Vidyadhar Kulhari

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Author:Laxman Burdak, IFS (R), Jaipur

Vidyadhar Kulhari

Vidyadhar Kulhari.jpg
Full NameVidyadhar Kulhari
Born12 November 1913, Sangasi
Died: 3 May 2009
ResidenceVillage Sangasi in Jhunjhunu district in Rajasthan
Nationality

Flag of India.png Indian

OccupationFreedom Fighter, Advocate
Parent(s)Ch. Chimana Ram Kulhari (Father)
GotraKulhari

Vidyadhar Kulhari started his social services by taking part in Jat Mahotsav Jhunjhunu in 1932

Vidyadhar Kulhari (विद्याधर कुलहरी) (b.12 November 1913-d. 3 May 2009) was a freedom fighter and advocate of repute from village Sangasi in Jhunjhunu district in Rajasthan. He was born on 12 November 1913 in the family of Ch. Chimana Ram Kulhari.

Family of freedom fighters

His father Ch. Chimana Ram Kulhari was a reformer, a freedom fighters and hero of Shekhawati farmers movement. He was born in village Sangasi in Nawalgarh tahsil , district Jhunjhunu, Rajasthan. Chimana Ram Kulhari's brother Budha Ram Kulhari was also a freedom fighter.

He started his social services by taking part in Jat Mahotsav Jhunjhunu in 1932. He had welcomed the ‘Jaipur Prantiya Jat Kshatriya Sabha’ rallies in that function. Chaudhary Chimana Ram Kulhari had the courage to bring his wife wearing salwar-kurta in Jat Prajapati Mahayagya Sikar 1934 against the traditions. The entire family played a leading role in the Shekhawati farmers movement against the Jagirdars.

Jhunjhunu adhiveshan 1932

There was a grand gathering of farmers under the banner of Jat Mahasabha in Jhunjhunu on 11-13 February 1932. 60000 Jat farmers attended it. Thakur Deshraj camped at Jhunjhunu for 15 days to make it a success. The farmers from all parts of India attended it. It was presided by Rao Sahib Chaudhary Rishal Singh Rayees, who was escorted from station to the place of meeting on elephant accompanied by a caravan of camels. This program was of Jats but all the communities cooperated and welcomed. Kunwar Panne Singh Deorod welcomed this rally and Vidyadhar Singh Sangasi did the welcome of ‘Jaipur Prantiya Jat Kshatriya Sabha’ rallies. Though the Jagirdars made all attempts to make it a failure, yet it proved to be a successful affair. On the appeal of fund collection the participant farmers donated their gold ornaments, which they were wearing. This was the first opportunity of awakening the Shekhawati farmers and proved a grand success. Sardar Harlal Singh and Chaudhary Ghasi Ram had traveled a lot for its publicity and spread its message. Some of the prominent Jat leaders were awarded Kshatriya titles. For example Chaudhary Har Lal Singh was awarded the title of ‘Sardar’, Ratan Singh of Bharatpur as ‘Kunwar’ and Chaudhary Ram Singh as ‘Thakur’. Thus the Rajput monopoly over these titles vanished.

Jat Prajapati Mahayagya Sikar 1934

After successful Jhunjhunu adhiveshan in 1932, a deputation of Jats from Sikar district, under the leadership of Prithvi Singh Gothra met Thakur Deshraj and requested him to do a similar adhiveshan in Sikar also.

The Jat Prajapati Maha-Yagya took place at Sikar from 20 - 29 January 1934. Kunwar Hukam Singh Rahees Angai (Mathura) was made Yagyapati or Chairman of the Yagya. Chaudhary Kaluram Sunda of village Kudan was the Yagyaman. Acharya Shri Jagdev Sidhanthi received an invitation for this Yagya at his Gurukul at Kirthal, In that invitation was he requested to attend the Yagya and bring twenty Bhramcharis and disciples with him. Volunteers went to all the households in all the villages in the region and collected material that would be needed. They collected Ghee, Flour, Gur, and invited all the householders to participate. Hundreds of cans of Ghee and hundreds of sacks of flour were collected.


During the Yagya 3000 men and women adopted the Yogyopavit, which was a symbol Kisan sangathan. Sheetal Kumari daughter of Kunwar Netram Singh adopted yagyopavit. Chaudhary Chimana Ram Kulhari of Sangasi brought his wife wearing salwar-kurta. The unity of Jat farmers in this Yagya had terrified the Jagirdars of Sikar. The role played by Sardar Har Lal Singh and Thakur Deshraj was unparallel which made this yagya a grand success.


