Krishna Poonia

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Author:Laxman Burdak, IFS (Retd.), Jaipur
Krishna Poonia
Krishna Punia

Krishna Punia (कृष्णा पूनिया) (born 5 May 1977), a sportsperson, has entered into politics of Rajasthan. During December 2018 elections, she was elected MLA from Sadulpur constituency, as a candidate of Indian National Congress.[1]

As a Sportsperson

A Discus thrower, from Churu, Rajasthan, Krishna Poonia won Discus throw bronze medal in Doha Asian Games. Poonia threw the discus to 61.53, her personal best, in the second try and finished behind Aimin Sing of China (63.52) and Ma Xuenjun, also of China (62.43).

Krishna Poonia had won gold medal in the 46th Open National athletics championships to nose ahead of favourites Seema Antil and Harwant Kaur while registering a career-best 60.10 metres distance.

Discus thrower Krishna Poonia became the fifth athlete to qualify for the Beijing Olympics after finishing fourth in a women's invitational event in the United States.Poonia crossed the Olympic qualification mark with a throw of 59.04m in the Mt SAC Relays at Hilmer Lodger Stadium-Walnut in California, held from April 17 to 20 July,2009.

She led an Indian clean sweep in the women's discus final on 11 October 2010, winning the Delhi Commonwealth Games gold medal with a throw of 61.51 metres. The Government of India awarded her the civilian honour of Padma Shri in 2011.[2]

Early life

Krishna Poonia was born on 5 May 1982 to a Jat family in Haryana's Agroha village, which lies in the Hisar district. She married Virender Singh Poonia of Gagarwas village in Churu district in Rajasthan in 2000. The couple work for Indian Railways and live in Jaipur. Virender Singh is a former athlete who coached Krishna after marriage. Krishna studied sociology in Kanodia Girls College in Jaipur.


She won bronze medal in 2006 Doha Asian Games. Krishna Poonia threw the discus to 61.53, her personal best, in the second try and finished behind Aimin Sing of China (63.52) and Ma Xuenjun, also of China (62.43).

Krishna Poonia had won gold medal in the 46th Open National athletics championships to nose ahead of favourites Seema Antil and Harwant Kaur while registering a career-best 60.10 metres distance.

She contested at the 2008 Beijing Olympics, but failed to reach the finals, after finishing 10th in the qualifiers with a throw of 58.23.

On 8 May 2012, she bettered her personal best with a throw of 64.76 meters in Hawaii, US, which is the new national record.

Arjun Award Winner 2010

She is recipient of Arjun Award-2010 (Athletics)

Gold Medal at Delhi Commonwealth Games - 2010

Discus thrower Krishna Poonia is the first Indian woman athlete to win the Gold Medal in Commonwealth Games 2010 in New Delhi. Poonia led the historic clean sweep of the discus event by clearing 61.5 meters. She is the first Indian woman to win a gold medal in track and field events of Commonwealth games and the first Indian to win a gold medal in such events after Milkha Singh who had won the gold in Men's 440 yards race in the 1958 Cardiff Commonwealth Games

The winning trio of Krishna Poonia, Harwant Kaur and Seema Antil spoke to NDTV after winning the gold, silver and bronze medal respectively in the women's discus event and giving India its first sweep of all 3 medals in this Commonwealth Games : Listen NDTV Video

Padma Shri Awards 2011

Krishna Poonia was among the seven athletes who were named for the Padma Shri Awards 2011.[3]

London Olympics 2012

She completed a creditable six in the women's discus throw in the 2012 London Olympics. Poonia's best effort of 63.62 m came in her fifth and penultimate attempt. She had 62.42 m in the first attempt and 61.61 in the third and 61.31 in the sixth and the final throw. She had two no-throws in the second and the fourth attempt.[4] Earlier she became only the sixth Indian to make it to the final round of track and field events in an Olympics after Milkha Singh, P T Usha, Sriram Singh, Gurbachan Singh Randhawa and Anju Bobby George.[5]

Political career

She Joined the Congress at an election rally in Churu – her home district- in the presence of Rahul Gandhi and chief minister Ashok Gehlot. The 36-year-old officer in North Western Railway has resigned from her job. Krishna had made up her mind to quit her job and join the Congress Party in August itself after she was approached by the Congres's leadership.

