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Viewsडा० रणवीर सिंह दहिया की रागनियांFrom Jatland Wikiजात मैं सुधार कौण करै ?
जाट का जाट बैरी होग्या घणा बुरा जमाना आया रै । भाई का भाई बैरी क्यों होग्या नहीं समझ मैं पाया रै ॥
गरीब जाट की बहू मरती आज बिना दवाई क्यों गरीब जाट की हालत सुधरै ना बात चलाई क्यों अमीर जाट आँख फेरगे म्हारे मैं बदबू आई क्यों थारे स्कूल न्यारे होगे म्हारे का बुरा हाल बणाया रै ॥
बीस कील्ले आळे का मन्नै छोरा बेरोजगार दिखा दे दो कील्ले आळा मरै भूखा तू बस्या घरबार दिखा दे बिना ब्याहा रहै म्हारा उड़ै इसा परिवार दिखा दे गरीब किसान का बेटा यो चलाता सरकार दिखा दे अमीर की सै जात पीस्सा म्हारै जात का ठप्पा लाया रै ॥
जात के नाम पै जात्यां आळे खूब निशाने साध रहे पूरी जात का भला चाहवैं वे माणस एकाध रहे जात के नाम पै पेट अपना फुला बाध रहे जात सुधार कोन्या चाहते समझ हमनै सड़ांध रहे जात का नाम लेकै लोगां नै फायदा घणा ए ठाया रै ॥
किस्मत माड़ी गरीब जाट की न्यों कहकै नै भकावैं पाछले जन्म का भुगतैं सैं उसका फल आज पावैं इस जन्म का मिलै अगले मैं आच्छी ढ़ाळ समझावैं इस जन्म का ना कोए खाता रणबीर पै ये लिखावैं सारी जात्यां के गरीबो क्यों ना कदे हिसाब लगाया रै ॥
Dndeswal 10:37, 5 September 2007 (EDT)
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