Seleucus

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Author: Dayanand Deswal
Coin of Seleucus Nicator

Seleucus I Nicator (c. 358 BC – 281 BC), generally known as Seleucus (सेल्यूकस) was one of the infantry generals under Alexander the Great, who eventually assumed the title of Basileus and established the Seleucid Empire over much of the territory in the Near East which Alexander had conquered.

After the death of Alexander in June 323 BC, Seleucus initially supported Perdiccas, the regent of Alexander's empire, and was appointed Commander of the Companions and chiliarch at the Partition of Babylon in 323 BC. However, after the outbreak of the Wars of the Diadochi in 322 BC, Perdiccas' military failures against Ptolemy in Egypt led to the mutiny of his troops in Pelusium. Perdiccas was betrayed and assassinated in a conspiracy by Seleucus, Peithon and Antigenes in Pelusium sometime in either 321 or 320 BC.

Seleucus invades India

Seleucus' wars took him as far as India, where, after two years of war (305-303 BC), he made peace with the Indian Emperor Chandragupta Maurya, and exchanged his eastern satrapies in the Indus River Valley for a considerable force of 500 war elephants, which would play a decisive role against Antigonus at the Battle of Ipsus in 301 BC and against Lysimachus at the Battle of Corupedium in 281 BC.

Chandragupta Maurya (known in Greek sources as Sandrökottos), founder of the Mauryan Empire, had conquered the Indus valley and several other parts of the easternmost regions of Alexander's empire. Seleucus began a campaign against Chandragupta and crossed the Indus. Seleucus' Indian campaign was, however, a failure and Chandragupta defeated Seleucus in battle.[1] The two leaders ultimately reached an agreement, and through a treaty sealed in 305 BC, Seleucus ceded a considerable amount of territory to Chandragupta in exchange for 500 war elephants, which were to play a key role in the forthcoming battles, particularly at Ipsus. The victorious Maurya king married Helen, the daughter of his Greek rival. According to Strabo, the ceded territories bordered the Indus River.

हिन्दी में एक लेख

सेल्यूकस सिकन्दर का प्रमुख सेनापति था। उसका पूरा नाम 'सेल्यूकस निकेटर' था। सिकन्दर के देहावसान के बाद वह बेबीलोन का शासक बना था। सिकन्दर की ही तरह सेल्यूकस ने भी भारत को जीतना चाहा। उसने क़ाबुल की ओर से सिन्धु नदी पार की, पर वह अपने लक्ष्य मे विफल रहा। इसका नतीजा सेल्यूकस तथा चन्द्रगुप्त मौर्य की सन्धि के रूप मे सामने आया।

  • मौर्य शासक चन्द्रगुप्त से पराजित होने के बाद सेल्यूकस को क़ाबुल, कन्धार, गान्धार और हेरात व बलूचिस्तान के कुछ भाग उसे दे देने पड़े।
  • सेल्यूकस ने ही मेगस्थनीज़ को राजदूत बनाकर चन्द्रगुप्त मौर्य के पास भेजा था।
  • सेल्यूकस की बेटी थी- 'हेलेन'। उसका विवाह चाणक्य ने प्रस्ताव मिलने पर सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य से कराया, किन्तु चाणक्य ने विवाह से पहले ही हेलेन और चन्द्रगुप्त के सामने कुछ शर्ते रखीं, जिस पर उन दोनों का विवाह हुआ।
  • पहली शर्त यह थी कि उन दोनों से उत्पन्न संतान उनके राज्य का उत्तराधिकारी नहीं होगी। चाणक्य ने इसका कारण बताया कि हेलेन एक विदेशी महिला है। भारत के पूर्वजों से उसका कोई नाता नहीं है। भारतीय संस्कृति से हेलेन पूर्णतः अनभिज्ञ है। दूसरा कारण यह बताया कि हेलेन विदेशी शत्रुओं की बेटी है। उसकी निष्ठा कभी भी भारत के साथ नहीं हो सकती। तीसरा कारण बताया की हेलेन का बेटा विदेशी माँ का पुत्र होने के नाते उसके प्रभाव से कभी मुक्त नहीं हो पायेगा और वह भारत की मिट्टी, भारतीय लोगों के प्रति पूर्ण निष्ठावान नहीं हो पायेगा।
  • एक और शर्त चाणक्य ने हेलेन के सामने रखी कि वह कभी भी चन्द्रगुप्त के राज्य कार्य में हस्तक्षेप नहीं करेगी और राजनीति और प्रशासनिक अधिकार से पूर्णत: विरत रहेगी; परन्तु गृहस्थ जीवन में हेलेन का पूर्ण अधिकार होगा।[2]

External Links

References