She had visited several villages under Sadulpur (Rajgarh Churu) constituency to create awareness about girl children and on the need for education. She was trying to get the pulse of people and was overwhelmed by their response. There was a controversy when she was not selected for the Khel Ratna for which shooter Ronjon Sodhi was chosen. On 8 December 2013, she lost her seat in Sadulpur in the Rajasthan Assembly elections, where she represented Congress.

कृष्णा पूनिया का परिचय

कृष्णा पूनिया

कृष्णा पूनिया को चुरू जिले की शान कहा जा सकता है। राजस्थान के चुरू जिले के गागरवास गांव से ताल्लुक रखने वाली कृष्णा पूनिया जाट बेटियों के लिए मिसाल हैं। कृष्णा जी के पति विजेन्द्र पूनिया, कृष्णा जी के कोच भी हैं। दोनों ही भारतीय रेलवे में कार्यरत भी हैं। सन् 2000 के वो दोनों स्वर्ण पदक कृष्णा पूनिया की जिंदगी में अहम बन गए, जो उन्होंने अपनी पढ़ाई के दौरान ही चटक लिए थे। अमृतसर में आयोजित ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप में कृष्णा ने 46.14 मीटर डिस्कस थ्रो के साथ स्वर्ण पदक चटका और इसी साल नेशनल स्पोर्ट्स फेस्टिवल फॉर वुमन, जयपुर में 47.70 मीटर थ्रो के साथ एक और स्वर्ण पदक उनक झोली में आया। ...बस फिर पूनिया ने कभी पलट कर नहीं देखा।

आज शेखावाटी के गांवों की हर बेटी कृष्णा पूनिया में एक सपना तलाशती है और देश की जाने कितनी ही बेटियां ऐसी हैं, जो उन्हीं की तरह अपने घर, परिवार का मान बढ़ाने का सपना संजो रही हैं। ...और उस सपने को सच करने में जुटी हुई हैं। सही मायने में देखा जाए, तो कृष्णा पूनिया डिस्कस थ्रो की दुनिया में ऐसा कमाल कर रही हैं, जो आने वाले हर दौर में बेटियों को प्रोत्साहित करता रहेगा।

राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में 7 स्वर्ण, 3 सिल्वर और 4 ब्रोंज पदक हासिल करने वाली कृष्णा पूनिया का नाम अंतरराष्ट्रीय डिस्कस थ्रो में अदब से लिया जाता है। कृष्णा पूनिया ने 16 अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं जिनमें बिजिंग में आयोजित ओलंपिक 2008 शामिल है, में अपने प्रदर्शन दुनियाभर का ध्यान खींचा है। रच दिया इतिहास

राष्ट्रमंडल खेलों में कृष्णा पूनिया ने रचा स्वर्णिम इतिहास

उडन सिख मिल्खा सिंह की 1958 की कामयाबी के 52 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद महिला डिस्कस थ्रोअर कृष्णा पूनिया ने आज एक नया इतिहास रचते हुए 19वें राष्ट्रमंडल खेलों की इस स्पर्धा में 61.51 मीटर की दूरी तक थ्रो फेंक स्वर्ण पदक जीत लिया।

