Tomyris

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Queen Tomrys receiving the head of Cyrus

Tomyris (तोमरिस)/(तोमिरस) was a queen who reigned over the Massagetae[1], a large and warlike pastoral-nomadic Iranic people of Central Asia east of the Caspian Sea, in approximately 530 BC.

History

Many Greek historians recorded that she "defeated and killed" the Persian emperor Cyrus the Great during his invasion and attempted conquest of her country. Herodotus, who lived from approximately 484 to 425 BC, is the earliest of the classical writers to give an account of her career, writing almost one hundred years later. Her history was well known and became legendary. Strabo, Polyaenus, Cassiodorus, and Jordanes (in De origine actibusque Getarum, The Origin and Deeds of the Goths) also wrote of her.[2]

According to the accounts of Greek historians, Cyrus was victorious in his initial assault on the Massagetae. His advisers suggested laying a trap for the pursuing Scythians: the Persians left behind them an apparently abandoned camp, containing a rich supply of wine. The pastoral Scythians were not used to drinking wine—"their favored intoxicants were hashish and fermented mare's milk"[3]—and they drank themselves into a stupor. The Persians attacked while their opponents were incapacitated, defeating the Massagetae forces, and capturing Tomyris' son, Spargapises, the general of her army. Of the one third of the Massagetae forces that fought, there were more captured than killed. According to Herodotus, Spargagises coaxed Cyrus into removing his bonds, thus allowing him to commit suicide while in Persian captivity.[3]

Tomyris sent a message to Cyrus denouncing his treachery, and with all her forces, challenged him to a second battle. In the fight that ensued, the Massagetae got the upper hand, and the Persians were defeated with high casualties. Cyrus was killed and Tomyris had his corpse beheaded and then crucified,[4] and shoved his head into a wineskin filled with human blood. She was reportedly quoted as saying, "I warned you that I would quench your thirst for blood, and so I shall" [5]

तोमऋषि:ठाकुर देशराज

ठाकुर देशराज [6] ने लिखा है ....तोमऋषि - यह आक्सस नदी के दक्षिणी हिस्से पर राज्य करते थे। ईसा से 600 वर्ष पहले भारत के प्रसिद्ध राजा साइरस ने खुरासान के पूर्वी हिस्से पर इनकी लड़ाई हुई थी। जिसमें सायरस को मुंह की खानी पड़ी और फिर वह वापस लौट गया तोमऋषि की राजधानी भी उद्यान थी। इससे मालूम होता है यह भी शिव गोत्री थे।

जाट वीरों का इतिहास: दलीप सिंह अहलावत

जाट महारानी तोमरिस का सम्राट् साईरस से युद्ध

फ़ारस एवं मांडा देश के सम्राट् साईरस ने बल्ख तथा कैस्पियन सागर पर शासक जाटों से युद्ध किये, परन्तु वह दोनों जगह असफल रहा। बल्ख पर कांग जाटों का शासन था और मस्सागेटाई पर दहिया जाटों का शासन था। ये दोनों स्वतन्त्र राज्य रहे।

मस्सागेटाई जाटों का एक छोटा तथा शक्तिशाली राज्य था जो कि सीथिया देश का ही एक प्रान्त था। इसका प्राचीन नाम उद्यान था। इस प्रान्त का शासक अरमोघ था जिसकी महारानी तोमरिस थी। राजा अरमोघ की मृत्यु हो जाने पर शासन की बागडोर महारानी तोमरिस ने सम्भाली। अब साईरस ने उचित अवसर समझकर अपने दूत द्वारा तोमरिस को उसके साथ विवाह करने का प्रस्ताव भेजा। महारानी ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार करते हुए उत्तर दिया कि “मैं जाट क्षत्रियाणी हूं, अपना धर्म नहीं छोड़ सकती तथा अपने देश को तुम्हारे अधीन नहीं करूंगी।” यह उत्तर मिलने पर साईरस ने 529 ई० पू० में भारी सेना के साथ तोमरिस के राज्य पर आक्रमण कर दिया। उसकी सेनायें अरेक्सिज (Araxes) नदी पर पहुंच गईं जहां उन्होंने नावों का पुल बांधा। यह सूचना मिलने पर तोमिरस ने साईरस को निम्नलिखित संदेश भेजा -

