Mohanjodaro

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Author:Laxman Burdak, IFS (R)

Map of Mohanjodaro

Mohanjodaro or Mohenjo-daro or Moenjodaro (Urdu: موئن جودڑو‎, Sindhi: موئن جو دڙو, Hindi: मोहनजोदड़ो lit. Mound of the Dead), in Larkana District of Sindh, Pakistan. It is a site of Indus Valley Civilization.

Location

Mohenjo-daro is located in the Larkana District of Sindh, Pakistan, on a Pleistocene ridge in the middle of the flood plain of the Indus River Valley, around 28 kms from the town of Larkana. The ridge was prominent during the time of the Indus Valley Civilization, allowing the city to stand above the surrounding plain, but the flooding of the river has since buried most of the ridge in deposited silt. The site occupies a central position between the Indus River and the Ghaggar-Hakra River. The Indus still flows to the east of the site, but the riverbed of the Ghaggar-Hakra on the western side is now dry.

Site of Indus Valley Civilization

Built around 2600 BCE, it was one of the largest settlements of the ancient Indus Valley Civilization, and one of the world's earliest major urban settlements, contemporaneous with the civilizations of ancient Egypt, Mesopotamia, and Crete. Mohenjo-daro was abandoned in the 19th century BCE, and was not rediscovered until 1922. Significant excavation has since been conducted at the site of the city, which was designated a UNESCO World Heritage Site in 1980.[1]

जाट वीरों का इतिहास: दलीप सिंह अहलावत

दलीप सिंह अहलावत[2] लिखते हैं: हड़प्पा और मोहन-जोडड़ो - ऐरावती नदी पर स्थित हड़प्पा नगर क्षुद्रकों का एक पुराना नगर प्रतीत होता है। सिन्धुगत मोहन-जोदड़ो नगर इन क्षुद्रकों के साथी अन्य असुरों का नगर था। सतलुज से रावी नदी के आसपास तक क्षुद्रक देश था। वहां से मिली पुरातन-मुद्राओं पर अंकित लिपि असुर-लिपि है। असुर-लिपि में मीन अथवा मत्स्य की आकृति का प्रयोग क्षुद्र-मीना शब्द से प्रकट है। भारतीय इतिहास को न जानते हुए, पाश्चात्य लेखक जॉन मार्शल, मैके और उनके साथी इस विषय में वृथा कल्पनाएं कर रहे हैं। हड़प्पा की स्थिति भारतीय इतिहास में अत्यन्त स्पष्ट है। यूरोप और अमेरिका के लेखकों की कल्पनाओं का इसमें स्थान नहीं। हड़प्पा और मोहन-जोदड़ो के कला-कौशल को वेदकाल से पूर्व का कहना अज्ञान प्रकट करना है। यह कला-कौशल महाभारत युद्ध के काल के आसपास का है।[3]

अश्वमेध यज्ञ की स्मृति रक्षार्थ अर्जुन ने मोहन-कृष्ण और युधरो-युधिष्ठिर के नाम पर मोहन-जोदरो-मोहनजोदड़ो नामक नगर बसाया। किन्तु आर से चार सौ वर्ष पूर्व तक ही इसकी स्थिति का इतिहास मिलता है। इसके बाद का काल इस नगरी के लिए सर्वथा अन्धकारमय रहा। किन्तु समीप की खुदाइयों में सिन्ध के लरकाना जिला में N.W.R. स्टेशन से आठ मील दूरी पर मोहनजोदड़ो नगरी के मकान, सड़क, तालाब, मूर्तियां, हड्डियां, आभूषण आदि वस्तुएं प्राप्त हुई हैं, जिसके आधार पर तत्कालीन सिन्धु-सभ्यता का बड़ा विशद एवं उन्नत परिचय प्राप्त हुआ है। उस समय से भी पूर्व वहां जट्टसंघ का प्रजातन्त्री शासन था। सिन्धु देश का साहित्य इसका साक्षी है। “बंगला विश्वकोष” जिल्द 7 पृष्ठ 6 पर लिखा है कि - पूर्वे सिन्धुदेश जाट गणेर प्रभुत्व थीलो - जाट रमणीगण सुन्दर च औ सतीत्व जन्य सर्वत्र प्रसिद्ध होई। अर्थात् प्राचीनकाल में सिन्धु देश में जाटों का गणराज्य था। और जाटवंश (कुल) बालायें अपने सौन्दर्य और सतीत्व के लिए सर्वत्र प्रसिद्ध हैं।[4]

History

Mohenjo-daro was built in the 26th century BCE.[5] It was one of the largest cities of the ancient Indus Valley Civilization, also known as the Harappan Civilization,[8] which developed around 3000 BCE from the prehistoric Indus culture. At its height, the Indus Civilization spanned much of what is now Pakistan and North India, extending westwards to the Iranian border, south to Gujarat in India and northwards to an outpost in Bactria, with major urban centers at Harappa, Mohenjo-daro, Lothal, Kalibangan, Dholavira and Rakhigarhi. Mohenjo-daro was the most advanced city of its time, with remarkably sophisticated civil engineering and urban planning.[9] When the Indus civilization went into sudden decline around 1900 BCE, Mohenjo-daro was abandoned.[6][7]

External links

References

  1. Mohenjo-daro
  2. जाट वीरों का इतिहास: दलीप सिंह अहलावत, पृष्ठ-171
  3. भारतवर्ष का वृहद इतिहास प्रथम भाग, 10वां अध्याय पृ० 227, लेखक पं० भगवदत्त बी० ए०।
  4. क्षत्रिय जातियों का उत्थान, पतन एवं जाटों का उत्कर्ष पृ० 295-96, लेखक योगेन्द्रपाल शास्त्री।
  5. Early excavations at Mohenjo-daro
  6. Early excavations at Mohenjo-daro
  7. [Kenoyer, Jonathan Mark (1998). “Indus Cities, Towns and Villages.” Ancient Cities of the Indus Valley Civilization. Islamabad: American Institute of Pakistan Studies. p.65.]

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