कृष्णा राष्ट्रमंडल खेलों के ट्रैक एंड फील्ड इतिहास में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला और मिल्खा सिंह के बाद दूसरी भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं। मिल्खा ने 1958 में कार्डिफ वेल्स में 400 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीता था। लेकिन उसके बाद से पिछले राष्ट्रमंडल खेलों तक भारत एथलेटिक्स में कोई स्वर्ण पदक नहीं जीत पाया। महिला डिस्कस थ्रो में कृष्णा ने स्वर्ण पदक, हरवंत कौर ने 60.16 मीटर की दूरी नापकर रजत पदक और सीमा अंतिल ने 58.46 मीटर की थ्रो के साथ कांस्य पदक जीता। इस तरह भारत ने इस स्पर्धा में पूरी तरह क्लीन स्वीप कर दी।

भारत ने राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में दिल्ली से पहले तक एक स्वर्ण सहित कुल नौ ट्रैक एंड फील्ड पदक जीते थे। लेकिन भारत ने इस बार इन स्पर्धाओं में एक स्वर्ण, तीन रजत और तीन कांस्य सहित कुल सात पदक जीत लिए हैं।

कृष्णा ने इस तरह 19वें राष्ट्रमंडल खेलों में भारत को 30वां स्वर्ण पदक दिला दिया और इसके साथ ही भारत ने वर्ष 2002 में मैनचेस्टर में अपने सर्वाधिक 30 स्वर्ण पदकों के जीतने के रिकार्ड की भी बराबरी कर ली। भारत मैनचेस्टर में अपने सर्वाधिक कुल 69 पदक जीतने के रिकार्ड को पहले ही इन खेलों में पीछे छोड़ चुका है और अब उसने 30 स्वर्ण जीतने के अपने पिछले रिकार्ड की भी बराबरी कर ली है।

इससे पहले इन खेलों में अमरीका में रहने वाले भारतीय विकास गौडा ने पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा और प्रजूषा मलईकल ने महिलाओं की लंबी कूद स्पर्धा में रजत पदक जीत लिए थे। कविता राउत ने महिलाओं की 10 हजार मीटर दौड़ और हरमिन्दर सिंह ने पुरुषों की 20 किलोमीटर पैदल चाल स्पर्धा में कांस्य पदक हासिल किए थे। [6]

एथलेटिक्स में गोल्ड.. 52 साल बाद

कृष्णा पूनिया के नेतृत्व में भारतीय महिला खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दिल्ली गेम्स की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में क्लीन स्वीप कर लिया। पूनिया ने जहां स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया, वहीं हरवंत कौर ने रजत व सीमा अंतिल ने कांस्य पदक जीता। कृष्णा हालांकि अपने कॅरिअर के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन (63.69 मी.) से थोड़ी दूर रहीं, लेकिन सोमवार को उन्होंने 61.51 मीटर डिस्कस फेंक कर स्वर्ण जीत लिया। हरवंत ने 60.16 मीटर तथा सीमा अंतिल ने 58.46 मीटर की दूरी तय की।

मिल्खा के बाद सिर्फ कृष्णा : एथलेटिक्स में भारत को पहला स्वर्ण 1958 में उड़न सिख मिल्खा सिंह ने दिलाया था। उनके बाद कृष्णा ही एकमात्र भारतीय एथलीट है, जिन्होंने स्वर्ण पदक जीता। कृष्णा की इस उपलब्धि पर खुद मिल्खा ने उन्हें गले लगाकर बधाई दी। सोमवार को दिल्ली गेम्स में भारत का यह पहला स्वर्ण था और उसके स्वर्ण पदकों की संख्या 30 हो गई है।

पहले प्रयास में ही निर्णायक बढ़त : कृष्णा ने पहले प्रयास में ही 61.51 मी. की दूरी तय की, जो निर्णायक साबित हुई। हालांकि आगे के प्रयास में यह दूरी कम होती गई। दूसरी तरफ हरवंत ने तीसरे प्रयास में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। सीमा ने पहले प्रयास में 55.25 मीटर की ही दूरी तय की और ऐसा लग रहा था कि शायद पदक उनसे फिसल जाएगा, लेकिन दूसरे प्रयास में उन्होंने 58.46 मी. तय करके अपनी स्थिति संभाल ली।

