Lisad

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Lisad or Lisarh Nisad (निशाड़) is village in Shamli tahsil of Shamli district in Uttar Pradesh

Jat Gotras

  • Lal,
  • Malik,
  • Tomar--गाँव पाहले मूल रूप से तोमर जाटों का था पर वर्तमान में गठ्वाले मलिक गोत की प्रधानता है

Population

The Lisarh village has population of 13077 of which 7128 are males while 5949 are females as per Population Census 2011.[1]

History

दलीप सिंह अहलावत[2] के अनुसार मुजफ्फरनगर जिला लल्ल गठवाला मलिक वंश के लिए रोहतक-सोनीपत के बाद सर्वाधिक महत्त्व रखता है। जिला सोनीपत के एक गांव में चौ० पाथू मलिक रहते थे जिनके चार पुत्र नैया, मल्हण, कक्के और देवसी नामक थे। नैया नाराज होकर अपने घर से यमुना पार कैरानाकांधला के पास कैथरा (काहनान) गांव पहुंचा। यह गांव भिण्ड तंवर जाटों का था जहां वह उस गांव के जमींदार बोहरंग राव भिण्ड-तंवर गोत के जाट के घर में रहने लग गया। उस समय दिल्ली पर सैय्यद वंश के बादशाह का राज्य था जिसकी नींव खिज्रखां ने सन् 1414 ई० में तुगलक वंश को समाप्त करके डाली थी और वह सन् 1414 ई० से 1421 ई० तक दिल्ली सल्तनत पर शासक रहा था। इस सैय्यद वंश का राज्य 1451 ई० तक रहा था। बोहरंग राव जाट ने अपनी पुत्री मलूकी का विवाह नैया से संवत् 1483 (सन् 1426 ई०) में कर दिया और उसके नाम अपनी सारी भूमि व सम्पत्ति करवा दी। बोहरंग राव की इस मलूकी के अतिरिक्त और कोई सन्तान न थी। इसलिए नैया को अपने घर रख लिया। इससे नाराज होकर [Kaithra|कैथरा गांव]] के भिण्ड तंवर जाटों ने संवत् 1487 (सन् 1430 ई०) में नैया को खेतों की एक जोहड़ी में कत्ल कर दिया। इस घटना के पश्चात् नैया की विधवा ने सोनीपत में मलिकों के प्रधान गांव आहुलाना में स्वयं पहुंचकर मलिकों के ‘दादा’ से पुकार की। इस अबला की अपील पर समस्त गठवाला खाप ने कैथरा गांव पर धावा करके वहां के भिण्ड-तंवर जाटों को एक-एक करके मार दिया। उनकी केवल एक गर्भवती स्त्री को छोड़ दिया, जिससे एक लड़का हुआ और उसकी संतान का एक ही घर भिण्ड-तंवर जाटों का वहां है। यह वंश न घटा है न बढ़ा है। मलिकों ने उस कैथरा गांव का नाम बदलकर नैया के नाम पर निशाड़ रख दिया और नैया की विधवा पत्नी मलूकी का पुनर्विवाह नैया के छोटे भाई देवसी से करवा दिया। जिस जोहड़ी में नैया का वध किया गया था वहां पर मलिकों ने नैया की समाधि बनाई जो आज भी है। यह भी निर्णय किया गया कि वहां के मलिकों की चौधर (प्रधानता) नैया के ही खानदान में रहेगी। मलिकों की इतनी आबादी बढ़ी कि आज जि० मुजफ्फरनगर में निशाड़ गांव के आस-पास इनके 52 गांव हैं जिन का प्रधान निशाड़ गांव में नैया के खानदान का पुरुष होता आ रहा है। उसको भी ‘दादा’ कहा जाता है। इन लोगों में भी आर्यसमाज का काफी प्रचार है। यहां के मलिकों की चौधर


जाट वीरों का इतिहास: दलीप सिंह अहलावत, पृष्ठान्त-276


आहुलाना जैसी शक्तिशाली तो नहीं है, तब भी अन्य वंशों की अपेक्षा इनका संगठन आदर्श है। यहां के मलिक एवं उनका प्रधान ‘दादा’ भी आहुलाना के ‘दादा’ को बड़ा मानते हैं और समय आने पर इनसे निर्णय करवाते हैं (हरिराम भाट की पोथी, जाटों का उत्कर्ष पृ० 334-335, लेखक योगेन्द्रपाल शास्त्री)।

Notable persons

External links

Read - गठवाला खाप की वो छत्रछाया जिसने बसा दिए 72 गांव

References


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