Seminar to Commemorate 1857: A seminar was organised on 15 July 2007 in Jhunjhunu in Rajasthan to commemorate the 150th anniversary of 1857. The topic of the seminar was ’1857 and the Present Day India’. This was addressed by Md. Salim, RYA National President, as the main speaker. Freedom fighter Vidyadhar Kulhari, CPI(ML) Rajasthan Secretary Mahendra Singh, Phoolchand Dheva and a number of intellectuals also addressed the seminar.

He has written his autobiography named as "Mera Jiwan Sangharsh".Vidyadhar Kulhari's son Satish Kulhari is also an advocate.Other sons Mr.Vijay Singh Kulhari & Mr. Subhash Chandra Kulhari are Prof.& Assoc.Prof.,Agriculture University ,Bikaner respectively.He died on 3rd May 2009.

जाट जन सेवक

ठाकुर देशराज[1] ने लिखा है ....श्री चौधरी विद्याधर जी एडवोकेट झुंझुनू - [पृ.401]: आपका जन्म प्रसिद्ध जाट नेता चौधरी चिमनाराम जी के घर आज से लगभग 30 साल पहले हुआ। आप शेखावाटी प्रांत के जाट युवकों में सबसे पहले वकील हैं। आप प्रारंभ से ही यहां के जाटों के कानूनी सलाहकार हैं। राज्याधिकारियों से सदा किसान हकों के लिए लड़ते रहते हैं।

गत प्रजामंडल आंदोलन में भी आपने अपनी प्रेक्टिस छोड़कर सत्याग्रह में भाग लिया। अब पुन: 14 जून 1945 के जयपुर राज्य में किसानों के हकों को आघात पहुंचाने वाले ऑर्डर के खिलाफ लड़ने के लिए जो कमेटी बनाई गई उसके आप ही संयोजक बनाए गए। गत दिसंबर में बिबासर गांव में किसानों के एक सभा में भाषण देने को लगान बंदी बतला कर जयपुर सरकार ने तारीख 21 फरवरी 1946 को आप को गिरफ्तार कर लिया और तारीख 22 अप्रैल 1946 को जयपुर सरकार का सम्मानपूर्ण समझौता हो जाने पर आपको विमुक्त कर दिया गया। आप बड़े उत्साही युवक और ऊंचे दर्जे के कानून विशेषज्ञ हैं। आजकल आप शेखावाटी के केंद्र झुंझुनू में प्रैक्टिस करते हैं।

सन 1946 में प्रजामंडल की ढुलमुल नीति को देखकर आपने किसान सभा में अपने को शामिल कर लिया और थोड़े ही दिनों में किसानों में इतने लोकप्रिय हुए कि जयपुर राज्य किसान सभा के प्रधान बना दिए गए।


[पृ.402]: शिक्षा सदन घासीराम ने आपका स्वागत अपने वार्षिक अधिवेशन का प्रेसिडेंट बनाकर किया और जयपुर की सरकार आप के स्वतंत्र व्यक्तित्व से परिचित परिचित होती जा रही थी।

आप बुद्धिवादी समाजवादी हैं ईश्वर ने आपको दिमाग दिया है जिससे गहराई के साथ सोचते हैं किंतु सीना चौड़ा नहीं है। इसी से अकेला होकर चलने का साहब आप नहीं करते।

आप का त्याग है परिश्रम भी है किंतु जब देखा जाता है, लोग आपको धोखा देने की ही कोशिश करते हैं। जब आप अपने शत्रु और मित्र को सही रूप से पहचान लेंगे तो शेखावाटी के सर्वोपरि नेता होंगे।

जीवन परिचय

Vidyadhar Kulhari

आपका जन्म १२ नवम्बर १९१३ को चौधरी चिमनाराम कुलहरि के घर गाँव सांगासी जिला झुंझुनू राजस्थान में हुआ. आपको किसानों की सेवा करने का कार्य विरासत में मिला. आपने अपना सार्वजनिक जीवन १९३२ में झुंझुनू जाट महोत्सव से शुरू किया, जिसमें आप स्वागताध्यक्ष थे. बाद में आप शेखावाटी जाट किसान पंचायत के मंत्री बने. उस समय आपने भूमि का बंदोबस्त, भूमि पर किसानों के अधिकार और लगान की दरों के निश्चय के लिए एक नया अभियान हाथ में लिया. १९३९ में जयपुर प्रजामंडल आन्दोलन को संगठित करने में आपने कड़ा परिश्रम किया. १९४१ में जयपुर प्रजामंडल की 'किसान उपसमिति' के आप सदस्य रहे और उस दौरान किसान हितों के लिए अनेक सुझाव पेश किए. १९४१ में जयपुर सरकार की और से जो पॉलिटिकल रेफोर्म कमिटी बनाई गई थी, उसमें आप सदस्य थे.

