
खो दी बीमारी12.....हैं बेशक जाट देवता॥11॥
ईसा से हजारों वर्ष पहले लिखते डाक्टर सेस,
धनवान् बलवान् विद्वान् जाट थे विशेष।
जल बवान असवारी13.....हैं बेशक जाट देवता॥12॥
एशिया, मलाया, चीन, यूरोप के शासक लिखते टॉड राजस्थान,
खेती करके पेट पालें आज उनकी संतान।
करते जमींदारी.....हैं बेशक जाट देवता॥13॥
खेती करके पेट पालें अपना और जहान का,
अमीर, गरीब, जीव गुण गाते किसान का।
कहते हैं सब भिखारी.....हैं बेशक जाट देवता॥14॥
कितनी फसल पकी, रॉली पूछे देकर तार,
भारत से कब अन्न आवे, भूखे कहें कर इन्तजार।
अंग्रेज व्यापारी.....हैं बेशक जाट देवता॥15॥
राजा प्रजा खैर मानें इसलिए जाट देवता,
देते हैं लगान अन्न खाने इसलिए जाट देवता।
कहें नौकर सरकारी.....हैं बेशक जाट देवता॥16॥
छः और 10, चौदह, 29 जंग में ललकारते,
हर हिटलर आर्य सब जर्मन पुकारते
सबसे बलकारी.....हैं बेशक जाट देवता॥17॥
विश्वनाथ मन्दिर पर जो चांदी का हुआ काम है,
लाख रुपए लाकर किया रणजीतसिंह ने नाम है।
कहे काशी ललकारी.....हैं बेशक जाट देवता॥18॥
युधिष्ठिर का हीरा उलटा अफगानिस्तान से ले रणजीत,
कीमत दुनिया सारी एक वक्त भोजन कर नचीत।
माया के भंडारी.....हैं बेशक जाट देवता॥19॥
आकोदा का कूंआं देखो देवताओं का काम है,
बनाने वाले का नाम चौधरी हर्षराम है।
कहती पंहारी.....हैं बेशक जाट देवता॥20॥
दस हाथ का भीतर, चार हाथ चौड़े पत्थर ढोल,
सोला ढोल ऊपर नीचे पानी तक रखे अनतोल।
जाट होशियारी.....हैं बेशक जाट देवता॥21॥
भगत पूरण, धन्ना, तेजा, हरिदास, निश्चलदास,
सुलतान, बखतावर भरें धर्म-बहनों के भात खास।
फैली जग उजियारी.....हैं बेशक जाट देवता॥22॥
यशोधर्मा, कनिष्क, सूरजमल, जवाहर, महीपाल,
गोकला, शाहबेग, तारु, नलवा से शहीद लाल।
जिन्दगानी वारी.....हैं बेशक जाट देवता॥23॥
राजाबाई करे सफाई डाकुओं की, हरनामकौर,
चांदकौर, किशोरी सी जाटनी शहजोर।
दुश्मन की करें खवारी.....हैं बेशक जाट देवता॥24॥
जाट जननी बिछाराम जिनमें भाई बलदेव,
नाम रखें कौम का हैं देवता पर करें सेव।
स्कूल फुलवारी.....हैं बेशक जाट देवता॥25॥
सबसे बड़े मोटे राजा, सबसे छोटे हैं वजीर,
जाट हैं वजीर होते हुए, कहते कर तकरीर।
खुशामद ना प्यारी हैं बेशक जाट देवता॥26॥
जो खाते इनका अन्न दाना उनके जाट देवता,
जिनका जग में नहीं ठिकाना, उनके जाट देवता।
कहती विधवा नारी.....हैं बेशक जाट देवता॥27॥
सच्चे आर्यों का नाम दूसरा बस जाट है,
तीन सौ बको पर सच्ची ईश्वरसिंह की डाट है।
सच्चे व्रतधारी.....हैं बेशक जाट देवता॥28॥

References

  1. Jat Jyoti, June-2016, p. 37
  2. Jat Jyoti, June-2016, p. 37
  3. Jat History Dalip Singh Ahlawat/Chapter III (Page 211)

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