Indragarh Bundi

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District map of Bundi

Indragadh (इंद्रगढ़) is a village in Indragarh tahsil of Bundi district in Rajasthan.

Variants

Location

Pin Code: 323613

Jat Gotras

Villages in Indragarh tahsil

History

The place is associated with Burdak history. According to Bards it has been capital of Burdak (Chohans).

Monuments

There is a famous Temple of Bijasan Mata situated here and every year in Navaratri huge numbers of people come here. The temple is surrounded by the Aravali range.

इंदरगढ़

राजस्थान का इंदरगढ़ चौहान राजपूतों के बनवाए हुए दुर्गों के लिए उल्लेखनीय है। [1]

कुमारिका क्षेत्र

कुमारिका क्षेत्र राजस्थान राज्य के अंतर्गत आता है। कोटा से 44 मील (लगभग 70.4 कि.मी.) की दूरी पर इन्द्रगढ़ के निकट एक झील को 'कुमारिका क्षेत्र' के नाम से अभिहित किया जाता है।[2]

Indragadh Inscription of year 1683 AD

Sanskrit Text
"इन्द्रगढ़ाधिपति महाराजाधिराज श्री राजसिंह जी तत्सुत महाराजाधिराज महाराव श्री सिरदारसिंहजी तस्य महाराक्षी मायावती महाराणीजी आलीजी तत्कृत वाप्या."
Indragadh Inscription of year 1683 AD[3]

यह शिला लेख वरदा, जुलाई 1971 प. 53 ,54 ,61 पर प्रकाशित हुआ है. डॉ. गोपीनाथ शर्मा [4]लिखते हैं कि यह लेख इन्द्रगढ कसबे के निकट काकीजी की बावड़ी की ताक से वि.स. 1740 का प्राप्त हुआ है. इसमें कुल 22 पंक्तियाँ हैं. इसकी भाषा प्राय संस्कृत है. लेख में इन्द्रगढ के चौहान राजा सिरदारसिंह, जो इन्द्रसिंह का पौत्र है, के राज्य काल में उक्त तिथि पर खंडेलवाल वाधाराम के शुभ विवाहोत्सव के पर्व पर महारानी आली द्वारा उक्त बावडी का निर्माण वर्णित है. इसमें इन्द्रसिंह को इन्द्रगढ़ाधिपति की संज्ञा दी गयी है. इसका लेखक गुजराती नटल नमण अंकित है. इसका कुछ अंश साथ के बाक्स में है.

In Mahabharata

Kumarika (कुमारिक) (Tirtha) Mahabharata (III.80.97),


Vana Parva, Mahabharata/Book III Chapter 80 mentions Merit attached to tirthas. Kumarika (कुमारिक) (Tirtha) is mentioned in (III.80.97). [5]....There is then the tirtha of the Kumarikas (कुमारिक) (III.80.97) of Indra, that is much resorted to by the Siddhas. By bathing there, one obtaineth the region of Indra.

External links

References

  1. Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.72
  2. Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.203
  3. डॉ गोपीनाथ शर्मा: 'राजस्थान के इतिहास के स्त्रोत', 1983, पृ.93
  4. राजस्थान के इतिहास के स्तोत्र, प. 93
  5. कुमारिकाणां शक्रस्य तीर्थं सिद्धनिषेवितम, तत्र सनात्वा नरः कषिप्रं शक्र लॊकम अवाप्नुयात (III.80.97)