Kosi

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(Redirected from Koshi River)
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Author:Laxman Burdak, IFS (R)

Kosi River (कोसी नदी) drains the northern slopes of the Himalayas in Tibet and the southern slopes in Nepal. The Koshi is 720 km long and drains an area of about 74,500 km2 in Tibet, Nepal and Bihar.[1][2]

Variants

  • Nepali: कोशी नदी, koshī nadī
  • Hindi: कोसी नदी, kosī nadī
  • Koshi (कोशी)
  • Koshi River (कोशी नदी)
  • Kosi River (कोसी) (AS, p.242)

Major tributaries

From a major confluence of tributaries north of the Chatra Gorge onwards, the Koshi River is also known as Saptakoshi (सप्तकोशी) for its seven upper tributaries. These include the Tamor River originating from the Kanchenjunga area in the east and Arun River and Sun Koshi from Tibet.

The Sun Koshi's tributaries from east to west are Dudh Koshi, Bhote Koshi, Tamakoshi River, Likhu Khola and Indravati. The Saptakoshi crosses into northern Bihar where it branches into distributaries before joining the Ganges near Kursela in Katihar district.[3]

River Basin

The Koshi is 720 km long and drains an area of about 74,500 km2 in Tibet, Nepal and Bihar.[4][5]

The river basin is surrounded by ridges which separate it from the Yarlung Tsangpo River in the north, the Gandaki in the west and the Mahananda in the east. The river is joined by major tributaries in the Mahabharat Range approximately 48 km north of the Indo-Nepal border. Below the Siwaliks, the river has built up a megafan some 15,000 km2 in extent, breaking into more than 12 distinct channels, all with shifting courses due to flooding. Kamalā, Bāgmati (Kareh) and Budhi Gandak are major tributaries of Koshi in India, besides minor tributaries such as Bhutahi Balān.[6][7]

Origin

History

कोसी

विजयेन्द्र कुमार माथुर[8] ने लेख किया है ...कोसी (AS, p.242): कौशिकी (नदी) का अपभ्रंश हो सकता है. इस नाम की भारत में कई नदियाँ हैं.

कोसी नदी का परिचय

कोसी नदी गंगा की सहायक नदी है, जो नेपाल के पहाड़ों से निकल कर नेपाल और बिहार में बहती हुई राजमहल (बिहार) के निकट गंगा में मिल जाती है। इसे बिहार का शोक भी कहा जाता है।

यह नदी नेपाल और उत्तरी भारत में बहती है। यह नदी अपनी सहायक नदियों के साथ कोसी नेपाल के पूर्वी तीसरे हिस्से व तिब्बत के कुछ हिस्से को अपवाहित करती है, जिसमें माउंट एवरेस्ट के आसपास का क्षेत्र शामिल हैं। इसकी कुछ प्रारंभिक धाराएँ नेपाल की सीमा के पार तिब्बत से निकलती है। भारत-नेपाल सीमा से लगभग 48 किमी उत्तर में कोसी में कई प्रमुख सहायक नदियाँ मिलती हैं और यह संकरे छत्र महाखड्ड से शिवालिक की पहाड़ियों से होते हुए दक्षिण दिशा में मुड़ जाती है। इसके बाद कोसी नदी उत्तर भारत के विशाल मैदान में बिहार में अवतरित होकर गंगा नदी की ओर बढ़ती है, जहाँ यह लगभग 724 किमी की यात्रा के बाद पूर्णिया के दक्षिण में गंगा से मिलती है। लगातार भारी मात्रा में मलबा बहाकर जमा करते रहने के कारण उत्तरी भारत के विशाल मैदान में कोसी की अपनी कोई स्थायी धारा नहीं है।