“फारस एवं मांडा देश के प्रधान, इस युद्ध का परिणाम अनिश्चित है। हम आप को आपका वर्तमान इरादा छोड़ने की सलाह देते हैं। आप अपने ही साम्राज्य में सन्तुष्ट रहिए और हमें हमारा शासन करने दीजिए। लेकिन आप इस कल्याणकारी शान्तिप्रिय सलाह को नहीं मानेंगे। अतः आप फिर भी मस्सागेटाई से युद्ध करने के लिये व्याकुल ही हो तो पुल बनाने का कार्य छोड़ दो। हम अपने राज्य में तीन दिन चलकर पीछे हट जाते हैं और आप आराम से नदी पार करके हमारे देश में आगे बढ़ जाइये या यदि आप अपने ही क्षेत्र में हमारे से भिड़ना चाहते हो तो आप पीछे हट जाइये, हम आगे बढ़ आयेंगे।” (P. Syke. OP. Cit)।

साईरस ने अपने सभासद क्रेसस की सलाह से मस्सागेटाई राज्य में आगे बढ़ना स्वीकार किया और यह सूचना तोमरिस को भेज दी गई। महारानी ने अपनी प्रतिज्ञा पूरी की तथा वह पीछे हट गई। परन्तु साईरस ने युद्ध विद्या का प्रयोग इस तरह से किया - साईरस ने शराब तथा अच्छा स्वादिष्ट भोजन एक कैम्प में रखवा दिया और वहां पर सेना की एक दुर्बल टुकड़ी छोड़ दी। और शेष शक्तिशाली सेना को नदी की ओर पीछे हटा दिया।

साईरस का लक्ष्य यह था कि मेरी इस दुर्बल सेना टुकड़ी को जाट सैनिक हरा देंगे और शराब व भोजन पर टूट पड़ेंगे। तब उन पर मेरी शक्तिशाली सेना आक्रमण कर देगी। साईरस का यह उपाय सफल रहा। तोमरिस की जाट सेना ने आक्रमण करके उस दुर्बल सैनिक टुकड़ी को मौत के घाट उतार दिया। उन्होंने वहां पर रखी शराब व भोजन का सेवन किया और शराब में धुत होकर वे सब सो गये। उस अवस्था में पर्शियन सेना ने उन पर आक्रमण कर दिया। मस्सागेटाई सैनिक कुछ तो मारे गये और शेष को कैदी बना लिया। इनमें तोमरिस का पुत्र स्परगेपिसिज (Spargpises) भी पकड़ा गया, जो कि शराब के नशे में चूर था। जब वह होश में आया तो उसने आत्महत्या कर ली।

