Karor Singh

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Karor Singh was a Virk Jat who founded Karorsinghia Misl in Punjab.

इतिहास

करोड़ासिंह - विर्क गोत्री जाट जिन्होंने ‘करोड़ा सिंघया’ मिस़ल की स्थापना की।[1]

ठाकुर देशराज लिखते हैं

ठाकुर देशराज लिखते हैं कि करोड़सिंह मिसल का संस्थापक पंजगढ़ नामक स्थान का रहने वाला युवक करोड़सिंह था। जगाधरी के समीप छाछरौली को सदर मुकाम बनाकर इसने लूटमार आरम्भ कर दी। थोड़े ही दिनों में 12000 सेना इसके पास एकत्रित हो गई। अनेक लूटमारों में इसके हाथ बहुत सा धन पड़ा था। जालन्धर को इसने अपने राज्य में मिला लिया था और सीमांत प्रदेश पर भी आक्रमण करके उसे अपने राज्य में मिला लिया था। करोड़सिंह के मर जाने के बाद उसकी जगह बघेलसिंह सरदार हुआ। जब 1778 ई० में सिक्खों ने सीमाप्रान्त पर अधिकार कर लिया और उसकी खबर देहली में पहुंची तो बादशाह आलम ने सिक्खों के दमन करने के लिए सेना भेजी। बघेलसिंह उस समय अन्य सिक्ख लोगों का साथ छोड़ कर अलग हो गया। शाहआलम की फौज को तो कुलकिया सरदारों ने मारकर भगा


जाट इतिहास:ठाकुर देशराज, पृष्ठान्त-230


दिया। बघेलसिंह के मारे जाने के बाद उसके एक मित्र का लड़का जोधासिंह इस मिसल का सरदार नियत हुआ। महाराज रणजीतसिंह ने जबकि अंग्रेज दूत उनके पीछे सन्धि के लिए लगे फिरते थे, इस मिसल को अपने राज्य में शामिल कर लिया। किन्तु चूंकि गवर्नमेंट अंग्रेज सतलज पार के रईसों को रक्षा का विश्वास दिला चुकी थी, इसलिए महाराज ने अंग्रेज सरकार के कहने पर इस इलाके को वापस कर दिया। अंग्रेजों ने भी कुल इलाके को तो बघेलसिंह की औलाद के पास नहीं रहने दिया, किन्तु कुछ भाग उनकी औलाद के पास अब तक जागीर में चला आता है। इस मिसल का दूसरा नाम पंजगढ़िया मिसल भी था। (जाट इतिहास:ठाकुर देशराज, पृष्ठ-230)

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References


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