Parmanand Khuntela

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Parmanand Khuntela (ठाकुर परमानंद), from Santruk (सान्तरुक), Bharatpur was a Social worker in Rajasthan. [1]

जाट जन सेवक

ठाकुर देशराज[2] ने लिखा है ....ठाकुर परमानंद - [पृ.25]: भरतपुर राज्य की पूर्वी उत्तरी सीमा पर सान्तरुक एक गाँव है। खूंटेला जाटों की बस्ती है। नंबरदार चिरंजीसिंह के घर में अब से 41-42 साल पहले इस नौजवान ने जन्म लिया था। मैं उन दिनों एक अत्यंत साधारण आदमी था। जब तक किसी को यह ख्याल भी न था कि यह साधनहीन लड़का जो कनेर के पेड़ के नीचे चने अथवा अरहर की रोटियों को बिना साग चटनी के रारह के हिंदी मिडिल स्कूल में पढ़ते समय खाकर अपना जीवन बिता रहा है एक दिन लीडर भी


[पृ.26]: होगा। उस समय से परमानन्द से मेरी दोस्ती है। ओल केस में परमानंद के पिताजी को कारावास हुआ। उस मुकदमे में उनकी आर्थिक दशा अत्यंत गिर गई। गांव के प्रतिद्वंदियों ने उसे जड़ से मिटाने की कोशिश की। सन् 1924 से आई हुई विपति ने परमानंद को सन 1938 का पेला। इस पर भी सन 1939 में वह मेरे साथ भरतपुर की जेल में गए। सन् 1939 के भरतपुर सत्याग्रह को सफल बनाने में भी कृष्णलाल जी जोशी, पंडित दौलतराम और ठाकुर परमानंद से अधिक परेशानियां शायद ही किसी दूसरे ने उठाई हो।

जीवन परिचय

गैलरी

संदर्भ


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