सप्तकोसी: कोसी नदी हिमालय पर्वतमाला में प्रायः 7000 मीटर की ऊँचाई से अपनी यात्रा शुरू करती है जिसका ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र नेपाल तथा तिब्बत में पड़ता है। दुनिया का सबसे ऊँचा शिखर माउंट एवरेस्ट तथा कंचनजंघा जैसी पर्वतमालाएं कोसी के जलग्रहण क्षेत्र में आती हैं। नेपाल में इसे सप्तकोसी के नाम से जानते हैं जो कि सात नदियों इन्द्रावती, सुनकोसी या भोट कोसी, तांबा कोसी, लिक्षु कोसी, दूध कोसी, अरुण कोसी और तामर कोसी के सम्मिलित प्रवाह से निर्मित होती है। इनमें पहली पाँच नदियों के संयोग से सुनकोसी का निर्माण होता है और यह पश्चिम से पूर्व की ओर बहती है। यह नदियाँ गौरी शंकर शिखर तथा मकालू पर्वतमाला से होकर आती हैं। छठी धारा अरुण कोसी की है जिसके जलग्रहण क्षेत्र में सागर माथा (माउन्ट एवरेस्ट) अवस्थित है। सातवीं धारा पूरब से पश्चिम की ओर बहने वाली तामर कोसी है जो कि कंचनजंघा पर्वतमाला से पानी लाती है। इस तरह सुनकोसी, अरुण कोसी तथा तामर कोसी नेपाल के धनकुट्टा जिले में त्रिवेणी नाम के स्थान पर आकर मिल जाती हैं और यहीं से इसका नाम सप्तकोसी, महाकोसी या कोसी हो जाता है। त्रिवेणी पहाड़ों के बीच स्थित है और यह स्थान चतरा से, जहाँ कोसी मैदान में प्रवेश करती है, प्रायः दस किलोमीटर उत्तर में पड़ता है।[1] कोसी का रुख़

कोसी नदी की अपनी कोई स्थायी धारा नहीं थी क्योंकि तटबंध बनाकर नदी की धारा को नियंत्रित दिशा दी गई। कोसी नदी की धारा बदल दी गई इसलिए बिहार में प्रलयंकारी बाढ़ कि स्थिति पैदा हुई है। बिहार में बाढ़ के कारण स्थिति गंभीर बनी हुई है। दरअसल इतने बड़े पैमाने पर आई बाढ़ की वजह है कोसी नदी का अपना रास्ता बदलना।

संदर्भ: भारतकोश-कोसी नदी

In Mahabharata

Kaushiki (कौशिकी) (Tirtha/River) Mahabharata (II.27.20), (II.82.111), (III.82.135), (III.114.1), (VI.10.17), (VI.10.28),


Sabha Parva, Mahabharata/Book II Chapter 27 mentions the countries subjugated by Bhimasena. Kaushiki (कौशिकी) (Tirtha/River) is mentioned in Mahabharata (II.27.20). [9]


Vana Parva, Mahabharata/Book III Chapter 82 mentions names Pilgrims. Kaushiki (कौशिकी) (Tirtha/River) is in Mahabharata (III.82.135).[10] Bathing next at the confluence of the Kirtika with the Kausiki (III.82.135) and the Aruna, and fasting there for three nights a man of learning is cleansed of all his sins.


Vana Parva, Mahabharata/Book III Chapter 114 mentions Kaushiki (कौशिकी) (Tirtha/River) in Mahabharata (III.114.1). [11]...Then the son of Pandu started from the river Kaushiki (कौशिकी) (III.114.1) and repaired in succession to all the sacred shrines. And he came to the sea where the river Ganga (गङ्गा) (III.114.2) falls into it....


Bhisma Parva, Mahabharata/Book VI Chapter 10 describes geography and provinces of Bharatavarsha. Kaushiki (कौशिकी) (River) is mentioned in Mahabharata (VI.10.17) [12]...of Gomati, and Dhutapapa and Vandana and Mahanadi, of Kaushiki, and Tridiva, and Krtiya, and Vichitra, and Lohatarini. Kaushiki (कौशिकी) (River) is again mentioned in Mahabharata (VI.10.28) [13]....of Sighra, and Pischala, and the river Bharadwaji, of the river Kaushiki, and Shona, and Chandrama;...

