Vidyarthi Bhawan Jhunjhunu

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Author:Laxman Burdak लक्ष्मण बुरड़क
13 मई 1952 को जागीरदारों की गोलियों से शहीद हुए करणीराम मील और रामदेवसिंह गिल की विद्यार्थी भवन झुंझुनू में स्थित मूर्तियाँ

विद्यार्थी भवन झुंझुनू का शेखावाटी किसान आन्दोलन में काफी योगदान रहा है. झुंझुनूं में अखिल भारतीय जाट महासभा का सम्मलेन सन् 1932 में संपन्न हुआ था.

झुंझुनूं में जाट महासभा का सम्मलेन सन् 1932

सन 1931 में ही मंडावा में आर्य समाज का वार्षिक सम्मलेन हुआ. ठिकानेदारों ने भय का वातावरण बनाया किन्तु हजारों स्त्री-पुरुषों ने सम्मलेन में भाग लिया. सभी ने आग्रह किया कि झुंझुनू में होने वाले सम्मलेन में भाग लें. ठाकुर देशराज के नेतृत्व में झम्मन सिंह वकील, भोला सिंह, हुकुम सिंह तथा स्थानीय भजनोपदेशकों की टोलियाँ शेखावाटी अंचल के सैंकड़ों गाँवों में घूमी और झुंझुनू सम्मलेन को सफल बनाने की अपील की.(राजेन्द्र कसवा: पृ.109)


झुंझुनू सम्मलेन, बसंत पंचमी गुरुवार, 11 फ़रवरी 1932 को होना तय हुआ जो तीन दिन चला. स्वागत-समिति के अध्यक्ष पन्ने सिंह को बनाया गया. उनके पुत्र सत्यदेव सिंह के अनुसार महासम्मेलन के आयोजन के लिए बिड़ला परिवार की और से भरपूर आर्थिक सहयोग मिला. मुख्य अतिथि का स्वागत करने के लिए बिड़ला परिवार ने एक सुसज्जित हाथी उपलब्ध कराया. महासम्मेलन की अध्यक्षता के लिए दिल्ली के आनरेरी मजिस्ट्रेट चौधरी रिशाल सिंह राव को आमंत्रित किया था.

चौधरी घासीराम, हर लाल सिंह, राम सिंह बख्तावरपुरा, लादूराम किसारी, ठाकुर देशराज, पंडित ताड़केश्वर शर्मा, जीवन राम जैतपुरा, हुकुम सिंह आदि की मेहनत के कारण पूरा झुंझुनू जिला महासम्मेलन की और उमड़ पड़ा. पन्ने सिंह के बड़े भाई भूरेसिंह ने भी इस सम्मलेन के दौरान उत्साह से कार्य किया. सीकरवाटी से भी काफी संख्या में किसान नेता आये थे.

दिन में भाषणों के अतिरिक्त भजनोपदेशक रोचक और जोशीले गीत प्रस्तुत कर रहे थे. जीवन राम जैतपुरा, हुकुम सिंह, भोला सिंह, पंडित दत्तुराम, हनुमान स्वामी, चौधरी घासी राम आदि ने एक से बढ़कर एक गीत सुनाये. ठाकुर देशराज, पन्ने सिंह, सरदार हरलाल सिंह आदि नेताओं ने सामाजिक, आर्थिक एवं राजनैतिक बदलाव की आवश्यकता प्रतिपादित की. विशाल सम्मलेन को संबोधित करते हुए जयपुर रियासत के आई .जी . यंग (F.S.Young) ने कहा - जाट एक बहादुर कौम है. सामन्तों और पुरोहितों के लिए यह असह्य था. (राजेन्द्र कसवा: पृ.113)

इस ऐतिहासिक सम्मलेन जो निर्णय लिए गए उनमें

  • प्रमुख निर्णय था - झुंझुनू में विद्यार्थियों के पढ़ने और रहने के लिए छात्रावास का निर्माण.

जाट बोर्डिंग झुंझुनू की स्थापना सन् 1933

झुंझुनूं में जाट महासभा के सम्मलेन सन् 1932 के परिपालन में इस संस्था की स्थापना जाट नेताओं के सहयोग से 1933 ई. में 'जाट बोर्डिंग' के रूप में झुंझुनू में एक किराये के नौहरे से हुई थी. कुछ समय बाद मि. एफ.एस.यंग आई.जी. पुलिस जयपुर और सरदार हरलाल सिंह के प्रयास से बिसाऊ ठाकुर से भूमि प्राप्त हो जाने के बाद यह संस्था नियमित छात्रावास के रूप में चलने लगी. विभिन्न क्षेत्रों के कार्यकर्ता भी यहाँ आकर रुकने लगे. सरदार हरलाल सिंह का तो यह मुख्यालय ही हो गया था. ऊँट आदि की सवारियां रखने की भी व्यवस्था की गयी जो रेतीले इलाके में संचार व्यवस्था बनाने के लिए जरूरी था. ऊंटों की सहायता से रातोंरात शेखावाटी के किसी भी कौने से समाचार मंगवाए या भेजे जा सकते थे. बाद में सन 1941 में इस संस्था का नाम बदलकर 'जाट बोर्डिंग हाऊस' से 'विद्यार्थी भवन' कर दिया गया. किसान आन्दोलन के दौरान यह संस्था सारी गतिविधयों का केंद्र बनी रही और आन्दोलन यहीं से संचालित होता था. इसी तरह का कुछ योगदान 1943 ई . में स्थापित 'जाट बोर्डिंग हाऊस' सीकर का भी इस आन्दोलन से रहा. (डॉ पेमा राम:शेखावाटी किसान आन्दोलन का इतिहास, 1990,p. 226)