ज्योंही तोमरिस को अपनी पराजय की सूचना मिली, उसने साईरस को दूसरा ऐतिहासिक


जाट वीरों का इतिहास: दलीप सिंह अहलावत, पृष्ठान्त-353


संदेश भेजा जो कि निम्नलिखित है -

“साईरस, तुम खून बहाने के लिये इच्छुक हो किन्तु अपनी वर्तमान सफलता पर अधिक गर्व न करो। जब तुम स्वयं शराब के नशे में चूर होते हो तो क्या-क्या मूर्खतायें तुम नहीं करते हो? तुम्हारे शरीर में यह प्रवेश करके तुम्हारी भाषा को भी अधिक अपमानजनक बना देती है। इस विष के कारण तुमने मेरे पुत्र को जीत लिया है, अपनी चतुराई अथवा वीरता से नहीं। मैं दोबारा तुम्हें यह सुझाव देने का साहस रखती हूं। शायद, इसे मानने में तुम अवश्य ही रुचि लोगे। मेरे पुत्र को स्वतन्त्र कर दो तथा मस्सागेटाई के तीसरे भाग को कब्जा कर तुमने हमको अपमानित किया है। इससे ही सन्तुष्ट रहिये तथा इन क्षेत्रों से बिना चोट खाये दूर जाईये। यदि तुम इस से दूर नहीं हटोगे तो मैं मस्सागेटाइयों के महान् देवता सूर्य की सौगन्ध खाती हूं कि जैसे तुम खून के लालची हो, मैं तुमको तुम्हारा ही खून पिला दूंगी।”

महारानी के इस संदेश का साईरस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। निराश होकर महारानी ने अपनी सारी सेनायें एकत्रित कर लीं। फिर जो युद्ध हुआ वह बहुत भयंकर था। दोनों ओर वीर जाट थे जो अन्तिम समय तक लड़े। हैरोडोटस लिखता है कि “प्राचीन काल से लड़ी गई सभी लड़ाइयों से यह युद्ध अधिक खूनखराबे वाला था।” तोमरिस की मस्सागेटाई सेना ने 529 ई० पूर्व इस युद्ध में विजय प्राप्त की। इस युद्ध में साईरस मारा गया। तोमरिस महारानी ने युद्ध के मैदान से साईरस के मृत शरीर की खोज करवा कर प्राप्त कर लिया और महारानी ने उसका सिर काटकर उस को एक खून के भरे बर्तन में डालकर कहा - “मेरी प्रतिज्ञा के अनुसार तुम अपना ही खून पीओ।”

महारानी तोमरिस इस युद्ध में स्वयं आगे की सेना के साथ होकर लड़ी थी। महान् जाटों (मस्सागेटाई) के हाथों अजेय महान् सम्राट् साईरस की यह प्रथम तथा करारी हार और उसकी समाप्ति हुई। सोग्डियाना के जाटों ने भी ऐसी ही करारी हार विश्वविजेता सम्राट् सिकन्दर को भी दी थी, जिसका वर्णन अगले पृष्ठों पर किया जायेगा।

परिणामस्वरूप मांडा एवं फारस साम्राज्य की उत्तरी सीमा अरेक्सिज नदी तक निश्चित हो गई और जाट महारानी अपने ही राज्य की सीमाओं के भीतर ही पूर्णतः सन्तुष्ट रही। जाट महारानी का महत्त्व बहुत बढ़ गया था, क्योंकि उसने एक महान् विजय प्राप्त की तथा उसने भागते हुए शत्रु का पीछा अपने राज्य क्षेत्र में भी नहीं किया और शत्रु के क्षेत्र को अपने अधीन नहीं किया।

नोट - साईरस की सेना प्रधान रूप से जाट सेना ही थी जिसके सेनापति भी जाट थे। इसका वर्णन मध्यपूर्व के प्रकरण में किया जायेगा।

तोमरिस जाट महारानी की धार्मिकता, सहनशीलता, देशभक्ति और वीरता अद्वितीय थी। ऐसे उदाहरण संसार के स्त्री इतिहास में बिरले ही मिलते हैं।[7]

External Links

References

  1. Guida Myrl Jackson-Laufer (1999): Women Rulers Throughout the Ages: An Illustrated Guide (2, illustrated ed.). ABC-CLIO. p. 395. ISBN 1576070913, 9781576070918.
  2. "The Origin And Deeds Of The Goths"
  3. Herodotus:Queen Tomyris of the Massagetai and the Defeat of the Persians under Cyrus
  4. Mayor, pp. 157–9.
  5. Herodotus Book One (205)-(214) (Hdt 1.214)
  6. Thakur Deshraj: Jat Itihas (Utpatti Aur Gaurav Khand)/Parishisht,p.163
  7. Jat History Dalip Singh Ahlawat/Chapter IV (Pages 353-354)