In Ramayana

Kishkindha Kanda Sarga 40 of Ramayana The Empire of Holy Vanaras where Sugreeva orders vanara-s to search Sita in east under the leadership of Vinata, a mighty vanara. Sugreeva commissioning Vinata explains the topography and geography of Eastern side of the Jambudwipa, 'the Indian subcontinent,' and its eastward, comprising whole of South-East Asia. This is the first chronicle ever recorded about the lands and oceans, islands and dwellers in there, as far as Ancient Indian Geography is concerned.

Kausiki (कौशिकी) (T/R) is mentioned in Ramayana (4.40.20). [14]...:20b: "Search shall be conducted at the riversides of heartening rivers like River Bhagirathi, another name for Ganga River, and Sarayu River, like that at Kaushiki River and....

External links

References

  1. "Kosi Basin". Water Resources Information system of India.
  2. Nayak, J. (1996). Sediment management of the Kosi River basin in Nepal. In: Walling, D. E. and B. W. Webb (eds.) Erosion and Sediment Yield: Global and Regional Perspectives. Proceedings of the Exeter Symposium July 1996. IAHS Publishing no. 236. Pp. 583–586.
  3. Sharma, U. P. (1996). Ecology of the Koshi river in Nepal-India (north Bihar): a typical river ecosystem. In: Jha, P. K., Ghimire, G. P. S., Karmacharya, S. B., Baral, S. R., Lacoul, P. (eds.) Environment and biodiversity in the context of South Asia. Proceedings of the Regional Conference on Environment and Biodiversity, March 7–9, 1994, Kathmandu. Ecological Society, Kathmandu. Pp 92–99.
  4. "Kosi Basin". Water Resources Information system of India.
  5. Nayak, J. (1996). Sediment management of the Kosi River basin in Nepal. In: Walling, D. E. and B. W. Webb (eds.) Erosion and Sediment Yield: Global and Regional Perspectives. Proceedings of the Exeter Symposium July 1996. IAHS Publishing no. 236. Pp. 583–586.
  6. "Koshi River". Encyclopædia Britannica. Encyclopædia Britannica Online. Encyclopædia Britannica Inc. 2011.
  7. "Koshi River, Bihar, India". San Diego State University
  8. Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.242
  9. ततः पौण्ड्राधिपं वीरं वासुदेवं महाबलम, कौशिकी कच्छ निलयं राजानं च महौजसम (II.27.20)...And the Pandava then subjugated in battle those strong and brave heroes of fierce prowess, viz., the heroic and mighty Vasudeva, the king of Pundra and king Mahaujasa who reigned in Kausika-kachchha, and then attacked the king of Vanga.
  10. कालिका संगमे सनात्वा कौशिक्यारुणयॊर यतः, तरिरात्रॊपॊषितॊ विद्वान सर्वपापैः परमुच्यते (III.82.135)
  11. ततः परयातः कौशिक्याः पाण्डवॊ जनमेजय, आनुपूर्व्येण सर्वाणि जगामायतनान्य उत (III.114.1)
  12. गॊमतीं धूतपापां च वन्दनां च महानदीम, कौशिकीं त्रिदिवां कृत्यां विचित्रां लॊहतारिणीम VI.10.17)....
  13. शीघ्रां च पिच्छिलां चैव भारद्वाजीं च निम्नगाम, कौशिकीं निम्नगां शॊणां बाहुदाम अद चन्दनाम (VI.10.28)
  14. मार्गध्वम् गिरि दुर्गेषु वनेषु च नदीषु च । नदीम् भागीरथीम् रम्याम् सरयूम् कौशिकीम् तथा ॥४-४०-२०॥