Swami Nityanand

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लेखक:लक्ष्मण बुरड़क, IFS (Retd.), Jaipur
Swami Nityanand

Swami Nityanand (Punia) (b.1921-d.26 November 2012) was a pioneer Educationist and reformer in Rajasthan. He left his job in Police and started Khinchiwala Gramothan Vidyapith Sansthan which played a leading role in educating rural people in Churu and Sikar Districts. PIN Code of Khinchiwala is 331506 and is situated near Sitsar. He was born on Bhadwa badi V.S. 1978 (1921 AD) at village Khairu Chhoti, tahsil Rajgarh, district Churu Rajasthan in the family of Shri Harlal Punia and Smt Saraswati Devi.

Role in Kangar kand

Chaudhari Rupram Maan and Swami Chetnanand started the education program of Jat farmers in rural areas of Ratangarh tehsil by opening private schools. They appointed Swami Nityanand and Chaudhari Chandgi Ram for this purpose. Swami Chetnanand was born in the family of a Dhaka Jat farmer and could feel the effect of oppression by Jagirdars. These people remained under ground and collected money to start the private education of Jat boys. Chaudhari Budh Ram Katewa of Bharatia ki Dhani, Ratangarh, Chaudhari Budh Ram Dudi village Sitsar and Chaudhari Surta Ram Sewda, Ratangarh helped a lot in this campaign. Chaudhari Surta Ram Sewda gave his own land for starting a school and Chaudhari Budh Ram Dudi got made a shade on this land to start a school.

At that time there were about 40-50 Jat boys getting education in Ratangarh town who were mainly from Sihag, Dudi, and Tetarwal Jats of Ratangarh town and rest were from nearby villages like Sangasar, Loonchh, Loha, Chhabri, Kadia, Tidiyasar, Thathawata etc. Most of these boys were from poor families and could not afford education on their own. The only means of funding the private education was through collection of contribution (chanda) or subscription from the farmers. Jats of Ratangarh and Churu either could not afford or did not give subscription out of fear of the Jagirdars. But the Jats of Ganganagar district were well off and they were not much effected by Jagirdars. They gave handsome amounts for education.

Chaudhari Hari Ram Dhaka went to Sangariya to get financial help from Swami Keshwanand. Swami Keshwanand appointed him the Manager of Industries Department of Jat High School Sangariya. Megh Singh Sewda also joined this school. Chaudhari Hari Ram Dhaka collected about Rs. 2000/- from the teachers of Jat High School and called Chaudhari Rupram Maan, Vidyarthi Bhawan Ratangarh, to hand over this amount. He then sent Chaudhari Rupram Maan to Advocate Harishchandra Nain at Ganganagar. There was a good subscription at Ganganagar and with this financial assistance Chaudhari Rupram Maan and Swami Chetnanand organized a grand sabha of farmers at Ratangarh in Podaron ka Nohra. Swami Keshwanand and Chaudhari Hari Ram Dhaka also joined this sabha. A number of decisions were taken in this sabha about awakening of the farmers of this area. As decided in this sabha Swami Keshwanand sent Chaudhari Hari Ram Dhaka to Ratangarh to enhance the movement of education and freedom.


स्वामी नित्यानंद का जीवन परिचय

जाट कीर्ति संस्थान चुरू द्वारा 31.8.2017 को ग्रामीण किसान छात्रावास रतनगढ में प्रदान किया गया सम्मान

स्वामी नित्यानंद का जन्म खैरू छोटी तहसील राजगढ़ जिला चूरू राजस्थान में पिताश्री हरलाल जी पूनिया और माता श्रीमती सरस्वती देवी के यहाँ भादवा बदी 8 वि.सं. 1978 सं 1921 में हुआ. आपने बीकानेर राज्य में पुलिस की नौकरी को ठोकर मारकर सुख-सुविधाओं को त्याग कर खींचीवाला में कार्तिक शुक्ल 5 संवत 2005 में 6 नवम्बर 1947 को शिक्षा की अलख जगाने के लिए डेरा दाल दिया.

खींचीवाला ग्रामोदय विद्यापीठ की नींव

खींचीवाला वह पवन पवित्र तीर्थ स्थान है, जहाँ कभी जंगल हुआ करते थे. सुदूर मरुस्थल में सामंती शासन था और दूर-दूर तक कोई स्कूल अथवा शिक्षा संसथान का नामोनिशान नहीं था. सामंती शासन में किसान वर्ग को शिक्षा से जानबूझ कर वंचित किया गया था. स्वामी नित्यानंद ने इन अभावपूर्ण स्थितियों को समझा और खींचीवाला में स्कूल प्रारंभ करने का निर्णय लिया. 6 नवम्बर 1947 को आपने एक कंकेड़े के पेड़ के नीचे स्कूल शुरू किया.