झुंझुनू में विद्यार्थी भवन का जलसा सन 1938

सन 1938 में सरदार हरलाल सिंह ने झुंझुनू में विद्यार्थी भवन का जलसा किया. इसमें हजारों कार्यकर्ताओं के अलावा पंडित हीरालाल शास्त्री एवं स्वामी केशवानंद भी पधारे. किसान पंचायत के स्थगित होने के बाद हीरालाल शास्त्री का जयपुर रियासत में कद बढ़ गया था. हरलाल सिंह उनके प्रमुख विश्वसनीय नेता बन चुके थे. इस जलसे में आई.जी. मि. एफ.एस.यंग (F.S.Young) भी आये थे. सम्मलेन से पूर्व वे डाक बंगले में रुके हुए थे. छात्रावास के मंत्री होने के नाते विद्याधर कुल्हरी मि. यंग को बुलाने गए. यंग ने कहा , 'पास के कमरे में बिसाऊ ठाकुर बिशन सिंह भी रुके हुए हैं. उनसे भी सम्मलेन में सम्मिलित होने का आग्रह कर लें.' विद्याधर कुल्हरी ने ऐसा ही किया. ठाकुर बिशन सिंह सम्मलेन में चलने के लिए ख़ुशी से तैयार हो गए. तीनों सम्मलेन-स्थल पर पहुंचे. (राजेन्द्र कसवा, p.156)

विद्याधर कुल्हरी ने छात्रावास की रिपोर्ट पढी. उस समय छात्रावास के लिए आवंटित भूमि से सटी हुई पांच-छ: बीघा जमीन पड़ी थी जो बिसाऊ ठाकुर बिशनसिंह की थी. अपनी रिपोर्ट के अंत में विद्याधर कुल्हरी ने इस जमीन को छात्रावास के लिए देने हेतु मांग कर डाली. मि. यंग ने तत्काल ठाकुर बिशन सिंह से बात की. उदार ह्रदय वाले बिशन सिंह ने मांगी गयी सारी जमीन छात्रावास को देने की घोषणा की. यंग आरंभ से ही छात्रावास के लिए दिलचस्पी रखता था. तत्कालीन परिस्थितियों में यह असाधारण कार्य था जिसके लिए ठाकुर बिशन सिंह को सम्मान से देखा गया. (राजेन्द्र कसवा, p.157)


सीकर रावराजा के बारे में आन्दोलन के दौरान जब सीकर की जनता ने सीकर शहर के दरवाजे बंद कर लिए तो जयपुर से आने वाली फ़ौज के खाने-पिने के सामान की व्यवस्था सीकर जाट पंचायत की और से उसके कोषाध्यक्ष भगवाना राम खीचडों का बास ने की थी. इससे जयपुर अधिकारियों की जाटों के प्रति सहानुभूति बढ़ गयी और उनकी शिकायतों पर तत्काल ध्यान दिया जाने लगा. बाहर के किसान नेताओं से प्रतिबन्ध हटाना पहला कदम था. मि. यंग ने 1000 रुपये 'जाट बोर्डिंग हाऊस झुंझुनू' को देने के लिए जयपुर प्रधानमंत्री को भेजने हेतु लिखा. इसके साथ ही मि. यंग ने जाटों के साथ सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार अपनाने तथा पढ़े-लिखे जाटों के लड़कों को सेना, पुलिस, राजस्व और इसी तरह के अन्य विभागों में नौकरियां देने हेतु भी जयपुर सरकार ने सिफारिश की तथा पुलिस में बड़ी संख्या में जाट लड़कों को नौकरियां दीं. मि. यंग की सिफारिश पर जयपुर स्टेट काउन्सिल ने भी 8 अगस्त 1938 की अपनी बैठक में यह निर्णय किया की जाटों के साथ सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार किया जाय और स्थानीय पढ़े-लिखे जाटों को प्रशासन के हर विभाग में नियुक्तियां दी जाएँ. साथ ही सामाजिक मामलों में भी जाटों के साथ उचित व्यवहार किया जाय. (डॉ पेमाराम, p. 161)

पिक्चर गैलरी

सन्दर्भ


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