Khadwali

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Khadwali (खडवाळी) or Khidwali (खिडवाळी) is a medium-size, Hooda gotra village in district Rohtak. Being near to village 'Sanghi', it is also addressed as "Sanghi-Khadwali (सांघी-खडवाळी). It is the head village of Hooda Khap which is spread in 36 villages.[1]

Jat Gotras

History

हुड्डा गोत्र का इतिहास जाट-रत्न [2] में प्रकाशित हुआ है. सांघी गाँव के डालाण पाने के भाट पँ. ओमप्रकाश के अनुसार हुड्डा गोत्र चंद्रवंशी है. इनके पूर्वज चौहान वंश में अग्र नाम के व्यक्ति थे. अग्र के पुत्र उदासीह थे जिनसे हुड्डा (ऊदा) गोत्र का प्रचलन हुआ. इनका निवास प्रारंभ में अलतकुण्ड (साम्भर) में था जहाँ से निकल कर इन्होने गढ़रेहड़ा (गोगामेड़ी) गाँव बसाया जहाँ गोगापीर का मेला लगता है. गढ़रेहड़ा से चलकर ये चित्रकूट बसे फिर वहां से छोड़ कर राजस्थान के जैसलमेर में चले गए. कुछ समय जैसलमेर रहकर अजमेर आ गए. परिवार बढ़ने से उदयसिह परिवार एवं पुत्र हरडा सहित घुसकानी गाँव में 'देववाला' तालाब के किनारे 'खुजाटी खेड़ा' गाँव बसाया. उदा की पत्नी का नाम घुमानी था जिसके नाम पर गाँव का नाम घुसकानी पड़ा. घुसकानी की नींव संवत 1230 (सन 1177 ) को रखी गयी थी. घुमानी हुड्डा गोत्रीय लोगों की दादी कहलाई तथा उसके पति उदा (हुड्डा) के नाम पर गोत्र का नाम हुड्डा पड़ा. इसके पांच साल बाद घुसकानी के एक किमी. उत्तर की तरफ विक्रमी संवत 1235 (सन 1182 ) में हुड्डा के पुत्र हरडा के चचेरे भाई फ़तेह सिंह ने खिडवाली गाँव बसाया. फ़तेह सिंह के दूसरे भाई ने यमुना की तरफ बल्लभगढ़ के पास दयालपुर गाँव बसाया.

History

Notable persons

चौ० टेकराम हूडा (Death: 1926 AD)

दलीप सिंह अहलावत लिखते हैं -

चौ० टेकराम हूडा का जन्म खिडवाली गांव (जि० रोहतक) में हुआ था। आपके पिताजी का नाम चौ० रामजीलाल हूडा था। आप एक निडर योद्धा, साहसी, हिन्दूधर्म के रक्षक तथा गोमाता के सच्चे सेवक एवं रक्षक थे। चौ० टेकराम की महानता इस कारण है कि आपने वह कार्य पूरा किया जो ईश्वर का आदेश है कि - हे राजपुरुषो! जैसे सूर्य मेघ को मार और उसको भूमि में गिरा सब प्राणियों को प्रसन्न करता है वैसे ही गौओं के मारने वाले को मार गौ आदि पशुओं को निरन्तर सुखी करो।" (ऋग्वेद मं० 1/अ० 18/सू० 120/मन्त्र 10)।

ईश्वर के इस आदेश का पालन करने के चौ टेकराम के अनेक उदाहरण हैं जिनमें से कुछ का ब्यौरा निम्न प्रकार है -