वर्ल्ड चैंपियन के हटने का भी मिला फायदा : वर्ल्ड चैंपियन ऑस्ट्रेलिया की डैनी सैमुअल्स के दिल्ली गेम्स से हटने के साथ ही कृष्णा को स्वर्ण का दावेदार माना जा रहा था। सैमुअल्स सुरक्षा कारणों से यहां नहीं आई।

कॅरिअर की सबसे बड़ी सफलता : राजस्थान की कृष्णा पूनिया के कॅरिअर की यह सबसे बड़ी सफलता है। वे इस तरह के बड़े टूर्नामेंट में कभी स्वर्ण पदक नहीं जीत पाई है। 2006 के एशियन गेम्स में उन्होंने कांस्य पदक जीता था, जबकि बीजिंग ओलिंपिक में वे फाइनल तक भी नहीं पहुंच सकी थीं।

कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीतने वाली वे राजस्थान की दूसरी खिलाड़ी बन गई हैं। 2006 के मेलबोर्न गेम्स में राजस्थान के राज्यवर्धन राठौड़ ने एक स्वर्ण व एक रजत जीता था। इन गेम्स से पहले कृष्णा ने भारत में ही आयोजित ग्रांप्री स्पर्धाओं में स्वर्णिम तिकड़ी जमाई थी।

झूम उठे हजारों दर्शक : जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में बैठे हजारों दर्शकों को शायद पहले से आभास था कि भारत की बेटियां कुछ खास करने वाली हैं। शुरू से ही भारत जिंदाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए और खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया। कृष्णा ने जैसे ही अपने अंतिम प्रयास में 58.27 मी. की दूरी तय की, तो दर्शक खुशी से झूम उठे। खुद भी तिरंगा लेकर स्टेडियम में ही झूमने लगी। सीमा व हरवंत के चेहरे भी सफलता बयां कर रहे थे।

पति ही निभा रहे हैं कोच की भूमिका : पांच मई 1982 को हरियाणा के अग्रोहा गांव में जन्मी व राजस्थान की बहू कृष्णा के कोच उनके पति वीरेंद्र पूनिया ही हैं, जो खुद अच्छे एथलीट रह चुके हैं। सोमवार को जब कृष्णा स्वर्ण के लिए प्रयास कर रही थीं, तो वीरेंद्र भी वहां मौजूद थे और कृष्णा का हौसला अफजाई कर रहे थे।

स्वर्ण नहीं जीत सकी टिंटु लुका : भारत को महिलाओं की 800 मीटर दौड़ में टिंटु लुका से बड़ी उम्मीद थी, लेकिन वे छठे स्थान पर रहीं। उन्होंने 2:01.15 मिनट का समय लिया। टिंटू ने हालांकि शुरुआत अच्छी की थी और करीब आधी दूरी तक बढ़त बनाए रखी, लेकिन अंतिम दौर में थकान उन पर हावी हो गई। केन्या की नैन्सी ने 2:00.01 मिनट के साथ स्वर्ण जीता। महिलाओं की 100 मीटर बाधा दौड़ में भारत की गायत्री सातवें स्थान पर रहीं।[7]

