Shivrinarayan

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Author:Laxman Burdak, IFS (R)

Map of Janjgir-Champa district

Shivrinarayan (शिवरीनारायण) is a town in Janjgir-Champa district in the Indian state of Chhattisgarh.

Origin

It gets name after the lady Shabari of Ramayana who had offered Berry fruits to Rama.

Variants

Location

Sheorinarayan is located at 21.73°N 82.58°E.It has an average elevation of 235 m (771 ft).

History

Shivrinarayan has a significant role in the life of Lord Rama. Lord Rama along with his wife Sita and his younger brother Lakshaman had started his Vanvas (exile) in the Bastar district (more precisely Dandakaranya region) of Chhattisgarh. They lived more than 10 years of their 14 years of Vanvas in different places of Chhattisgarh. One of the remarkable place is Shivrinarayan which is nearby Bilaspur district of Chhattisgarh.

Shivrinarayan was named after an old lady Shabari. When Ram visited Shabari she said "I do not have anything to offer other than my heart, but here are some berry fruits. May it please you, my Lord." Saying so, Shabari offered the fruits she had meticulously collected to Rama. When Rama was tasting them, Lakshmana raised the concern that Shabari had already tasted them and therefore unworthy of eating. To this Rama said that of the many types of food he had tasted, "nothing could equal these berry fruits, offered with such devotion. You taste them, then alone will you know. Whomsoever offers a fruit, leaf, flower or some water with love, I partake it with great joy." More details at Shabari.

Shivrinarayan Math: Shivrinarayan Math is centuries old Hindu temple as well as institution located in the town of Shivrinarayan. It was established during the eighth century. It is a heritage centre and bears tremendous importance from Historical and Religious perspective.

शिवरी नारायण

शिवरी नारायण महानदी, शिवनाथ और जोंक नदी के त्रिधारा संगम के तट पर स्थित प्राचीन, प्राकृतिक छटा से परिपूर्ण और छत्तीसगढ़ की जगन्नाथपुरी`` के नाम से विख्यात कस्बा है। यह छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिला के अन्तर्गत आता है। यह बिलासपुर से ६४ कि. मी., राजधानी रायपुर से बलौदाबाजार से होकर १२० कि. मी., जांजगीर जिला मुख्यालय से ६० कि. मी., कोरबा जिला मुख्यालय से ११० कि. मी. और रायगढ़ जिला मुख्यालय से सारंगढ़ होकर ११० कि. मी. की दूरी पर अवस्थित है।

अप्रतिम सौंदर्य और चतुर्भुजी विष्णु की मूर्तियों की अधिकता के कारण स्कंद पुराण में इसे श्री पुरूषोत्तम और श्री नारायण क्षेत्र कहा गया है। हर युग में इस नगर का अस्तित्व रहा है और सतयुग में बैकुंठपुर, त्रेतायुग में रामपुर और द्वापरयुग में विष्णुपुरी तथा नारायणपुर के नाम से विख्यात यह नगर मतंग ऋषि का गुरूकुल आश्रम और शबरी की साधना स्थली भी रहा है। भगवान श्रीराम और लक्ष्मण शबरी के जूठे बेर यहीं खाये थे और उन्हें मोक्ष प्रदान करके इस घनघोर दंडकारण्य वन में आर्य संस्कृति के बीज प्रस्फुटित किये थे। शबरी की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए 'शबरी-नारायण` नगर बसा है। भगवान श्रीराम का नारायणी रूप आज भी यहां गुप्त रूप से विराजमान हैं। कदाचित् इसी कारण इसे गुप्त तीर्थधाम`` कहा गया है। याज्ञवलक्य संहिता और रामावतार चरित्र में इसका उल्लेख है। भगवान जगन्नाथ की विग्रह मूर्तियों को यहीं से पुरी (उड़ीसा) ले जाया गया था। प्रचलित किंवदंती के अनुसार प्रतिवर्ष माघ पूर्णिमा को भगवान जगन्नाथ यहां विराजते हैं।

प्राचीन काल से ही दक्षिण कौशल के नाम से जाने वाला यह क्षेत्र धार्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत समृध्द रहा है। यहां शैव, वैष्णव, जैन और बौद्ध धर्मो की मिली जुली संस्कृति रही है। छत्तीसगढ़ का यह क्षेत्र रामायणकालीन घटनाओं से भी जुडा हुआ है। इसे नारायण क्षेत्र या पुरूषोत्तम क्षेत्र के नाम से भी जाना जाता है। यह क्षेत्र शिवरी नारायण के नाम से जाना जाता है।

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिला मुख्यालय से ६४ किमी की दूरी पर मैकल पर्वत श्रृंखलाओ के मध्य शिवनाथ, जोंक और महानदी के संगम पर स्थित शिवरी नारायण को तीर्थ नगरी प्रयाग जैसी मान्यता मिली है। यहाँ पर छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध शिवरी नारायण मंदिर है। ऐसी मान्यता है कि वनवास काल में भगवान श्री राम को यहीं पर शबरी ने बेर खिलाये थे अत: शबरी के नाम पर यह शबरीनारायण हो गया और कालांतर मे इसका नाम बिगाडकर शिवरी नारायण पड गया। यहां पर शबरी के नाम से ईटों से बना प्राचिन मंदिर भी है। पर्यटन की दृष्टी से यह स्थल अत्यंत महत्वपूर्ण है।

शिवरीनारायण मंदिर : इस मंदिर को बडा मंदिर एवं नरनारायण मंदिर भी कहा जाता है। उक्त मंदिर प्राचीन स्थापत्य कला एवं मुर्तिकला का बेजोड नमूना है। ऎसी मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण राजा शबर ने करवाया था। ९वीं शताब्दी से लेकर १२वीं शताब्दी तक की प्राचीन मुर्तियो की स्थापना है। मंदिर की परिधि १३६ फीट तथा ऊंचाई ७२ फीट है जिसके ऊपर १० फीट के स्वर्णीम कलश की स्थापना है शायद इसीलिये इस मंदिर का नाम बडा मंदिर भी पडा। सम्पूर्ण मंदिर अत्यन्त सुंदर तथा अलंकृत है जिसमे चारो ओर पत्थरों पर नक्काशी कर लता वल्लरियों व पुष्पों से सजाया गया है। मंदिर अत्यंत भव्य दिखायी देता है।

संदर्भ: विकिपीडिया-शिवरीनारायण

External links

References