1. एक बार रोहतक शहर के मुसलमान कसाई ईद पर्व के दिन एक गाय को सजा-धजा कर उसे काटने के लिए बूचड़खाने में ले जा रहे थे। पता लगने पर वीर टेकराम हूडा उचित समय पर कसाइयों की गली में पहुंच गया। गाय को साथ ले जाने वालों पर वीर योद्धा टेकराम ने शेर की तरह झपटकर उनको मारना शुरु कर दिया। इनकी मार से दो-तिहाई मर गए और कई घायल हो गये। शेष गाय को छोड़कर भाग खड़े हुए। उस वीर ने अपने एक साथी को, जो कि कुछ दूरी पर खड़ा था, इस गाय को भगा ले जाने को पुकारा और वह इस गाय को भगाकर शहर से दूर ले गया। जब चौ० टेकाराम ने देखा कि सब कसाई उससे भयभीत होकर गाय को वापिस लाने का साहस छोड़ बैठे हैं, तब आप भी वहां से भागकर अपने गांव में आ गये।
2. इस घटना के कुछ समय पश्चात् वीर योद्धा टेकराम अपने कुछ साथियों को लेकर रोहतक के बूचड़खाने में घुस गए जहां पर कई कसाई गौओं तथा बछड़ों की हत्या करने ही वाले थे। उन्होंने सब कसाइयों को मौत के घाट उतार दिया और सब गौओं तथा बछड़ों को वहां से निकाल लाए। ऐसी थी चौ० टेकराम की महान् वीरता।
3. चौ० टेकराम ने अपने मित्र पहलवान लोटनसिंह अहलावत जो चिराग दिल्ली के निवासी थे, को दिल्ली के मुसलमान कसाइयों से गौओं को छुड़ाने हेतु युद्ध करने में कई बार सहायता दी। पहलवान लोटनसिंह अहलावत ने दिल्ली के कसाइयों को मार-मार कर इतना भयभीत कर दिया था कि उन्होंने पशुहत्या बंद कर दी। चौ० लोटनसिंह भी चौ० टेकराम की इस गोरक्षा सहायता के लिए रोहतक आते रहते थे।

चौ० टेकराम ने रोलट एक्ट के विरुद्ध हरयाणा में स्वाधीन विचारों का प्रसार किया। परिणामस्वरूप इन्हें सन् 1919 ई० में लाहौर किले में 3 वर्ष बन्दी रखा गया।

हण्टर कमेटी ने इनकी स्वाधीनता का उल्लेख अपनी उस रिपोर्ट में किया जो हाउस ऑफ कामन्स में प्रस्तुत की गई थी।

जब चौ० लालचन्द जी चौ० मातुराम को हराकर एम.एल.सी. बने तथा वजीर भी बनाए गए, तब चौ० मातुराम ने चौ० लालचन्द के खिलाफ चुनाव याचिका दायर कर दी। ट्रिब्यूनल ने चौ० लालचन्द की सदस्यता खत्म कर दी, साथ ही उन्हें वजारत भी छोड़नी पड़ी। उपचुनाव में चौ० मातुराम के मुकाबले में चौ० छोटूराम ने चौ० टेकराम को खड़ा किया। इस चुनाव में चौ० टेकराम भारी मतों से विजयी होकर एम.एल.सी बने।

दुर्भाग्य से अगस्त 1926 ई० में चौ० टेकराम को रोहतक में प्रेम निवास (सर छोटूराम की नीली कोठी) चौराहे पर उनके शत्रुओं ने कत्ल कर दिया।

वीर योद्धा चौ० टेकराम पर केवल हूडा गोत्र एवं जाट जाति को ही नहीं, बल्कि समस्त हिन्दू जाति को गर्व है। इनकी महानता सदा अमर रहेगी।

(जाट वीरों का इतिहास: दलीप सिंह अहलावत, पृष्ठ 1005-1006)

श्रीकृष्ण हुड्डा (Mob: 9253126898) प्रधान सर्व हुड्डा खाप खिडवाली, कैम्प कार्यालय, चेंबर न.172 , जिला अदालत रोहतक.


External Links

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References

  1. Jat History Dalip Singh Ahlawat/Chapter XI, Page 1005
  2. जाट-रत्न:फरवरी 2011, पृ. 29 -30

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