कृष्णा पूनिया को पांच लाख का इनाम

Krishna Punia and his husband Virendra Punia with C P Joshi

केन्द्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री सी.पी.जोशी ने 19 वें राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान एथलेटिक्स में 52 साल बाद पहला स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाली एथलीट कृष्णा पूनिया को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए बधाई देते हुए उन्हें राजस्थान क्रिकेट संघ (आरसीए) की ओर से पांच लाख रपया नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है । आरसीए के अध्यक्ष डा. जोशी ने बताया कि यह राशि एक दिसंबर को जयपुर में एक सम्मान समारोह में प्रदान की जाएगी । उस दिन जयपुर में न्यूजीलैंड और भारत के बीच एक दिवसीय क्रिकेट मैच भी है । कृष्णा ने इस पुरस्कार के लिए डा. जोशी का आभार व्यक्त करते हुए कहा राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक करने वाली पहली भारतीय महिला एथलीट बनने का मेरा सपना पूरा हुआ है । मेरे लिए विजय का वह क्षण अद्भुत क्षण था । उन्होंने कहा राशि से बढकर मैं जोशी जी का आभार व्यक्त करती हूं कि उन्होंने मेरा ही नहीं सभी खिलाडियों का सम्मान किया है । कृष्णा पूनिया राजस्थान के चूर जिले के गागरवास गांव की रहने वाली है ।उनके पति वीरेन्द्र सिंह पूनिया उनके कोच भी हैं । [8]

डाँ. जोशी ने बुधवार को दिल्ली में अपने कृषि भवन स्थित कार्यालय में श्रीमती कृष्णा पूनिया से मुलाकात कर उन्हें इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए बधाई दी। डाँ. जोशी ने कहा कि उन्होंन देश का गौरव बढाया है। श्रीमती कृष्णा पूनिया की उपलब्धियां खिलाडियों के लिए प्रेरणादायी है। इस मौके पर श्रीमती पूनिया के पति और कोच श्री वीरेन्द्र सिंह पूनिया भी उनके साथ थे।[9]

अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएं :

1.ओलंपिक, बिजिंग, चीन - 2008 (58.23 मीटर)

2.एनुअल थ्रो मीट, केलिफोर्निया, अमेरिका - 2008 (63.41 मीटर)

3.एस.ए.सी. रैली, केलिफोर्निया, अमेरिका - 2008 (59.04 मीटर)

4.वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप, ओसाका, जापान - 2007 (57.70 मीटर)

5.17वीं एशियन चैंपियनशिप, अम्मान, जॉर्डन - 2007 (58.23 मीटर)

6.15वें एशियन गेम्स, दोहा, कतर - 2006 (61.53 मीटर)

7.कॉमनवेल्थ गेम्स, मेलबॉर्न, ऑस्टे्रलिया - 2006 (58.78 मीटर)

8. एशियन ग्रांड प्रिक्स, बैंकॉक, थाईलैंड - 2006

9. एशियन ग्रांड प्रिक्स, बंगलुरू - 2006

10. एशियन ग्रांड प्रिक्स, पूना - 2006

11.ए.एफ.आई. सलवान इंटरनेशनल थ्रो मीट, दिल्ली - 2006

12. 16वीं एशियन चैंपियनशिप, दक्षिण कोरिया - 2005

13.एशियन ग्रांड प्रिक्स, इंडोनेशिया - 2005

14. एशियन ग्रांड प्रिक्स, सिंगापुर - 2005

15.एशियन ग्रांड प्रिक्स, थाईलैंड - 2005

16. 9वें एस.ए.एफ गेम्स, इस्लामाबाद, पाकिस्तान - 2005

17.Senior Inter State Atheletic Meet held at Chennai on 22/10/099 -Silver Medal

18.Senior Open National Atheletic Meet-2009 held at Bangalore - Silver Medal

19. Common Wealth Games. DELHI- She won First prize

मुख्य पुरस्कार

मुख्य पुरस्कार :

  • 1. महाराणा प्रताप पुरस्कार, राजस्थान सरकार
  • 2.भीम पुरस्कार, हरियाणा सरकार
  • 3.महाराणा मेवाड़ पुरस्कार, मेवाड़ फाउंडेशन, उदयपुर
  • 4. भवानी सिंह सम्मान, राजपरिवार, जयपुर
  • इंडिया टुडे द्वारा देश की सर्व श्रेष्ठ महिला का पुरस्कार राजस्थान की मुख्यमन्त्री के द्वारा दिया गया. यह पुरस्कार सामाजिक कामों व खेल के क्षेत्र मे उत्कृष्ट कार्यों के लिये दिया गया।


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