Vallabha

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Vallabha (वल्लभ) (Ballabha) was a Chandravanshi King born to Valakaswa in the line of Ajamidha.

AjamidhaJahnuSindhudwipaValakashwaVallabhaKushikaGadhi

Jat Gotras from Vallabha

Ball (बल्ल) - Ball gotra of Jats in Punjab started from their ancestor Raja Vallabha/Ballabha. [1]

In Mahabharata

Anusasana Parva/Book XIII Chapter 4 mentions the ancestry of Vallabha as under: In the race of Bharata, a king of the name of Ajamidha, who performed many sacrifices and was the best of all virtuous men. His son was the great king named Jahnu. Ganga was the daughter of this high-minded prince. The farfamed and equally virtuous Sindhudwipa was the son of this prince. From Sindhudwipa sprung the great royal sage Valakaswa. His son was named Vallabha who was like a second Dharma in embodied form. His son again was Kusika who was refulgent with glory like unto the thousand-eyed Indra. Kusika's son was the illustrious King Gadhi who, being childless and desiring to have a son born unto him, repaired to the forest.

शरूयतां पार्थ तत्त्वेन विश्वामित्रॊ यथा पुरा
बराह्मणत्वं गतस तात बरह्मर्षित्वं तथैव च Mahabharata(13.4.1)
भरतस्यान्वये चैवाजमीढॊ नाम पार्थिवः
बभूव भरतश्रेष्ठ यज्वा धर्मभृतां वरः Mahabharata(13.4.2)
तस्य पुत्रॊ मना आसीज जह्नुर नाम नरेश्वरः
दुहितृत्वम अनुप्राप्ता गङ्गा यस्य महात्मनः Mahabharata(13.4.3)
तस्यात्मजस तुल्यगुणः सिन्धुद्वीपॊ महायशाः
सिन्धुद्वीपाच च राजर्षिर बलाकाश्वॊ महाबलः Mahabharata(13.4.4)
वल्लभस तस्य तनयः साक्षाद धर्म इवापरः
कुशिकस तस्य तनयः सहस्राक्षसमद्युतिः Mahabharata (13.4.5)

Dalip Singh Ahlawat writes -

9. बल्लव-बल्लभी - यह जनपद गुजरात काठियावाड़ में था। इस प्रदेश पर जाटवंश का राज्य था। महाभारत काल के पश्चात् बल या बालियान जाटवंश का शासन इस जनपद पर रहा। यहां के राजा ध्रुवसेन द्वितीय (बालियान जाट गोत्री) के साथ सम्राट् हर्षवर्द्धन (वैस या वसाति जाटवंशज) ने अपनी पुत्री का विवाह किया था। चीनी यात्री इत्सिंग ने लिखा है कि “इस समय भारत में नालन्दा और बल्लभी दो ही विद्या के घर समझे जाते हैं।” दूसरे चीनी यात्री ह्यूनसांग ने बलवंश की इस राजधानी को 6000 बौद्ध भिक्षुओं का आश्रयस्थान तथा धन और विद्या का घर लिखा है। सन् 757 ई० में सिंध के अरब शासक ह्शान-इब्न-अलतधलवी के सेनापति अबरुबिन जमाल ने गुजरात काठिवाड़ पर चढ़ाई करके बल्लभी के इस बलवंश के राज्य को समाप्त कर दिया।

References

  1. Dr Mahendra Singh Arya, Dharmpal Singh Dudee, Kishan Singh Faujdar & Vijendra Singh Narwar: Ādhunik Jat Itihas (The modern history of Jats), Agra 1998 p. 268

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