स्वामी नित्यानान्दजी ने पहले पहल सिहागों की छतरी रतनगढ़ में विद्यार्थी भवन के छात्रों को पढ़ाने लगे थे, वहां से वे सुलखनियां में आये और विद्यालय खोला जिसका जिम्मा रामेश्वर लाल सहारण (खुड़ी) को सौंप कर खींचीवाला आये और इस स्थान को अपनी कर्मस्थली बनाया.

शुरू में विद्यालय घास-फूस के छपर के नीचे चालू किया गया था. कोई पक्का मकान नहीं था. पीने के पानी की समस्या से निजात पाने के लिए जनसहयोग से एक पक्का कुण्ड बनाया जिसमें वर्षा का जल संगृहीत किया गया . धीरे-धीरे संस्था ने गति पकड़ी और सन 1952 तक यहाँ छात्रावास की व्यवस्था हो गयी.

स्वामी नित्यानंद जी एक लंगोटी और भगवा चोले में रहते थे. उन्होंने भूके प्यासे अपार कस्ट सहकर कठिन परिश्रम और त्याग से इस खींचीवाला ग्रामोदय विद्यापीठ को आगे बढाया. वे मैस में से एक ठंडी रोटी और प्याज खाकर आपने काम पर चल देते थे. जब वे बाहर जाते तो बीकानेर से रसगुल्ले और चोमू के बेर अवश्य लाते और स्नेह से छात्रों को खिलते थे.

खींचीवाला ग्रामोदय विद्यापीठ से शिक्षा प्राप्त लोग

आपने दूर-दूर तक इस बीयाबान क्षेत्र जिसमें पानी का अभाव था, आवागमन के कोई साधन नहीं थे और जंगली जानवरों का भय था, वहां शिक्षा की लौ जगाने की ठान ली. गाँव -गाँव जाकर मुखियाओं से संपर्क किया और बच्चों को लाकर पढाना चालू किया. क्षेत्र के प्रबुद्ध लोगों की सहायता से आज यह स्थान चमन हो गया है. इस विद्यालय से हजारों छात्र पढ़ कर बाहर निकले. समाज सेवा में शामिल हुए, कई शासकीय सेवाओं में ऊँचे पदों पर गए और अधिकारी बने. कुछ विदेशों तक भी पहुंचे.

खींचीवाला विद्यापीठ से शिक्षा प्राप्त करने वालों में प्रमुख हैं -

इस विद्यालय ने चूरू जिले के सुजानगढ़, रतनगढ़ और सीकर जिले के लक्ष्मणगढ़ , फतेहपुर तहसील के हजारों छात्रों को शिक्षित कर शिक्षा के क्षेत्र में अलख जगाई.

आपने काँगड़ कांड में भी भाग लिया था.

आपने उर्दू एवं फारसी भाषा की शिक्षा ग्रहण की थी. बीकानेर रियासत में पढने की व्यवस्था नहीं होने से कार बहल (हरयाणा) में चौथी तक उर्दू एवं फारसी पढ़े. बीकानेर पुलिस में जब नौकरी लगे तो आपके अलावा वहां उर्दू और फारसी का जानकार नहीं था इसलिए आई जी के कार्यालय में आने वाले उर्दू एवं फारसी के पत्रों का हिंदी अनवाद के लिए आपको लगाया गया जहाँ आपकी खूब ख्याति हुई. यहीं से नौकरी छोड़ देश और समाज सेवा में जुट गए.

आप मार्च 1961 से 1965 तक पंचायत समिति सुजानगढ़ के प्रथम निर्विरोध प्रधान रहे थे.

खींचीवाला विद्यापीठ के सहयोगी

इस विद्यापीठ में चौधरी कुम्भा राम आर्य, स्वामी केशवानंद, मोहन लाल सुखाडिया मुख्यमंत्री राजस्थान, कालू लाल श्रीमाली केन्द्रीय शिक्षामंत्री, एस.के डे, केन्द्रीय सामुदायिक विकास एवं पंचायती राज मंत्री आदि भी पधारे हैं. स्वामी केशवानंद का इस संसथान को विकसित करने में विशेष स्नेह, प्रेरणा और सहयोग रहा. जिन लोगों ने खींचीवाला विद्यापीठ में सहयोग दिया और शिक्षा सुविधाओं का विकास किया उनमे प्रमुख हैं -

सम्मान

जाट कीर्ति संस्थान, चूरू द्वारा स्वामी नित्यानंद जी को निकट भविष्य में अभिनन्दन ग्रन्थ भेंट कर सम्मानित करने की योजना है. साथ ही उनकी आदम-कद मूर्ती की स्थापना करने की भी योजना है.

सन्दर्भ


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