Nehrawati

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Nehrawati (नेहरावाटी) was the region of Rajasthan ruled by Nehra Jats. When Shekhawats became rulers of the area they renamed it Shekhawati.

History

Nehra Jats ruled in Rajasthan over an area of 200 sqaire miles. In fifteenth century Nehras ruled at Narhar in Jhunjhunu district. At Naharpur, 16 miles down below the Nehra Hill, their another group ruled. At the end of 16th century and beginning of 17th century there was a war between Nehras and Muslim rulers. The Nehra chieftain Jhunjha or Jujhar Singh won the war and captured Jhunjhunu town. Later at the time of victory ceremony he was deceived by Shekhawat Rajputs and killed. Jhunjhunu town in Rajasthan was established in the memory of Jujhar Singh Nehra the above Jat chieftain. There were 1760 villages under the rule of Nehras in Rajasthan.

About Narhar, Thakur Deshraj writes that it was ruled by Nehra Jats. Nehra jats ruled in Rajasthan over an area of 200 square miles. The Nehra hills of Rajasthan were their territory. To the west of Jhunjhunu town is a Hill 1684 feet above see-level and visible from miles around. [1]. This hill near Jhunjhunu town is still known as Nehra Hill in their memory. [1] Another hill was known as Maura which was famous in memory of Mauryas. Nehra in Jaipur was the first capital in olden times. In the fifteenth century Nehras ruled at Narhar, where they had a fort. At Naharpur, 16 miles down below the Nehra Hill, there another group ruled. [1]The present Shekhawati at that time was known as Nehrawati. [2]

नेहरा जाटों का इतिहास: कैप्टन दलीप सिंह अहलावत

दलीप सिंह अहलावत[3] लिखते हैं: सूर्यवंशी वैवस्वत मनु के इक्ष्वाकु, नरिष्यन्त (उपनाम नरहरि) आदि कई पुत्र हुए। नरहरि की सन्तान सिंध में नेहरा पर्वत के समीपवर्ती प्रदेश के अधिकारी होने से नेहरा नाम से प्रसिद्ध हुई। इस तरह से नेहरा जाटवंश प्रचलित हुआ।

जयपुर की वर्तमान शेखावाटी के प्राचीन शासक नेहरा जाट थे जिन्होंने सिंध से आकर नरहड़ में किला बनाकर दो सौ वर्ग मील भूमि पर अधिकार स्थिर कर लिया था। यहां से 15 मील पर इन्होंने


1. जाटों का उत्कर्ष, पृ० 310, लेखक योगेन्द्रपाल शास्त्री।
2, 3. भारत का इतिहास पृ० 65, हरयाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड भिवानी, हिन्दुस्तान की तारीख उर्दू पृ० 244।
3. जाट इतिहास पृ० 76, लेखक ले० रामस्वरूप जून
* असल में सूर्यवंश का प्रचलन तो कश्यपपुत्र विवस्वत् से हुआ था।


जाट वीरों का इतिहास: दलीप सिंह अहलावत, पृष्ठान्त-225


नाहरपुर बसाया। उनके नाम से झुंझनूं के निकट का पहाड़ आज भी नेहरा पहाड़ कहलाता है। दूसरे पहाड़ का नाम मौड़ा (मौरा) है जो मौर्य जाटों के नाम पर प्रसिद्ध है। मुगल शासन आने से पूर्व शेखावत राजपूतों ने नेहरा जाटों को पराजित कर दिया और इनका राज्य छीन लिया। नेहरा जाटों की यह नेहरावाटी आवासभूमि शेखावतों के विजयी होते ही शेखावाटी के नाम पर प्रसिद्ध हो गई।

दुलड़ों का आगमन

ठाकुर देशराज[4] ने लिखा है .... पंजाब में किन्हीं दिनों भट्टी (यदुओं की एक शाखा) का बड़ा बोलबाला था। राजा रिसालू के बाद वहां दुल्ला भट्टी का नाम लिया जाता है। पंजाबी देहाती गीतों में दूल्हा की बहादुरी की प्रशंसा भरी पड़ी है। इसके नाम से पंजाब में ‘दुला की बार’ नाम से एक इलाका भी प्रसिद्ध रह चुका है। आगे चलकर भट्टियों की एक शाखा ही दुलड़ के नाम से प्रसिद्ध हो गई। इसी शाखा के कुछ लोग अब से सैकड़ों वर्ष पूर्व नेहरा वाटी, जो अब शेखावाटी के नाम से पुकारी जाती है, में आकर आबाद हो गए। मंडावा के पास उनका एक गाँव ‘दुलड़ों का बास’ नाम से मशहूर है। जिसे हनुमानपुरा भी कहते हैं।

See also

Nehra

External links

References

  1. 1.0 1.1 Thakur Deshraj, Jat Itihas pp.614-615. Cite error: Invalid <ref> tag; name "Thakur Deshraj" defined multiple times with different content
  2. Mahendra Singh Arya et al: Adhunik Jat Itihas, p.261,s.n. 83
  3. जाट वीरों का इतिहास: दलीप सिंह अहलावत, पृष्ठ.225-226
  4. Thakur Deshraj:Jat Jan Sewak, 1949, p.380

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