१४ जून १९४५ को जयपुर राज्य के किसानों के हकों को आघात पहुँचाने वाले आदेश के खिलाफ लड़ने के लिए जो सर्वाधिकार कमेटी बनाई गई थी, उसका संयोजक आपको ही बनाया गया था. १९४६ में लगानबंदी आन्दोलन के दौरान आपको बीबासर गाँव में भाषण देते हुए गिरफ्तार कर लिया था और तीन महीने जेल में रखा. १९४६ में ही जयपुर राज्य प्रजामंडल द्वारा किसानों के हितों को पूरा होता न देखकर आपने 'जयपुर राज्य किसान सभा' नमक अलग संगठन बनाया और आप उसके अध्यक्ष बने.

इस प्रकार आपने पूरा जीवन किसानों के हितों के लिए संघर्ष करने में ही लगाया. आप प्रारम्भ से यहाँ के किसानों के कानूनी सलाहकार रहे और राज्याधिकारियों से सदा किसान हकों के लिए लड़ते रहे. आप स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्रकोष्ठ के संयोजक भी रहे.

गोठडा (सीकर) का जलसा सन 1938

जयपुर सीकर प्रकरण में शेखावाटी जाट किसान पंचायत ने जयपुर का साथ दिया था. विजयोत्सव के रूप में शेखावाटी जाट किसान पंचायत का वार्षिक जलसा गोठडा गाँव में 11 व 12 सितम्बर 1938 को शिवदानसिंह अलीगढ की अध्यक्षता में हुआ जिसमें 10-11 हजार किसान, जिनमें 500 स्त्रियाँ थी, शामिल हुए. सम्मलेन में उपस्थ्तित प्रमुख नेताओं में आप भी थे.

किसान सभा का रींगस सम्मलेन 30 जून 1946

इसके प्रत्युत्तर में किसान सभा की और से रींगस में विशाल किसान सम्मलेन 30 जून 1946 को बुलाया गया. इसमें पूरे राज्य के किसान नेता सम्मिलित हुए. यह निर्णय किया गया कि पूरे जयपुर स्टेट में किसान सभा की शाखाएं गठन की जावें. विद्याधर कुलहरी को ही जयपुर स्टेट की किसान सभा का अध्यक्ष चुन लिया गया. (राजेन्द्र कसवा, p. 203) अन्य कार्यकारिणी सदस्य निम्न थे:-

सीकर वाटी में त्रिलोक सिंह, देवा सिंह बोचल्या, ईश्वर सिंह भामू, हरी सिंह बुरड़क आदि किसान सभा के जिम्मेवार नेताओं के रूप में पहचाने गए. (राजेन्द्र कसवा, p. 204)

महरामपुर में किसानों की बृहत सभा आयोजित 1947

जयपुर राज्य किसान सभा ने महरामपुर में 16 फ़रवरी 1947 को किसानों की एक बृहत सभा आयोजित की. झुंझुनू के डिप्टी कमिश्नर, पुलिस अधीक्षक, नाजिम और डिप्टी इंस्पेक्टर पुलिस बहुत से पुलिस दल के साथ पहुँच कर सारी शेखावाटी में दो महीने के लिए दफा 144 लगा दी. स्थल पर दफा 144 तोड़ने पर पंडित ताड़केश्वर शर्मा, राधावल्लभ अग्रवाल, दुर्गादत्त जयपुर, ख्याली राम मोहनपुरा, शिवकरण उपदेशक, माली राम अध्यापक, मान सिंह बनगोठडी और डूंगर सिंह को गिरफ्तार कर लिया. जयपुर राज्य किसान सभा ने धरा 144 उठाने की मांग की और न उठाने पर शेखावाटी की जनता के मूलभूत अधिकारों की रक्षा के लिए विद्याधर कुलहरी, ईश्वर सिंह भैरूपुरा, देवासिंह बोचल्या, राधावल्लभ अग्रवाल और आशा राम ककड़ेऊ की एक सर्वाधिकार युक्त कमेटी बना दी जो जनता के सामने सविनय अवज्ञा भंगकरने का प्रोग्राम रखे और सत्याग्रह चलाये. साथ ही गाँवों में आये दिन होने वाले झगड़े-फसादों के समय रक्षार्थ 'किसान रक्षा दल' के संगठन का निर्णयलिया तथा 'किसान सन्देश' नामक बुलेटिन निकालने का निश्चय किया. (किसान सन्देश 13 मार्च 1947) (डॉ पेमा राम 216 )

बाहरी कड़ियाँ

सन्दर्भ

डॉ पेमाराम:शेखावाटी किसान आन्दोलन का इतिहास, प्रकाशक - गणेश सेवा समिति, जसनगर, जिला नागौर, १९९० पृष्ठ ८७

  1. Thakur Deshraj:Jat Jan Sewak, 1949, p.401-402

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